Category : कविता

  • इंतजार….

    इंतजार….

    कितना इंतजार है मेरे प्यार में….. ये तुम क्या जानो पल-पल जी रही हूँ तुम्हारी यादों में….. पर अब अच्छा नहीं लगता यूँ तुम्हारे ख्वाबों में जीना हकीकत हो तुम मेरी जिंदगी के…. लौट आओ न...


  • पता नहीं क्यों?

    पता नहीं क्यों?

    पता नहीं क्यों तुमको सेना पर पत्थर मरने वाले भटके नौजवान लगते हैं. पता नहीं क्यों तुमको भारत तेरे टुकड़े होंगे बोलने वाले देश प्रेमी लगते हैं. पता नहीं क्यों तुमको राष्ट्रीयगान ना गाने वाले देश...


  • ज़रा सी बात

    ज़रा सी बात

      मेरी ज़रा सी बात पर वो खफा हो गया न जाने क्यों इंसान से “खुदा ” हो गया, न सोचा न समझा न देखा  न भाला पल भर वो जाने क्या से क्या हो गया...

  • षड्यंत्र

    षड्यंत्र

    षड्यंत्र (छन्द मुक्त कविता) •••••• षड्यंत्र बिन नहीं काम चलता चाहे हो अपना भाई कोई भाई ही भाई को डसता कलयुगी इस दौर में षड्यंत्र करते कृष्ण भी अधर्म के विरोध में मरवा दिया भीष्म को...

  • “दुर्मिलसवैया”

    “दुर्मिलसवैया”

    छंद दुर्मिल सवैया (वर्णिक ), शिल्प – आठ सगण, सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा , 112 112 112 112, 112 112 112 112 माँ शैलपुत्री मंच परिवार को सुख स्वास्थ्य और सम्पदा प्रदान...


  • प्रेम…

    प्रेम…

    मेरे जीवन के हसीन पन्नों पे रंग भरी स्याहियों की सौगात हो तुम…… जो मिट न सके कभी दिल की दीवारों से ऐसी अमिट चाहत की छाप हो तुम….. वक्त का हर लम्हा मेरा मुस्कुराता है...

  • बचपन….

    बचपन….

    यादें कहाँ थमने का नाम लेती है समुंद्री लहरो की भाँति उफनती ही रहती है तभी तो वर्षो पीछे छूटकर रूठ गया बचपन पर आज भी वो नटखट शरारत भरी यादें याद आते ही दिल को...