Category : ग़ज़ल/गीतिका



  • मुझे पीपल बुलाता है

    मुझे पीपल बुलाता है

    प्रखरतम धूप बन राहों में, जब सूरज सताता है। कहीं से दे मुझे आवाज़, तब पीपल बुलाता है। ये न्यायाधीश मेरे गाँव का, अपनी अदालत में सभी दंगे फ़सादों का, पलों में हल सुझाता है। कुमारी...



  • ग़ज़ल – आजकल

    ग़ज़ल – आजकल

    काट सका जो यूपी फीता। दिल्ली समझो वो ही जीता। यूपी का रण जो भी हारा, घट रहता है उसका रीता। कृष्णउन्हेफिर जितवाते ही, जनता की गर पढ़ते गीता। वोट हमारे पाकर जीते, रोज़ रटें अम्बानी...

  • भागती है ज़िन्दगी

    भागती है ज़िन्दगी

    रात भर पहियों पे सरपट भागती है ज़िन्दगी। अगली सुबह दिन चढे फिर जागती है ज़िन्दगी।। दर्द की एक रात लम्बी लगती ज़िन्दगी से भी, हँसती रहे गर तो बस एक रात सी है ज़िन्दगी। जिस्म...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    शम्मा की तरह परवाना जलता रहेगा। ताक मे बैठकर वो आहे भरता रहेगा। नही आमंत्रण है उसे करीब आने का। दूर से देखो दीदार अब करता रहेगा।। जमीं की तिश्नगी पुकारती जोर शोर से। बादल बरसने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अब दिल में कोई और बसाया न जायेगा , क़ल्बों जिगर से अक्स मिटाया न जायेगा ! चाहेंगे जिस्म-ओ-जॉ की तरह उम्र भर मगर , है इश्क़ आपसे ये जताया न जायेगा ! आँखों में अश्क...

  • चाह पाने की

    चाह पाने की

    चाह पाने की ख्याली जाएगी अब पली आशा निकाली जाएगी हो न पूरे स्वप्न सबके यहाँ बिन मनी सारी दिवाली जाएगी नोट अपने ही न मिलते बैंक से ब्याह निपटाने दलाली जाएगी दूसरे की रौनकें है...