कविता

बात यह है दरअसल

बात यह है दरअसल तुम ही मेरी नज्म हो तुम ही मेरी कविता हो तुम ही हो मेरी ग़ज़ल तुम्हें महसूस किये बिना शब्दों को छन्द आबद्ध किये जाने का मेरा हर प्रयास हो जाता  है  निष्फल मुझे निहारते ही तुम भी तो लहरों सा जाती हो मचल तुम्हारी  छवि सा गहरा हैं  मरू तल इसी […]

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कविता : शान्ति दीप जलाना होगा

आज दिलों में अपने हमको, शान्ति दीप जलाना होगा, नफ़रत का संसार मिटाकर, प्यार उजाला लाना होगा। खेल चुके हैं खेल बहुत, अलगाववाद और आरक्षण का, ज्ञानवान- विद्वान बनाकर, विकसित राष्ट्र बनाना होगा। भ्रष्टाचार के जो भी पोषक, हैं आतंकवाद के अनुयायी, देश प्रेम की अलख जगाकर, उन दुष्टों को निपटाना होगा। वेद ऋचाएँ ज्ञान […]

कविता

मां, तुम कितनी अच्छी हो ! -6

यहां तक भी यदि, मैं सुरक्षित पहुँच गई, तो मां, बस में जला दी जाऊंगी, निर्भया की तरह, या दफ्तर में भद्दे इशारों और व्यवहारों से, बच नहीं पाऊंगी, मुझे वहां कोई भी नहीं बचा पाएगा, क्योंकि वे सब तो बॉस और उसके साथी होंगे, अपना हक़ समझकर सारी हरकतें करेंगे, आखिर वे किससे डरेंगे […]

कविता

मुक्तक

कोई ख़ुशी की पनाह में दुखी कोई गम की पनाह में सुखी जिंदगी का अजीब सिलसिला न तू खुशनसीब न मै बदनसीब वीरानों में गुज़र जाने दो ज़िन्दगी,ख्यालों में न आया करो नाकाम मोहब्बत का दर्द, लिखा जो है अपने नसीब । gunjan

कविता

मुक्तक-नव वर्ष -2015 की शुभकामनायें

दो हजार पंद्रह का स्वागतम प्यार सब कर लो, दो हजार चौदह की विदाई यार अब कर लो। सभी कड़वाहट बिसारो सबको गले लगाकर, फूल के जैसा अपने को तैयार अब कर लो॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी”

कविता

काम याद आते हैं …….

  लोग नहीं लोगों के काम याद आते हैं तुलसी दास नहीं रामायण के राम याद आते हैं वेद व्यास नहीं गीता के श्याम याद आते हैं क्या लिखूं तेरे बारे में के लोग कह उठें “इंतज़ार” नहीं उसके दिल के राज़ याद आते हैं ……..इंतज़ार

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पराया धन

कह कर सब ने पराई सदा ही दिल दुखाया मेरा …… जब कहा सब ने है पराया धन फिर भी बेटी से  बहन का हर फ़र्ज़ निभाया मैने यूँ बड़े होते होते भी समझ न पाई क्यों हो कर भी अपनी पराई ही कहलाई ……. ब्याह कर जब आई यहाँ भी सब ने कहा सदा है पराये घर से आई फिर भी बीवी […]

कविता

मौसम के बहाने

  आज फिर छाया है घना कोहरा साथ में बूंदा बांदी एक नीम तो दुजा करेला गले में मफलर कसके लपटते हुए अनमने मन से बुदबुदाते हैं बाबूजी— अधिक ठंड से निबटने के लिए ओसारे में आज फिर सुलगेगी बोरसी घेर कर सब बैठ जाएंगे खुलेगी यादों की पोट्ली देर रात तक हंसी कहकहों का […]