Category : मुक्तक/दोहा

  • लावणी छंद – मौसम

    लावणी छंद – मौसम

    ज्यों- ज्यों  धूप चढ़ी अम्बर पर ,ढली रात भी बादल में । इक झटके में हवा जा छुपी, जाने किसके आँचल में । धीरे-धीरे गर्म हुआ फिर , वसुधा का कोना-कोना- झुलसा है मन इस मौसम...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    कोई पुरखों की मिल्कियत बचाना चाहता है। कोई कुनबे की इज्जत बचाना चाहता है। हे भगवान रक्षा करना मेरे वतन की अब- कौन देश की ताक़त बचाना चाहता है।

  • कविता

    कई दिनों से कविता उदास रहती है। व्यस्त जिन्दगी में भी आसपास रहती है। नहीं मिलता वक्त उससे मिलने का जरा भी- इसीलिए आजकल थोडा़ खटास रहती है।।


  • समकालीन दोहे

    समकालीन दोहे

    दुनिया कैसी हो गई, कैसे हैं अब लोग! पूजा से सब दूर हैं, चाहें केवल भोग!! सेवक बनकर घूमते, पर करते हैं राज! सेवा का कोई नहीं, करता है अब काज!! सत्ता पाना हो गया, अब...

  • दोहे

    दोहे

    कड़ी धूप ऐसी पड़ी, धरा गई सब सूख। गर्मी का मौसम हुआ, पड़े जोर की धूप।। गर्मी के संताप से,……….धरा हुई बेहाल। जून मास की दुपहरी, तन मन हुआ निढाल।। कर्ज में डूबा किसान, माथे शिकन...

  • बसन्ती दोहे

    बसन्ती दोहे

    नीलगगन उज्जवल, लगे शीतला लगे बयार। हंस वाहिनी का जनम, वहे बसंती धार। १ उपवन में कलियां, खिली भ्रमर मचाए शोर। फूल फूल इठला रहे, देश बसंती भोर। २ मन भावनी सुहावनी, है ऋतुराज बसंत। उपवन...

  • दोहा – मतदान

    दोहा – मतदान

    हम सब मिलकर प्रेम से, करें वोट का दान। सब से  अच्छा हैे यही,जमकर  हो मतदान। — अब्दुल हमीद इदरीसी (हमीद कानपुरी)

  • तुम्हारा दीदार

    तुम्हारा दीदार

    आज फीर से बहार छाई है आज फीर से यहाँ चमन लौटा है आज किसी के खुश्बू से पुरा गगन महका है आज उन के दीदार से ये दिल बार बार धड़का है

  • तुम्हारी याद

    तुम्हारी याद

    आज फिर वही उदासी छाई है तुम्हारी परछांई भी कहीं नज़र नहीं आई है कहीं कहीं से कुछ खुश्बू आती है जो तुम्हारी याद दिलाती है उदास बैठा हूँ तुम्हारी याद में अपने दोस्त की तलाश...