मुक्तक/दोहा

आए याद उसूल

जीवन में मिलते रहे ,सुख दुख वाले फूल ,एक बार कंटक मिला ,आए याद उसूल। कैसे कह दूँ बोलिये ,कब आओगे मीत ,वो तो मेरे मन बसे ,बन जीवन संगीत। थोड़े में करना भगत ,जीवन का निर्वाह ,ये मंदी के हैं दिवस,कर धन की परवाह। फ़ोकट में सब चाहते ,बड़ी सफलता मीत.इसीलिए बजता रहा ,घोटाला […]

मुक्तक/दोहा

ये मिथ्या के घोल

मन के भीतर छल भरा,ऊपर मीठे बोल , इनसे बचना साथियों ,ये मिथ्या के घोल। — अपने दिल नादान पर,कब चलता है जोर, अच्छी सूरत देख के,होता भाव  विभोर। — यह जीवन व्यापार है, लेन देन का काम, घाटा लाभ साथ चलें,सफल कभी नाकाम .. — जीवन में अब मिल रहा,दुखों का फरमान. सुख चिट्ठी […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

शब्दों की कुछ भी समझ,तब तक बिल्कुल व्यर्थ। जब  तक   ज़हन  चढ़ें  नहीं , उन शब्दों  के अर्थ। जहाँ तक नज़र जा रही, रफ  दिखते  हालात। दहशत दहशत हर तरफ, दहशत की ही बात। सुख दुख टिकते कब भला,आता जाता माल। शुक्र  करो  रब का  सदा, जैसा  भी हो  हाल। रोज़  बनाते  बस  रहे, कागज़ी  […]

मुक्तक/दोहा

पावस और सावन

विधा – दोहे पावस / सावन पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन मे उठे हिलोर || कजरारे घन आय के , बरसावें जब नीर | तपती धरती खिल […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

हौसलों की बुलंदी से चट्टानों को चूर करूँगीदुश्मनों को झुकने को अब मैं मजबूर करूँगीमंजिल चाहे कितनी दूर क्यों हो मेरी दोस्तों विश्वास अटल है आये संकटों को दूर करूँगी भाव का सागर हृदय में रोता रहाहृदय मेरा बीज प्रेम के बोता रहा नयन बंद किये जब दर्शन हुआ हैस्वप्न में जागकर मन ये सोता […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

सच्चा मित्र वही होता है, जो हर सुख-दुख में सम साथ निभाये, बिन मांगे हर संभव मदद हंसते-हंसते कर जाये । मित्रता की अमर कहानी कृष्ण-सुदामा की सुनाई जाती है – जीवन में सच्चा मित्र वही जो परछाईं बन साथ निभाये ।। — मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुक्तक/दोहा

विज्ञान के दोहे

ख़ूब रचा विज्ञान ने,सुविधा का संसार। जीवन में सुख भर गया,दिखता जीवन-सार।। आना-जाना,परिवहन,लेन-देन,संचार। नए सभी कुछ हो गए,शिक्षा अरु व्यापार।। दूर बैठ संवाद हो,चित्र,वीडियो संग। सचमुच में विज्ञान ने,बिखराये नव रंग।। जीवन हरसाने लगा,विज्ञानी सौगात। पर यंत्रों से हो गए,मानव के जज़्बात।। लाइव टेलीकास्ट है,एसी,फ्रिज,जलयान। वायुयान,बिजली सुखद,मोबाइल की शान।। पर इंसां आराममय,श्रम से है वह […]

मुक्तक/दोहा

मीरा की भक्ति के दोहे

थी दीवानी श्याम की,मीरा जिसका नाम। जो युग-युग को बन गई,हियकर अरु अभिराम।। पिया हलाहल,पर अमर,पाया इक वरदान। श्रद्धा से तो मिल गई,जीवन को नव आन।। लोक लाज को तज हुई,मीरा भक्तिन रूप। खिली हृदय पावन-मधुर,मीठी-मोहक धूप।। मीरा खोई श्याम में,श्याम बने मनमीत। नहीं हरा पाया उसे,मीरा पाई जीत।। इकतारा लेकर सजी,मीरा मंदिर ख़ूब। नाची,गाई,मस्त […]

मुक्तक/दोहा

ईश्वर का प्रतिरूप धरा पर

मरीजो  की करें सेवा समर्पित करके जीवन धन। लड़े दिन रात रोगों से मनुज को दे रहे जीवन। यही भगवान का प्रतिरूप जो भय रोग हरते हैं, मनुज के रूप में में साक्षात दिखते हैं यही भगवन । * मगर इस वेशभूषा में छिपे कुछ लोग ऐसे है। कसम खाई भलाई हित  शपथ  वह भूल […]

पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा

पाक अभी भी नापाक है

मुक्तक एक वीर भूमि की सीमा फिर से है जाग उठी, लहू युद्धभूमि में रणबांकुरों से मांग उठी। पैशाचिक ताण्डव जो नित्य पाक करता है उसे फूंक देने को युवकों में आग उठी।। दो सीमा पर क्या इसी भांति हम अपना रक्त बहायेंगे, शान्त बने रणवीरों के शव कब तक गिनते जायेंगे समय कह रहा […]