Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बिना बात ही डर ग‌ए क्यूं? टूट ग‌ए, बिखर गए क्यूं? मंज़िल तक तो पंहुच जाते, रस्ते- रस्ते ठहर ग‌ऐ क्यूं? सज़ा मिले बच्चों को ऐसा, ज़ुर्म जहां में कर गए क्यूं? ज़िंदा रहते हिम्मत थी...

  • खून उबलता है

    खून उबलता है

    लावा  जैसे ग़र  ये   दर्द   पिघलता   हैपलकों से कब इतना बोझ सँभलता है तब-तब  सब्र  टूटने  पर  मजबूर  हुआ जब-जब पानी सर के पार निकलता है सर्दी गर्मी बारिश लाख सितम  कर  लें मौसम है मौसम ...

  • गज़ल

    गज़ल

    दूर होकर भी मेरे दिल के बेहद पास लगती है हज़ारों सूरतों में वो सूरत-ए-खास लगती हैrr मिल जाए तो जीने का मज़ा आ जाए मुझको भी बिना उसके मुझे ये ज़िंदगी वनवास लगती है वो...



  • मुझे पीपल बुलाता है

    मुझे पीपल बुलाता है

    प्रखरतम धूप बन राहों में, जब सूरज सताता है। कहीं से दे मुझे आवाज़, तब पीपल बुलाता है। ये न्यायाधीश मेरे गाँव का, अपनी अदालत में सभी दंगे फ़सादों का, पलों में हल सुझाता है। कुमारी...



  • ग़ज़ल – आजकल

    ग़ज़ल – आजकल

    काट सका जो यूपी फीता। दिल्ली समझो वो ही जीता। यूपी का रण जो भी हारा, घट रहता है उसका रीता। कृष्णउन्हेफिर जितवाते ही, जनता की गर पढ़ते गीता। वोट हमारे पाकर जीते, रोज़ रटें अम्बानी...

  • भागती है ज़िन्दगी

    भागती है ज़िन्दगी

    रात भर पहियों पे सरपट भागती है ज़िन्दगी। अगली सुबह दिन चढे फिर जागती है ज़िन्दगी।। दर्द की एक रात लम्बी लगती ज़िन्दगी से भी, हँसती रहे गर तो बस एक रात सी है ज़िन्दगी। जिस्म...