Category : कविता



  • मुझे नींद क्यों नहीं आती।

    मुझे नींद क्यों नहीं आती।

    मुझे नींद क्यों नहीं आती। अक्सर देर रात तक थिरकती है अंगुलियाँ मोबाईल की दुनिया में उचट जाती है फिर नींद आंखों से कहीं दूर सोचती हूँ फिर मुझे नींद क्यों नहीं आती। जहाँ मेरे शब्द...



  • कविता

    कविता

    जिंदगी की वीरानियों को समेटने की नाकाम कोशिशें , ले आती हैं इंसान को जब कभी दोराहे पर बिखर जाता है एक अंधेरा से चारों तरफ । सुलगने लगता है शांत पड़ा अहसास भी दहकती हुई...

  • बलात्कार

    बलात्कार

    क्या से क्या आज की कहानी हो गयी , हर तरफ चर्चा रेप का दुनिया दीवानी हो गयी । भाषणबाजी ये आज आम हो गयी , आज औरत खुलेआम बदनाम हो गयी । सतयुग में द्रौपदी...

  • हाय री मोह्हबत

    हाय री मोह्हबत

    तुम को चाहता हूँ अपनों की तरह तुम मुझे देखती हो गैरों की तरह मेरी मोह्हबत में वो कशिश नहीं या तुम्हारी नज़र मुझ पे पड़ती ही नहीं तुम समझ कर ना समझ हो या समाज...

  • मेला –रेला

    मेला –रेला

    यह वक़्त कितना बेरहम पल में क्या से क्या हो जाता है, एक हँसता गाता चेहरा आंसूओं से तर बतर  चीख पुकार में बदल जाता है, कुछ देर पहले…बंटी बोला था… …पापा मैं दशहरा मेला देखने...

  • ‘मीटू’ ‘मीटू’

    ‘मीटू’ ‘मीटू’

    ना मेरी खता थी न तेरी खता थी, कुछ मेरी तमन्ना थी कुछ तेरी ज़रुरत थी, ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा बस आँखों आँखों की गुगतगूं थी , ना तुम मुस्कुराये ना हम...