Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये न सोचो कि हम पराए हैं तेरी खातिर जमी पे आए हैं। एक पल के लिए करीब तो आ तेरी खातिर वफा के साए ह़ै। छेड़ कर तार यू़ं मेंरे दिल के दर्द इस दिल...

  • उम्मीदें

    उम्मीदें

    2212 2212 2212 बैसाखियों पर चलती उम्मीदें मेरी अब नफरतों पर पलती उम्मीदें मेरी न मिला शजर, न मिली कली कोई कभी बनकर परिंदा उड़ती उम्मीदें मेरी शब रो रही महताब के आगोश में तारों के...

  • ग़ज़ल 2

    ग़ज़ल 2

    दिल से दिल की लगी छुपाने के लिए ज़ख़्म ए दिल छुप छुप नहीँ धोता कोई । ख्वाब ने नींद को खुलने न दिया शायद वर्ना इस तरह इस कदर नहीँ सोता कोई। जब तलक दिल...

  • ग़ज़ल 1

    ग़ज़ल 1

    सुन तेरे पास आने को जी चाहता है फिर गले से लगाने को जी चाहता है। मोहब्बत में हद से गुज़र जाएं आजा कि अब पार जाने को जी चाहता है। मैं आ कतरा  कतरा लिखूं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जब भी तुम चाहोगी प्रेयसि, तब ही मिलन हमारा होगा मिल बैठेंगे हम-तुम दोनों, दिलकश बहुत नजारा होगा दूर निकल जायें दुनिया से, केवल हम-तुम साथ रहेंगे जीवन में खुशबू महकेगी, जब तक साथ तुम्हारा होगा...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    छंद – दिग्पाल /मृदुगति (मापनी युक्त मात्रिक छंद )मापनी -221 2122 , 221 2122 मौसम बहुत सुहाना, मन को लुभा रहा है डाली झुकी लचककर, फल फूल छा रहा है मानों गरम हवा यह, गेसू सुखा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आँखों को भी मल मल देखा। तुमको खुद में हर पल देखा।। बारिश के मौसम में आकर। बादल सा मन पागल देखा।। जब – जब आयी तेरी बातें। रीता तन- मन घायल देखा।। वापस आओ रूठो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चारों और अंधेरा देखा दूर  बहुत सवेरा देखा! मज़बूरों का फुटपाथों पे, मैने  रेन- बसेरा देखा! बिखरे सब परिवार मिले, तेरा  देखा,  मेरा देखा! ससंद  के  गलियारों में, मक्कारों का डेरा देखा! ऐरे-गेरे जितने भी मिले,...