Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    बह्र- 2122 2122 2122 2, काफ़िया- अर, रदीफ़- दिया मैंने क्या लिखा क्योंकर लिखा क्या भर दिया मैंने कुछ समझ आया नहीं क्या डर दिया मैंने आज भी लेकर कलम कुछ सोचता हूँ मैं वो खड़ी...

  • हसरत न पालिये

    हसरत न पालिये

    जितना हो सके हाँ दूर ही से टालिये। इस बेजुबान दिल में हसरत न पालिये।। बैठा के उसको सामने करते रहे हिसाब, दिल में छुपाएं कितनी कितनी निकालिये। किराए की सांसें लिए बैठे हैं आप हम,...

  • ग़ज़ल – मोहब्बत

    ग़ज़ल – मोहब्बत

    फूल सी ज़िन्दगानी हुई, जब मोहब्बत सुहानी हुई। जिन्दगी ठहरी ठहरी सि थी आप आए रवानी हुई । आइना नाज़ करने लगा आपकी मेहरबानी हुई। हम सनम के लिए मिट गए ये खबर क्या पुरानी हुई??...

  • उम्रभर

    उम्रभर

    उनकी सादगी की मशाल,जलती रहेगी उम्रभर, खुशी बस इतनी मुझे रोशन रखेगी उम्रभर। वो इतना निष्ठुर नहीं था,फिर क्या बात हुई, उनके इसी सोच की,सोच रहेगी उम्रभर। छोटी सी भूल की इतनी बड़ी सजा है क्या,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये जिंदगी तो’ हो गयी’ दूभर कहे बग़ैर आता सदा वही बुरा’ अवसर कहे बग़ैर | बलमा नहीं गया कभी’ बाहर कहे बग़ैर आता कभी नहीं यहाँ’ जाकर कहे बग़ैर | है धर्म कर्म शील सभी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हाथ में वही अंगूरी सुरा,पियाला है रहनुमा का’ मन काला, वस्त्र पर उजाला है | छीन ली गई है आजीविका, दिवाला है ढूंढ़ते रहे हैं सब, स्रोत को खँगाला है | आसमान पर जुगनू, चाँद सूर्य...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अक्सीर दवा भी अभी’ नाकाम बहुत है बेहोश मुझे करने’ मय-ए-जाम बहुत है | वादा किया’ देंगे सभी’ को घर, नहीं’ आशा टूटी है’ कुटी पर मुझे’ आराम बहुत है | प्रासाद विशाल और सुभीता सभी’...

  • (तरही ) ग़ज़ल

    (तरही ) ग़ज़ल

    कभी दुख कभी सुख, दुआ चाहता हूँ इनायत तेरी आजमा चाहता हूँ वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ तेरे इश्क की इम्तिहा चाहता हूँ जो भी कोशिशे की हुई सब विफल अब हूँ बेघर मैं अब...

  • गज़ल

    गज़ल

    तू मेरे दिल, मेरी जां, मेरे ईमान में है हमसा आशिक न तेरा कोई जहान में है दिखाई देता है हर शख्स में तेरा ही अक्स मिलूँ किसी से भी बस तू ही ध्यान में है...

  • “अपने मन की”

    “अपने मन की”

    शुरू करो कुछ अपने मन की कब तक करोगे सबके मन की, लोगों को खुश करना छोड़ो कब तक सुनोगे बेसर पर की, अपनी खिचड़ी पका रहे सब कब तक भरोगे मटकी जल की, उठो लड़ो...