Category : मुक्तक/दोहा



  • दोहे

    दोहे

    श्रृद्धा की थाली सजी, मनभावों के दीप। स्वीकारो प्रभु वंदना, अंतस करो सुदीप।। रीति नीति सत साधना, मानव सेवा भाव। जीवन में सब से रहे, सदा उचित बर्ताव।। धन दौलत वैभव भले, मत देना जगदीश। इतनी...

  • “कता/मुक्तक”

    “कता/मुक्तक”

    दिल की बातें कभी-कभी होंठों पर भी आ जाती है। मुस्कुराहट मन में खिल कभी लबो पर छा जाती है। गुजरे वक्त की नजाकत कभी गम गुदगुदा जाए तो- तन्हाई घिरी हँसी लपक सुर्ख चेहरे को...


  • “दोहा-मुक्तक”

    “दोहा-मुक्तक”

    शीर्षक—अहंकार, दर्प, दंभ, अभिमान, मद, गर्व, घमण्ड ) नित मायावी खेत में, उग रहे अहंकार। पाल पोस हम खुद रहे, मानों है उपहार। पुलकित रहती डालियाँ, लेकर सुंदर फूल- रंग बिरंगे बाग से, कौन करे प्रतिकार॥-1...

  • दोहे : नारी

    दोहे : नारी

    नारी सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार ! प्रेम-नेह का दीप ले, हर लेती अँधियार !! पीड़ा,ग़म में भी रखे,अधरों पर मुस्कान ! इसीलिये तो नार है,आन,बान औ’ शान !! नारी तो है श्रेष्ठ नित...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अब तो जूठन भी नसीब नहीं होती पेट के मारो को सारे जलसे ऊँची इमारतों के फानूस में टंगे होते हैं -राज सिंह

  • मुक्तक

    मुक्तक

    रखेगें सच्चाई मन में यही मेरा विश्वास है। तिरंगे की ओर से करोड़ो का आवाज है। नहीं झुकेगा कभी ये भारत,भारतीय लोग उस हरा केसरिया श्वेत रंग चक्र पर नाज है॥१॥ भारतीय अस्मिता को कभी भी...

  • दोहे : बेटियां

    दोहे : बेटियां

    बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार ! बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !! बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश ! बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !! बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय ! बेटी चोखे...