Category : पद्य साहित्य

  • अल्फ़ाज़

    अल्फ़ाज़

      अल्फ़ाज़ कागज़ कलम लिए आज हूँ, तुमको सोचती आज हूँ , ख्वाब से निकाल लूँ, तुमको साकार कर लूँ , तुम्हारे ख्याल को , शब्दों में ढाल लूँ , कहाँ से शुरू करूँ , कहाँ...

  • चुनाव चिन्ह

    चुनाव चिन्ह

      गर्मया था चुनावी माहौल चारों ओर बज रहे थे सब ओर देशभक्ति के गीत, जो था कभी पक्का दुश्मन वो भी बन गया था नेताओं का सच्चा मीत। “मेरे देश की धरती सोना उगले भर...

  • नारी पर दोहे

    नारी पर दोहे

    नारी पर दोहे — दुष्ट चक्षुओं से बचने को ,परदा करती नारि। नारी सुलभ संकोच ही , काफी इसे सँभारि।। परदा कर लेवे लाख पर , रक्षित न होती नारि । अन्तरचरित शक्तिबल से ही ,रक्षा...

  • मैं बेटी हूँ

    मैं बेटी हूँ

    मैं बेटी हूँ , मैं दुहिता हूँ , मैं इस दुनिया में आयी हूँ , मै हूँ रचना परमेश्वर की मैं प्यार प्रीत बन आई हूँ । मैं हूँ मान्या , मैं हूँ कन्या , उषा...

  • खुशियों के त्यौहार

    खुशियों के त्यौहार

    दिवाली गुरुपर्व ईद क्रिसमस सब खुशियों के हैं त्यौहार. सबको गले लगाकर झूमो, मिल कर गायें नाचें यार. हम सब भारत मां की संतान सुख दुख, रहन सहन, सब एक. सभी सुखी हों यही मनाते, मिल...

  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    लफ्फाज़ी होती रही, हुई तरक़्क़ी सर्द। समझ नहीं ये पा रहे, सत्ता के हमदर्द। अबलाओं पर ज़ुल्म कर, बनते हैं जो मर्द। निन्दा जमकर कीजिये, मिलें जहाँ बेदर्द। डंका अब बजने लगा, उसका भी घनघोर। एक...

  • आज के दोहे

    आज के दोहे

    प्रेम, दया, करुणा सभी, मानव के श्रृंगार। मिल-जुलकर जो रह गये, हो जाये उद्धार। जीवन का दर्शन यही, यही समूचा सार। कहते वेद, पुराण सब सुंदर रखो विचार। जन्म सफल होगा तभी, जीवन सुखमय होय। आस-पास...


  • मेरे पास उदासी

    मेरे पास उदासी

    मेरे पास उदासी बैठी है सुबह से बातें कर रही है ताने मारती मैं मुँह लटकाए सुन रहा हूँ झेल रहा हूँ यातनाएँ बेवजह। क्या करूँ? झुलस रहा हूँ झेल रहा हूँ पीड़ा मार समय की...

  • प्रेम

    प्रेम

    कोय कोय समझै जगत म्ह इस प्रेम की गहराई, भक्ति, गृहस्थी अर मुक्ति की राह इसनै दिखाई। पत्थर की मूरत तै प्रेम वा मीरा बाई कर बैठी, बालकपण म्ह वा पति उस कृष्ण नै वर बैठी,...