Category : कविता


  • कह मुकरी

    कह मुकरी

    (१) याद वही दिन हर क्षण आते, अश्रु नयन में भर भर जाते। बिन देखे अब रहा न जाता, ऐ सखि साजन?नहिं प्रिय माता।। (२) नखरे करके मुझे सताते, बार -बार छूकर मुस्काते। लगते अच्छे दिल...

  • शंखनाद

    शंखनाद

    नारी तुम, बन चंडी, उतर धरा पर.. करो स्वतन्त्रता का आगाज़ …! काटो बन्धन, लिए हौंसलें… भरो उड़ाने…. न रोक सके कोई परवाज़…!! कब तक ट्विंकल, कब तक आसिफा, कब तक बेटियाँ मारी जायेंगी ..! आने...

  • आक्रोश

    आक्रोश

    मुझे आक्रोश है आज भी उन लोगों से जिन्होंने मेरा साथ तब छोड़ा जब मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी। मुझे आक्रोश है आज भी उन लोगो से  जिन्होंने मेरी मोहब्बत को तब ठुकरया जब मुझे किसी...

  • कविता

    कविता

    प्यार प्रकृति से जो कर ले प्यार को सही पहचानेगा नील गगन से तारे तोड़कर क्या खोएगा क्या पायेगा प्यार अविरल धारा में हैं प्यार प्रकृति प्रवाह में है प्यार सीखें परिंदों से हम प्यार सीखे...

  • दिलखुश जुगलबंदी- 16

    दिलखुश जुगलबंदी- 16

    विश्व झूमने लगता है दिलखुश जुगलबंदी एक काव्य-यज्ञ है, जिसमें सब अपनी-अपनी काव्य-समिधाएं डालते हैं, सकारात्मक विचारों को पालते-स्वीकारते हैं, नकारात्मक तत्वों को नकारते हैं, तब खिलती है आनंद की बगिया, कूकती है खुश हो कोयलिया,...


  • अवनति

    अवनति

    जहाँ होते थे पहले लहलहाते खेत आज वहां कंक्रीट के जंगल हैं, पहले वहां खुले विचरते थे कुछ दुधारू पशु और किसान आज वहां तंग कमरों में, बसते हैं कुछ इंसान और कुछ हैवान, पूर्व और...


  • मुक्त काव्य

    मुक्त काव्य

    “मुक्त काव्य” दिन से दिन की बात है किसकी अपनी रात है बिना मांगे यह कैसी सौगात है इक दिन वह भी था जब धूप में नहा लिए आज घने छाए में भी बिन चाहत भीगती...