Category : मुक्तक/दोहा

  • दोहे

    दोहे

    १- गले मिलें हम भूलकर ,सारे कलुषित राग । बैर जला दें हम सभी ,हो होली की आग ।। २- मारें रंग फुहार की ,कर दें चूनर लाल। इस होली में रंग दें ,गोरी तेरे गाल...


  • ना

    ना

    तुम्हारे ना पीछे जरूरर कोई राज होगा तुम इकरार न कर लो इसी लिए इंकार होगा में तो शहीद हो गया तुम्हारे प्यार में अब तो तुम्हारी शहादत का इंतज़ार होगा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    कोई किसी पर इल्जाम लगा देता है, कोई किसी का भी दाम लगा देता है, दर्द दिल में हो या कि दुकानदारी में वो हर जगह, झंडू बाम लगा देता है — सुरेश मिश्र

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    रे प्रीतम मधुमास की, छवि छटा एकाधिकार। डाल रंग या छोड़ दें, फागुन को स्वीकार। पिया रहूँगी पाश में, मत फेरों तुम नैन- खुली किवाड़ी साजना, पर मेरे अधिकार॥-1 साजन यह सिंदूर ही, रखे है सर्वाधिकार।...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    हाथ न छोडूंगी साँवरिया, आज पकड़ में आई बाँसुरिया। छूने नहिं दूँगी कांभरिया, पिया माखन मिश्री गागरिया। चाहे ज़ोर लगा लो जितना, नहीं पीछे हटूँगी कृष्णा- रंग दूँगी तोरी नगरिया, मनमोहन मधुवन की डगरिया॥ महातम मिश्र,...

  • चतुष्पदी

    चतुष्पदी

    भूल शहादत जाए वीरों की दो दिन में, घोटालों पर नियमित चर्चाएँ होती हैं। आँख दबाना न्यूज सुनो जी ब्रेकिंग हुई, ध्यान कहाँ जाता जब बेचारी रोती हैं। — पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’  

  • रात बीती

    रात बीती

    रात बीती अब सवेरा हो रहा। नींद टूटी है अंधेरा खो रहा।। रात के तारे उजाले में छिपे। तू अभी सपनों की चाह सो रहा।। तू रहा सोया तो जाने क्या हो। तू अभी चूका तो...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    हे जगत के अन्नदाता भूख को भर दीजिये। हों सभी के शिर सु-छाया संग यह वर दीजिये। उन्नति के पथ डगर पिछड़े शहर का भी नाम हो- टप टपकती छत जहाँ उस गाँव को दर दीजिये॥-1...

  • होली के दोहे

    होली के दोहे

    रंगों के सँग खेलती, एक नवल- सी आस। मन में पलने लग गया, फिर नेहिल विश्वास।। लगे गुलाबी ठंड पर, आतपमय जज़्बात। प्रिये-मिलन के काल में, यादें सारी रात।। कुंजन, क्यारिन खेलता, मोहक रूप बसंत। अनुरागी...