Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रिश्तों के लिए खुदको बदलते चले गए शोला थे मोम बनके पिघलते चले गए। आह से वाह की तासीर कम न हो कहीं खामोशियों की आग में जलते चले गए। ये उम्मीद का धागा जब टूटा...





  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यार, जबसे तू खफा सा हो गया है। हर ख़ुशी से, फासला सा हो गया है। इस दफा तो, ओर है न छोर इसका। दर्द बढ़ कर, आसमां सा हो गया है।। आते जाते, पूछते सब...