कविता

मैं और मेरा बिस्तर

इस लॉक डाउन के मौसम में मुझ से दुखी है मेरा बिस्तर उससे इतना मोह हो गया नहीं छूटता मुझसे मेरा बिस्तर जब देखो पसरा रहता हूं इस बिस्तर पर गद्दे भी करहाने लग गए अब मेरा बोझ ढोते ढोते कुछ धंसने लगे भी हैं ये अब मेरे प्रिय गद्दे सोचता हूं कि कुछ कम […]

इतिहास कविता पद्य साहित्य

संभावना

जिस तरह दिनकर सुबह को निकलकर शाम को विलीन हो जाता है फिर दूसरे सुनहरे कल के लिए उसी तरह/ मुझे संभावना है कि इंसान भी आज नहीं तो कल अवश्य ही बदलेंगे अपने सुनहरे भविष्य के लिए।।     मनोज बाथरे चीचली

कविता

दिलखुश जुगलबंदी- 24

देखो-देखो कायर भाग रहा है दुनिया की निगाहों में भला क्या है बुरा क्या, ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा -सुदर्शन खन्ना मेरे अच्छे वक़्त ने दुनिया को बताया कि मैं कैसा हूँ और मेरे बुरे वक़्त ने मुझे बताया कि दुनिया कैसी है. -रविंदर सूदन खुलते नहीं हैं रोज़ दरीचे बहार […]

कविता

कविता – वाह रे , कोरोना !

कविता –  वाह रे , कोरोना  ! वाह रे , कोरोना ! तूने तो गजब कर डाला , छोटी सोच और अहंकार को , तूने चूर-चूर कर डाला ।। वाह रे , कोरोना  ! …… पैसो से खरीदने चले थे दुनिया , ऐसे नामचीन पड़े है होम आईसोलोशन में , तूने तो पैसो को भी […]

कविता

अनुचरी बन घूमती है

अनुचरी बन घूमती है घर लौटी मजदूरन प्यार से वंचित व्यथित केवल देह मात्र होकर जुट जाती है घरेलू कामकाज में, बच्चे की नाक पोंछती हुई चूल्हा जलाती है, बच्चों को बगल में बिठाकर आटा मलकर रोटी पकाती है। वह लौटती है डरी,सहमी हुई सी भूलकर वास्तविक रूप को पत्नी, माँ, बहन, बेटी होकर। रात […]

कविता

लॉकडाउन

यह लोकडॉउन न होता पिता पुत्र को भी बराबर लेटने का मौका न मिलता बचपन में पुत्र खेलता है पिता की गोदी में कभी खेलता उसके ऊपर बना उसे घोड़ा यौवन के आते ही बचपन खो जाता है पुत्र व्यस्त हो जाता अपने धंधे में कर उसकी शादी पिता हो जाता निश्चिंत पिता हो जाता […]

इतिहास कविता पद्य साहित्य

लहराते विचार

विचारों के अथाह सागर में लहराते हुए विचार अपने लिए कुछ अरमानों के संग संसार में सफ़र पर निकलते हैं वो सोचते हैं हमें कहीं ठहराव का महासागर मिल जाए।। मनोज बाथरे चीचली

इतिहास कविता पद्य साहित्य

पहचान

मैं क्या हूँ? मेरी पहचान क्या है अपने ज़हन में यह प्रश्न लिए घूमता हुआ इंसान इस/ प्रश्न का उत्तर दर-ब-दर तलाशता फिरता है लेकिन / उसका उत्तर उसको क्या पता जिससे वह पूछ रहा है उसका / उत्तर तो सिर्फ ये हैं कि / इंसान अपनी पहचान स्वयं बनायें।। मनोज बाथरे चीचली जिला नरसिंहपुर […]

कविता

लॉक डाउन को सफल बनाते हैं

लक्ष्य प्राप्ति के लिए थोड़ा सब्र अपनाते हैं, कुछ न करके अपना- अपना फर्ज़ निभाते हैं। धैर्य और सहनशीलता का परिचय दे जाते हैं, घर बैठकर लॉक डाउन को सफल बनाते हैं। मास्क,सैनिटाइजर को अपना अस्त्र बनाते हैं, सोशल डिस्टेंस को अपनाकर प्राण बचाते हैं। कोरोना के हमले को हम सब विफल बनाते हैं, घर […]

कविता

लाक डाउन

लाक डाउन के फायदे बहुत हैं, घर में बैठो आराम करो, बीवी बच्चों से प्यार करो, घर के कामों में मदद करो, दारू बंद गुटका बंद, पैसे का सही उपयोग हुआ, लड़ाइयां सबकी बंद हुई, महिलाओं ने खाना बनाना सीखा, सुबह देर तक सोना हुआ, सब टेंशन से मुक्ति मिली, लाकडाउन के मजे बहुत हैं, […]