Category : मुक्तक/दोहा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    सफर यूँ ही अपना ये चलता रहे चेहरा खुशियों से तेरा ये खिलता रहे साथ देना हमेशा ही तुम यूँ मेरा चाहे जितनी भी झंझावात होती रहे एक पल भी जुदा जो तू मुझसे रहे सांसे...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    दिल के जख्म जमाने को दिखाया नही करते हैं, देखने के बहाने जख्मों को, लोग कुरेदा करते है| जिसने जख्म दिये है वह, हमदर्दी की बात करें, महफिल हो या तन्हाई  जज्बात से खेला करते हैं|...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब...


  • पावस

    पावस

    पावस / सावन पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन...

  • दोहे

    दोहे

    छायादार पेड़ नहीं, बोया याद बबूल अब करते हैं देश वे गलती यहाँ कबूल पैसों से बढ़कर नहीं, उनके लिए अब कोय अपने सब अपराध भी, इसके बल पर धोय खुद को ही मान लेते सबसे...

  • मुक्तक

    कोई माँ बच्चे को, यूँ दूध नही पिलाती, नजर न लगे, अपने आँचल में छुपाती| होती निगाहें, बच्चे की भाव भंगिमा पर, माँ अपने जिस्म की नुमाइश नही लगाती| नही भाव ममता का, है इसकी आंख...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    अहंकार का बोझ जब, सिर पर चढने लगा, आदमी को आदमी तब, कीडे सा लगने लगा| ढोने लगा वह बोझ अपना, अपने कांधो पर यहाँ, आदमी से आदमियत का, अहसास भी घटने लगा| — अ कीर्ति...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    शीर्षक -दीवार,भीत,दीवाल “मुक्तक” किधर बनी दीवार है खोद रहे क्यूँ भीत। बहुत पुरानी नीव है, मिली जुली है रीत। छत छप्पर चित एक सा, एक सरीखा सोच- कलह सुलह सर्वत्र सम, घर साधक मनमीत।। नई नई...