Category : ग़ज़ल/गीतिका


  • हाल -ए -दिल

    हाल -ए -दिल

    गजल हाल-ए -दिल उनको आज सुनाया जाये जख्म दिल का उनको फिर से दिखाया जाये अत़्फ की चाह मुझे है उनसे अब तक तो इसलिए अश्क बहे हुए दिखाया जाये धड़कने नग़्म विरह के अब गाती...

  • बहरी सरकार

    बहरी सरकार

    गजल आज बहरी हो गयी सरकार है इसलिए हर शख्स अब लाचार है रोज धरती पुत्र मरते जब यहाँ तब किसां मांगे सभी अधिकार है रेप चलते -फिरते होते है यहाँ लड़कियाँ अब हो गयी लाचार...

  • गज़ल

    गज़ल

    दर्द तेरे दिल में जगा सकता हूँ पर रहने दे, तुझको दीवाना बना सकता हूँ पर रहने दे, नामुमकिन नहीं है कुछ भी दीवानों के लिए, साबित करके दिखा सकता हूँ पर रहने दे, अपनी गज़लों...

  • बादल 

    बादल 

    आँख मिचौली करते बादल हमको कितना छलते बादल .. कभी उमड़ते कभी घुमड़ते लेकिन नहीं बरसते बादल .. चालीस पर अटका है पारा किन्तु नहीं पिघलते बादल .. सूखे गाँव गली चौबारे पल भर नहीं ठहरते...

  • गीतिका

    गीतिका

    शायद कोई राज़ छिपाया लगता है  चेहरे के ऊपर इक चेहरा लगता है  .. प्यार वफ़ा कसमें रस्में वह क्या जानें  जिसको जीवन खेल तमाशा लगता है  .. वक्त के हाथों की हम सब हैं कठपुतली...

  • सफेद पोशाक

    सफेद पोशाक

    सफेद पोशाक में, काला दिमाग रखता है वो। सेवक बनकर सेवा का लाभ उठाता है वो।।   अजीब तरह का हुनर रखता है वो। झुठ को सच, सच को झुठ कहता है वो।।   उसके बातो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सियासत का बाज़ार अब गर्म हो रहा है। चैन मेरे वतन का देखो कहीं खो रहा है। मजहब,जाति से क्यूं तोलते इन्सान को; कैसी मानवता का यह बीज बो रहा है। सर्वोपरि तो मातृभूमि होती है...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    देख रहा हूँ आज तुझे मैं अपने उन निगाहों में छोड़ गए तुम अंगुली को छिछले मन प्रवाहों में याद करो न थी कोई खींचातानी मयखानों की थी न कोई वला गिला नाहीं शिकन परवाहों में॥...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    आप की आज छवि देखता रह गया उन निगाहों में हवि फेंकता रह गया जो दिखा देखने की न आदत रही फिर फिरा के नयन पोछता रह गया॥ ले उड़ी शौक रंगत नयी रोशनी उस दिशा...