Category : मुक्तक/दोहा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    प्रणय घड़ी की स्मृतियां, विस्मृत न कर देना, तन न्योक्षावर मैं कर दूं, फिर छोड़ कभी न देना। बांह पाश में जकड़ रहे हो, प्रेम पिपासु बन कर, प्रेम रस का पान कर मधुकर, त्यज कभी...

  • दोहे वर्तमान के

    दोहे वर्तमान के

    अंतर्मन में घुल गया,विष बनकर आघात ! सुबहें गहरी हो गयीं,घायल है हर रात !! धुंआ हो गयी ज़िन्दगी,हुई ख़त्म सब म्याद ! नहीं शेष उत्साह अब,बढ़ता नित अवसाद !! सिसक रहा है वक़्त अब,निकल रही...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    तलवारों की क्या कहें, जबतक रहती म्यान। तबतक जग सुंदर लगे, हाथ रहें बेध्यान। एक बार निकली अगर, म्यानों से करवाल- रक्त चखे बिन कब गई, कब म्यान कर ध्यान।।-1 चंद्रहास रण की चमक, चाँद चमक...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    जीते हैं जिलाते हैं खाते हैं पहनते हैं फिर क्यूँ दिखते कंकाल। किसके हैं भंडार कुछ कहते हैं छलकते हैं फिर क्यूँ पलते आकाल। हिलते हैं हिलाते हैं बमबम हैं थिरकते हैं अनजाने से हालात- आते...

  • जीवन के दोहे

    जीवन के दोहे

    जीवन मुरझाने लगा, ऐसी चली बयार ! स्वारथ मुस्काने लगा, हुआ मोथरा प्यार !! बिकता है अब प्यार नित, बनकर के सामान ! भावों की अब खुल गई, सुंदर बड़ी दुकान !! सब ही अपने में घिरे, त्याग दिये सब त्याग...

  • बाल दिवस पर दोहे

    बाल दिवस पर दोहे

    दशरथ पिता नहीं रहे, कहां मिलेंगे राम। रिश्ते भी अब नेट पर, ढूढ़े मिले तमाम।1।   पढना लाल भूल गये, संस्कारों की बात। कौन उन्हें समझाये,आज भला यह बात।2।   बाल साहित्यकार भी,हो गये आज स्यान।...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    पक्के इरादे हो तो घर मजबूत होता है। अटूट रिश्ता अपनों में वशीभूत होता है। अजेय हो जाती हैं यादें पृष्ट खुलने पर- अजी गैरों से कब बैर फलीभूत होता है॥-1 अखंडित दीप जलता है दिन...

  • बच्चे

    बच्चे

    बच्चे खिलते पुष्प हैं, लिये सत्य प्रतिमान  ! अंतर्मन परिशुध्द है, लगते देव समान !!   बच्चे सचमुच भेद बिन, नहीं झूठ,ना पाप ! बच्चों के तेजत्व को, कौन सकेगा माप !!   बच्चे होते हैं सरल, हरदम मन के साफ...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    होता कब यूँ ही कभी, शैशव शख्स उत्थान जगत अभ्युदय जब हुआ, मचला था तूफान रिद्धी सिद्धि अरु वृद्धि तो, चलती अपने माप राह प्रगति गति बावरी, विचलित करती मान॥ तकते हैं जब हम कभी, कैसे...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    नमन करूँ जननी तुझे, चूमूँ तेरे पाँव हर डाली तेरी खिली, फैली शीतल छाँव मन चित तेरे पास हैं, सुंदर तेरा रूप हर्षित हैं सारे लला, सुंदर स्नेहल गाँव॥ तेरी छवि अति पावनी, छाये सकल समाज...