Category : ग़ज़ल/गीतिका


  • किताबें कहती हैं /गज़ल

    किताबें कहती हैं /गज़ल

    हमसे रखो न खार, किताबें कहती हैं। हम भी चाहें प्यार, किताबें कहती हैं।   घर के अंदर घर हो एक हमारा भी। भव्य भाव संसार, किताबें कहती हैं।   बतियाएगा मित्र हमारा नित तुमसे, हँसकर...


  • अब और न सता

    अब और न सता

    अब न सता मुझे तू मेरा साथ छोड़ दे | वादे किये थे जो कभी तू आ के तोड़ दे|| मुझको सता ना और तू बेर्दद मसीहा| मुझको मेरे हाल पे ऐसे ही छोड़ दे|| मुझको...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये रिश्ते और ये शादी सभी केवल बहाना ….है , मुहब्बत वो तराना है जो सबको गुनगुनाना है | ** चला है कौन सा नम्बर तुम्हारी आइडी है क्या , मुझे इतना बता देना तुम्हारा क्या...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खामोशियाँ बोलें तो सुनने का मज़ा कुछ और है दर्द-ए-दिल चुपचाप सहने का मज़ा कुछ और है तैरना लाज़िम है माना पार जाने के लिए पर नदी के साथ बहने का मज़ा कुछ और है ये...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख़ुशी की बात होठों   पर   ग़मों   की   रात   होठों   पर , चले आओ कि होने दो   सनम   बरसात    होठों   पर | ** बड़ा    जालिम   जमाना  है  फँसा  देगा  सवालों  में , मैं आने दे नहीं  सकता...

  • नज़्म/गज़ल

    नज़्म/गज़ल

    कलम में कैद रहते है,तो दम घुटता है लफ्ज़ो का, रिहा होकर बाहर निकले ,तो खुल कर सांस लेते है, कभी नासूर भी इन्सान को ना दर्द दे पाए, कभी छोटे से घाव भी बड़ी तकलीफ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    उन्हें पता है,  जिसने बीज विष के  बोये हैं कैसे-कैसे अबतक किसान, देश के रोये हैं। बन रहे महलों के  साए में  हैं किसके साए भरी जवानी,  औ’ बुढापा  जिसने खोये हैं। लह-लहाते खेतों से  जो...

  • “अँधेरी नज्म”

    “अँधेरी नज्म”

    कहीं टूटकर बिखर न जाए गजल डर है जख्मे हालात लिखता नहीं | अल्फाजों का बिकता देखा बाजार वजह इतनी, और मै बिकता नहीं || कौन पढता है ऐसी-वैसी गजल किताबां कोरे पन्ने सजता नहीं |...