Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • गज़ल

    गज़ल

    ख्वाबों की तरह बनता-बिखरता हुआ सा कुछ सीने में लग रहा है क्यों टूटा हुआ सा कुछ ============================ वही दूर तक फैले हुए तनहाई के साए ये रास्ता है जाना-पहचाना हुआ सा कुछ ============================ ता-उम्र जिसको...

  • गजल/ गीतिका

    गजल/ गीतिका

    अब कहां लोग प्यार करतें हैं । इश्क में बस शिकार करतें हैं।। पूरे अरमान करने को वो तो। रूप देखो हजार करतें है।। आँखों में अब नही होता पानी। बातें तो बेशुमार करतें हैं।। चांदनी...

  • गज़ल

    गज़ल

    खुदा सबकी कब यूँ इमदाद क्यूँ नहीं करते ये कौन लोग है फरियाद क्यूँ नही करते. अभी नज़र न करे ये सभी रूदाद क्यूँ नही करते सुबह जब नींद जागे तो सम्वाद क्यूँ नही करते. खुदा...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बादल का अंदाज जुदा सा लगता है । सावन सारा सूखा सूखा लगता है ।। जाने क्यूँ मरते हैं उस पर दीवाने । इश्क़ उसे जब खेल तमाशा लगता है ।। काहकशाँ से टूटा जो इक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तक़दीर में केवल खुशियां कब आती हैं सच्चे प्यार में परेशानियां सब आती हैं छुपा ना रहे जब राज़ कोई दरमियां मोहब्बत में गहराइयां तब आती हैं सोचा भूल गया तुझसे बिछड़के लेकिन तेरे संग गुजारी...

  • करीब आ जाओ

    करीब आ जाओ

    गर जानना है मुझको करीब आ जाओ पहचानना है मुझको करीब आ जाओ, दुआ सलाम से फितरत नहीं जानी जाती दिल्लगी है तो फिर हाल ए दिल सुना जाओ, किनारे बैठ कर दरिया की गहराई नहीं...

  • गज़ल

    गज़ल

    दिन चेहरे को लिखूँ, जुल्फों को मैं रात लिखूँ तेरी आँखों से बहे अश्कों को बरसात लिखूँ रंग कागज़ का भी हो जाएगा गुलाबी कुछ मैं जिस पे अपनी पहली-पहली मुलाकात लिखूँ देखकर अपनी ही आँखों...

  • भारत की जीत

    भारत की जीत

    ये जीत नहीं कुछ लोगों की यह भारत की जीत है। कुकर्मों के कुठाराघात पर निष्काम कर्म की जीत है। लोभी लंपट और कपटी सिमट गए हैं अब गुहा में प्रतिघात पर अहंकार के एकीकरण की...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इश्क का  गर  सफीर  हो  जाता । नाम  फिर   मुल्कगीर  हो  जाता। जाने  कब का  अमीर हो  जाता। बस  ज़रा   बे ज़मीर  हो   जाता। बात मन  की  अगर  सुनी  होती, कम न रहता  कसीर  हो  जाता।...