Category : पद्य साहित्य

  • आया बसंत ( कविता )

    आया बसंत ( कविता )

    💐आया बसंत 💐 ————————– मन में लिए खुशियाँ अनंत आया बसंत , आया बसंत जो ठूँठ पड़े थे , कुदरत ने नव पल्लव से श्रृंगार किया थी सुप्त पड़ी इस धरती पर नव जीवन का संचार...


  • ऋतुराज

    ऋतुराज

    पुष्प सुसज्जित पूर्ण यौवना बाग वन वन टेसू खिले लगाए आग। इतराती प्रकृति सोलह श्रृंगार कर मोहित हो प्रेम रस बरसाए अंबर। पुष्प पुष्प पर डोले प्यासे मधुकर प्रेम गीत गाए मोहित हो भ्रमर। ले उड़े...

  • मां जयतु वीणा धारिणी

    मां जयतु वीणा धारिणी

    मां जयतु वीणा धारिणी मां सरस्वती वीणा वादिनी जयतु हे मां हंस विराजनी, जय हो शारदे ज्ञानदायिनी मां पद्म हंस की विराजनी मां सरस्वती——–। ऋद्धि-सिद्धि दायिनी मां विवेक शून्य विनाशिनी देवि! सुखद हास देती हृदय में...

  • गज़ल

    गज़ल

    ख्वाब आँखों में जितने पाले हैं सब के सब टूट जाने वाले हैं ==================== जो पसंद हो वही नहीं मिलता खेल कुदरत के भी निराले हैं ==================== हमें तुम क्या मिटाओगे, हमने सीने में तूफान पाले...

  • कविता

    कविता

    लो आ गया नया ज़माना, स्वच्छ भारत बन गया है एक बहाना । क्या भारत की स्वच्छता का इरादा , टूट रहा है यह स्वच्छ भारत का वादा । सैलानी हैं आते यहाँ, दिखती है गंदगी...

  • कोमल बेटियाँ

    कोमल बेटियाँ

    फूलों सी, कलियों सी कोमल बेटियाँ, माँ का प्यार, पिता की इज्ज़त बेटियाँ कुल की शान, अभिमान की पगड़ी बेटियाँ, घर-परिवार की आन, मान, शान,जान बेटियाँ सीता, सावित्री, दुर्गा सी होती वीरांगना बेटियाँ, आज जीत कर...

  • प्रेम दिवस

    प्रेम दिवस

    चक्षुओं में मदिरा सी मदहोशी मुख पर कुसुम सी कोमलता तरूणाई जैसे उफनती तरंगिणी उर में मिलन की व्याकुलता जवां जिस्म की भीनी खुशबू कमरे का एकांत वातावरण प्रेम-पुलक होने लगा अंगों में जब हुआ परस्पर...

  • उसका भी वजूद है ——

    उसका भी वजूद है ——

    एक स्त्री अच्छी माँ अच्छी बहन अच्छी बेटी भी है लेकिन अच्छी बहू नही , अच्छी पत्नि नही तो , तो आत्म-मंथन कीजिये कमी कहां है। एक स्त्री बचपन से जवानी तक कभी पिता के सम्मान...