Category : मुक्तक/दोहा

  • सौन्दर्य के दोहे

    सौन्दर्य के दोहे

    दर्पण ने नग़मे रचे,महक उठा है रूप ! वन-उपवन को मिल रही,सचमुच मोहक धूप !! इठलाता यौवन फिरे,काया है भरपूर ! लगता नदिया में ‘शरद’,आया जैसे पूर !! उजियारा दिखने लगा,चकाचौंध है आंख ! मन-पंछी उड़ने...

  • “कता”

    “कता”

    तुझे छोड़ न जाऊँ री सैयां न कर लफड़ा डोली में। क्या रखा है इस झोली में जो नहीं तेरी ठिठोली में। आज के दिन तूँ रोक ले आँसू नैन छुपा ले नैनों से- दिल ही...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    होता रहा उत्थान, जगत का ऐसे वैसे। मानवता को राह, मिली पग जैसे तैसे। देख जी रहा वक्त, शख्त सुरताल लगाकर- सुनो भी अपने गीत, मीत मन कैसे कैसे॥-1 अभ्युदय जिया मान, खान पर पान मचलता।...


  • स्वच्छता के दोहे

    स्वच्छता के दोहे

    बिखरी हो जब गंदगी, तब विकास अवरुध्द घट जाती संपन्नता, बरकत होती क्रुध्द वे मानुष तो मूर्ख हैं, करें शौच मैदान जो अंचल गंदा करें, पकड़ो उनके कान पाठक जी तो कर रहे, सचमुच पावन काम...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    सच लिखने की कोशिश करती हूँ, कुछ सीखने की कोशिश करती हूँ। ज़माना हर रोज लगाता है कीमत, नहीं बिकने की कोशिश करती हूँ। देश पर मिटने की कोशिश करती हूँ, जिद्द पर टिकने की कोशिश...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    माँ जगत की अन्नदाता भूख को भर दीजिये। हों सभी के शिर सु-छाया संग यह वर दीजिये। उन्नति के पथ डगर पिछड़े शय शहर का नाम हो- टप टपकती छत जहाँ उस गाँव को दर दीजिये॥-1...


  • माँ

    माँ

    जमीन से जुड़ी हुई है किस्मत मेरी इसलिए मैं आसमान नहीं देखता मेरे हिस्से में मेरी माँ आयेगी इसलिए जायदाद में मिले वो दुकान नहीं देखता