Category : कविता

  • दिवाली

    दिवाली

    एक दिवाली ऐसी भी हो जहाँ न शोर पटाखों का हो और न बारूदों के धुएं का जहर हवा में घोला जाये अपनी हिंसक खुशियों के हित प्रकृति पर ना दुराचार हो पशु पक्षी ना व्याकुल...

  • कविता का रूप

    कविता का रूप

    कविता का रूप सरल मसले कुछ भी रहे मगर भाव, भाषा और विचार का सभी पर हो असर। कुछ आक्रमकता और कर्मठता पर्सनल हस्तक्षेप को न प्राथमिकता अच्छे शब्द और मौलिकता सही मायने में कविता की...

  • हम कह ना पाए

    हम कह ना पाए

    लग रहा है जैसे तू मुझसे दूर जा रही है, तेरी यादें मुझमें एक डर सा जगा रही है। बीते लम्हों की बेचैनी मुझे रुला सी रही है, दिल की हर धड़कन तुझे बुला सी रही...

  • #मन_गौरैया#

    #मन_गौरैया#

    #मन_गौरैया# तन की कोठरी में चहकती फुदकती मन गौरैया कभी पंख फड़फड़ाती कभी ची- ची करती भर जाती पुलक से नाचती देहरी के भीतर। उड़ना चाहती पंख पसार उन्मुक्त गगन में देखना चाहती ये खूबसूरत संसार…....

  • दीपावली

    दीपावली

    है दीपों की अवली यह दीपावली का पर्व मनाएं सब मिलजुल कर प्रेम, शांति से सहर्ष। पूजन हो घर-घर प्रिय लक्ष्मी-गणेश का राम-सीता,राधा-कृष्ण देवो के देव पार्वती महेश का। बाँटे खुशियाँ मिष्ठान्न खाएँ पटाखे बम चकरी...


  • दीपावली पर दो रचनाएं

    दीपावली पर दो रचनाएं

    1. दीपावली मन मंदिर को पावन कर जाओ, राग द्वेष के तम को हर जाओ। भाईचारे की अलख जगा कर, खुशियों के फिर दीप जलाओ।  नव दीपक की नवल ज्योति से, जाति धर्म का कलुष भगाओ।...

  • जिन्दगी क्या है

    जिन्दगी क्या है

    जिन्दगी तो प्रेम की एक गाथा है, जिन्दगी भावुक प्रणय की छाँव है, जिन्दगी है वेदना की वीथिका सी जिन्दगी तो कल्पना की छुवन भर है। जिन्दगी है चन्द सपनों की कहानी, जिन्दगी विश्वास के प्रति...


  • कहानी है औरत

    कहानी है औरत

    संस्कृति सभ्यता सौन्दर्य की कहानी है औरत —- सूर्य की पहली किरण के साथ द्वार पर लक्ष्मी के स्वागत को उरेन डालने से लेकर रात के सुकून की कहानी है औरत ….. मंथरा कैकयी द्रोपदी तो...