Category : ग़ज़ल/गीतिका


  • “गज़ल/गीतिका”

    “गज़ल/गीतिका”

    रोज मनाते बैठ दिवाली बचपन लाड़ दुलार सखी नन्हें हाथों रंग की प्याली दीया जले कतार सखी नीले पीले लाल बसंती हर फूल खिले अपनी डाली संग खेलना संग खुशाली नाहीं कोई दरार सखी॥   चौक...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    जगमग अवली दीप हमारे सुंदर साख प्रदीप हमारे अनुपम पुंज प्रकाश पर्व यह रोशन चित नवदीप हमारे।। चाँद छुपा है रात दिवाली आभा अति प्रियदीप हमारे।। शोर शराबा किलक पटाखे हरषित प्रिय कुलदीप हमारे।। रंगोली घर...




  • जो बिताया फ़जूल में…

    जो बिताया फ़जूल में…

    जो बिताया फ़जूल में हिसाब माँगेगा वक्त हर हाल एक दिन जवाब माँगेगा इस जमानें को सिर्फ ख़ार ही दिये जिसने क्या भला वो जहान से गुलाब माँगेगा आप जिस दिन नकाब को उतार कर निकले...

  • तरही ग़ज़ल

    तरही ग़ज़ल

    मैंने गीत गाये हैं कई, तारों को दिल के छेड़कर मुझे स्वरों का तो पता नहीं, जो गीत मैं अपने भी गा सकूँ तन्हा-तन्हा  हो रही है ये मेरी ज़िंदगी, कोई साथ भी न मेरे चल...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये तमाम उम्र गुजारी है तेरे ख़यालों में बची है जितनी गुज़र जाएगी सवालों में । ग़म ए तन्हाई के अंधेरो ने छुपाया है मुझे ये राज है के हम मिलते नहीँ उजालों में । एक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिक्र तेरी सुन्दरता और फिर बयाँ उनका कौन कौन है सच्चा दोस्त इम्तिहाँ उनका | वज्मे शाह में मय का है अकीद बंदोवस्त राजदां था’ जो तेरा, अब है’ राज़दां उनका | ये धरा है उनकी,...