Category : मुक्तक/दोहा

  • मुक्तक….

    मुक्तक….

      चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है। सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है। ये माना है नही आसां मुहब्बत राह पर चलना- कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है। ________अनहद...





  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    सुधबुध वापस आय, करो कुछ मनन निराला। जीत गई है हार, भार किसके शिर डाला। मीठी लगती खीर, उबल चावल पक जाता- रहा दूध का दूध, सत्य शिव विजय विशाला॥-1 हम बचपन के साथी क्या डगर...

  • #हर_दिन_मेरी_माँ_का_दिन_है

    #हर_दिन_मेरी_माँ_का_दिन_है

    माँ ने अपनी सांसें देकर मुझको पाला है, भ्रूणमात्र को धारण कर जीवन को ढ़ाला है। आँचल के नीचे रखकर पोषण छीर पिलाया, आने वाली विपदा को माँ ने ही टाला है।। #हर_दिन_मेरी_माँ_का_दिन_है —प्रदीप कुमार तिवारी—

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    तुझे छोड़ न जाऊँ री सैयां न कर लफड़ा डोली में। क्या रखा है इस झोली में जो नहीं तेरी ठिठोली में। आज के दिन तूँ रोक ले आँसू नैन छुपा ले नैनों से- दिल ही...

  • नग़मा-मुखड़ा

    नग़मा-मुखड़ा

    हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है देखे कितने मंजर हमने पर क्यूं तू ही भाता है ना जानूं क्यूं खुद पर मेरा लगता अब अधिकार नही आईना अब मैं जब भी...

  • सौहार्द

    सौहार्द

    हिन्दू न चाहिए न मुसलमान चाहिए ना कब्र चाहिए न तो शमशान चाहिए धर्म पे जिस,  देश बँटे धर्म नही है हर दिल में बस इक धर्म हिन्दुस्तान चाहिए || हमको न राम और न रहमान...