Category : मुक्तक/दोहा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    आज के दिन के सूर्योदय से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की थी। आज के दिन सम्राट विक्रमादित्य ने राज्य स्थापित किया था इनके नाम पर ही विक्रमी संवत प्रारम्भ होता है। आज के...

  • “दोहा”

    “दोहा”

    आया मनवा झूमते, अपने अपने धाम गंगा जल यमुना जहाँ, वहीं सत्य श्रीराम॥-1 कोई उड़ता ही रहा, ले विमान आकाश कोई कहे उचित नहीं, बादल बदले प्रकाश॥-2 अपनी अपनी व्यथा है, अपने अपने राग कहीं प्रेम...


  • “दोहा”

    “दोहा”

    बाबा भोलेनाथ की, महिमा अपरम्पार भंग भष्म की आरती, शक्ति सत्य आपार।।-1 डम डम डमरू बज रहा, आदि कलश कैलाश अर्ध चन्द्रमा खिल गया, गंगा धवल प्रकाश।।-2 जय गणेश जय कार्तिके, जय नंदी महराज जय जय...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    किसानों से जमीनें छीन उनके प्राण हरना है, अमीरों के हितों को ध्यान में रख काम करना है, कोई जीते कोई हारे फरक पड़ना नहीं कुछ भी, वतन को लूट कर इनको तो अपना कोष भरना...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शब्द – साजन ,सजन,सजना ,बालम ,बलमा ,बलम आदि मापनी -१२२ ,१२२,१२२,१२२ सजन हैं हमारा नयन दिल दुलारा बलम के हृदयतल चमन चित हमारा करूँ नित्य पूजा की थाली लिए मैं सजाकर निभाकर लजाकर दिदारा॥ महातम मिश्र,...

  • वतन की चाहत

    वतन की चाहत

    शहीद दिवस पर वीर शहीदों को नमन। देश के एक सच्चे वीर सैनिक की ‘चाहत’—- ऐ खुदा ! मेरी तक़दीर में ये मुकाम लिख दे, इस माटी के लिए मेरी उम्र तमाम लिख दे। वतन की...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    बना फूलों से ये गजला करें स्वीकार ये माला मिटाये गम सभी मेरे इसी में भाव सब डाला भरोसा है मुझे तेरा तेरे शरणों में अाई हूँ बतादे तूँ कमी मेरी सुधारू भाग्य मैं काला —...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    तुम्हें क्या है पता मैं तो तुम्हें अपना बनाया था नहीं कोई मिला मुझको तुझे पलकों पे सजाया था तु इतनी दूर है मुझसे पर अभी भी नजर आती, न था कोई अपना मेरा तुझे दिल...