Category : मुक्तक/दोहा

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    सभी  दिखावा  कर  रहे , दिल से करें न काम। मिशन विज़न सब खेल हैं, फकत चाहते नाम। कूड़ा करकट तो फकत , टुकड़ा टुकड़़ा  शैल। छीन  रहा  है  ज़िन्दगी , मानव  मन का  मैल। जाति...



  • हिन्दी इक वरदान

    हिन्दी इक वरदान

    दुनिया  के हर  देश में , बढ़ा रही है शान। भारतवालों  के लिए , हिन्दी इक वरदान। जोर शोर  से हो रहा,हर सू अब जयगान। हिन्दी  तेरे   महल  में , मोदी सा  दरबान। दुनिया भर में...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    द्वेष की खाई न क्यों कर पाटते हैं और सदा सत्ता के तलवे चाटते हैं हो ना अर्जुन सा धनुर्धर दूसरा भी एकलव्यों के अंगूठे काटते हैं — मनोज श्रीवास्तव

  • मुक्तक

    मुक्तक

    “मुक्तक” सूक्ष्म निरीक्षण से हुए, कोटि कोटि सत्काम। जल के भीतर जीव प्रिय, नभचर थलचर आम। मित्र जीव रक्षा करें, बैरी लेते प्राण- रुधिर सभी का एक सा, अलग अलग है नाम।। लघु के लक्ष्य अभेद...


  • दोहा

    दोहा

    शिक्षक दिन पर व मंच व मित्रों को हार्दिक बधाई, गुरुजनों को नमन! ॐ जय माँ शारदा! “दोहा” शिक्षक दिन पर आप को, बहुत बधाई मीत। मिला ज्ञान इनसे सुखद, गौतम गाए गीत।। बहुत धीर गंभीर...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    “मुक्तक” गैरों ने भी रख लिया, जबसे मुँह में राम। शुद्ध आत्मा हो गई, मिला उचित अभिराम। जिह्वा रसमय हो गई, वाणी हुई सुशील- देह गेह दोनों सुखी, राघव चित आराम।। दर्शन कर अवधेश के, तरे...