Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यहां हम डूबने को तैयार, बैठे हैं, वो साहिल पर लिये पतवार, बैठे हैं! हमारे दिल में क्या है कैसे कहें उनसे, जो अब तक लब पे ले इंकार, बैठे हैं! चलो सहरद है क्या तुमको...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अपने हालात देखे हंसी आ गई ये कहां से कहां ज़िंदगी आ गई एक नज़र उनकी आज हमपे पड़ी कि नज़र में हमारी नमी आ गई दिल रोता रहा मन के वीराने में क्या मोहब्बत में...

  • गज़ल

    गज़ल

    कभी हम फूल होते हैं, कभी हम खार होते हैं कभी लाठी बुढ़ापे की, कभी तलवार होते हैं ============================ आईने की तरह सच बोलते हैं हम हमेशा ही जो जैसे देखता है वैसे ही दीदार होते...

  • गज़ल

    गज़ल

    लोग कहते हैं बहुत मगरूर होता जा रहा हूँ, जैसे-जैसे थोड़ा मैं मशहूर होता जा रहा हूँ, ============================ वक्त ने मुझको सिखा दी है परख इंसान की, मतलबी लोगों से बस अब दूर होता जा रहा...

  • गज़ल

    गज़ल

    वो खत के पुर्जे उडा रहा था हवाओ का रुख दिखा रहा था बन लत ये नशा बढा रहा था सदाओं का हस्र दिखा रहा था मिला जो अपने हिसाब मन जो बफाओ का रुख दिखा...

  • गीतिका

    गीतिका

    सूरज छिपा तो जब अँधेरा भी बढ़ाता आ गया आभास होते ही लगा रोशन जमाना आ गया जीवन सदा बीता लगा चाहत निशाना हो बना अब कर रंज मन में लिया सा जो सुनाना आ गया...

  • “गीतिका/गज़ल”

    “गीतिका/गज़ल”

    बैठिए सर बैठिए अब गुनगुनाना सीख ले हो सके तो एक सुर में स्वर मिलाना सीख ले कह रही बिखरी पराली हो सके तो मत जला मैं भली खलिहान में छप्पर बनाना सीख ले मानती हूँ...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तुम नहीं सुनते कहानी मेरी हो रही बंजर जवानी मेरी | क्या कहे तुमको जबानी मेरी खत्म अब सब वो रवानी मेरी | धीरे’ धीरे बह गया पानी सब रह गयी केवल निशानी मेरी | क्या...