Category : मुक्तक/दोहा

  • कुछ मुक्तक

    कुछ मुक्तक

    सहरा ए दिल से नदी कोई निकल न जाये न मिलाओ तुम निगाहें कहीं दिल मचल न जाये इतना न नाज दिखा इस इंतजार को तू तिरे आने तक कहीं मौसम बदल न जाये मिरी ग़जलों...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    ज़िन्दगी को वो चौसर की विसात बना बैठे उनकी चाल से जिंदगी को खैरात बना बैठे दस्तूर-ए-ज़िन्दगी की रवायत यही है शायद बनके प्यादा खुद को राजा बेताज बना बैठे । … Gunjan Agarwal


  • मुक्तक

    मुक्तक

    जिन्दगी बहुत हसीन है हँस- हँस के जीना यारों । दुनिया बहुत लम्बी-चौड़ी है सबको हँसाना यारों। अपने तरफ से सबका पूर्ण सहयोग करना यारों। किसी को दर्द की दुनिया मे पहुचाना नही यारों । ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    पर्यावरण का सुरक्षा करना हमारा धर्म है वृक्ष और पौधा लगाना यही हमारा कर्म है इससे वायुमंडल का संतुलन हो जाता है पृथ्वी को हरा भरा करना यही सत्कर्म है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ दुनिया वालों से हमारा एक...

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    दुल्हन सी सजी धरती को विधवा लिवास न पहनाओ वृक्ष इसके हैं प्यारे बच्चे इसे बांझ मत बनाओ माना कि धरती माँ में सहनशक्ति अनंत है सारा सब्र टूट जाये इसे इतना भी मत सताओ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ पूरे...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    जुड़े वर्णो से वर्ण , वर्णन कुछ तो करेंगे चली कलम स्वछंद. छन्द कुछ तो बनेंगे उलझे रहो तुम व्याकरण के उलझनों में मेरे मुखरित भाव स्वतंत्र. कुछ तो कहेंगे **************************** ©Copyright Kiran singh

  • मुक्तक

    मुक्तक

    मेरा पहला मुक्तक भाजपा के महानायक आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में सादर समर्पित [1] हे राजनीति के युग पुरुष , तेरा लख-लख अभिनंदन तेरी अमोघ गौरव गाथा का , कण-कण करता वंदन...


  • कुछ मुक्तक

    कुछ मुक्तक

    (1) जीवन की आड़ी तिरछी राहों पर आगे बढ़ता चल बाधा से घबराना कैसा सोच समझ पग धरता चल जन काँटों को चुन एक तरफ कर समतल कर दे राहों को दुःखी हृदय में प्रेम जगा...