गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़िन्दगी इतनी उदास क्यूं है भटकती हुई-सी आस क्यूं है । सब कुछ है दिखावटी,नकली, खोखला इस कदर हास क्यूं है । दूर-दूर तक है फैली खामोशी, ग़मगीन हर दिवस,मास क्यूं है । शंका के बादल छाये गगन पर, सिसकता यहां विश्वास क्यूं है । कितने हैं ज़िन्दा,कहना कठिन, चलती-फिरती हर लाश क्यूं है । […]

गीतिका/ग़ज़ल

सुनो किसी दयार में

कभी तो हमसे तुम मिलो,सुनो किसी दयार में कहो कभी मन की कही सुनो किसी दयार में।। जो बात दिल में है कहो ,कहो कहो न चुप रहो दिल टुकड़े टुकड़े हो रहा सुनो किसी दयार में।।  ये रात फिर न आएगी ये बात कह न पाओगे कसम वसम सब तोड़ दो सुनो किसी दयार […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सियासत में बाक़ी नहीं अब शराफत। कहाँ तक सुधारेगी उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम नफासत। करेगा वतन की जो पूरी हिफाज़त। उसे ही मिलेगी अवामी हिमायत। उन्हे हार मिलती ज़माने में हर सू, समय की समझते नहीं जो नज़ाकत। मुहब्बत का जज़्बा रहेगा जो दिल में, रहेगी […]

कविता

मनभावन सावन

वो मनभावन सावन मेरा इस बारी फिर से आया है प्यारे मायके की यादों का रेला संग में फिर से लाया है, फिर डाल भरी है अमुआ से और कोयल कूकी डाली पर बेईमान हुआ है फिर मौसम और रंग चढ़ा मतवाली पर सखियों संग बैठी मै झूले पर सपना मुझको आया है प्यारे मायके […]

गीत/नवगीत

गरज उठा फिर ! सिंह आज

गरज उठा फिर ! सिंह आज कायर स्यार छिपा है माद गड़ी है आँँखें उल्लू की सरहद पर लोमड़ नाद मची भगदड़ अरिदल में होंगे ढेर वहीं खंदल में कफन मिला हिम-गरल में शव मिले गलवान तरल में क्यों ! गरज उठा फिर ! सिंह आज हुई शहादत वीरों की खौला खून जवानों का निहत्थे […]

कविता

बूँद …. बूँद पानी

बादलों की गोद से उतरती भावनी रसधार छम -छम….. रिमझिम पायल पहने नाच – नाच …. आँगन हिलोर हर्ष करती धरती मुखर संग खेलती उसके घर हरीतिमा लहराती धानी चुनर गीत गाते पत्तों संग हवा नाचते मोर एक पाँव पे पीहू शोर मचाते जो पावस के दिन बरसते जाने कब किसके शब्द झरे मेघ जब […]

कविता पद्य साहित्य

रावण भी ऐसा ना था

जाने कैसे-कैसे निशिचर घूम रहे हैं मानव बन, मानव रूप लिये फिरते हैं गलियों में दानव बन। होलागढ़ थाना क्षेत्र के देवापुर गांव में अब, नृशंसता के शिखर पे पहुंचा राक्षेश्वर रावण बन।। ना ना गलत बोल गया हूं, रावण भी ऐसा ना था, पापी, लोभी, रक्तपिपासू पर निर्दय ऐसा ना था। सृष्टि और श्रेया […]

क्षणिका

6 ‘बंपर’ क्षणिकाएँ

1. शरमाये रो हित ‘रो’ हित ने एक विश्वकप में 5 शतक बनाये, फिर ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बनाकर थोड़ा शर्मा’ये ! 2. मोरल सपोर्ट 326 रन चाहिए ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए ! इधर भारत जीत की ओर, तो हो जाएंगे, टीम इंडिया टॉप स्कोरर ! हो मोरल सपोर्ट । 3. अमावस में आती है चांद […]

कविता

10 ग्लैमरस क्षणिकाएँ

1. स्वर्गीय स्वर्गीय होने के लिए मरना पड़ता है व ईश्वर स्वर्ग में रहते हैं ! जब ईश्वर प्राप्ति हेतु मरने ही होंगे, तो पाखंड में भटकना क्यों ? 2. तीन चीजें इस लॉकडाउन में तीन ही चीजें हुई, बाल बढ़ा, बाल झड़ा, बाल पका ! पर बा…. मुड़ा नहीं ! 3. टंडेली कुछ लोग […]

कविता पद्य साहित्य

कैसे जीवित रखे

हर आंगन में ख़ुशियों का अंबार नहीं होता, नित्य होते इम्तेहानों का कभी पार नहीं होता, कोशिशों में लगा ही रहता है खेवनहार सदा, आजीवन वहां कभी कोई त्यौहार नहीं होता।   हफ्तों तक भूखे रहते सैकड़ों ही परिवार यहां, जहां दो वक्त की रोटी का भी जुगाड़ नहीं होता, आधा भोजन थाली में छोड़ […]