Category : मुक्तक/दोहा

  • विनम्र श्रद्धांजलि

    विनम्र श्रद्धांजलि

    लड़ता रहा मौत से प्रतिपल, किंचित ना भयभीत हुआ। सत्ता और विपक्ष भी जिसका, निष्ठा से मनमीत हुआ। देह त्याग कर चला स्वर्ग में, इन्द्रासन अब डोला है। देख प्रतिष्ठा अटल की शचिपति, मन ही मन...

  • अटल जी अमर हैं

    अटल जी अमर हैं

    समय का पहिया चलेगा जब तक, अटल अटल था अटल रहेगा। छोड़ दिया देह मगर अब, जीवन दर्शन अटल रहेगा। काल के कपाल पर जो , लिखता मिटाता रहा। जन-जन में अटल रहा वह, जन-जन में...

  • महामानव अटल जी के प्रति

    महामानव अटल जी के प्रति

    अटलबिहारी दिव्य थे, सचमुच ही थे ख़ास ! अद्भुत थे,दैदीप्य थे, ऊंचे ज्यों आकाश !! कर्मवीर,सचमुच अटल, था चोखा अंदाज़ ! हर दिल,हर मस्तिष्क पर, किया जिन्होंने राज !! मित्रों के जो मित्र थे, भारत मां के लाल ! ऐसे मानव...


  • कड़वे दोहे

    कड़वे दोहे

    अंतर्मन में घुल गया,विष बनकर आघात ! सुबहें गहरी हो गयीं,घायल है हर रात !! धुंआ हो गयी ज़िन्दगी,हुई ख़त्म सब म्याद ! नहीं शेष उत्साह अब,बढ़ता नित अवसाद !! सिसक रहा है वक़्त अब,निकल रही...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    साहस इनका देखिए, झोली में पाषाण। कहते हैं मेरा वतन, बात-बात में वाण। आतंकी के देश से, आया कैसे गैर- मिला मंच खैरात का, नृत्य कर रहा भाण॥-1 लेकर आओ हौसला, हो जाए दो हाथ। क्यों...

  • “मिलन मुक्तक”

    “मिलन मुक्तक”

    5-8-18 मित्र दिवस के अनुपम अवसर पर आप सभी मित्रों को इस मुक्तक के माध्यम से स्नेहल मिलन व दिली बधाई, भोर आज की अधिक निराली ढूँढ़ मित्र को ले आई। सुबह आँख जब खुली पवाली...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    तर्क तौलते हैं सभी, लिए तराजू हाथ। उचित नीति कहती सदा, मिलों गले प्रिय साथ। माँ शारद कहती नहीं, रख जिह्वा पर झूठ- ज्ञान-ध्यान गुरुदेव चित, अर्चन दीनानाथ॥-1 प्रथम न्याय सम्मान घर, दूजा सकल समाज। तीजा...

  • सावन

    सावन

    पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन मे उठे हिलोर...

  • दोहे

    दोहे

    १) महिना सावन आ गया, रिमझिम है चहुँ ओर। पेड़ों पर फल लद गये, नाचे वन में मोर।। २) छाता साजन ले गये, भीगे मन के तार। तडप रहा पूरा बदन, मन में उठे हुलार।। ३)...