मुक्तक/दोहा

होली के दोहे

रंगों के सँग खेलती,एक नवल- सी आस ! मन में पलने लग गया,फिर नेहिल विश्वास !! लगे गुलाबी ठंड पर,आतपमय जज़्बात ! प्रिये-मिलन के काल में,यादें सारी रात !! कुंजन,क्यारिन खेलता,मोहक रूप बसंत ! अनुरागी की बात क्या,तोड़ रहे तप संत !! बौराया -सा लग रहा,देखो तो मधुमास ! प्रीति-प्रणय के भाव का,है हर दिल […]

मुक्तक/दोहा

पहली मुलाकात के दोहे

मुलाकात पहली बनी,बहुत बड़ा वरदान। तुझसे ही मुझको मिली,एक नई पहचान।। तेरे मिलने से हुए,पूरे सब अरमान। तू ही अब है ज़िन्दगी,तू ही मेरी शान।। मुलाकात पहली सदा,रक्खूँगा मैं याद। मैं था उजड़ा,व्यर्थ-सा,हुआ तभी आबाद।। तू मुझसे जब आ मिली,बिखरा मोहक नूर। हर नीरसता मिट गई,मायूसी सब दूर।। बनकर तू जलधार प्रिय,बुझा गई सब प्यास। […]

मुक्तक/दोहा

ताजमहल पर दोहे

अमर मुहब्बत की कथा,है भावों का नूर। शाहजहाँ ने रच दिया,ताजमहल भरपूर।। बेग़म पर सब वारकर,दिया सुखद उपहार। शाहजहाँ ने कर दिया,रोशन यह संसार।। थी बेग़म दिल के निकट,शाहजहाँ का ताज। इतिहासों में है अमर,कहलाती मुमताज।। दुनिया में जानी गई,संगमरमरी आभ। ताजमहल तो बन गया,बेहद ही अमिताभ।। शहर आगरा भा रहा,करे पर्यटन ख़ूब। हर इक […]

मुक्तक/दोहा

दोहे:-

ज्यों माटी को गूँथ कर, देता रुप कुम्हार। वैसे ही निज शिष्य को, देता गुरु आकार।01 गुरु दीपक हैं ज्ञान का, करता दिव्य प्रकाश। आलोकित जीवन करें, और तिमिर का नाश।।02 शिक्षक ईश्वर के सदृश, करें सदा उपकार। उसने ही हमको दिया, जीवन का उपहार।।03 जीवन को सुरभित करें, उर में भरे प्रमोद। प्रलय और […]

मुक्तक/दोहा

शीर्षक :- वृक्ष संरक्षण

ज्ञान अगर बचपन से होगा , पोधों के संरक्षण का, कमी न होगी वृक्षों की यदि हो, शौक वृक्षा रोपण का। खेल – खेल में बचपन सीखे , उपयोगिता वृक्षों की, क्रांति आयेगी फिर जीवन में, काम न होगा शोषण का। हम बच्चों को यह समझाएंँ , वृक्ष जरूरी जीवन में, प्रकृति चाहती साथ आपका, […]

मुक्तक/दोहा

शीर्षक :- बेटी संग दोहे

चला रहे अति लाड़ से , बेटी प्रिय संतान। नन्हीं कलिका में छिपा ,उज्ज्वल भविष्य मान ।।१।। बोल तोतले बोलती , मोह रही पितु मात। बेटी ही है दिख रही , भविष्य की सौगात ।।२।। बाँहों मैं है झूलती , मात पिता संसार। दुनिया से बेखबर है , मिलता स्नेह अपार।।३।। रामचरितमानस लगे , बेटी […]

मुक्तक/दोहा

होली के दोहे

रंगों के सँग खेलती,एक नवल- सी आस ! मन में पलने लग गया,फिर नेहिल विश्वास !! लगे गुलाबी ठंड पर,आतपमय जज़्बात ! प्रिये-मिलन के काल में,यादें सारी रात !! कुंजन,क्यारिन खेलता,मोहक रूप बसंत ! अनुरागी की बात क्या,तोड़ रहे तप संत !! बौराया -सा लग रहा,देखो तो मधुमास ! प्रीति-प्रणय के भाव का,है हर दिल […]

मुक्तक/दोहा

समरसता के दोहे

समरसता यदि संग है,तो पलता मधुमास। अपनाकर संवेदना,मानव बनता ख़ास।। समरसता-आचार तो,है करुणा का रूप।। जिससे खिलती चाँदनी,बिखरे उजली धूप।। समरसता सुविचार से,मानव बने उदार। द्वेष,कपट सब दूर हों,बिखरे नित उपकार।। अंतर्मन में नम्रता,अधरों पर मृदु बोल। समरसता करती सदा,जीवन को अनमोल।। रीति,नीति हमसे कहें,बन तू सद् इनसान। समरसता देवत्व है ,पाए जीवन मान।। समरसता […]

मुक्तक/दोहा

युवाशक्ति

युवाशक्ति को है नमन्,जो रचती इतिहास। हो हिमगिरि-सा दृढ़ युवा,ऊँचा ज्यों आकाश।। युवा उठे तो हो सृजन,विचले तो विध्वंस। युवा विवेकानंद है,है मानस का हंस।। तूफ़ानों को जीतकर,ला दे नवल विहान। युवा सदा गतिशील है,है वह मंगलगान। भगतसिंह,सुखदेव है,युवा लगे ‘आज़ाद’। हर बाधा से लड़ करे,युवा वतन आबाद।। युवा जोश का नाम है,रखता नित विश्वास। […]