हाइकु/सेदोका

चन्द हायकु

चन्द हायकु 1. चुप रहना कुछ मत कहना कर दिखाना। ———– 2. अकेला तू ही बदलेगा दुनिया शुरु तो कर। ———– 3. शिक्षा जरूरी जीवन-संग्राम में डिग्री नहीं। ———– 4. सब संभव कुछ न असंभव करके देख। ———- 5. प्रतिभा कभी मोहताज न रही परिवेश की। ———- 6. यथार्थ में है वास्तविक योग्यता ढोंग में […]

हाइकु/सेदोका

श्रृंगार धरती का !!!!

हरियाली ये श्रृंगार धरती का उजाड़ो मत ! …. हैं वरदान धरा में पेड़ पौधे बचा लो इन्हें ! … बो देना बीज धरा की गोद सूनी प्रकृति कहे ! …. खुद तपते शीतल छाँव देते हमें वृक्ष ये! … कड़वी नीम मीठी निम्बोली देती शीतल छाँव ! …. कुल्हाड़ी मार गिराया जो पेड़ को […]

हाइकु/सेदोका

मातृदिवस पर हाइकु

1 – स्वर्ग है कहीं माँ के ही चरणों में ढूँढो तो सही | 2 – माँ वंदनीय चौदह भुवन में अतुलनीय | 3 – माँ सरगम माँ प्रेम प्रतिभास माँ अहसास | 4 – घूमता चक्र माँ के ही इर्द -गिर्द हर रिश्ते का | 5 – मिला जिस को माँ का प्यार -दुलार […]

हाइकु/सेदोका

हाईकु

तुम बेवफा बने हृदय शूल वफा का सिला! हो गये जुदा देकर तुम दगा कुछ ना मिला! दु:खी मत हो मेरे टूटे हृदय वक्त दे भुला! दुआएं मेरी तुम रहो प्रसन्न मैं हूँ अकेला! बोझिल साँझ जर्जर हुआ तन मैं हूँ बेहाल!

हाइकु/सेदोका

-दस हाइकु-

1 – क्या -क्या जंजाल इक्कीसवीं सदी में सब बेहाल | 2 – सत्य कसैला मनमोहक झूठ बाजी ले लूट | 3- शब्दों की भीड़ बीमार कल्पनाएं अर्थ रहित | 4 – पीड़ा का मौन पिघलता है प्यार से समझे कौन | 5 – सपने बुने अलगनी में पड़ें सूखते रहे | 6 – बहरे […]

पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

हायकु

हायकु सृंखला-2 1-रक्त एक ही फिर भी तो लड़ते राम-रहीम। 2-घटी मर्यादा गरिमा विस्मित सी कद-पद की । 3- रंक से राजा पलटती जो बाजी राजा से रंक। 4- शूल जीवन नेक काम करें तो पथ्य में फूल । 5- जीवन-नैया चढ़ती-उतराती भव-सागर । [15/04, 9:39 AM]

पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

होली पर हाइकु

होली पर हाइकु 01ः- रंग होली का जब धोये कटुता सार्थक हो। 02ः- होली के रंग अपनत्व के साथ रंग न भंग। 03ः- गुलाबी रंग गालों पर मलते दाग जो पड़े। 04ः- मिल के बने लाल पीले नीले भी होली में रंग। 05ः- दूसरा कोई अपना सा लगे सच की होली। 06ः- हैवानों में भी […]

हाइकु/सेदोका

होली है होली !!

प्रेम फागुनी मन के उत्सव में भीगता रहे ! .. रंग गुलाल चले भंग के संग मचाते शोर ! .. प्रेम फागुनी मन के उत्सव में भीगता रहे ! .. धरा ने खेला अम्बर संग रंग मचा धमाल ! … होली के रंग अपनों के संग हैं कहे फागुन ! … होली के रंग पिचकारी […]

हाइकु/सेदोका

हाइकु

घात लगाए कुटिल पाकिस्तान बाज न आए ! आकार लघु गंभीरता समेटे होते हाइकु ! गर्भ में कली डरती क्या करती की भ्रूणहत्या ! चारदीवारी हुई असुरक्षित रिश्ते विक्षिप्त पहाड़ कर्ज मौत का आलिंगन धरतीपुत्र पिसी जिंदगी मर्यादा-अमर्यादा है अंतर्द्वन्द तने भृकुटि देख वहशियत बुलबुले सी अंजु गुप्ता

पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

कैसी ज़िन्दगी? (10 ताँका)

1. हाल बेहाल मन में है मलाल कैसी ज़िन्दगी? जहाँ धूप न छाँव न तो अपना गाँव! 2. ज़िन्दगी होती हरसिंगार फूल, रात खिलती सुबह झर जाती, ज़िन्दगी फूल होती!   3. बोझिल मन भीड़ भरा जंगल ज़िन्दगी गुम, है छटपटाहट सर्वत्र कोलाहल!   4.   दीवार गूँगी सारा भेद जानती, कैसे सुनाती? ज़िन्दगी है […]