मुक्तक/दोहा

चिन्तन

जब जाग रहा होता हूँ, तब भी सोया सा रहता हूँ, आँख खुली पर ब्रह्मांड में कहीं खोया सा रहता हूँ। कभी खोजता सत्य क्या है, कभी जगत का सार, कभी सोच कुछ पलकें भीगें, तो रोया सा रहता हूँ। चिन्तन करते करते अक्सर, चिन्ता में पड़ जाता हूँ, भटक रहा क्यों धर्म मार्ग से, […]

मुक्तक/दोहा

अर्थ का महत्व

अर्थ के भी महत्व, समझ आने लगे हैं, न दिया तो रूठकर, अपने जाने लगे हैं। दे दिया गर सारा, बिसरा दिये जाओगे, ऐसे क़िस्से भी, ज़माने में आने लगे हैं। देख कर रंग, ख़रबूज़ा रंग बदलता है, ऐसा मुहावरा सदियों से यहाँ चलता है। माना कि यह प्रवृत्ति, अभी थोड़ी कम है, कौन जाने […]

मुक्तक/दोहा

दोहे “जीवन के हैं मर्म”

दोहे “जीवन के हैं मर्म” —मात-पिता को तुम कभी, मत देना सन्ताप।नित्य नियम से कीजिए, इनका वन्दन-जाप।।—आदिकाल से चल रही, यही जगत में रीत।वर्तमान ही बाद में, होता सदा अतीत।।—जग में आवागमन का, चलता रहता चक्र।अन्तरिक्ष में ग्रहों की, गति होती है वक्र।।—जिनके पुण्य-प्रताप से, रिद्धि-सिद्धि का वास।उनका कभी न कीजिए, जीवन में उपहास।।—शीतकाल में […]

मुक्तक/दोहा

आज के हालात

सच को सच कहने से डरता हूँ, रिश्ता कोई टूट न जाए, सच का किस्सा सच सुनकर, अपना कोई रूठ न जाए। अक्सर देखा हमने सबको, रिश्ते टिके स्वार्थ की नींव, भरे हुए हैं झूठ के गागर, सच सुनकर कोई फूट न जाए। कभी कभी तो सच झूठ में, हम खुद ही फँस जाते हैं, […]

मुक्तक/दोहा

त्रिफला से कायाकल्प

चूरन त्रिफला लीजिए,ऋतुओं के अनुसार। उदर रोग नासें सभी,शेष न रहे विकार।। अपना जितना भार हो,कर उसके दस भाग। मात्रा उतने ग्राम की, लें प्रातः उठ जाग।। भोजन से नित पूर्व ही,या भोजन के बाद। आधे घण्टे तक नहीं,कुछ भी लेना स्वाद।। सावन-भादों मास में,सेंधा लवण मिलाय। सेवन त्रिफला का करें,चीखे उदर न हाय।। क्वार-कार्तिक […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

उन्हें तकलीफ है हमारे रिजर्वेशन से उन्हें तकलीफ है कोरोना वैक्सिनेशन से आरक्षण,सब्सिडी,संसाधनों पर तो हक है कभी लगाव नहीं देख पाया ‘नेशन’ से। — सुरेश मिश्र

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

भरा हुआ है नीर नयन में, किसे दिखाऊँ, मन की पीड़ा बहुत घनी, किसे सुनाऊँ? लिये जिस्म की चाहत, सब घूम रहे हैं, प्यार वफ़ा की बातें बोलो, किसे बताऊँ? किया समर्पण, नहीं कभी धर्म को देखा, आशिक की आँखों में, सपनों को देखा। राधा से मैं बनी राबिया, जिसकी ख़ातिर, अटैची औ’ फ्रिज में, […]

मुक्तक/दोहा

चुनाव और नेता

इस चुनाव के  दौर में, हवा  चली   विपरीत। वोटर नब्ज  देख रहा, किस की कैसी नीत। खूब  नचाया  नाच है,  जनता  करे  हिसाब। हवा चली विपरीत है, किस का चलता दाब। हथकंडे    अपना   रहे, कैसे    होगी    जीत। होश  सभी  के  उड़  रहे, हवा चली विपरीत। हवा   चली   विपरीत  है, ढूंढ   रहे   हैं  […]

मुक्तक/दोहा

महफिल

मयखाने में महफ़िल सजा रहे हो जवानी की ताकत क्यों घटा रहे हो जाम पर जाम पीये जा रहे हो तुम भीड़ में भी तन्हा क्यों रह रहे हो दुनिया का ख़ौफ़ तो कोसों दूर है बस दिल मे  दीवानगी का शोर है महफ़िल लूट लेते हो जहाँ जाते हो रात तो पीने में बीत […]

मुक्तक/दोहा

संदेशपूर्ण चौपाईयाँ

मानवता का धर्म निभाना।ख़ुद को चोखा रोज़ बनाना।। बुरे सोच को दूर भगाना।प्रेमभाव को तुम अपनाना।।(1) दयाभाव के फूल खिलाना।पर-उपकारी तुम बन जाना।। झूठ कभी नहिं मन में लाना।मानव बनकर ही दिखलाना।।(2) निर्धन को तुम निज धन देना।उसके सारे दुख हर लेना।। भूखे को भोजन करवाना।करुणा का तुम धर्म निभाना।।(3) अंतर में उजियारा लाना।द्वेष,पाप तुम […]