Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • मेरा दोस्त

    मेरा दोस्त

    मय्यत सजी थी उसकी सब लोग रो रहे थे अश्कों से अपनी उसके कफ़न को धो रहे थे वह दोस्त था मेरा हमवतन हमनिवाला दिल रो रहा था मेरा लब मुस्काये जा रहे थे मुस्कान देख...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जीस्त के पाँव यूँ जो ठहरते नहीं चलने से आबले ये मुकरते नहीं बेवजह साथ यूँ छोड़ तुमने दिया बिन ख़िज़ां के तो पत्ते भी झरते नहीं हर कहीं है मिलावट नमक की, तभी आजकल ज़ख़्म...

  • “गजल/गीतिका”

    “गजल/गीतिका”

    मापनी-122 122 122 12, काफिया-आया, रदीफ़- सनम…….. तुझे प्यार करना न आया सनम तुने दिल खिलौना बनाया सनम तुझे क्यूँ न जाने सुहाई पलक नयनों ने नयना मिलाया सनम॥ वफा बेवफा की अलग है व्यथा बताओ...

  • गज़ल

    गज़ल

    जलूँगा कब तलक तनहा मैं शरारों की तरह, कभी उतरो मेरे आँगन में सितारों की तरह, मैं एकटक तुझे देखा करूँ, देखा ही करूँ, चाँदनी रात के पुरनूर नज़ारों की तरह, पास रह के भी मिलना...

  • गजल…..

    गजल…..

      तुम्हें प्यार ऐसे सजन कर रहीं हूँ । तेरे नाम का ही भजन कर रही हूँ । सताओ न ऐसे चले अब तो आओ । हरिक साँस अपनी हवन कर रही हूँ । तुम्हें याद...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुझको सच कहने की बीमारी है इसलिए तो ये संगबारी है अपने हिस्से में मह्ज़ ख़्वाब हैं,बस! नींद भी, रात भी तुम्हारी है एक अरसे की बेक़रारी पर वस्ल का एक पल ही भारी है चीरती...

  • हर आदमी

    हर आदमी

    हो गया क्‍यों अजनबी हर आदमी. सो गया क्‍यों मजहबी हर आदमी. वह पढ़ा है वह गुना है देश में, नहीं’ बना क्यों मकतबी हर आदमी. खूब धन दौलत कमा के बावला, बन गया क्‍यों मतलबी...