Category : मुक्तक/दोहा

  • “मुखपोथी पर लोग”

    “मुखपोथी पर लोग”

    मुखपोथी के झाड़ में, कच्चे-पक्के बेर। जिन्हें न आती शायरी, वो भी कहते शेर।। सिद्ध हो रही साधना, सफल हुआ उद्योग। अपनी बातें लिख रहे, मुखपोथी पर लोग।। भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार। उजड़ रहा...


  • पर्यावऱण पर कुछ दोहे

    पर्यावऱण पर कुछ दोहे

    आबादी के दंश से पर्यावरण खराब । आबादी को रोक के, धरा करेंगे साफ।1। पेड़ों में ब्रम्हा ,विष्णु ,पेड़ो में श्रीराम। वन बचाने खातिर अब,लाल करो कुछ काम।2। जीव रहे तब तक जिंदा,जब तक इनमें जान। लाल खातिर है...

  • “हेलमेट सिर पर रखो”

    “हेलमेट सिर पर रखो”

    आस-पास होने लगा, सड़कों का विस्तार। लेकिन इससे हो गयी, बहुत तेज रफ्तार।। सड़क किनारे लगेंगे, छायावाले वृक्ष। इस पर भी अब टिप्पणी, करने लगा विपक्ष।। स्वच्छ बने वातावरण, सुधरें सबके हाल । पेड़ों पर खिल...

  • मुक्तक – शब्द संचयन

    मुक्तक – शब्द संचयन

    शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा। काव्य जगत का मैं छोटा सा साधक हूँ, पर शब्दों में उर्जा का परिचायक होगा ।। —प्रदीप कुमार तिवारी—

  • मुक्तक – नशेड़ी

    मुक्तक – नशेड़ी

    बन के नशेड़ी इंसान हैवान बन जाते हैं, कभी-कभी तो पीकर भगवान बन जाते हैं। परिवार को गाली देते, सड़कों पर लेटते, अच्छे खासे पद को भी बदनाम कर जाते हैं।। —प्रदीप कुमार तिवारी—

  • दोहे – बेटियां

    दोहे – बेटियां

    बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार ! बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !! बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश ! बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !! बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय ! बेटी चोखे...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    मुक्तक तेरे चार गुण, कहन-शमन मन भाव। चाहत माफक मापनी, मानव मान सुभाव। चित प्रकृति शोभा अयन, वदन केश शृंगार- समतुक हर पद साथ में, तीजा कदम दुराव॥-1 यति गति पद निर्वाह कर, छंद-अछन्द विधान। अतिशय...

  • मुक्तक….

    मुक्तक….

      चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है। सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है। ये माना है नही आसां मुहब्बत राह पर चलना- कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है। ________अनहद...