Category : कविता

  • कविता

    कविता

    जाने कैसे आ जाता है कलियों के अन्दर मकरन्द आती कैसे है फूलों में सुन्दर मोहक मधुर सुगंध नित्य भोर में प्यारी कोयल क्यूँ बागों में जाती है जाकर वह मीठी बोली से सबका दिल बहलाती...

  • मेरी कलम

    मेरी कलम

    जब से क़लम उठाई है, तब से मन करता है, कि जो लिखूँ सच लिखूँ पर दुनिया हमें ना सच लिखने देती है ना बोलने ! आखिर करूँ तो क्या ? फिर माँ ने कहा बेटा...

  • योग

    योग

    योग है, हमारे जीने का नया रास्ता, जो करें योग रहे स्वस्थ ! ना बढ़े मोटापा ना बढ़े मधुमेह ! आओ बहन योग करने चले ! सारी बीमारियों को छोड़ा कर योग चले ! तुम भी...

  • पहली बारिश

    पहली बारिश

    वो बचपन की पहली बारिश याद है हमें , जब मैंने उसे अपने हाथों पर महसूस किया था ! जब माँ ने मेरे साथ बैठ कर ही आँगन  में खाना खाया था ! वो बचपन की...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    इक कुर्सी और खिड़की जैसे ज़िन्दगी सिमट के रह गयी थी वहीं जीवन की सांझ न खत्म होता इंतज़ार इंतज़ार भी अपने दिल के टुकड़ों का जो दिल मे रहते है मगर नज़रों से कोसों दूर...

  • काल – चक्र

    काल – चक्र

    अपनी बढ़ती स्वार्थवृत्ति पर लगा अंकुश निश्चित ही तेरा निज तन-मन होगा खुश संचित – संपत्ति रख सदा पावन – पवित्र महाकाल  की  दृष्टि  यहाँ – वहाँ सर्वत्र झूूंठ-कपट-छल कब तक साथ निभायेगा एक -न- एक...

  • पी रही हूँ

    पी रही हूँ

    पी ही हूँ गरल की तरह कर आत्मा का हनन बरस रहा है आज फिर आसमां से पानी में मिला वो निकल चिमनियों के मुख से मिल गया प्राणदायनी के साथ जो पी रही हूँ आज...