कविता

कोरोना

कोरोना महामारी तीव्र गति से चल रही है  थम सी गई है साँसे ये संसार की,  हर तरफ सन्नाटा भयानक- सा वातावरण  ना दिख रही वे रौनके बाजार की!!  चारों ओर महामारी ही महामारी है  ज्यों लगे हमें यह जीवन अशुभ कारी है  कौन बचाए,इस पाप अधर्म से जैसे, युद्ध अभी भी जारी है!! अस्त्र […]

कविता

अनुभूति

जिक्र नहीं इसका ये अर्थ नहीं, उनका अब हमें कोई फिक्र नही। जीवन की दौड़ में न भूले है न विसरे है उनको अंतर्मन की राहों में सिमरा है हर पल उनको। छोड़ा है बस उनके साथ चलना, मगर छोड़ा नही कभी उनका साथ निभाना। अनजान किया बस अपनी बहकती नजरों से मगर आज भी […]

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बेटी हम शर्मिंदा हैं

बेटी हम शर्मिंदा हैं, कातिल तेरा जिन्दा है। किया कृत्य तेरे साथ है, दुःख कितना तुमने देखा है।।                  बेटी हम शर्मिंदा हैं………. नहीं शर्म आती दरिंदो को, ना देखें उम्र ना देखें मासूमियत। इन को तो अपने मतलब से मतलब, क्या इनके घर में नहीं है बेटी।। […]

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धरती की संतान

हम सब धरती की संतान हैं चलो अच्छा है कि इतनी तो समझ अभी बाकी है हममें, पर मेरे प्यारे समझदार भाइयों बहनों क्या सिर्फ कहना? मान या समझ लेना ही पर्याप्त है या फिर हमें भी कुछ करने की जरूरत है? आखिर जब धरती माँ ने अपना विशाल आँचल अपने बच्चों के लिए फैला […]

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मूड बनाइये जरा

ईमानदारीपूर्वक मूड बनाइये ! मैंने लॉकडाउन अवधि में फोन पर बात नहीं किया है, टीवी नहीं है, बीवी नहीं है, घर पर दूरी लिए हूँ और पुस्तकें ही सहारा है ….और क्या ? ×××× बे’वफ़ा तो वे हैं, जो वफ़ा को बे.बे कहते हैं, बी.बी नहीं ! ×××× मुझे बारिश में भींगना अच्छा लगता है, […]

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हम हैं धरती की संतान

हम सब धरती की संतान हैं अच्छा है, समझ है हममें, हम है समझदार भाइयों- बहनों हमारा क्या कहना इसलिए तो भगवान ने हमें बनाया साहित्यकार धरती की भलाई करने को हम सदा है तैयार। हमें अब बहुत कुछ करने की ज़रूरत है आखिर जब धरती माँ ने अपना विशाल आँचल फैला रखा है हमें […]

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मेरे गांव में

रोज सूरज उगता था एक जैसा… परन्तु आज अलग उगा है जिसमें कोई आकर्षण नहीं नजर आ रहा है फीका-फीका सा जो कल तक चलती थी शीतल मंद-मंद हवा मेरे गांव में, वो आज हो गई है बेहद जहरीली । कल हुए दंगों ने मेरे गांव में फैला दी है शमशानों सी काट खाने वाली […]

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दूर गगन में उड़ते पंछी

पंछी उड़ते दूर गगन में सभी सीमाओं से बहुत दूर यह मेरा है यह तेरा है की चिंता नहीं बस मंजिल पर पहुंचना है ज़रूर यह पूरा गगन है मेरा हौसलों से मेरी उड़ान है एक पेड़ नहीं है मेरा घर मेरा तो अपना सारा जहान है पूर्ब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण कोई […]

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दुनियां है फ़ानी

मालूम है दुनियां है फानी आनी और जानी फिर भी डरता है यह मन इसीलिए तो कैद है न होता जो यह डर घूम रहा होता आजाद परिंदा बन आजादी पे रोक है दिल में भय है मालूम है दुनियां है फ़ानी दो चार दिन की है ज़िंदगानी

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अन्यथा

संविधान की दुहाई भी दोगे और देश के संविधान कानून का मजाक भी उड़ाओगे, अपने लिए अलग औरों के लिए अलग ढंग से राग वैरागी गाओगे। जब देश सबका संविधान सबका तब अलग अलग परिभाषा भला कैसे गाओगे? भाई को भाई से लड़ाकर कौन सा सूकून पाओगे? बेकार का लफड़ा न पैदा करो यार, संविधान […]