Category : कविता


  • खलती है बेटियां

    खलती है बेटियां

    बेटी से बनकर बहू जब बांट देती है  परिवार को तब खलती हैं बेटियां आजादी के नाम पर करती है मनमानी लेती है आधुनिकता की आड तब खलती हैं बेटियां भाई के प्यार के बदले जब...




  • हाउसवाइफ

    हाउसवाइफ

    हां मैं सिर्फ एक हाउसवाइफ ही तो हूँ समाज की नजरों में जिसका कोई वजूद नहीं । सपनों को आंखों में बसाए , ख़्वाबों को दिल में छिपाए कब बड़ी हो जाती है लड़की उम्र का...

  • इश्क़

    इश्क़

    जीने की आरजू में रोज मरते हैं , हम वो परवाने हैं जो इश्क़ की आग में रोज खुद को फना करते हैं । तड़फते हैं दिन भर इश्क़ के चूल्हे में रात को इश्क़ के...

  • बेटियां

    बेटियां

    मोम की गुड़िया सी कोमल होती है बेटियां माता पिता के दुलार में पलती है बेटियां अनजान घर की बहू बनती तब भी बेटी का ही रूप होती है बेटियां खुदा की सौगात ,जमा पूंजी का...


  • बेटी ही धन है

    बेटी ही धन है

    बेटी ही धन है बेटी है तो जन है बेटी है तो मान है बेटी है तो आप भाग्यवान है। परिवार की ऊजाला है बेटी माँ बाप की रखवाला है बेटी बेटी है तो बहार है...