Category : कविता

  • सृजन-से-सृजन

    सृजन-से-सृजन

    सृजन-से-सृजन होता है, यह तो आप जानते ही हैं. पेड़-पौधे-वल्लरियां, मनुष्य-प्राणी, कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी सभी सृजन-से-सृजन करने के अनुपम उदाहरण हैं. हमारे पाठक-कामेंटेटर्स तो कविता-से-कविता का सृजन करने में इतने माहिर हैं, कि प्रतिक्रियाओं में ही कवि...

  • पद

    पद

    कृष्ण जन्माष्टमी पर आप सभी मित्रों को हार्दिक बधाई, ॐ जय श्रीराधे कृष्ण! “पद” मैं हूँ गोकुला का गोपाला आज हमारो जन्म हुवो है, मैं यशुमति का लाला यमुना जी के निर्मल जल में, नाग कालिया...

  • पिता और बेटा

    पिता और बेटा

    मजदूरी करके भी हमको उसने पढ़ाया है। कचौड़ी के बदले उसने सूखी रोटी खाया है। हम पढ़-लिखकर इन्सान बनेंगे, यह उम्मीद थी कि वह खुद जगाया है। जब पिया सिगरेट बेटा, देखना वह शरमाया है। उन्होंने...

  • पुकार

    पुकार

    जन्माष्टमी पर्व की सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं । कन्हैया आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।।💐💐💐 ओ धेनु चरइया कान्हा , माखन चोर कान्हा , असुरों का तुम करते , उद्धार कन्हैया रे, तेरी लीला है अपरम्पार,...

  • क्या तब?

    क्या तब?

    तप्त अग्नि में जलकर राख हो जाऊंगा। एक दिन मिट्टी में मिलकर खाक हो जाऊंगा। तब मिट्टी को रौंदकर क्या मुझे  याद करोगे? झूठे ख्वाबों की शायरी से क्या मेरा इंतजार करोगे? करना है इश्क़ तो...

  • हाइकु

    हाइकु

    ललही छठ की हार्दिक बधाई “हाइकु” ललही छठ लालन को आशीष माँ को नमन।। जै छठ मैया मंगल दायिनी माँ पग वंदन।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी


  • समय

    समय

      माँ ने आँगन में जो बोए थे सपनो के पौधे कभी, वक्त की कंकरीट के आगे वो पौधे ही उजड गए। पिता ने जो उम्मीद का दामन थामा था कभी, वो उम्मीदे घर छोड़,नया असियां...

  • कान्हा की मुरली

    कान्हा की मुरली

      कान्हा पूछ रहे है राधा से,बताओ मुरली कहाँ छुपाई। कान्हा को परेशान देखकर,राधा मन ही मन मुस्काई। कान्हा तुम मुझसे मिलने पल दो पल ही तो आते हो। यहाँ आकर भी मुरली सौतन को छोड़...

  • मां की ममता

    मां की ममता

    मां की कोख हमें, दुनिया के गुण सिखाती है। मां की लोरी हमे, प्यारी नींद सुलाती है। मां अपने कदमों से हमें चलना सिखाती है। मां ममता की मूरत है, हमें प्यार करना सिखाती है। मां...