Category : मुक्तक/दोहा

  • रामाँ रहीम बन के…

    रामाँ रहीम बन के…

    झाँका है दूर नभ से रामाँ रहीम बन के निकला है आज चन्दा फिर सज के और संवर के भूलो गमो के नगमे जी भरके मुस्कुराओ कर लो इबादते तुम अरमान पूरे मन के ।  

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    भ्रांतियों में जी रहा है आदमी जहर को यूँ पी रहा है आदमी फंस गया पाखंडियों के जाल में झूठ का क़ैदी रहा है आदमी   सत्य का पालक यहाँ कोई नहीं न्याय संरक्षक रहा कोई...



  • मुक्तक

    मुक्तक

    सुहाना नेह का रिश्ता , इसे दिल में बसा लूँ मैं तुम्हारा आसरा पाकर, जहाँ सारा भुला दूँ मैं तुम्हीं हो आरजू मेरी , तुम्हीं मेरी इबादत हो मिलन के मिल सके दो पल, उन्हें कविता...


  • दोहा

    दोहा

    ज्ञानी से ज्ञानी मिले,करे ज्ञान की बात। ज्ञान और अज्ञान में, होगी लातम लात।। – अमन चाँदपुरी

  • दोहा

    दोहा

    दोहा– खाली हांड़ी देख कर, बालक हुआ उदास। फिर भी माँ से कह रहा, भूख लगी ना प्यास।। — अमन चाँदपुरी

  • एक मुक्तक

    एक मुक्तक

    अब दर्द भी छुपाने पड़ते हैं कहकहे झूठे लगाने पड़ते हैं दिखावो का दौर है आजकल अपना होने में ज़माने लगते हैं नीलिमा शर्मा (निविया)