कविता

इतिहास रचो तुम

नारी तुम माँ हो, बहिन हो, पत्नी हो, बेटी हो, कई अलग रूपों से गुजर कर भी तुम्हे किसने अबला बना दिया ? कन्या का पूजन करवा कर भी तुम्हें कई बार गोद में ही मरवा दिया। हुस्न की जाल में तुम्हारी अस्मत को भी लूट लिया। आदमी ने मकान बनाया औरत ने उसे घर […]

कविता

मनभावन सावन

वो मनभावन सावन मेरा इस बारी फिर से आया है प्यारे मायके की यादों का रेला संग में फिर से लाया है, फिर डाल भरी है अमुआ से और कोयल कूकी डाली पर बेईमान हुआ है फिर मौसम और रंग चढ़ा मतवाली पर सखियों संग बैठी मै झूले पर सपना मुझको आया है प्यारे मायके […]

कविता

बूँद …. बूँद पानी

बादलों की गोद से उतरती भावनी रसधार छम -छम….. रिमझिम पायल पहने नाच – नाच …. आँगन हिलोर हर्ष करती धरती मुखर संग खेलती उसके घर हरीतिमा लहराती धानी चुनर गीत गाते पत्तों संग हवा नाचते मोर एक पाँव पे पीहू शोर मचाते जो पावस के दिन बरसते जाने कब किसके शब्द झरे मेघ जब […]

कविता पद्य साहित्य

रावण भी ऐसा ना था

जाने कैसे-कैसे निशिचर घूम रहे हैं मानव बन, मानव रूप लिये फिरते हैं गलियों में दानव बन। होलागढ़ थाना क्षेत्र के देवापुर गांव में अब, नृशंसता के शिखर पे पहुंचा राक्षेश्वर रावण बन।। ना ना गलत बोल गया हूं, रावण भी ऐसा ना था, पापी, लोभी, रक्तपिपासू पर निर्दय ऐसा ना था। सृष्टि और श्रेया […]

कविता

10 ग्लैमरस क्षणिकाएँ

1. स्वर्गीय स्वर्गीय होने के लिए मरना पड़ता है व ईश्वर स्वर्ग में रहते हैं ! जब ईश्वर प्राप्ति हेतु मरने ही होंगे, तो पाखंड में भटकना क्यों ? 2. तीन चीजें इस लॉकडाउन में तीन ही चीजें हुई, बाल बढ़ा, बाल झड़ा, बाल पका ! पर बा…. मुड़ा नहीं ! 3. टंडेली कुछ लोग […]

कविता पद्य साहित्य

कैसे जीवित रखे

हर आंगन में ख़ुशियों का अंबार नहीं होता, नित्य होते इम्तेहानों का कभी पार नहीं होता, कोशिशों में लगा ही रहता है खेवनहार सदा, आजीवन वहां कभी कोई त्यौहार नहीं होता।   हफ्तों तक भूखे रहते सैकड़ों ही परिवार यहां, जहां दो वक्त की रोटी का भी जुगाड़ नहीं होता, आधा भोजन थाली में छोड़ […]

कविता पद्य साहित्य

अंतिम गुरु

सर्वप्रथम शिक्षक हम सबके, माता और पिता बने, बाल्यकाल में उन्हीं से, हमें शिक्षा के उपहार मिले, द्वितीय शिक्षक फ़िर हमारे, आदरणीय गुरुदेव बने, जिनकी शिक्षा के बलबूते, हम ज्ञान की सीढ़ियां चढ़े, किंतु शिक्षा प्राप्त करना, कभी भी पूर्ण कहां होता है, फ़िर ठोकरें खाकर, हम स्वयं ही स्वयं के शिक्षक बने, ग़लतियों ने […]

कविता

एक अधूरी कविता

मेरी अधूरी कविता मेरी ही तरह सम्पूर्णता को तलाशती है मैं सम्बन्धों में पूर्णता खोजती हूं वो शब्दों से पूरी होना चाहती है मैं गुणों से अधूरी हूँ उसमें भावनाओं की कुछ कमी सी है।। मैं अनंत में खोना चाहती हूं वो कागज पर बिखरना चाहती है मैं भीड़ में अकेली हूं वो मेरे बिना […]

कविता

सावन की पहली बर्षा

पानी की दो बूंद गिरी जगी किरण एक आशा की सूखी हुई धरती और मन ने ली एक अंगड़ाई धरती के आंचल में दबे बीज में तरुणाई भर अाई पाकर  नमी वो भी इठला बाहर उघर आया शुष्क मन हुआ भीगा भीगा टिप टिप जो बरसा पानी झंकृत हो बज उठा मन  का सितार मन […]

कविता

एक ओंकार

ये देवालयों से आने वाली आरती की आवाजें मस्जिदों की अजाने गुरुद्वारों की अरदास जो कानों में अा रही हैं ध्यान से सुनो कुछ कह रही हैं चिल्ला चिल्ला के कह रही हैं सुनो मेरी आवाज मेरी आवाज़ में कोई नहीं फर्क सब आवाज़ों में गूंज रहा है एक ही शब्द एक ही नाद ओंकार […]