Category : मुक्तक/दोहा

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    धुँआ-धुँआ हो गयी जिंदगी अब तुम बिन कतरा कतरा बह गये सपने सब तुम बिन होते जो साथ बनते तुम मेरी ग़ज़ल गुंजन मेरे शब्द रूठे मुझसे न जाने कब तुम बिन । ****************************** मुमकिन नही...

  • राज मुक्तक सुधा

    राज मुक्तक सुधा

    [1] माँ के हाथों की रोटी बड़ी प्यारी लगती है, माँ की मुस्कुराहट भी फुलवारी लगती है/ उपवन का पत्ता-पत्ता गाता प्रेम का गीत, माँ तेरा आँचल ममता की अटारी लगती है/ [2] कोई धन को...

  • दोहे

    दोहे

    फिर आँगन में नाचती , बूंदों संग उमंग । विरही मन प्यासा रहा, पिया न मेरे संग ।। बदरा आज उदास है , बरसत हैं ये नैन । पिया आस में आज भी , लम्बी होती...

  • एक मुक्तक

    एक मुक्तक

    दर्द ऐ गम जो छुपा लिया होता होंठो पर ताला लगा लिया होता गुलज़ार होता अपना भी दामन खता ऐ इश्क जो ना किया होता । — गुंजन अग्रवाल

  • साथ-साथ

    साथ-साथ

    अब तुम्हारे साथ रहने को दिल करता है, साथ में रहकर हँसने को दिल करता है, जब दूर रहना था हम दोनों को यहां पर, तो हम एक दूसरे के साथ क्यों रहता है रमेश कुमार...


  • कुछ दोहे

    कुछ दोहे

      तुलसी ने मानस रचा, दिखी राम की पीर। बीजक की हर पंक्ति में, जीवित हुआ कबीर।1। — माँ के छोटे शब्द का, अर्थ बड़ा अनमोल। कौन चुका पाया भला, ममता का है मोल।2। — भक्ति,नीति...

  • चतुष्पदी

    चतुष्पदी

    माँ का दूध कलंकित कर , नारी पर शक्ति दिखाते हैं ऐसे नापाक नामर्द जगत में, कैसे मुख दिखलाते हैं पुरुषत्व कभी न शोषण करता, प्रेम का पाठ पढ़ाता है क्यारी-क्यारी सींच सींच कर, गुलशन रोज सजाता...

  • दोहा-मुक्तक

    दोहा-मुक्तक

    दोहा-मुक्तक मूरख जनता है नहीं, अब वो है चालाक, नेता जी की नियत को, वो लेती है झाँक।। जाकर के मतदान में, अपना देती वोट। बढ़ते भ्रष्टाचार पर, कर देती है चोट।। — अमन चाँदपुरी

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    ठंडी बयार मन को मेरे गुदगुदा गई झुलसे हुए बदन को थोड़ा सरसरा गई काली घटा को प्यार से दामन में समेटे हौले से इक फुहार मुझे थपथपा गई पंच तत्व में सूर्य रश्मि ने ऊर्जा...