Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    विधाता छंद, मापनी- 1222 1222 1222 1222…… ॐ जय माँ शारदे…….! उठा कर गिन, रहे टुकड़े, जिसे तुमने, गिराया है तुम्ही जिसमें, ललक तकते, रहे किसने, डराया है छिटककर अब, पड़ें है जो, नुकीले हो, गए...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बात शिकवे की’ करो तो वो’ खफ़ा होता है किन्तु उनका कहा’ पेंचीदा’ गिला होता है | आड़ होती गो’ की’ रक्षा, छिपा रहता मुखड़ा मारना पीटना हत्या, वो’ जफ़ा होता है | वो दुकाने खुली’...

  • ढलेगी जीत में ये हार इक दिन

    ढलेगी जीत में ये हार इक दिन

    ढलेगी जीत में ये हार इक दिन गिरेगी राह की दीवार इक दिन चलेगा नाम का सिक्का हमारा झुकेगा सामने संसार इक दिन मिटेगा नाम जग से नफ़रतों का रहेगा प्यार केवल प्यार इक दिन धरम...

  • गज़ल

    गज़ल

      मुकम्मल गर हमारी भी दुआ इस बार हो जाये तो मुमकिन है हमारी जिंदगी गुलज़ार हो जाए .. चलो अब तो करें मिल कर मुहब्बत का कोई वादा कहीं ऐसा न हो के आपसी तकरार...

  • गज़ल

    गज़ल

    न जाने क्या हुई हमसे खता है वो क्यूँकर आजतक हमसे खफा है .. भले ही हो गया हमसे जुदा पर ख्यालों में अभी तक रह रहा है .. समझ पाये नहीं जिसको अभी तक हमारी...



  • कांच के टुकड़े

    कांच के टुकड़े

    टूटे हुए टुकड़ों को काश संभाला होता आशियाँ को अपने यूँ न जलाया होता गैरों को अपना बनाने की हसरत में यूँ न अपनों पर बेरुखी का कहर ढाया होता ईमान पर चलने वाले भी दागदार...

  • बगाबत

    बगाबत

    बगाबत पे उतर आती है जिंदगी , कानून को परे रखकर खंजर की तरह । लहूलुहान हो जाते हैं रिश्ते भी आजकल, गैरों को अपना बनाने की जुस्तजू की तरह । आंखों में उतर आती है...

  • गीतिका

    गीतिका

    इतना न हमे याद आया करो हर जगह न यूं सताया करो रोज होती है लड़ाई हमसे प्यार फिर न जताया करो घड़ी दो घड़ी जहन से मेरे दूर कही चले जाया करो मचल उठती है...