Category : मुक्तक/दोहा

  • आज के दोहे

    आज के दोहे

    प्रेम, दया, करुणा सभी, मानव के श्रृंगार। मिल-जुलकर जो रह गये, हो जाये उद्धार। जीवन का दर्शन यही, यही समूचा सार। कहते वेद, पुराण सब सुंदर रखो विचार। जन्म सफल होगा तभी, जीवन सुखमय होय। आस-पास...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    रूप चौदस/छोटी दीपावली की सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगल शुभकामना “मुक्तक” जलाते दीप हैं मिलकर भगाने के लिए तामस। बनाते बातियाँ हम सब जलाने के लिए तामस। सजाते दीप मालिका दिखाने के लिए ताकत- मगर...

  • दोहे रमेश के दिवाली पर

    दोहे रमेश के दिवाली पर

    संग शारदा मातु के, लक्ष्मी और गणेश ! दीवाली को पूजते, इनको सभी ‘रमेश !! आतिशबाजी का नहीं, करो दिखावा यार ! दीपों का त्यौहार है,… सबको दें उपहार ! आतिशबाजी से अगर,गिरे स्वास्थ्य पर  गाज...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    “मुक्तक” दीपक दीपक से कहे, कैसे हो तुम दीप। माटी तो सबकी सगी, तुम क्यों जुदा प्रदीप। रोज रोज मैं भी जलूँ, आज जले तुम साथ- क्या जानू क्या राज है, क्यों तुम हुए समीप।।-1 धूमधाम...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    चढ़ा लिए तुम बाण धनुर्धर, अभी धरा हरियाली है। इंच इंच पर उगे धुरंधर, किसने की रखवाली है। मुंड लिए माँ काली दौड़ी, शिव की महिमा न्यारी है- नित्य प्रचंड विक्षिप्त समंदर, गुफा गुफा विकराली है।।...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    “मुक्तक” सत्य समर्पित है सदा, लेकर मानक मान। जगह कहाँ कोई बची, जहाँ नहीं गुणगान। झूठा भी चलता रहा, पाकर अपनी राह- झूठ-मूठ का सत्य कब, पाता है बहुमान।।-1 सही अर्थ में देख लें, लाल रंग...

  • दोहावली

    दोहावली

    “दोहावली” गली छोड़ कर क्यूँ गए, ओ मेरे मन मीत कोयल अब गाती नहीं, सुबह सुरीली गीत।।-1 दूर जा रहें हैं सभी, जैसे जूनी रीत। गाँव छोड़ कर बस रहे, शहर अनोखी प्रीत।।-2 सुना रहे हैं...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    कीर्ति (वर्णिक) छंद विधान – स स स ग मापनी- 112 112 1122 मुक्तक” मुरली बजती मधुमाषा हरि को भजती अभिलाषा रचती कविता अनुराधा छलकें गगरी परिहाषा।।-1 घर में छलिया घुस आया यशुदा ममता भरमाया गलियाँ...

  • नारी

    नारी

    नारी घर संसार है, नारी है आधार| नारी पर क्यों हो रहा, फिर -फिर अत्याचार|| आदि शक्ति संजीवनी, जग की मूलाधार| स्वयं तरसती प्रीत को, बहती बन रसधार|| मासूमों को नोचते, करते नित संहार| स्वांग रचा...

  • “दोहा”

    “दोहा”

    “दोहावली” हँसते मिलते खेलते, दिल हो जाता खास। प्रेम गली का अटल सच, आपस का विश्वास।।-1 राधा को कान्हा मिले, मधुवन खुश्बू वास। थी मीरा की चाहना, मोहन रहते पास।।-2 गोकुल की गैया भली, थी कान्हा...