मुक्तक/दोहा

स्वागत नव वर्ष नव संवत्सर 2078

हे काल-चक्र-प्रसूत नव वर्ष , संवत्सर अभ्यागत काल-खंड के नव सूत्र-धर प्रारब्ध के संकेत, भवितव्यता विचार स्वागत करें दूरस्थ हो, कर जोडकर विगत ने बहुत कुछ हमको सिखाया सो रहे थे तान चादर, उसने जगाया अखिलविश्व की तोड-तंद्रा,चैतन्य कर नश्वर, क्षण-भंगुरता का पाठ पढाया नहीं लौटता, जो भी बीता, खोया कल हर निशा पश्चात होता […]

मुक्तक/दोहा

तन्हाई(103)

हर कोई असहाय लग रहा,विपदा की वेला आई ।मनुसृष्टि पर कहर ढा रही ,क्रूर काल की अँगड़ाई ।खुद की करो सुरक्षा ,या-फिर कोरोना का ग्रास बनो!भीड़-भाड़ से दूर रहो ,जीवित रक्खेगी तन्हाई ।————————-डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

मुक्तक/दोहा

दोहे : नारी-महिमा

नारी सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार ! प्रेम-नेह का दीप ले, हर लेती अँधियार !! पीड़ा,ग़म में भी रखे,अधरों पर मुस्कान ! इसीलिये तो नार है,आन,बान औ’ शान !! नारी तो है श्रेष्ठ नित ,हैं ऊँचे आयाम ! इसीलिये उसको “शरद”, बारम्बार प्रणाम !! नारी ने नर को जना,इसीलिये वह ख़ास ! नारी […]

मुक्तक/दोहा

श्रीमद्भगवद्गीता के मुक्तक

(1) है दुनिया में जो व्यापक ज्ञान और अध्यात्म की वाहक सदा जो पथ दिखाती है,बनाती नर को जो लायक उसे कहतें हैं सारे दिव्यता का इक महासागर, कहाती है जो गीता,कृष्ण थे,जिसके अमर गायक। (2) मुझे गीता ने सिखलाया,जिऊँ मैं कैसे यह जीवन सुवासित कैसे कर पाऊँ,मैं अपनी देह और यह मन मैं चलकर […]

मुक्तक/दोहा

बसन्त (दोहे)

बसन्त (दोहे) मधु ऋतु ने दस्तक करी ,दशों दिशा हुलसाय | अमराई बौरों भरी , गली गली महकाय || हरे रंग का घाघरा ,लहर – लहर लहराय| पीली चुनरी ओढ़ के , धरा रही मुस्काय || विविध रंग के पुष्प से, धरा सज गयी आज| पवन बसन्ती बह रही , बजे सुरीले साज | प्रीत […]

मुक्तक/दोहा

नीर की महत्ता के दोहे

नीर ईश का रूप है,पंचतत्व का सार। नीर नहीं तो व्यर्थ है,यह सारा संसार।। नीर लिए आशा सदा,नीर लिए विश्वास । नीर से सांसें चल रही,देवों का आभास ।।अमृत जैसा है “शरद”, कहते जिसको नीर । एक बूंद भी कम मिले,तो बढ़ जाती पीर ।। नीर बिना जीवन नहीं,अकुला जाता जीव । नीर फसल औ’ […]

मुक्तक/दोहा

अहिंसा के दोहे

सत्य-अहिंसा रोशनी,हैं जीवन के सार। लाते हैं जो हर घड़ी,अंतहीन उजियार।। नीति अहिंसा की बड़ी,सचमुच बहुत महान । जीवन की जिससे बढ़े,सच में नित ही शान ।। जियो सदा तुम ज्ञान से,सदाचार का भाव। सतत् अहिंसा-भाव से,चोखा रहे प्रभाव।। जीवन में नित हर्ष हो,बिखरे नित आनंद । भाव अहिंसा उच्चतम,प्रभु भी करें पसंद।। अपनाना तुम […]

मुक्तक/दोहा

मिलन के दोहे

मिलन ईश वरदान है,है इक पावन भाव। जिसका मनचाहा मिलन,उसको नहीं अभाव।। मिलन नहीं तो,है विरह,जो लगता अभिशाप। मिलन एक अहसास है,मिलन लिए नित ताप।। मिलन बदल दे ज़िंदगी,मिलन प्रेम के नाम। मिलन खुशी है,वेग है,मिलन राधिका-श्याम।। मिलन सदा है वंदगी,मिलन एक उत्कर्ष। मिलन मेलकर दो हृदय,जीते हर संघर्ष।। मिलन कामना नेक है,मिलन रचे मधुमास। […]

मुक्तक/दोहा

धूप छांह के रंग

रूप सुहानी चांदनी ,दिलकश थी आवाज ,पर चिडिया को ले उडा ,चतुर सयाना बाज। सुबह रसोई जागती ,करते बरतन शोर ,अदरख वाली चाय से ,होती अपनी भोर। ठिठुर रही है जिंदगी ,मौत भरे मुस्कान ,घना कोहरा चीर के ,आओ धूप महान। अंधियारे को चीर कर ,ऊगे सूरज रोज ,चन्दा तारों की करे ,सारा दिन वो […]