Category : कविता

  • जानते हैं सब

    जानते हैं सब

    क्या है इस संसार में, जानते हैं सब। एक ही मालिक है सबका, ईश्वर, कहो या रब गर है भाई हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई फिर ये आपस में हैं करते क्यों प्रतिदिन जंग क्या है इस...

  • आपाधापी के कूप में

    आपाधापी के कूप में

    गर्मी का मौसम आते ही बहाता है पसीने के पनारे सर्दी का मौसम अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराता है दांत कट-कटाकर प्यारे वर्षा रानी प्रेम से अपने साथ लाती है आनंद-जल के धारे, लेकिन, बसंत ऋतु आती...





  • रखिये

    रखिये

    हर शौंक को आप खूब रखिये बेखबर बन कर सब खबर रखिये चाहे नजर हो आसमान पर पांव लेकिन जमीन पर रखिये चाहे कुछ भी कहें लोग अपने को विचलित मत रखिये मुझे दिल मे अगर...


  • हाय – हाय ये मजबूरी

    हाय – हाय ये मजबूरी

    मौसमी बरसात में मेढक मदारी हो गए। दुराचारी थे रात मे, प्रातः पुजारी हो गए, चार ही साल तो हुए ,दिखायी क्या हमने एकता , जालीदार टोपी पहनने वाले, मंदिर जाने को बाध्य हो गए, मौसमी...

  • राह

    राह

    क्यों देखती हूँ बेवजह तेरी राह जबकि ख़बर है न आओगे तुम खो चुके हैं अहसास सारे मर गए हैं रिश्ते हमारे फिर भी दिल तलाशता है तुम्हें पता है इन अहसासों को कभी न समझ...