Category : ग़ज़ल/गीतिका

  • गज़ल

    गज़ल

    कब दीवारों से झाँकता है कोई, मुझको शायद मुगालता है कोई, ==================== मुड़ के देखा हवा का झोंका था, लगा ऐसे पुकारता है कोई, ==================== रूबरू होती है मुलाकातें, अब कहाँ चिट्ठी बांचता है कोई, ====================...

  • मन की खिड़की खोलो जी

    मन की खिड़की खोलो जी

    क्यूँ बैठे हो गुमसुम गुमसुम मन की खिड़की खोलो जी दिल मे क्या क्या राज़ छिपा है हमसे भी तो बोलो जी ~~ आँसू पीते पीते खारे सागर से हो जाओगे मुखरित करके दर्द हृदय का...

  • गज़ल

    गज़ल

    क्या बताऊँ क्यों नहीं सुनता हूँ मैं हर घड़ी हैवान से लड़ता हूँ मैं देख वह ले जा रहा है आदमी दौड़ कर रोको उसे कहता हूँ मैं।। फूलकर कुप्पा हुआ सहकार पा कब उठेंगे हाथ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यूँ ना बेमतलब मुझे सताया करो बेवजह झूठी आस ना दिलाया करो भँवरा बन फूलों पर, मँडराते हो यूँ ना दिल हर किसी पर लुटाया करो। खेलों ना मेरे, अहसासों के साथ किया हमने प्यार, रिश्ता...

  • इज़हार

    इज़हार

    आए थे पास जब वो, यूं प्यार को लिये। लफ़्जों में पिरोये हुये, इज़हार को लिये। हर वक्त का मनुहार, वो अंदाज़ सुहाना, दिल हारने लगा था, इनकार को लिये। आख़िर वो प्यार हमने, सर से...

  • उल्फ़त

    उल्फ़त

    ऐ  दिल  के  दामनगीर  सुनो, हम तुमसे उल्फ़त कर बैठे, दिल पहले ही जख्मों से भरा, उस पर ये हिमाकत कर बैठे दिल कहताहै ख़्वाब बहारोंके, सज जाएंगे अब तेरे ज़ानिब तूभी  अपनी  तकदीर  सजा, वो ...

  • मौसम

    मौसम

    फिर ढूंढ लाओ वही गुलमोहर वाला मौसम। हदे निगाह हरे भरे शजर वाला मौसम। नदी की रेत में ढूंढते थे मिल के सीपियाँ, अब कहाँ रंग बिरंगे पत्थर वाला मौसम।                          गुड्डे गुडियों की शादी, वो सजी...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    उसका दूभर दुनिया में जीना हुआ पत्थरों के बीच जो शीशा हुआ साथ कोई दे न दे मेरा यहाँ साथ अपने ख़ुद को है रक्खा हुआ ज़िंदगी में मुश्किलों से जूझ कर अपने होने का सबब...