Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • गीतिका

    गीतिका

    मापनी -221 2122 221 2122 चाह बाँधों न हमें तुम ,कोयल हमें सुनाती । आज़ाद हैं हमें बस ,बातें यही लुभाती । पँछी कहाँ थमें हैं ,ये तो उड़ान भरते देखें न ज़ख्म इनको ,संघर्ष राह...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      कितना मुझको रुला गया कोई, याद उनकी दिला गया कोई। आज मुस्काये हम भी ख्वाबों में, दिल की बस्ती बसा गया कोई। सारे मंज़र ही ले उठे करवट, गांव से जब भी आ गया कोई।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गमगीन ये वातावरण है, इक तेरे जाने के बाद। आँखों में भी जागरण है, इक तेरे जाने के बाद। ले गए तुम साथ अपने आस भी, विश्वास भी, श्वास लेना भी कठिन है, इक तेरे जाने के बाद। गीत सब...

  • अक्सर मार देते हैं

    अक्सर मार देते हैं

    लड़कपन को भी, जो दिल में है अक्सर मार देते हैं मेरे ख़्वाबों को सच्चाई के मंज़र मार देते हैं वफायें अपनी राह-ए-इश्क़ पे जब भी रखी हमने हिक़ारत से ज़माने वाले ठोकर मार देते हैं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुहब्बत से हमें जबसे मुहब्बत हो गई है. तभी से नफरतों से और नफरत हो गई है. “अगर सच कह नहीं पाते तो कहिये झूठ भी मत” बस इतनी बात बोली थी, अदावत हो गई है....

  • अच्छा लगता है/गज़ल/

    अच्छा लगता है/गज़ल/

    नित्य नवेली भोर, टहलना अच्छा लगता है चिड़ियों सँग, चहुं ओर, चहकना अच्छा लगता है जब बहार हो, रस फुहार हो, वन-बागों के बीच मुस्काती कलियों से मिलना, अच्छा लगता है गोद प्रकृति की, हरी वादियाँ,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      बेबसी, आह, खयालों में तुम्हें ढूंढेंगे प्यार के टूटे हुये वादों में तुम्हें ढूंढेंगे । प्यार की राह में गर हाथ कभी छूटा तो फूल खुशबू और बहारों में तुम्हें ढूंढेंगे । जब कभी भीड़...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सबके मन की गांठें खोले साल नया बिखरे रिश्तों को फिर जोड़े साल नया भूखे को दे रोटी, निर्धन को धन दे सबकी खाली झोली भर दे साल नया ग़म से आहत दिल डूबा है आशा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      दीन दुनिया ईमान है कोई बाखुदा अहले जान है कोई । चाहतों का दीया न बुझ जाए आज आया तूफ़ान  है कोई । जख्म पे जख्म दे रहा मुझको इस तरह कद्रदान है कोई ।...