मुक्तक/दोहा

मुक्तक

हार देख कर डर नहीं,देख भाल की धार को। उठा ले ढाल को अब ,पलट दे हर प्रहार को।। ठान लें ये जान ले ये मान ले खून में उबाल दे। रौद्र रूप विकराल ले धड़ों को गगन में उछाल दे।।   प्रवीण माटी

मुक्तक/दोहा

हिन्दी माँ

हिन्दी भाषा प्रेम की, सबको प्रेम सिखाय। सब भावों के राग की, ये ही है पर्याय।। शब्दों का निज कोष है, वाणी का मधुगान। हिन्दी बोलो प्रेम से, हिन्दी बड़ी महान।। सखा भाव सी मैत्री, रखती सबके साथ। बड़े प्रेम से थामती, सब भाषा का हाथ। समझे सबकी बात को, करती सबका मान। हिन्दी भाषा […]

मुक्तक/दोहा

चेतना के दोहे

नित पावन सम्बंध हों,तब बनती है बात। पावनता यदि लुप्त हो,तो अँधियारी रात।। सदा सुहावन बंध हो,तब भूषित सम्बंध। अस्थायी सम्बंध हो,तो बिरथा अनुबंध।। मात-पिता संतान के,मध्य नेह सम्बंध। रिश्ते हैं यदि निष्कलुष,तब हो पूर्ण निबंध।। मुस्कानें बिखरा रहे,जग में नित सम्बंध। तोड़ सका है कौन कब,युगयगीन के बंध।। सम्बंधों में रह रहा,नित देखो भगवान। […]

मुक्तक/दोहा

पुष्प पर दोहे

पुष्प सुखद लगते हमें,देकर नित्य सुगंध। मधुर करें ये पुष्प तो,आपस के संबंध ।। पुष्प विहँसते ही रहें,बाधाओं के बीच। कमल खिले हरदम यहाँ,भले ताल में कीच।। पुष्प खुशी में,पीर में,सदा निभाते साथ। श्रद्धा को अभिव्यक्त कर,मान सौंपते हाथ।। पुष्पों की उत्कृष्ट नित,सचमुच में मुस्कान। पुष्प कहें हमसे यही,सदा बचाना आन।। पुष्प कहीं भी खिल […]

मुक्तक/दोहा

नव वर्ष

सुदिन सुमंगल मय रहे मास बारहों खास | जीवन में उल्लास हो पूरण हो हर आस || मंगल मय हो वर्ष यह ..घिरे न गम की छाँव | प्रीत पले उर में सदा ,मंजिल पायें पाँव || नवल भास्कर उदित हो फैलाये उजियार | मिटे तमस जग का सकल कहीं न हो अँधियार || सदगुण […]

मुक्तक/दोहा

एक खत

फौजी की पत्नी का प्रथम खत *********************** प्रिय देखा था न्यूज में ,मचा हुआ कोहराम धरती का जो स्वर्ग था,बिल्कुल हुआ तमाम | बेबस हूँ असहाय हूँ , कष्ट नहीं मन लेश प्रिय तुम हो रण बांकुरे ,मेटो सकल कलेश| चहूँ दिश अत्याचार है ,मचता हाहाकार | जन्नत की घाटी मेरी ,करती आर्त पुकार || […]

कविता पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा राजनीति

दोहे राजनीति पर

दोहे 1-उत्सव होइ चुनाव का,बजैं जाति के ढोल। खाई जनता में बढ़े,सुन सुन कड़ुवे बोल।। 2-जातिवाद अभिशाप है,लोकतंत्र के देश। समाज सेवा होइ नहि, जातिय झंडा शेष।।   कवि:अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

  करो कोशिश भले कितनी, बुरी आदत नहीं जाती, चला इंसान जाता है , मगर फितरत नहीं जाती, किसी भी राह पर जाने से पहले सोच ले प्यारे- कि लग जाए अगर इकबार, फिर वो लत नहीं जाती । .. प्रवीण पारीक ‘अंशु’, ऐलनाबाद, हरियाणा