मुक्तक/दोहा

सौंदर्य के दोहे

रूप दमकता नित्य ही,फैलाता आलोक। प्रिये आज तू चाँद है,देखे सारा लोक।। गालों पर आभा खिली,लुभा रहा है नूर। दाता ने तुझको दिया,सच यौवन भरपूर।। चंचल चितवन से चलें,जाने कितने तीर। दिल थामे सब घूमते,कौन बताए पीर।। बतला दे ऐ रूपसी,तू किसका वरदान। तेरा मोहक रूप ये,है किसका अरमान।। रूप दमकता नित्य ही,फैलाता आलोक। प्रिये […]

मुक्तक/दोहा

लेखनी

आग उगलती लेखनी,ही लाती परिणाम। जो बदले युग को सदा,लाये नव आयाम।। लेखन में जब सत्य हो,परिवर्तन का भाव। वही लेखनी पूज्य है,जिसमें जनहित-ताव।। गाये जो बस दर्द,ग़म,पीड़ाओं के गीत। बने झोंपड़ी,भूख की,जो सच्ची मनमीत।। वही लेखनी धन्य है,जो असत्य से दूर। जो रखती संवेदना,वही कलम मशहूर।। कलम बिके ना,दृढ़ रहे,हों कैसे हालात। तभी बनेगी […]

मुक्तक/दोहा

दो हज़ार इक्कीस

आशा बहुत है तुमसे हे दो हजार इक्कीस | तोड़ो सभी निराशा हे दो हजार इक्कीस | यह बीस जो गया है तम भर गया जहां में- भर दो नया उजाला हे दो हजार इक्कीस | मारा बहुत है इसने दुर्दिन दिखा गया है | कुछ ले गया है हमसे पर कुछ सिखा गया है […]

मुक्तक/दोहा

कैमरे के मुक्तक

होते जो भी सुखद-दुखद पल,सबका चित्रण करता जीवन के बीते लम्हों को अंक में निज के भरता जिसका प्रियवर नाम कैमरा,वह इक यंत्र है न्यारा, तस्वीरों में विगत सजाकर,मायूसी को हरता। यादों को भरकर निज गृह में,इतिहासों को रचता था कैसा उज्ज्वल अतीत,इन विश्वासों को सृजता रिश्ते-नाते,प्रेम-नेह सब,रहें गर्भ में जिसके, उस अलबेले यंत्र कैमरे […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – सुबह की सैर

करो सुबह की सैर नित,दूर रहेंगे रोग। जीवन हो खुशहाल तब,दीर्घ आयु का योग।। सुबह मिले ताज़ी हवा,जो सचमुच वरदान। हर्ष मिले,आनंद भी,सांसें पायें मान।। रक्तचाप का संतुलन,सुगर नियंत्रित होय। काया फुर्तीली रहे,जीवन सुख को बोय।। सैर सुबह की कह रही,निद्रा त्यागो नित्य। पैदल चलना है भला,साथ देय आदित्य।। अंतर के आनंद से,जीवन गाये गीत। […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

कैसा कलियुग आ गया,बदल गया इंसान। दौलत के पीछे लगा,तजकर सब सम्मान।। बदल गया इंसान अब,भूल गया ईमान पाकर दौलत बन गया,मानो ख़ुद भगवान।। नैतिकता को तज करे,पोषित वो अँधियार। इंसां अब इंसान ना,बना हुआ अख़बार।। प्यार,वफ़ा और सत्य अब,ना इंसां के पास। भावों का खोया हुआ,देखो अब अहसास।। रिश्ते सारे टूटते,स्वारथ का बाज़ार। बदला […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

जग का पूरा कर सफ़र,होना तय प्रस्थान। बंदे जीना पर यहां,जी भर यह ले ठान।। लाएगा अंतिम सफ़र,जब आएगा काल। पर जी लें यदि ज़िन्दगी,ना हो तनिक मलाल।। रहना जग में कुुछ दिनों,यह ना सदा निवास। कुछ पल रहकर है गमन,रहे यही अहसास।। मौत अचानक ही चढ़े,इसका रखना ध्यान। फिर निश्चित,अंतिम सफ़र,वक़्त बहुत बलवान।। करुणा […]

मुक्तक/दोहा

सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक

मन को हरते है सदा, मीठे मीठे बोल। बोल अनोखी चाशनी, रिश्तों में दे घोल ।। घोल प्रेम संसार में , कटुता का कर त्याग। त्याग दिये जो स्वार्थ को, मिले प्रेम अनमोल ।। — साधना सिंह ‘शिवा’

मुक्तक/दोहा

किससे करे गुहार !

सच्चे पावन प्यार से, महके मन के खेत ! दगा झूठ अभिमान से, हो जाते सब रेत !! किस से बातें वो करे, किस से करे गुहार ! भटकी राहें भेड़ जो, त्यागे स्व परिवार !! मंत्र प्यार का फूँकते, दिल में रखते घात ! रिश्ते क्या बेकार है, करना उन से बात !! नेह-स्नेह […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

एक पक्षीय बात, कभी अच्छी नहीं होती, सुनी सुनाई बात, कभी सच्ची नहीं होती। घोल रहे हैं जहर फसल में, जो नित दिन, आन्दोलन की अगुवाई, अच्छी नहीं होती। जरा गौर से देखो, विगत वर्षों की कहानी, कृषक के घर, खुशहाली की नयी कहानी। मिलती दवा खाद, नियमित सस्ते दामों पर, बढे दाम फसलों के, […]