Category : मुक्तक/दोहा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    रसीला हो बड़ा मीठा फलों का नृप कहाता है। प्रशंसा वो करे खुलकर इसे जो व्यक्ति खाता है। पना-आचार-चटनी-जूस औ’ फ्रूटी-अमावट भी। जिसे जो भी लगे अच्छा वही इससे बनाता है॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

  • मुक्तक

    मुक्तक

    मुक्तक आसमां को छू सकूँगी देखना अब एक दिन चाँद तारों की करूँगी सैर मैं तब एक दिन दूर तक उड़ कर गगन छू लूँ किसी की फिर न सुन आस है मुझको करूँगी नाम मैं...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    खुशी मिलती कहाँ कोई बता तो दे ठिकाने को सजा लू ढूंढकर उसको पता तो दे बिराने को उसी की ताक में रहते उसी से दिल लगा बैठे कहाँ रहती प्रसन्ना वह मुकामे खिल खिलाने को॥...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    यहीं पर था सरोवर एक पानी पी गए कौए नए जोड़े मिले थे दो किनारे खो गए हौए बड़े पोखर मिला करते लिए अपनी तलैया को अभी की हाल देखो तो सुराही पी गए पौए॥ बहुत...

  • दोहे

    दोहे

    पीपल पाती हाथ में,चुरमुर होती आज रख कलम पूछूँ अब रे,हवा दे गई ताज I दुखिया दुख को ढो रही,सुबह लगाती आस सुख सपना सा लग रहा,न सुख मिला है पास I

  • मुक्तक

    मुक्तक

      है खुशी ही खुशी और सब ग़म भगे। गैर आ पास में बन रहे हैं सगे। हर जगह बस मेरी लोग चर्चा करें। इस कदर चाहने जो मुझे तुम लगे॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’


  • मुक्तक

    मुक्तक

    देखता आकाश जानिब सोचने में व्यस्त है। पंख तेरे पास लेकिन हौसला जो पस्त है। क्यों प्रतीक्षा कर रहा है वक्त की ऐ बेखबर। अनुकरण के योग्य होता खुद बनाता जो डगर॥ — पीयूष कुमार द्विवेदी...

  • दो मुक्तक : अच्छे दिन

    दो मुक्तक : अच्छे दिन

    लल्लू-पंजू पूछ रहे हैं- कब आयेंगे अच्छे दिन? फ़ौरन पकड़ बाँध लो, नहिं तो तरसायेंगे अच्छे दिन पन्द्रह-पन्द्रह लाख डाल दो, सब लोगों के खाते में ऐसा हो जाये तो कल ही, मिल जायेंगे अच्छे दिन...

  • दोहे

    दोहे

    मोहन मन मोहित हुआ, लगे न दूजी ठोर । अब तो निरखो साँवरे, तनिक हमारी ओर ।। हरपल बढ़ती जा रही, विरहा की ये पीर । विरहानल भड़का रहा, इन नैनों का नीर ।। प्रिय तुमको...