Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    समान्त- अना, पदांत- जरुरी है, मापनी- 2122, 2122, 2222 हों कठिन राहें मगर चलना जरुरी है दूर हो मंजिल डगर दिखना जरुरी है बढ़ चलेंगे हर कदम अपने तरिके से हौसला हर हाल में रखना जरुरी...


  • गज़ल

    गज़ल

    सुनने के लिए है, ना सुनाने के लिए है, ये गज़ल फक्त उनको मनाने के लिए है, देखा जो चाँद को तो दिल को आसरा हुआ कोई हमें भी राह दिखाने के लिए है, इक बार...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वज़्न – 221 1222 221 1222 पिजरे से परिंदे को आज़ाद नहीं करते । कुछ लोग मुहब्बत को आबाद नहीं करते ।। फ़ितरत है पतंगों की शम्मा पे मचलने की । ऐसे जुनूं पे आलिम इमदाद...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इस दुनियां में इंसानों के क़िस्से बड़े निराले हैं ऊपर से तो दिखते उजले, पर अंदर से काले हैं जिन हाथों ने पाला-पोसा उनको ही डँस लेते हैं धरती मां ने दूध पिलाकर, नाग कई ये...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    वज़्न- 1222 1222 1222 1222, काफ़िया- आह, रदीफ़- हो जाए न जाने किस गली में कब सनम गुमराह हो जाए बहुत है राह में खुश्बू महक हमराह हो जाए दिवानों की अजब दुनियां बना लेते ठिकाने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      सीरत खराब उसकी जबाँ और भी खराब ऊपर से देखिये जी गुमाँ और भी ख़राब .. चलने लगीं हैं आँधियाँ बदलाव की यहाँ मौसम तो है खराब समाँ और भी खराब .. किस्मत भी खेलने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुमकिन पहरे तुमसे मिलने जाने में रोक सकोगे क्या ख़्वाबों में आने में सारे फ़न हैं  मुझमें उसको लगता है उलझी है वो दुनिया को समझाने में मैं लौटा तो छूट गयी मेरे पीछे एक उदासी...

  • गज़ल

    गज़ल

    तुम न होगे तो और क्या होगा । कोई मंज़िल न रास्ता होगा ।। दिन न निकलेगा बिन तेरे दिलबर। स्याह रातों का सिलसिला होगा।। ज़ीस्त तेरे ही नाम कर दी है। वो ही होगा कि...