कविता

वक्त की किताब

वक्त की किताब के, पन्नों को, फिर से बांचना चाहता हूँ।  मैं आज फिर से , उन लम्हों में झांकना चाहता हूँ।  इतना मिला…… और कितना छूट गया । मैं उस हिसाब को , फिर से जांचना चाहता हूँ । वक्त की किताब के , उन पन्नों को , फिर से बांचना चाहता हूँ। खुशियों […]

कविता

बाध्यता के बीच

कई-कई जगह पशु-शृंखला भी देखने को मिले, खासकर “बोतु शृंखला” •••• जब गुरु द्रोण नहीं मिले, तब एकलव्य ने खुद के भीतर टैलेंट पैदा करके क्या बुराई की ? क्या खुद की प्रतिभा को बाहर निकालना अपराध है? •••• टैलेंट की यहाँ पहचान कहाँ हो रही है ? सिरफ़…. सुंदर कपड़े, मकान, गुंडई और तमाशा […]

कविता

दिल तो कभी मिला नहीं !

महिलाएँ अपने-अपने ‘वो’ को ‘जान’ कहती हैं, तो ‘वर’ (पति) भी कहती हैं, यानी घुमा -फिराकर उस ‘वो’ को ‘जानवर’ कह ही डालती हैं ! •••• होता है आध्यात्मिक सत्संग और आते हैं उद्घाटन को वैसे ‘नेता’, आध्यात्मिकता से दूर तलक नाता नहीं ! शायद उसने चंदा जो ज्यादा दिए ! •••• टैलेंट की यहाँ […]

कविता

यादें

बाद मुद्दतें तुम्हें मेरी याद अाई शायद कोई निशानी मिल गई होगी मेरी धुंधला गया था मैं तुम्हारी नजरों से फिर से कोई कहानी याद आ गई होगी भूल सकते हो मुझे तुम पर उस दिल का क्या करोगे जिसमें में बसा रसा था कभी सागर में लहरें उठती रहती हैं और कभी ले आती […]

कविता

सोच बदलो गाँव बदलो

गाँव को गाँव ही रहने दो, इसे शहर न बनाओ । शहर की सुविधाओं को अब गाँव में ही ले आओ। माना शहर में रौनक होती है, मगर गाँव में अमन शान्ति भी होती है गाँव की मिट्टी की खुशबू फिर से ले आओ। गाँव को गाँव ही रहने दो शहर न बनाओ। अपनी सोच […]

कविता

अलबेला

बिहार के बड़े ‘शिक्षक संघों’ को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि इनमें साहस का अभाव है ! ‘नियोजित प्रारंभिक शिक्षक संघों’ में साहस है ! •••• मैं तो एसएमएस में ही अटक कर रह गया, पर “वो”…. एफबी, व्हाट्सएप को भी ठेंगा दिखा- ‘इंस्टाग्राम’ हो निकल गयी ! •••• ‘बसंत’ का अर्थ ‘अलबेला’ होता है, […]

कविता

नफरत करो तुम मुझसे !

जब नियोजित शिक्षक नियमित वेतनमान और पेंशन की माँग करते, तो सरकार की नजर में अयोग्य हो जाते हैं; पर अभियान के लिए योग्य कैसे हो गए ? •••• तेरे से मिलने की खुशी दर्द बन जाती है, अच्छा है, मुझसे नफ़रत करो तुम ! •••• फीके न पड़े कभी आपकी, ज़िंदगी का रंग; मुस्कराते […]

कविता

कविता

उठो,जागोऔर तब तक रुको नही जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”। महान विचारक देशप्रेमी ,वक्ता, युग प्रवर्तन युवाओंके प्रेरणा स्वामी विवेकानंद भारत मां के लाल ने सनातन धर्म ,हिन्दी भाषा , हिन्दू संस्कृति में,प्रेम ,सहिष्णुता मानवता है सर्वोपरि विश्व में शान्ति का दिया संदेश देश का विश्व मे मान बढाया  देश मे,हर नर ,नारी […]

कविता

अब और नहीं

सिमटी -सिमटी जिंदगी में बसर । अब और नहीं …अब और नहीं।  ठहरी -ठहरी राहों का सफ़र।  अब और नहीं ..अब और नहीं। बांध ले अपनी हिम्मत को , तिल -तिल कर मरना । अब और नहीं …अब और नहीं। सिमटी -सिमटी राहों में बसर। अब और नहीं ..अब और नहीं। आशाओं के दिए जला […]

कविता

सलवटें

सलवटें जब चादरों में उभर आती है तो लगता है रात भर किसी ने बेचैनी में करवटें बदली है। सलवटें जब किसी के कपड़ो में झलक जाती है तो लगता है बेचारा दीन-हीन गरीब जिसकी हालत नहीं बदली है। सलवटें जब किसी माथे पर सिमट आती है तो लगता है यही उसकी जीवन की कहानी […]