Category : पद्य साहित्य

  • गीत – हमें जमीं से प्यार है।

    गीत – हमें जमीं से प्यार है।

    थार ही बस थार है, कि जिंदगी खुमार है। जिंदगी के मायने क्या, हमें जमीं से प्यार है।।1।। तीज, बीज, चैदहवीं, प्रकाश लाती पूर्णिमा। दूर-दूर ढाणियां पर, पास-पास दिल जमा।।2।। प्रीत-रीत, वाह अनूठी, रोज एक त्यौहार...

  • नवगीत – मेहनतकश, मतवाले

    नवगीत – मेहनतकश, मतवाले

    मेहनतकश मतवालों की यहां, नहीं रहेगी मुट्ठी खाली। तम का तख्त बदल देंगे हम, पूरब में फिर होगी लाली।।1।। चल पड़े है मेहनत के पथ, फूल कांटे ना गिनेंगे। मुश्किल है सौ आजमाएं, हम राहों से...

  • तस्वीर…..

    तस्वीर…..

    बरसों से एक तस्वीर तेरी बसा रखी है दिल में बड़ी शोख, शरारत भरी सूरत आंखों में लम्हा-लम्हा बड़े जतन से सम्भाला है मैनें कतरा-कतरा जिंदगी में समेट रखा है मैनें यादों के करवा में खुद...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    काफ़िया- आ स्वर, रदीफ़- रह गया शायद जुर्म को नजरों से छुपाता रह गया शायद व्यर्थ का आईना दिखाता रह गया शायद सहलाते रह गया काले तिल को अपने नगीना है सबको बताता रह गया शायद॥...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    खेती हरियाली भली, भली सुसज्जित नार। दोनों से जीवन हरा, भरा सकल संसार।। भरा सकल संसार, वक्त की है बलिहारी। गुण कारी विज्ञान, नारि है सबपर भारी।। कह गौतम कविराय, जगत को वारिस देती। चुल्हा चौकी...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    छलक जाती हैं याद करके ये तुम्हें अक्सर प्यार इन आंखो से छुपाया न गया। बात आकर कहीं रुक जाती है कहते कहते हाल ए दिल होठों से बताया न गया। बड़ी खामोशी से तकती हैं...

  • जिंदगी एक सिनेमा

    जिंदगी एक सिनेमा

    ये जिंदगी भी तो है इक सिनेमा नए किरदार नए अभिनय रंग अनेक कभी श्वेत श्याम सी यादें कभी रंग बिरंगी बातें कभी खिलता मौसम कभी ठहरा सा जीवन रोज नया सा रोल जिंदगी ये गोल...