Category : ग़ज़ल/गीतिका


  • ग़ज़ल-  ****चाह तुम्हारी****

    ग़ज़ल- ****चाह तुम्हारी****

    मुझको कितनी चाह तुम्हारी। हर पल देखूँ राह तुम्हारी।। मन करता है गीत सुनाऊँ। और सुनूँ मैं वाह तुम्हारी।। आहत दिल को कितनी राहत। देती एक निगाह तुम्हारी।। भूल न पाऊँ याद कभी भी. आह तुम्हारी...

  • गज़ल (बचपन यार अच्छा था)

    गज़ल (बचपन यार अच्छा था)

    गज़ल (बचपन यार अच्छा था) जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था बारीकी जमाने की, समझने में उम्र गुज़री भोले भाले चेहरे में सयानापन समाता था मिलते...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिसके लिए मैंने अपनी हस्ती को मिटा दिया आज उसी ने मुझे जख्म दे दे कर तड़पा दिया अपने हसीं लम्हों को उस पर निसार किया उन्हीं लम्हों को उसने जिंदगी से हटा दिया कर दिया...

  • किसकी खातिर

    किसकी खातिर

    देख कर वफायें उसकी, उसकी वफाओं पे मर गए मांग कर दुआएं मरने कि,ताबीर से मुकर गए| बेबस फिरती थी बेआस मेरी ये आँखें चेहरे दर चेहरे चाँद आया इक शाम गली में, इक चेहरे पे...

  • ग़ज़ल : ये कैसा शहर है…

    ग़ज़ल : ये कैसा शहर है…

    सन्नाटों में हैं चींखें ,लुट जाने का डर है बताओ तो मेरे दोस्तों ये कैसा शहर है चारों तरफ हाहाकार चारों तरफ चीत्कार है मेरे अधूरे सपनो का ये कैसा नगर है कभी खुशियाँ अपार तो...

  • मेरी माँ ने

    मेरी माँ ने

    मेरी माँ ने झूठ बोल के आंसू छिपा लिया भूखी रह के भी, भरे पेट का बहाना बना लिया. सर पे उठा के बोझा जब थक गई थी वो इक घूंट पानी पीके अपना ग़म दबा...


  • अपनी ही अंजुमन में…

    अपनी ही अंजुमन में…

    अपनी ही अंजुमन में मैं अंजाना सा लगूं बिता हुआ इस दुनिया में फ़साना सा लगूं.   गाया है मुझको सबने, सबने भुला दिया ऐसा ही इक गुजरा हुआ तराना सा लगूं.   अपने ही हमनशीनों...