Category : मुक्तक/दोहा

  • “छंद, रोला मुक्तक”

    “छंद, रोला मुक्तक”

    पहली-पहली रात, निकट बैठे जब साजन। घूँघट था अंजान, नैन का कोरा आँजन। वाणी बहकी जाय, होठ बेचैन हो गए- मिली पास को आस, पलंग बिराजे राजन।।-1 खूब हुई बरसात, छमा छम बूँदा बाँदी छलक गए...

  • दोहे

    दोहे

    सावन पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन मे उठे...


  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    माँ शारदे को नमन करते हुए समस्त मंच के गुणीजनों को मेरा वंदन अभिनंदन। आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई। सौंप दिया माँ-बाप ने, गुरु को अपना लाल। विनय शारदा मातु से, साधक शिक्षक...

  • दोहे रमेश के

    दोहे रमेश के

    इत देखूंँ परिवार या, उत देखूँ मै देश ! जीवन के बाजार मे,ऐसा फँसा रमेश ! ! पिछड़ेपन की देश मे,ऐसी चली बयार ! लगी हुई है होड़ सी , बनने की लाचार !! कर लेगें...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    बदला हुआ मौसम, बहक बरसात हो जाए। उड़ता हुआ बादल, ठहर कुछ बात हो जाए। क्यों जा रहे चंदा , गगन पर किस लिए बोलो- कर दो खबर सबको, ठहर दिन रात हो जाए॥-1 अच्छी नहीं...

  • नग़मा-मुखड़ा

    नग़मा-मुखड़ा

    हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है देखे कितने मंजर हमने तू ही दिल को भाता है ना जानूं क्यूं खुद पे मेरा लगता अब अधिकार नही आईना अब मैं जब भी...

  • “चतुष्पदी”

    “चतुष्पदी”

    सादर नमन साहित्य के महान सपूत गोपाल दास ‘नीरज’ जी को। ॐ शांति। सुना था कल की नीरज नहीं रहे। अजी साहित्य के धीरज नहीं रहे। गोपाल कभी छोड़ते क्या दास को- रस छंद गीत के...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शांति का प्रतीक लिए उड़ता रहता हूँ। कबूतर हूँ न इसी लिए कुढ़ता रहता हूँ। कितने आए-गए सर के ऊपर से मेरे- गुटरगूं कर-करके दाना चुँगता रहता हूँ॥-1 संदेश वाहक थे पूर्वज मेरे सुनता रहता हूँ।...