मुक्तक/दोहा

मुक्तक

सृजन है धेय जीवन का, यूँ  ज़ाया जा नहीं सकता । जो गुज़रा वक़्त कांटो में,वो लाया जा नहीं सकता ।। मन:  रुपी  ये  चट्टाने, कठिन,  दुर्गम  भी  होती  हैं । गुलिस्ताँ सहज उन पर भी, उगाया जा नहीं सकता ।। व्यस्त रहने वाले सभी, रास्ते पर आ रहे हैं । घरों पर जान तजने […]

मुक्तक/दोहा

गुरुदेव रफ़ी पर दस दोहे

सदा फ़रिश्ते की रफ़ी, तेरी ये आवाज़ है महफ़िल का नूर ये, सबको तुझपे नाज़ // 1. // सुरों का बादशाह तू, नग़मों का उस्ताद तुझसे रौशन महफ़िलें, सदा रहेगा याद // 2. // सरगम की पहचान तू, गीतों का सम्मान तेरे इक-इक गीत पर, खिल जाये मुस्कान // 3. // दिल में है मन्नत […]

मुक्तक/दोहा

कोरोना दोहा एकादशी

कोरोना की मार से, होकर सब मजबूर बैठे हैं बेकार हम, कामगार मज़दूर // 1. // कोरोना के रोग ने, किया कुठाराघात संकट पूरे विश्व में, चीन की खुराफ़ात // 2. // कोरोना का वायरस, जीना हुआ हराम आज सम्पूर्ण विश्व में, मच रहा कोहराम // 3. // कोरोना ने कर दिया, मानव को बीमार […]

मुक्तक/दोहा

अप्रैल फूल दोहा एकादशी

हाय! मार्च क्यों कर गया, यूँ जाने की भूल आया है सरकार फिर, आज अप्रैल-फूल // १. //   आज अप्रैल-फूल है, खो गया कहाँ मार्च अँधेरे में मूर्ख दिवस, ढूँढ रहा है टार्च // २. //   हिन्दी में जो ‘पुष्प’ है, उसका किया अनर्थ अंग्रेजी में ‘मूर्ख’ है, ‘फूल’ शब्द का अर्थ // […]

मुक्तक/दोहा

मिला जो वक्त थोड़ा-सा गुजारो आज मस्ती में

हंसी मिलती नहीं है रेल से, हंसी मिलती नहीं पनवेल से न ईर्ष्या-द्वेष से मिलती कभी भी हंसी आती नहीं है तेल से । अगर मस्ती हो जीवन में,सदा ये मुस्कुराएगी, अगर दिल साफ हो तो हंसी खुद ही चलकर आएगी, मम्मी-पापा-बीबी-बच्चे संग लगते बहुत अच्छे गुजारें वक्त थोड़ा संग, जिंदगी खिलखिलाएगी — सुरेश मिश्र

मुक्तक/दोहा

मुक्तक : कविता

जन -जीवन का आधार सतत वह ज्योति पुंज सविता ही है बंजर उपवन करने वाली जलधार सलिल सरिता ही है जो राह दिखाती युग -युग से आक्रांत क्लान्त मानव मन को घनघोर तिमिर मे आशा की वो एक किरण कविता ही है कविता मन की गहराई है बस शब्दों का विन्यास नहीं कविता संपूर्ण चेतना है […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

रफ्ता रफ्ता खो गया, दिल का चैन करार। रफ्ता रफ्ता हो गया , मुझको उससे प्यार। जब  से  मेरी  हो गयीं , उससे आँखें चार। मैं  उसका  बीमार  हूँ , वो   मेरी   बीमार। बुझा बुझा रहने लगा, तब से दिल ये यार। जबसे उसने प्यारको,नहीं किया स्वीकार। नहीं समझना तुम इसे,दिलबर का इंकार। अक्सर  होती  […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

१) वक़्त  कहाँ  लगता  है, दूरियां  बढ़ाने  में । ज़िंदगी गुज़र जाती है, फ़ासले  मिटाने में ।। नफ़रत सभी समझते हैं ना बोलने पर भी । वक़्त  केवल  लगता  है  प्यार  जताने  में ।। २) मोहब्बत अपनी कुछ इस कदर निभा रहे हैं । लाख  सितम  सहकर उनके, मुस्कुरा  रहे हैं ।। तार टूटे  सभी […]

मुक्तक/दोहा

जोगीरा सरररर…

काश्मीर की कली हुई पहले से खुशबूदार। अब्दुल्ला- मुफ्ती के चंगुल से हो गई फरार।। जोगीरा सरररर…… तीन तलाक न दे पाएगा शौहर बरखुर्दार। छोड़ मियां को बेगम करती मोदी जी से प्यार।। जोगीरा सरररर……. राममंदिर का हुआ फैसला सबको है स्वीकार। तम्बू से मंदिर में आएंगे अवधेश कुमार।। जोगीरा सरररर……. आजम खां की भैंस […]

मुक्तक/दोहा

कोरोना प्राणघातक है ।

कुछ मुक्तक १) कोरोना प्राण घातक है, चलो यह जानते हैं सब । दवा  कोई नहीं  इसकी, चलो यह मानते हैं सब ।। सजग हो राष्ट्र की जनता,कोरोना को भगाए गी । सुरक्षा हो नियति अपनी,चलो यह ठानते हैं सब ।। २) जलबा एक जुटता का, दिखाना है बहुत लाजिम । समर्पित राष्ट्र हित में […]