Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कातिलों को वफा में रक्खा है क्यों दिये को हवा में रक्खा है जिनके हाथों में प्यासा खंजर है हमने उसको दुआ में रक्खा है तेरे आमद से आंखें चमकी हैं नाम तेरा जिया में रक्खा...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तुम्हें ख़त लिख रहा हूँ लगी लत लिख रहा.हूँ दीवारें वालिदा को पिता छत लिख रहा हूँ बड़ों से झुक के मिलना लियाकत लिख रहा हूँ ये कत्लेआम दहशत कयामत लिख रहा हूँ मुहब्बत से ही...

  • गज़ल

    गज़ल

    प्यार करना सिखा जाना साथ मरना सिखा जाना चूम कर हाथ होठों से पीर हरना सिखा जाना दूर जाऊं तो आँखों में नीर भरना सिखा जाना जिन्दगी में जो आये दुःख धीर धरना सिखा जाना कूद...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मिले थे दिल जहाँ दिल से वहीँ इक बार आ जाना, मुहब्बत कितनी है हम से कसम तुमको बता जाना| रही मजबूरियां होंगी वफ़ा हम कर नहीं पाए, निभाया हमने हर रिश्ता सदा ही बा वफ़ा...

  • रंगों की सौग़ात

    रंगों की सौग़ात

      रंग न होते हिन्दू -मुस्लिम रंगों की ना जात सखे! रंगों की भाषा ना बोली पर कह देते बात सखे! लाख छिपाओ भाव हृदय के किंतु मुखरित हो जाते सुख-दुख-क्रोध-त्याग-ममता के रंग सभी जज़्बात सखे!...


  • तुम मेरे बेताब मन का….

    तुम मेरे बेताब मन का….

      तुम मेरे बेताब मन का दूसरा हिस्सा बन गये  हो  जिसे सुनता रहूँ  प्रेम का  वही किस्सा बन गये हो    हर तरफ तेरे सिवाय  मुझे अब कुछ नजर आता नहीं   दो जिस्म पर एक जान सा अटूट रिश्ता बन गये  हो    माह...

  • ग़ज़ल : बादल…

    ग़ज़ल : बादल…

    चाँद को शायद चुप करने की ठानी है। इसीलिये ये बादल पानी पानी है। फ़र्क़ नहीं खेतों की गेंहू बिछ जाये, बारिश की ये जिद, कैसी मनमानी है। टपक रहीं बूंदें, सोने को जगह नहीं, कब...