Category : कविता


  • शिक्षण क्रांति

    शिक्षण क्रांति

    जब तक न हुई थी हरित क्रांति, सर्वत्र व्याप्त थी विपदा-भ्रांति, हरित क्रांति से मिली हरीतिमा, अब करनी हमको शिक्षण क्रांति. भटक रहे हैं छात्र हमारे, अनुशासन का काम नहीं है, सभ्यता को भूल गए वे,...

  • अंतद्वन्द

    अंतद्वन्द

    समय खेलता है सबके साथ.. और हम उसके मोहरे हालातों के जाल में, यूँ घेर लेता मानो! तमाशा बनकर रह गए हम इस जिंदगी के खेल में कभी जीत की खुशी देता मन को चैन सुकून...

  • अपनी नायिका खुद बना जाए

    अपनी नायिका खुद बना जाए

    सृष्टि में परिवर्तन अहोरात्र सम्पन्न हो रहा है अपनी तमाम पुरातन छवियों को तोड़ता हुआ जीवन एक नए समय में चला आया है। ऐसे में जरूरी है कि स्त्री भी अपने अंधेरो और उजालो को अब...



  • होली पर एक रचना

    होली पर एक रचना

    इन्द्र्धनुष के रंगों जैसा, मुझको रंग दो, होली के रंगों को, सतरंगी कर दो। राग-द्वेष, बैर-भाव, नफ़रत जड़ से मिटाकर, बासंती अवसर को, खुशियों से भर दो। हिन्दू-मुस्लिम की बात नहीं करता यारों, मानवता जन-जन के...

  • खुद हर्षो, सबको हर्षाओ

    खुद हर्षो, सबको हर्षाओ

    हम आत्मिक प्रेम के दीवाने, हम आत्मिक प्रेम के परवाने, हम आत्मिक प्रेम पाना चाहें, आत्मिक प्रेम ही हम देना जानें. है आत्मिक प्रेम में चाह नहीं, आत्मिक प्रेमी को परवाह नहीं, वह निज मस्ती में...

  • “पिरामिड” 

    “पिरामिड” 

    ये नींव खोखली अंदर से हिलता खंभा बहुत अचंभा प्यारी अप्सरा रंभा॥-1 ये जड़ चेतना अंकुरण राग वैराग चिंतन स्फुरण अंदर तक जाते॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • प्रेम जिंदगी का कवच !!!

    प्रेम जिंदगी का कवच !!!

    मुसाफि़र सी इस जिंदगी में जो किसी के साथ चलना जानता है जो साथ चलते-चलते किसी का हो जाना चाहता है जो किसी का होकर उसे अपना बना लेता है ऐसी पगड‍ंडियां सिर्फ औ सिर्फ प्रेम...