कविता

उज्ज्वला छंद

प्यार से तुम लगा लो गले । पाप से हूँ भरा मैं भले ।। बाँह मेरी थाम लीजिए । दर्श अपना दिखा दीजिए ।। मत किनारा करो आज तो । आशीष दे करो राज तो ।। भक्ति साज तो देना हमें । कष्ट से अब उतारो हमें ।। थाम कश्ती को लो न कभी । […]

कविता

ज़रा याद करें

आओ मिलकर विचारों की ज़रा आग जलाए। डूब रही है जो देश की हस्ती ज़रा उसको रोशनाए। मर मिटे है जो अपने देश के लिए ज़रा उनकी याद सब को मिल करवाएं। जो कहते हैं यौवन आता है एक बार मस्ती का। ज़रा उनको भगत सिंह के आज तक गूंजते नव यौवन की कहानी सुनाएं। […]

कविता

कैसे बचाओगे बेटियो को तुम

शिक्षा के मन्दिर मे , बलात्कार करते हो तुम, गुरु के पवित्र नाम पर , कलंककित होते हो तुम, हे भारत के ज्ञान दाता , ज्ञान के मन्दिर को , बेटियों की इज्जतो से खेलते हो तुम , गुरु के नाम को बदनाम के रंग से रगते हो तुम, लड़कियो के शरीर को खिलौना समझ […]

कविता

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस की सुबह आई है, सबके चेहरे पर खुशियां छाई हैं। अधिकार हमें इसी दिन मिले थे, जीवन को आगे बढ़ा सकें हम, नयी उम्मीद और नये पैगाम लाया है। देश हमारा करें तरक्की, यही अहसास दिलाता है। संविधान का सब करें  सम्मान, यही भावना जगाता है। हाथ थाम कर एक दूसरे का, आगे […]

कविता

वो सवाल से डरता बहुत है

वो सवाल से डरता बहुत है जो भी जुल्म करता बहुत है क्यों हुआ हादसा, क्यों लुटे रहजनें अगर पूछो तो फिर लड़ता बहुत है तालीमो-ओ – किताबों से ना कोई वास्ता हुई गर संजीदी बातें तो बिगड़ता बहुत है धर्म,जात,प्रान्त,संप्रदाय मिटाने की बातों पे घड़ी भर में आँखों में ख़ून उतरता बहुत है किसकी […]

कविता

मन्नत का धागा

लाल रंग कच्चा इरादों में पक्का बाधं आयी ..सुन तेरे नाम का धागा सच्चा.. अहसास सारे मन के सब तेरे इक-इक गांठ लगा आयी..सुन पूरे तेरे इरादे जहां हो अच्छा.. थोड़ी सी मुस्कुराहट तेरे साथ की वो आहट बातों-बातों में रब से मांग आयी…सुन मेरी मांग में तेरे प्रेम का लाल सिंदूर पक्का… अहसास हम […]

कविता

डंक (कविता)

एक छोटा सा प्रयास रंग लाई दबी सहमी सी रहने वाली गुड़िया वर्षों बाद खुल कर मुस्कूराई। हर रोज पूछती थी  माँ मुझे बंदी क्यों बनाई क्या मैं तेरी बिटिया नहीं हूँ माई ? चुपके से वह आँसू पोछ लेती थी आत्म रक्षार्थ दाव-पेंच  बिटिया का आत्मविश्वास बना अट्ठारह वर्ष की होते ही  बिटिया को […]

कविता

कोई तो है

  मेरे मन को छूने का हुनर वो जान गया है। आँखों मे छिपे अश्को को पहचान गया है।। कोई रिश्ता नही है उससे लेकिन वो मेरे मन के हर कोने के छिपे दर्द को पहचान गया है। हर एक रिश्ता जब मुझे हर वक्त छल रहा था। वो मेरे दर्द को अपना मान मेरे […]

कविता

तैयारी

  मिट्टी की स्याही लेकर उंगलियो की कलम बनाकर, खुद के नए बूत को बनाने की फिर तैयारी कर ली है। हवाये कितनी भी विपरीत दिशाओ में अब चल ले, हमने हवाओ से भी लड़ने की तैयारी अब कर ली है। तुफानो से डगमगा रही जो नैया,तो मांझी का इंतजार क्यों, खुद मांझी बनकर अपनी […]

कविता

मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत कहां होगा लुटते अस्मिता नारी का देखा ज्वाला बहती चिंगारी का देखा, मानवता को गिरते देखा उजाले को घिरते देखा, मेरे सपनों का भारत कहां होगा कृषि प्रधान देश का नाम है कृषक को आत्महत्या करते देखा, बदनाम गिरगिट रंग बदलने में माहिर नेताओं को इसमें देखा, मेरे सपनों का भारत […]