Category : मुक्तक/दोहा

  • दोहे…

    दोहे…

    मन का पंछी उड़ रहा, सपनों के आकाश। तन भौतिकता लीन है, कैद मोह के पाश॥ जीवन की परिकल्पना, अंतस का संकल्प। विपदा में देते हमें, पग पग नया विकल्प॥ चिंतन साधन भूलकर, मन चिंता में...

  • 🌺 ✍ सफलता ✍ 🌺

    🌺 ✍ सफलता ✍ 🌺

    ✍ बिना परिश्रम किए कोई भी सफल नहीं हो सकता। आज का आदमी नाम तो चाहता है पर बिना काम किए। आदमी सोचता तो बहुत है, पर असफल हो जाने के डर से और मानसिक अकर्मण्यता...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    सरसी छंद आधारित मुक्तक……. मात्रा भार- 27, 16,11 पर यति, समान्त- आज, अपदांत नृपति गए छड़ साज पुराने, राजा रानी राज स्मृतियों से भरे घराने, वर्णित उनके काज दिखा रहे हैं झलक पुराने, काल किला परिवार...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    बुलाने पर नहीं आते हो इतना भेद करते हो कौन कहता है मेरी मौत पर तुम खेद करते हो तुम्हारे ही समर्थक ने तुम्हीं पर टिप्पणी की है जिस पत्तल में खाते हो उसी में छेद...

  • दोहा

    दोहा

    कम मत आंको मौन को, मौन बड़ा बलवान! शब्द जो नहीं कर सकें, करता यह जजमान!! राजनीति की आड़ में, करते देश खराब! घोटाले हैं अनगिणत ,होगा कभी हिसाब !! सूरत को मत देखिए, देख लिजिए...



  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    अरमानों ने कर लिया, ढ़ूँढ ढ़ूँढ कर प्यार माँ ने ममता भर दिया, देकर चाह दुलार खर्च कर रहा हूँ अभी, घूम घूम कर लाड़ पूँजी लेकर दौड़ता, घर ढूँढू बाजार।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी