कविता

नव वर्ष

नव उमंग – नव तरंग धूप – छांव संग – संग पीली सरसों- खिली सरसों तन चहका – मन हर्षो बौराए आम, मंहके बाग चुनरी में लगा दाग आया नूतन साल कोयल गाए डाल-डाल हृदय में खुशियां अपार चली प्रेम भरी बयार लगे भोर बड़ी सुहानी है ये नई साल की कहानी रजनी बनी मनमोहिनी […]

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अहमियत

शिक्षा की अहमियत को जानों गुरू की ज्ञान वाणी को पहचानों जीवन की दर्शन है यह     अपना पूरा करता है जीवन का हर सपना वेद पुरान में है दर्शन इस जीवन का पढ़ना इसे दर्पण अपने  दर्शन     का जिस ने रामायण गीता को है अपनाया जीवन में वह मानव सफलता है  पाया शिक्षा […]

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बादल

बादल बड़े बदचलन होते हैं लोग जब आतुर होते हैं सूरज या चँदा दर्शन के तब सायास ढक लेते हैं अपने पर फैलाकर और दे देते हैं सबूत अपनी बदचलनी या कि दंभ का। सूरज, चाँद और तारे चलते रहे हैं युगों-युगों से अपने नियत रास्तों पर पर कोई भरोसा नहीं इनका, कभी ये खुद भटक जाते हैं कभी हवाएं भटका देती हैं, इसी बदचलनी के चलते बादल खोते जा रहे हैं अपनी आँखें, अब नहीं दीखता इन्हें धरती का विराट कैनवास इसीलिए अनचाहे बरस जाते हैं, संवेदन खो चुके बादलों को अब अहसास भी नहीं होता उनकी जरूरत-गैर जरूरत का, धरती भी अब मान गयी है बादल बादल नहीं रहे बदचलन हो गए हैं। — डॉ. दीपक आचार्य

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आशीर्वाद

बड़े बुजुर्गों से मिलता आशीर्वाद बेटी तुम हो! माँ सीता! जैसी; त्याग समर्पण की देवी, साक्षात् लक्ष्मी , जिस घर में जाओगी बिटिया! वह घर ख़ुशियों से भर जाएगा , मांँ सीता के जैसे ही ; तुममें प्रेम है, धैर्यता ,गंभीरता ,परिस्थितियों का सामना , तुम बख़ूबी कर लेती हो! बड़ा भाग्यशाली होगा ! वह […]

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जीवन की बगिया

जीवन की झ्स बगिया में रंग  विरंगे हैं फूल     खिले कोई गोरा कोई है     काला अजीब अजीब है ये लल्ले कोई खुशहाल कोई गमजदां कोई है भूखा  कोई   बिछड़े कोई खाकर है मर       रहा कोई अन्न अन्न को    तरसे कोई महलों में ठाठ से सोता कोई झोपड़ पट्टी में है  […]

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मानव जीवन

मेरे प्यारे बच्चों सुनो! बड़े भाग्य से मानुष तन पाया , आओ , इस जीवन को सार्थक कर लें , किस उद्देश्य यह जीवन मिला , आओ , हम  इसको जाने , एक  –  एक पल बड़ा है मूल्यवान , रात्रि में सोने से पूर्व, अगले दिन की शुरुआत कैसे करें ? योजना बना लो! […]

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कितना ज़हर भरते हैं

हमसे बेखर हैं ओ, हम जिनकी खबर रखते हैं चुपके से गुजरते ओ, हम फिर भी नजर रखते हैं सुनाते हैं जिनको ओ, अपने सफर के किस्से वही आ जातें हैं और, मुझको खबर करते हैं हम जान रहे हैं कि ओ, चाल कैसे चलते हैं क्या करेगें कब कहां, ख्याल कैसे पलते हैं सादगी […]

कविता

प्रसन्न

जीवन में चाहे जितना भी ! कष्ट हो , मैं हमेशा प्रसन्न रहती हूंँ , सुख – दुख सुबह शाम जैसा; इनका आना – जाना जीवन में लगा ही रहता , जीवन में चाहे जितना भी कष्ट हो, फिर भी , मैं हमेशा प्रसन्न रहती हूंँ। मिलती है मुझको प्रेरणा काँटों में खिले फूलों से, […]

कविता

मंदिरों में वही पूजा जाता है

मंदिरों में  वही  सदा पूजा जाता है जो  छेनी-हथोड़े  की चोट खाता है। जब अनघड़ पत्थर तराशा जाता है मंदिरों में वही भगवान कहलाता है। दीपक  तभी  प्रकाशवान  बनता है जब वह तिल-तिल जलता जाता है। और वही दीपक प्रकाशित करता है जो जलने  की  साहस कर पाता है। कुछ पाने के लिए कुछ खोना […]

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ठिठुरन

माह दिसम्बर आया है भाई अपने संग जाड़ा को ले आई चारो दिशा में ठंडक है छाई ठंडक से बचना मेरे    साईं सुरक्षा करती है हमें रजाई कंबल भी करता है  भलाई छिपना है कंबल हो या रजाई आग भी करता है   सेंकाई सुबह शाम ठंडक का आलम सुरक्षा कवच स्वेटर है जानम गरम […]