Category : कविता

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    (1) वे खड़े पहाड़ भीग रहे दरक गए बरखा बौछार बह रहा गुमार॥ (2) ये बाढ़ बहाव पानी पानी टपके नैन छत न छप्पर नदी तलाव घर॥ महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी


  • खुशबू

    खुशबू

    कैसे कैद कर पाओगी खुश्बू को तुम वो फूलों की हो या तुम्हारे कर्मों की अच्छा लगता है तुम्हारा मौन हमेशा लोगों से सुनता गाथा तुम्हारे कर्मों कीज़िंदगी के जंग में सदा तुम्हें देखता रहा लड़कर...

  • फ़कीरों की बस्ती

    फ़कीरों की बस्ती

    मैं फ़कीरों की बस्ती में कहीं जा पहुंचा न जाने फिर क्यूं हंगामा खड़ा हो गया मंदिर की घंटी बजते ही लोग मुड़ जाते ईश्वर से हटकर वो मेरी ओर देखने लगा नफ़रत की दीवारों में...

  • मौजूदगी

    मौजूदगी

    न जाने कितनों दिनों से बारिश का कहर, बाढ़ का पानी अंदर बाहर बाढ़ ! तुम्हारा भीतर से यूँ बह जाना अनिवार्य लगता है कभी कभी ! अच्छा है तुम औरत हो ! मगर मेरी आँखें...

  • खामोशी

    खामोशी

    खामोशी ने आकर दस्तक दी मैंने दरवाज़ा खोला तो मुस्कुराई मुझे आश्चर्य हुआ… उन्हों ने मुझे पूछा; ऐसा भी क्या हुआ कि मेरे आने से तुम्हें आश्चर्य हो रहा है ? मैंने कहा; तुम खामोशी हो,...

  • सुप्रभात

    सुप्रभात

    सूर्य की कोमल किरणे हौले से तुम्हें जगा रही है रुपहली सुबह तुम्हें अपनी आगोश में लिए बहुत सारा प्यार देने को बेताब है आँगन की हरियाली पर ओस बिंदु तुम्हें लुभाने को बेक़रार है आओ...

  • आँखों में सपने पलते है

    आँखों में सपने पलते है

    सच्चाई को भुलाए, बस अपनी ओर बुलाए, गहरी निंद्रा में सुलाए,  मनचाही राह  चलते है । आँखों में सपने पलते है ।। डूबते को मिले कोई  सहारा, काश मिल जाए कोई किनारा, होकर बिल्कुल ही बेसहारा,...


  • जज्बात

    जज्बात

    जज्बात की तेज आंधी में प्यार के फूल // कहाँ खिलते हैं // डोर से टूटी पतंग को आसमान कहाँ मिलते हैं । शाखों पर हलचल तो हुआ करती है // हवा के झोंको से //...