Category : हाइकु/सेदोका

  • हाइकु

    हाइकु

    1 मिटती पीड़ा मिलते स्नेही-स्पर्श ओस उम्र सी । 2 ईर्षा वाग्दण्ड रिश्तो में डाले गांठ टूटे धागा सी 3 उलझा रिश्ता सुलझाये वागीश ऊन लच्छा सा 4 स्नेह की थापी बुझती वाड़वाग्नि मृतवत्सा की। 5...

  • मुस्कान स्मित

    मुस्कान स्मित

    ०१ मुस्कान तेरी, जीवन की नइया, है खेवइया। ०२ खिलखिलाना, तेरा मृदुल वाणी, मुस्कान मेरा। ०३ सदाबहार, बने रहे मुस्कान, मन हर्षित। ०४ आँखों में आशु, दिल में धड़कन, है हलचल। ०५ विखेरतें हैं, खुशबू चारों...

  • फागुन

    फागुन

    1 खड़का कुण्डा हुआ ठूंठ बासंती फागुन थापी । 2 बिंधे सौ तीर बिन पी , मीन साध्वी फागुन पीर । 3 बिखरी रोली तरु बाँछें खिलती फगुआ मस्ती। 4 शिकवा / सताया हेम विरही-भृंग पीड़ा...

  • मदनोत्सव

    मदनोत्सव

    1 षट रागिनी कुहू लगे मन पे कुसुमागम । 2. किंशुक- छाया वशीभूत अचला तृप्त मानव । 3 देख के बौर बौराये मत्त भौंरा गुनगुनाए । 4 पीली चुनरी धरा बनी दुल्हन हल्दी रस्म में। 5...

  • मेरे हाइकु

    मेरे हाइकु

    पीली सरसो लट चमके श्वेत बर्फ से ढकी ^^ रूपसी नारी सताई जाती जग सौंदर्य सजा ^^ बसंत ऋतु कोहरे में लिपटा बर्फ टुकड़ा ^^ जीवन माला सांस मनके चले तन नश्वर ^^ भीतर झाँको बंद...

  • हाइकु

    हाइकु

    चमका रवि खिला अमलतास थिरके पक्षी रवि प्रदीप तिमिर का प्रहरी तेजसमयी तपता रवि जले विटप तन गर्म ऋतु में निकल आया सूरज मुखी थाल रश्मि के साथ बीती रजनी प्रकट रश्मिरथ बिखरी रोली — शान्ति...

  • हाइकु -1

    हाइकु -1

    बिखरे नीड़ भस्म हुये सपने हृदय पीड़ घिरे बादल अंतर्मन सिसके हम घायल कुश की शैया व्यथित हुआ भीष्म मृत्यु लालसा ठिठके पाँव विरानापन देख औझल गाँव