Category : मुक्तक/दोहा

  • चंद दोहे आरक्षण के नाम

    चंद दोहे आरक्षण के नाम

    ” दीमक वाले देश में,बस कुर्सी की होड़। आरक्षण की आड़ में,पनप रहा है कोढ़।।” “आरक्षण धरना लगे, देशद्रोह सम पाप। गदहे दौड़े कब कभी,जीन कसें क्यूँ आप?” “आरक्षण की मार से,योग्य हुए लाचार। सच्चा मिट्टी...


  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    दहकां के दुख दर्द का,तनिक नहीं आभास। वोटन खातिर गाँव में , झूठा करें प्रवास। जनता किस बूते करे, इन पर फिर विश्वास। वर्तमान को खोद कर , बदल रहे इतिहास। खास ज़हनियत के रहे ,...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    नहीं सहन होता अब दिग को दूषित प्यारे वानी। हनुमान को किस आधार पर बाँट रहा रे प्रानी। जना अंजनी से पूछो ममता कोई जाति नहीं- नहीं किसी के बस होता जन्म मरण तीरे पानी।।-1 मानव...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    देखिए तो कैसे वो हालात बने हैं। क्या पटरियों पै सिर रख आघात बने हैं। रावण का जलाना भी नासूर बन गया- दृश्य आँखों में जख़्म जल प्रपात बने हैं।।-1 देखन आए जो रावण सन्निपात बने...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक। किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक। बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान- महँगे खर्च सता रहे, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1 हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन। युग बीता...

  • सिंहावलोकनी दोहा

    सिंहावलोकनी दोहा

    लगता मित्र नाराज है, कहो न मेरा दोष। दोष दाग अच्छे नही, मन में भरते रोष।।-1 रोष विनाशक चीज है, भरे कलेश विशेष। विशेष मित्र से प्यार कर, करहु न गैर भरोष।।-2 भरोष हनन करना नहीं,...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    जलाते वीर हैं दीपक भगाने के लिए तामस। चलाते गोलियाँ योद्धा जलाने के लिए तामस। सजाते दीप की अवली दिखाने के लिए ताकत- मगर अंधेर छुप जाती जिलाने के लिए तामस।।-1 विजय आसान कब होती बली...

  • आस

    आस

    धरती प्यासी, अम्बर प्यासा,हवाओं का भी रुख उदास,उड़ चले वो उस दिशा मेंपंछी बुझाने अपनी प्यास, ऐ हवाओं अब दे दो साथ,लेकर उनकी ये पुकार।बिन पंखों के मैं उड़ जाऊँ,पूरी करने उनकी आस।

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    रफ्ता रफ्ता खो गया, दिल का चैन करार।रफ्ता रफ्ता हो गया, मुझको उससे प्यार। जब से मेरी हो गयीं , उससे आँखें चार।मैं उसका बीमार हूँ, वो मेरी बीमार। बुझा बुझा रहने लगा, तब से दिल...