Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • ख़ामोशी

    ख़ामोशी

    जरा सोचना  तन्हाई में,खामोशी क्या  कहती है। मजलूम के होंठों  में दबी  चुप्पी  क्या  कहती है। अपने सपनों की खातिर, तुम जो  छोड आये हो, वो नदियाँ , वो गाँव की पगडण्डी क्या कहती है। आज...

  • फ़ानी दुनियां

    फ़ानी दुनियां

    फिर वही हम वही तनहाईयां है फिर वही आलम ए ख़ामोशियां हैं तीरगी फिर वही शब ए ग़म की गुमशुदा हो रही परछाईयां हैं सांसों के साथ चल रही छुपके आहों की चीखती सरगोशियां हैं कोई...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तुझसे रुबरु होने को दिल करता है। दिल मेरा बच्चे के मानिंद मचलता है। रूप ऐसा तेरा कि ना कभी दिखाई दिया। झुरमुठों की एक आस पर ये चलता है। तेरी ज्योति से जगमग ये कायनात...

  • गज़ल

    गज़ल

    दो दिन सुकून से जीना मुहाल करते हैं ये दुनिया वाले भी कितने सवाल करते हैं ========================== न रह सकेंगे खुश वो लोग किसी कीमत पर जो दूसरे की खुशी पर मलाल करते हैं ========================== हम...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दुनिया सभी देखी यहाँ, इसके सिवा देखा कहाँ ए जिंदगी जग में कटी, जग छोड़ अब जाना कहाँ ? अज्ञान है इंसान मणि को मानते भगवान वह कंकड़ नगीना को पहन भगवान को पाया कहाँ ?...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हुआ है प्यार तो वे चश्म से इकरार करते है छुपाकर प्यार दिल में, क्यों जुबां से वार करते है ? हमेशा एक ही वादा किया करते कुटिल नेता भली भोली प्रजा हर बात पर इतवार...

  • गज़ल

    गज़ल

    यूँ तो सब अपने यहां थे कोई बेगाना नहीं दौर-ए-गर्दिश में किसी ने मुझको पहचाना नहीं थी खबर हमको बहुत दुश्वारियां हैं राहों में लाख समझाया मगर दिल ने कहा माना नहीं सुन रहे हो जिसको...

  • नया महाभारत

    नया महाभारत

    अर्जुन और शिखंडी में मन, भेद नहीं कर पाता है राजनीति के हाट में बगुला, भगत बना मुसकाता है शब्द बाण के आघातों से, भीष्म तड़पते शैय्या पर चक्रव्यूह के द्वार के बाहर, अभिमन्यु मर जाता...

  • नम हवा फुलवारियों की

    नम हवा फुलवारियों की

    नम हवा फुलवारियों की खूब भाती है मुझे। नित्य नव भावों भरी कविता सुनाती है मुझे। रात के आगोश में सुख स्वप्न गाते लोरियाँ प्रात प्यारी शबनमी, निस दिन जगाती है मुझे। लाल सूरज जब समंदर...