Category : कविता


  • छाँव

    छाँव

    पूछ रही है छाँव हमसे धूप में ही क्यों याद करते हो शीतलता की जरुरत जब होती तभी तुम क्यों याद करते हो तन्हा होती हूँ जब मैं कभी मुंह मोड़कर चल देते हो अपने स्वार्थ...

  • ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी

    कभी हँसते हुए छोड़ देती ये जिंदगी… …कभी रोते हुए छोड़ देती ये जिंदगी… …न पूर्णविराम सुख में,,, …न पूर्णविराम दुःख में,,, …बस जहाँ देखो वहाँ अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी..!!!!!! प्यार की डोर सजाये...

  • आज के कान्हा

    आज के कान्हा

    आज भी कितनी ही “राधाएँ”, अपने “कान्हा” की राह तकतीं हैं ! “कान्हा” बैठे मुरली बजाए, इल्जामों में “राधाएँ ” घिरतीं हैं !! भगवान बना तू पूजा जाए, विष मीरा क्यों पीती है ! चैन की...


  • कदम हम न रखते

    कदम हम न रखते

    गर पता होता, इतनी मुश्किल डगर है मुहब्बत की राह में, कदम हम न रखते ! उलझने हैं ज्यादा, सकूं इसमें कम है पता इसका होता, इस राह न गुजरते ! उन्हीं की शिकायत, जब उनसे...

  • तमन्ना

    तमन्ना

    आरजु मेरी दिल की तमन्ना  है मिल के रहो! ……………… जीवन के ये अनमोल पल को हँस के ज़ियो! …………… ज़िंदगी एक किराये का धर है फुलते रहो! ……………… प्रेम का दीया मन मे जलाकर खिलते रहो!...

  • तुम

    तुम

    तुम कई बार मेरे ख़्वाबो में आया करते हों तुम्हें देखकर कई सपने सजाती हूँ जैसे कोई अपनो को पास होने का एहसास होता हैं फिर मैं अपने तन्हाई जीवन से दूर हो जाती हूँ सोचती...