Category : मुक्तक/दोहा

  • “छंद मुक्तामणि, मुक्तक”

    “छंद मुक्तामणि, मुक्तक”

    विधान – 25 मात्रा, 13,12 पर यति, यति से पूर्व वाचिक 12/लगा, अंत में वाचिक 22/गागा, क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त, कुल चार चरण, पर मुक्तक में तीसरा चरण का तुक विषम अतिशय चतुर सुजान का, छद्मी...

  •  “मुक्तक”

     “मुक्तक”

    मापनी- 212 212 1222 हर पन्ने लिख गए वसीयत जो। पढ़ उसे फिर बता हकीकत जो। देख स्याही कलम भरी है क्या- क्या लिखे रख गए जरूरत जो॥-1 गाँव अपना दुराव अपनों से। छाँव खोकर लगाव...


  • ” मुक्तक”

    ” मुक्तक”

    छन्द- वाचिक विमोहा (मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी – 212 212 दृश्य में सार है आप बीमार हैं पूछता कौन क्या कान बेकार है॥-1 आँख बोले नहीं मौन देखे नहीं पाँव जाए कहाँ सार सूझे नहीं॥-2 वेदना साथ...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    मापनी-2122 2122, 2122 212, समांत- आने, पदांत – के लिए घिर गए जलती शमा में, मन मनाने के लिए। उड़ सके क्या पर बिना फिर, दिल लगाने के लिए। राख़ कहती जल बनी हूँ, ख्वाइसें इम्तहान...

  • दोहे

    दोहे

    योग ब्रह्म मुहूरत जो उठे ,और करे नित योग | प्राण वायु करते ग्रहण , नहीं सतावे रोग || प्रात: की बेला मधुर , बहे सुवासित वायु | तन मन ऊर्जावान हो, और बढ़ावे आयु ||...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    अस्त-व्यस्त गिरने लगी, पहली बारिश बूँद। मानों कहना चाहती, मत सो आँखें मूँद। अभी वक्त है जाग जा, मेरे चतुर सुजान- जेठ असाढ़ी सावनी, भादों जमे फफूँद॥-1 याद रखना हर घड़ी उस यार का। जिसने दिया...

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    बसे नयनो में नीरज के, मिलो दीदार कर लेंगे। नयन भर कर निहारेंगे, तुम्हे स्वीकार कर लेंगे। तुम्हे है चाहते लाखो, मैं धड़कन सैकड़ो की हूँ, करो इकरार या इनकार तुमसे प्यार कर लेंगे।। कलेजा चीर...

  • दोहे – मातृ-वंदना

    दोहे – मातृ-वंदना

    माता सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार ! प्रेम-नेह का दीप ले, हर लेती अँधियार !! पीड़ा,ग़म में भी रखे,अधरों पर मुस्कान ! इसीलिये तो मातु है,आन,बान औ’ शान !! माता तो है श्रेष्ठ नित...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    छंद–दिग्पाल (मापनी युक्त) मापनी -221 2122 221 2122 जब गीत मीत गाए, मन काग बोल भाए। विरहन बनी हूँ सखियाँ, जीय मोर डोल जाए। साजन कहाँ छुपे हो, ले फाग रंग अबिरा- ऋतुराज बौर महके, मधुमास...