Category : मुक्तक/दोहा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    आंधी मगरूर दरख्तों को पटक जायेगी, सिर्फ वो ही शाख बचेगी जो लचक जायेगी, आसमां छूने का हो जायेगा खुद अंदाजा, जब जमीं पाँव के नीचे से सरक जायेगी — भरत मल्होत्रा

  • मुक्तक

    मुक्तक

    झूठ की गर्दन कट जाये शब्दों का ऐसा वार लिखें तलवार से भी तेज चले हम कलम की ऐसी धार लिखें मतलब,लालच उनके दिल में जो भी सत्ता के भूखे है सच की जीत में जीत...

  • दोहे -हिन्दी दिवस पर

    दोहे -हिन्दी दिवस पर

        हिंदी है रूपवती किन्तु, गरीब की कन्या है शहर में घृणा पात्र, गाँव में प्यारी है | ***** बाबुओं की दो माता, अंग्रेज़ी और हिन्दी खुद की माँ अंग्रेजी, सौतेली है हिन्दी | *****...

  • जय हिन्द जय हिन्दी

    जय हिन्द जय हिन्दी

    चले गये अंग्रेज पर छोड़ गये अपनी पहचान अंग्रेज़ी बोलने में कुछ लोग यहाँ समझते शान अंग्रेज़ी को यूं आगे बढ़ता देख हमारी हिन्दी अपने ही देश में बेचारी सहती है अपनी अपमान *************************** माँ की...

  • दोहों में बेटी

    दोहों में बेटी

    अब की बार बहार में , आया खूब निखार। है बेटी के जन्म से, महक गया संसार । १ बिटिया ऐसी लाडली , जैसे महक गुलाब। उसकी बाल छवियों पर , झूमें माँ का प्यार। २...


  • हाइकु-दोहे

    हाइकु-दोहे

    (1) प्यासी धरती/ खग दुखित रोते/ बढ़ती भूख। मिटते प्राणी/ है चकित नाहर/ घटा रसूख॥ (2) गिरे सितारे/ घट गई रौनक/ नभ बेहाल। छाते बादल/ सुधाकर शंकित/ तम की चाल॥ (3) घिरा अँधेरा/ डर नहीं मनुज/...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अंदर बाहर आग लगी है घर चौबारे सुलग रहे ये हालात सुधारें कैसे कैसे कोई विलग रहे टुकड़ा-टुकड़ा टूटा भारत टूटी उसकी ताक़त भी जांत-धर्म के झगड़े में क्योंभाई-भाई अलग रहे पहले मुझको फूलों जैसा तेरा...

  • *****राजनीति पर कुछ दोहे*****

    *****राजनीति पर कुछ दोहे*****

    पल में मिलते हैं गले, पल में लातम लात। राजनीति के खेल में, हर पल होती घात।। लूट रहे है देश को,पहन शराफत खोल। खण्ड-खण्ड हो जायगा, भारत का भूगोल ।। सबके अपने रंग है,सबके अपने...