मुक्तक/दोहा

दिलखुश जुगलबंदी- 34

किस्मत बुलंद कर लो हंसकर जीना दस्तूर है जिंदगी का, एक यह किस्सा मशहूर है जिंदगी का, बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते, यही सबसे बड़ा कसूर है जिंदगी का. वो दस्तूर भी बनाते हैं, मशहूर भी कराते हैं, वर्तमान का आनंद तो लेते नहीं, बीते हुए पलों के लौट कर न आ […]

मुक्तक/दोहा

दिलखुश जुगलबंदी- 33

मोल जानता है सबके चेहरे में वह बात नहीं होती, थोड़े-से अंधेरे से रात नहीं होती, ज़िंदगी में कुछ लोग बहुत प्यारे होते हैं, क्या करें उन्हीं से आजकल मुलाकात नहीं होती. यों तो मुलाकात करने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं होती, फिर भी मुलाकात करने के बहाने बहुत हैं, बस जरा-सा अपने […]

मुक्तक/दोहा

रोटी

रोटी की महिमा बड़ी, रोटी लिए प्रताप । रोटी से ही बल मिले, रोटी से ही ताप ।। रोटी सचमुच है ख़ुदा, रोटी है संसार । रोटी से आनंद है, रोटी से ही सार ।। रोटी से हर पुण्य है, रोटी से सद्कर्म । रोटी तो ईमान है, रोटी तो है धर्म ।। रोटी इक […]

मुक्तक/दोहा

बैठा नाक गुरूर

नई सदी ने खो दिए, जीवन के विन्यास । सांस-सांस में त्रास है, घायल है विश्वास ।। रिश्तों की उपमा गई, गया मनों अनुप्रास । ईर्षित सौरभ हो गए, जीवन के उल्लास ।। कहाँ हास-परिहास अब,और बातें जरूर । मिलने ना दे स्वयं से, बैठा नाक गुरूर ।। बोये पूरा गाँव जब, नागफनी के खेत […]

मुक्तक/दोहा

चतुष्पदी

घर आँगन में धन धान्य भरे और खेतों में हरियाली हो। सब सुख के साधन मिले तुम्हे हर तरफ दिव्य खुशियाली हो। ऐश्वर्य बढ़े अरोग्य रहो दिन दूनी प्रगति तुम्हारी हो, धन त्रियोदशी सबके घर में सुख सम्पति देने वाली हो। चिर यौवन तन,प्रमुदित हो मन,घर आँगन खुशहाली हो। लक्ष्मी जी की कृपा सदा हो, […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

कली के मुस्कुराने हुस्न के श्रृंगार के दिन हैं करे जो चाह चाहत से उसी इज़हार के दिन हैं नही अब ख़्वाब से होता गुज़ारा रू-ब-रू आओ मुहब्बत से मुहब्बत की हँसी तकरार के दिन हैं निगाहों का निगाहों से हुआ पहला मिलन जब से निगाहों में बसा है रूप का खिलता चमन तब से […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

विलखतीं रोज सीतायें बचाना भूल जाते हैं। मगर नारी की महिमा पर गजल औ गीत गाते हैं। दिलों में लाख रावण को छिपाये घूमते हैं पर- बनाकर कागजी रावण विजय उत्सव मनाते हैं।। पिता का साथ छूटे तो ये दुनिया रूठ जाती है। सगे रिश्तों के माला की कड़ी भी टूट जाती है। मरे जब […]

मुक्तक/दोहा

तितली है खामोश

बदल रहे हर रोज ही, हैं मौसम के रूप ! ठेठ सर्द में हो रही, गर्मी जैसी धूप !! सूनी बगिया देखकर, तितली है खामोश ! जुगनूं की बारात से, गायब है अब जोश !! दें सुनाई अब कहाँ, कोयल की आवाज़ ! बूढा पीपल सूखकर, ठूंठ खड़ा है आज !! जब से की बाजार […]

मुक्तक/दोहा

अनुशासन के दोहे

अनुशासन को मानकर,मानव बने महान । अनुशासन संकल्प है,जो लाता सम्मान।। अनुशासन है चेतना,अनुशासन उत्थान। अनुशासन को थामकर,जीना हो आसान।। अनुशासन संदेश है,अनुशासन शुभकर्म। अनुशासन है बंदगी,अनुशासन है धर्म।। अनुशासन है प्रेरणा,अनुशासन शुभगान। अनुशासन है सादगी,अनुशासन जयगान।। अनुशासन है साधना अनुशासन है ध्यान । अनुशासन है जागरण, ,मानव पाये शान ।। अनुशासन है दिव्यता,अनुशासन आवेश […]