भजन/भावगीत

गीत – बीती जाए उमरिया मेरी 

मेरे प्रभु राम जी कब दोगे तुम मुझको दर्शन। बीती जाए उमरिया मेरी तेरा तुझको सब कुछ अर्पण। क्या लाया था क्या ले जाए प्रभु की महिमा कही न जाए। दो कर जोड़ शीश नवा ले प्रभु में अपना ध्यान लगा ले। खिल जायेगा तेरा जीवन झांक ले तू मन के दर्पण । बीती जाए […]

भजन/भावगीत

माँ सिद्धिदात्री

नवम रुप माँ जगदम्बे का माँ सिद्धिदात्री कहलाती है, शंख, चक्र,गदा, कमल मैय्या धारण करती है। कमल आसन पर विराजित माँ कमलासनी भी कहलाती हैं, सिंहवाहिनी मैय्या मेरी सबको बहुत सुहाती है। इनकी पूजा से भोले ने भी सिद्धियाँ बड़ी प्राप्त किये, सर्वसिद्धियाँ मिलती उसको जो सिद्धिदात्री का ध्यान करे। चर्तुभुजी माँ सिद्धिदात्री सब मिल […]

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माँ महागौरी

माँ जगदम्बे का अष्टम रूप माँ महागौरी कहलाये, श्वेत वस्त्र आभूषण से अलंकृत माँ श्वेतांबरा भी कहाये। चार भुजाओं वाली मैय्या त्रिशूल डमरु संग सुहाए, शंख, चंद्र, कुंद की महिमा माँ के मन को भाये। वृषभ वाहन धारिणी मैय्या वृषारूढ़ा भी कहलाये, न्यायप्रिय और शांत मुद्रा माँ की मन को बहुत रिझाये। माँ अन्नपूर्णा रूप […]

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माँ कालरात्रि

सप्तम रूप माँ जगदम्बे का माँ कालरात्रि कहलाये, शुभकारी फल देती मैय्या शुभंकारी भी कहलाये। रुप भयानक, डरावनी पर भक्तों को नहीं कमी, दुष्टों का विनाश है करती काल विनाशिनी माँ। भूत प्रेत सब दूर रहे अग्नि, जल,शत्रु का न भय, ग्रहबाधा का नाश करे कालरात्रि माँ। एकनिष्ठ, नियम,संयम से पवित्र मन,वाणी,काया से, जो भी […]

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देवी भक्ति- गीत

(नवरात्रि पर भक्तों की गुहार सुनकर माता रानी जब धरा पर आने को तत्पर हुई तो स्वर्गलोक और कैलाश स्थित शिव परिवार पर क्या बीती? उसकी सुन्दर कल्पना के चित्रण का प्रयास किया है।) चली भवानी सिंह पर चढ़के अब भक्तों के देशकोई राह बुहारो रे,!आँखों में है प्यार बरसात, और प्यारा है भेषज़रा नज़र […]

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अम्बे रानी

जगदम्बे बहुत दयालु है सब भक्तों के प्यारी है अपनी दया दृष्टि से मां सारे जग को चमकाई है जो भी इनके शरण में जाता झोली भर के सबका आता मां शक्ति स्वरूपा जगजननी सबकी काया में सुख देती विधा दायनी, वर दायनी विघ्न हारनी , कष्ट निवारणी तेरे अनुपम छावं में मां मैं तुझे […]

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माँ कात्यायनी

महर्षि कात्यायन की कन्या माँ कात्यायनी कहलाती, माँ के षष्टम स्वरूप में जग में पूजी जाती। स्वर्ण सदृश्य चमकती है माँ शोक,संताप है हरती, रोग, दोष भय माता अपने भक्तों के हर लेती। कालिंदी के तट जाकर ब्रज की गोपियों ने पूजा, पति रूप में मिलें कन्हैया माँ कात्यायनी को ही पूजा। सूर्योदय से पूर्व […]

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माँ स्कंदमाता

स्कंदकुमार कार्तिकेय की माता जगत जननी का पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता कहलाती, चतुर्भुजी, कमल पुष्प धारिणी वरद मुद्रा, गोद में पुत्र लिए कमलासन,पदमासना, वातस्लय की देवी, विचार चेतना शक्तिदात्री पहाड़वासिनी,शुभ्रवर्णी, सिंह सवार,मां स्कंदमाता इच्छित फलदात्री मूढ़ को ज्ञानी बनाने वाली, नवचेतन निर्मात्री सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री जन कल्याणी माँ स्कंदमाता भव सागर से पार उतारती। पीत […]

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आयीं हैं मेरे घर पे दुर्गा भवानी

अम्बे महारानी जगदम्बे महारानी आयीं हैं मेरे घर पे दुर्गा भवानी। प्यारा सा अम्बे का महल बनाऊं आम के पत्तों से उसको सजाऊं। आरती करके मैं भोग लगाऊं, खुशबू से फूलों की उसको महकाऊं। आयीं हैं मेरे घर पे दुर्गा भवानी अम्बे महारानी जगदम्बे महारानी। आयीं हैं मेरे घर पे दुर्गा भवानी। कलश पुजाऊं मैं […]

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विनती

हे जगत जननी,अम्बे,जगदम्बे माँ मुझ पर कृपा करो, मैं अबोध,अज्ञानी, पापी मेरी भी नैय्या पार करो। पूजा, पाठ,भोग,आरती न जानूं मैं बस कौतुहलवश शीश झुका लेता हू्ँ, नीति अनीति, छल प्रपंच से अंजान तेरा दर्शन भर कर लेता हू्ँ। श्रद्धा के दो पुष्प कभी कभार तेरे दर पर रख देता हू्ँ, मैं किसी के कष्ट […]