Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • “ग़ज़ल/गीतिका”

    “ग़ज़ल/गीतिका”

    काफ़िया- आरों, रदीफ़- पर जी करता है लिख डालूँ कुछ नए बंद बीमारों पर जिसने जीवन दिया पिता बन उनके प्रतिउपकारों पर अपना पूरा जीवन देकर बदले में इक दिन पाया पिता दिवस पर लाख बधाई...


  • गज़ल

    गज़ल

    गज़ल १२२ १२२ १२२ १२२ खिलाफत लगी यूँ कि उलझा रही है गुलो में सियासत घुली ज़ा रही है. सियासत लियाकत कही भा रही है सियासत में नफरत उकसा रही है. लगी जिन्दगी रोष सी ज़ा...

  • गज़ल

    गज़ल

    दिखाई दिए यूँ कि बेख़ुद किया 🌀वज़्न–122 122 122 12 बढाओ न तुम इतनी भी दूरियाँ कि आने लगे  याद में  सिसकियाँ.   रहो दूर चाहत लिखे चिट्ठियाँ हुई जो कमी माफ गलतियाँ. उदासी भरी मोसमी...


  • गज़ल

    गज़ल

    गम छुपा कर सदा मुस्कुराते रहे | प्रीत की रीत हँस कर निभाते रहे | ना उमीदी का दामन न थामा कभी – राह काँटो में अपनी बनाते रहे | आज़माना गलत बात है प्यार में...

  • जज्बात

    जज्बात

    जज्बातों में भीगा हुआ कुछ तन्हा सा मुकाम था कुछ लफ्ज थे उलझे हुए कुछ तन्हाई का पैगाम था समझाया था दिल ने मेरे छोड़ दे उम्मीद किसी से न माना था ये दिल मेरा गहराई...

  • ये सच अगर होता

    ये सच अगर होता

    ये सच अगर होता, की कुछ भी देखता नही।। पत्थर की आँखें धीरे से, वो पोंछता नही।। ज़ख्मों पे मरहम, दूर से रखता रहा है वो। कहता ज़रूर है, किसी से वास्ता नही।। उनसे मिले क्या,...

  • गज़ल

    गज़ल

    उसके जवाल पे कोई फिर शक नहीं रहा याद जिसे सच्चाई का सबक नहीं रहा ========================== हर वक्त छाया रहता है सन्नाटा सा यहां लगता है घर में अब कोई अहमक नहीं रहा ========================== इतने बड़े...

  • ग़ज़ल-2

    ग़ज़ल-2

    इन आंखों में माना समंदर छुपा है छुपेगी कहां दिल की ये बेकरारी । तू फिर सितम पे सितम आजमा ले के अब दर्द सहना है आदत हमारी। खुद से निकल तेरे दिल में रहे बस...