Category : मुक्तक/दोहा

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    दहकां के दुख दर्द का,तनिक नहीं आभास। वोटन  खातिर  गाँव  में , झूठा  करें  प्रवास। जनता किस बूते करे, इन पर फिर विश्वास। वर्तमान को  खोद कर , बदल रहे इतिहास। खास ज़हनियत  के रहे ,...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    बाल-दिवस पर प्रस्तुति “मुक्तक” काश आज मन बच्चा होता खूब मनाता बाल दिवस। पटरी लेकर पढ़ने जाता और नहाता ताल दिवस। राह खेत के फूले सरसों चना मटर विच खो जाता- बूढ़ी दादी के आँचल में...

  • जीवन के दोहे

    जीवन के दोहे

    जीवन मुरझाने लगा, ऐसी चली बयार ! स्वारथ मुस्काने लगा, हुआ मोथरा प्यार !! बिकता है अब प्यार नित, बनकर के सामान ! भावों की अब खुल गई, सुंदर बड़ी दुकान !! सब ही अपने में घिरे, त्याग दिये सब...

  • नारी पर दोहे

    नारी पर दोहे

    नारी पर दोहे — दुष्ट चक्षुओं से बचने को ,परदा करती नारि। नारी सुलभ संकोच ही , काफी इसे सँभारि।। परदा कर लेवे लाख पर , रक्षित न होती नारि । अन्तरचरित शक्तिबल से ही ,रक्षा...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    लफ्फाज़ी होती रही, हुई तरक़्क़ी सर्द। समझ नहीं ये पा रहे, सत्ता के हमदर्द। अबलाओं पर ज़ुल्म कर, बनते हैं जो मर्द। निन्दा जमकर कीजिये, मिलें जहाँ बेदर्द। डंका अब बजने लगा, उसका भी घनघोर। एक...

  • आज के दोहे

    आज के दोहे

    प्रेम, दया, करुणा सभी, मानव के श्रृंगार। मिल-जुलकर जो रह गये, हो जाये उद्धार। जीवन का दर्शन यही, यही समूचा सार। कहते वेद, पुराण सब सुंदर रखो विचार। जन्म सफल होगा तभी, जीवन सुखमय होय। आस-पास...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    रूप चौदस/छोटी दीपावली की सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगल शुभकामना “मुक्तक” जलाते दीप हैं मिलकर भगाने के लिए तामस। बनाते बातियाँ हम सब जलाने के लिए तामस। सजाते दीप मालिका दिखाने के लिए ताकत- मगर...

  • दोहे रमेश के दिवाली पर

    दोहे रमेश के दिवाली पर

    संग शारदा मातु के, लक्ष्मी और गणेश ! दीवाली को पूजते, इनको सभी ‘रमेश !! आतिशबाजी का नहीं, करो दिखावा यार ! दीपों का त्यौहार है,… सबको दें उपहार ! आतिशबाजी से अगर,गिरे स्वास्थ्य पर  गाज...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    “मुक्तक” दीपक दीपक से कहे, कैसे हो तुम दीप। माटी तो सबकी सगी, तुम क्यों जुदा प्रदीप। रोज रोज मैं भी जलूँ, आज जले तुम साथ- क्या जानू क्या राज है, क्यों तुम हुए समीप।।-1 धूमधाम...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    चढ़ा लिए तुम बाण धनुर्धर, अभी धरा हरियाली है। इंच इंच पर उगे धुरंधर, किसने की रखवाली है। मुंड लिए माँ काली दौड़ी, शिव की महिमा न्यारी है- नित्य प्रचंड विक्षिप्त समंदर, गुफा गुफा विकराली है।।...