कविता

मेरे पापा

प्यार हमेशा करने वाले। जीवन खुशियाँ भरने वाले।। सच्चे मित्र कहाते पापा। अपने साथ घुमाते पापा।। बचपन में वो साथ चलाते। सदा हमें संस्कार सिखाते।। बच्चों सँग बच्चे बन जाते। जोर – जोर से हमें हँसाते।। चाट पकौड़े खूब खिलाते। मेले में लेकर भी जाते। झूला हमें झुलाते पापा। जोकर से मिलवाते पापा।। सदा सत्य […]

कविता

बदलता परिवेश

  रोज रखता था चिड़िया के लिए पानी कुछ दिन से आती है चोंच डालती है चोंच डाल बिना पानी पिए उड़ जाती है कई दिन हो गए आती रोज है पर बिन पानी पिए लौट जाती है समझ नहीं आया ऐसा क्यों करती है फिर ख्याल आया कहीं ऐसा तो नहीं पहले मैं आर […]

कविता

आस

सदियों का जो तप ये मेरा ना जाने कब का व्रत ये मेरा पल पल बिखरते हम रहे जिस चाह में बुझते जलते हंसते रहे ख्यालात में दिल के दर्द मेरे आंसुओ मे गिरते रहे हम भी क्या पागल बने दर्द शब्दों में कहते गये थी नही इतनी जफा ना हम समझे कभी वो अकेला […]

कविता

तमन्नाएं

चाहे जितना कोई समझाए दिल यह मान नही पाता अब पहले सी बात नही वह सुनना हमको नही भाता ।। खुद को तो अब भी लगता है सब कुछ हम निपटा सकते हैं छोटी मोटी कोई समस्या पल में दूर भगा सकते हैं यूं घबराकर पीठ दिखाना हमको रास नही आता अब पहले सी बात […]

कविता

ए जिंदगी

ए जिंदगी तू कैसे कैसे रंग दिखाती है,  कभी खट्टी तो कभी मीठी बन जाती है,  कभी धूप तो कभी छांव बन जाती है,  कभी धूप तो कभी सुख बन जाती है,  जिंदगी तेरे कितने रूप हैं,  हर रूप में एक नया रंग है,  रंगों से सजी जिंदगी कितनी खूबसूरत है, हर दिन बादलों का […]

कविता

मन की पीड़ा

मन की पीड़ा कोई क्या जाने मनमीत ही पीड़ा को पहचाने गम की पहाड़ जब टुट आता है जीवन कष्टमय हो ही जाता  है मन की पीड़ा तन मन को खाये हर्षित जीवन तब     मुरझाये उजड़ जाता है बाग का बागवान मन में जब आता गम बन मेहमान कोई देता जब मन को कोई […]

कविता

वर्षा

काले -काले बादल, दूर देश से आते हैं । पानी खूब बरसाते हैं ।। चम-चम बिजली चमके, मेंढ़क टर्रा के टेर लगाते हैं । पक्षी जोर-जोर से शोर मचाते हैं ।। चारों ओर छा जाती हरियाली, मिट्टी सौंधी खुशबू देती है । ताल-तलैया, नदी-पोखर मुस्काती हैं।। कीचड़- कीचड़ होता चहुंओर, थोड़ी परेशानी तो आती है […]

कविता

मोबाइल नहीं तो कुछ भी नहीं

वह डॉक्टर को दिखाने आई थी छोटी-सी बिटिया को भी साथ लाई थी वह तो अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थी बिटिया क्या करे? वह मोबाइल से दिल बहला रही थी कभी कुछ कभी कुछ देख रही थी पर बिना हिले-डुले एक जगह बैठी तो थी! बहुत देर हो गई मोबाइल से खेलते-खेलते मां […]

कविता

आंकलन

खुद को छोड़ सभी को हम जानते हैं एक एक कमियां उनकी उंगलियों पर गिना सकते हैं हम जब बात होती है खुद की तो खुद के बारे में शून्य हैं हम खुद अपने आप से अनभिज्ञ हैं हम

कविता

दिल में आता है

दिल में आता है चुपके से, तन्हाई में कहीं खो जाअूं मैं बचा कर नज़रें अपने आप से, कहीं दूर निकल जाअूं मैं मजबूरियां मेरी ज़िन्दगी की, अैसा करने देती नही मुझे बस में नही है मेरे वरना अैसा, ज़रूर ही कर लूं मैं महसूस की जिये मेरी मायूसी को, मेरी आँखों में देख कर […]