मुक्तक/दोहा

पाये तेरी गोद में, मैंने चारों धाम

तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास। सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास।। माँ ममता की खान है, धरती पर भगवान। माँ की महिमा मानिए, सबसे श्रेष्ठ-महान।। माँ कविता के बोल-सी,कहानी की जुबान। दोहो के रस में घुली, लगे छंद की जान।। माँ वीणा की तार है, माँ है फूल बहार। माँ […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक : बुजुर्ग

ताउम्र निभाता रहा फर्ज, खुद की खातिर कभी जिया ना, सुकुन से बैठकर नहीं खायी रोटी, दो घूंट पानी पिया ना। रात दिन एक कर दिया था, परिवार की खुशी के वास्ते, आरोप लगता है कर्तव्य था, अहसान कुछ भी किया ना। जो कुछ कमाया, दे दिया सब परिवार को, खुश रहें बच्चे, प्राथमिकता सदा […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

 हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई ( “हिंदी है पहचान हमारी” शब्द साधना सबसे न्यारी” “मुक्तक” हिंदी ही पहचान है, हिंदी ही अभिमान। कई सहेली बोलियाँ, मिलजुल करती गान। राग पंथ कितने यहाँ, फिर भी भारत एक- एक सूत्र मनके कई, हिंदी हुनर महान।।-1 एक वृक्ष है बाग का, डाल डाल फलदार। एक शब्द है ब्रम्ह […]

मुक्तक/दोहा

बरगद और बुजुर्ग

बरगद और बुजुर्ग को मानता अब कौन है? वक्त के चक्र को भला जानता कब कौन है? अहमियत इन दोनों की कभी खत्म नहीं हो सकती, मगर वक्त रहते इनको पहचानता भला कौन है? सदियों से जनमानस‌ के हृदय में प्रेम का बीज बो रहे हैं| बूढ़े रीति-रिवाजों और परम्परा को अपने काँधे पर ढो […]

मुक्तक/दोहा

कुर्सी

कुर्सी की माया बड़ी , समझो इसका सार कुर्सी यदि मिलती नहीं तो जीवन धिक्कार इसीलिए कहता हूँ भैया समझो इसका अर्थ, कुर्सी गर मिलती नहीं ,समझो जीवन व्यर्थ समझो जीवन व्यर्थ नहीं कोई है आशा कुर्सी सबसे श्रेष्ठ यही जीवन अभिलाषा बिन प्रयास कुछ होत नहीं जीवन में भाई, नेता बनना अगर तुम्हें फिर […]

मुक्तक/दोहा

भारतेन्दु हरिश्चंद्र

भारतेन्दु  हरिश्चंद्र जी की, कलम रचे वो छंद। खुल जायें सब द्वार दिमागी, जो थे पहले बंद।। हो   कोई   चौपट राजा  या, हो अंग्रेजी राज। शोषण के विपरीत लड़ा है,उनका सकल समाज। एक साथ रच डाले नाटक, कविता विपुल निबंध। मंचों पर अभिनय के द्वारा, तोड़े वर्जित बंध।। हिंदी माता की गोदी में, हुआ न […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

निज घर क्यों वंचित रहे,ध्यान धरे सरकार। दिवस मनाने मात्र से,कैसे हो उद्धार।। हिंदी भाषा में सभी, प्रकट करें उद्गार। सीधी,सादी है सरल, विस्तृत है संसार।। आखर-आखर लाख के,मीठे इसके बोल। हिंदी जननी सम समझ,हिंदी है अनमोल।। तुलसी मीरा जायसी, बोले जो रसखान। रचती पीर कबीर की, हिंदी अपनी शान।। भारतेंदु का युग बना, लेकर जिसकी छांव। […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

हमारी शान है हिंदी,हमारा मान है हिंदी। कई भाषा भले बोलें,मगर पहचान है हिंदी।। करें संकल्प दुनिया में,बढ़े हर दिन,चलन इसका। हमारे शौर्य की गाथा, विजय का गान है हिंदी।।

मुक्तक/दोहा

दोहे : शिक्षक दिवस पर

शिक्षा मंदिर में जला,  सदा ज्ञान का दीप । मोती गढ़ते रात दिन, बना स्वयं को सीप बहते शिक्षक हर दिशा, बनकर,अमृत धार। ज्ञान सरिता निज बहा, हरित करे संसार कोरी मिट्टी को गढ़े,दे दे कर निज थाप। इनकी थपकी में लखें, इनकी ममता आप।। निज साँसों के दीप से,चमकाये संसार। ऐसे गुरुवर को नमन, ‘आशा’  बारम्बार।। माँ […]