Category : कविता





  • हिंद का गांव

    हिंद का गांव

    शरीर बसा दूर देश में किंतु मन में बसा हिंद के गांव है, जहां की बोली में सरलता और जीवन में सहजता का भाव है। माटी की पगडंडी पर जब बारिश की पहली बूंदें गिरती है...


  • बहस

    बहस

    पुरजोर बहस हुई कागज़ और कलम में मोल किसका है ज्यादा? बिन कलम मूल्य हीन कोरा कागज़ महज़ चने की पुड़िया पानी में तैरती बच्चों की नाव, कागज़ रहित कलम बढ़ाता जेब की सुंदरता बालों को...


  • दिलखुश जुगलबंदी-13

    दिलखुश जुगलबंदी-13

    सबसे पहले हमें ही जागरुक होना होगा जुगलबंदी के गुलशन में रंगबिरंगे कुसुम खिलने लगे सूर्य की सहस्र रश्मियां पंखुड़ियों को चूमने लगीं ज्ञान का सौरभ फिज़ा में इत्र सा घुलने लगा मंद मंद पवन संग...

  • कविता – नारी

    कविता – नारी

    लिखती हूं आज फिर नारी के बारे में! इस सोये संसार की आत्मा को जगाना चाहूंगी! आज फिर मैं नारी को उसकी पहचान दिलाना चाहूंगी! रूप तो बहुत नारी के इस धरती पे! उन ही रूपो...