कविता

इकरार 

अब रूहों से रूहों का, जहाँ में इकरार नहीं होता। प्यार तो होता है जमाने में, पर प्यार सा प्यार नहीं होता। व्यापारी बन बैठा ये जमाना, है रूप और शोहरत का दीवाना। खूब छलकते है ख्वाहिशों के जाम, मगर हकीकत का दीदार नहीं होता। ख्वाहिश मंदो की ख्वाहिश है, मोहब्बत अब सिर्फ नुमाइश है। […]

कविता

अधरों की रानी (कविता)

मैं बांसुरी हूं, इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे जो ‘सुरी’ के पहले, ‘बे’ उपसर्ग लगाकर, मुझे बेसुरी कहने से बाज़ नहीं आते हैं, वे मुझे महज बांस की पौरी मात्र समझते हैं, मुझमें पोल को देखते हैं और देखते हैं मेरे छेद, वे मेरी सूरत ही देखते हैं पर, […]

कविता

प्यार ही धरोहर है

प्यार अमूल्य धरोहर है इसकी अनुभूति किसी योग साधना से कम नहीं है, इसके रूप अनेक हैं लेकिन नाम एक है। प्यार रिश्तों की धरोहर है और इस धरोहर को बनाये रखना हमारी संस्कृति एकता और अखंडता है , यह अनमोल है। प्यार निर्झर झरनों की तरह हमारे दिलों में बहता रहे यही जीवन की […]

कविता

प्रेम क्या है

प्रेम कोई प्रर्दशन नहीं है, प्रेम झूठी उपासना नहीं है, प्रेम अतृप्त वासना नहीं है, प्रेम कोई दिखावा नहीं है। प्रेम श्रृंगार भी नहीं है, प्रेम ना ही सत्कार है, प्रेम कोई परीक्षा भी नहीं, प्रेम कोई समझौता भी नहीं। प्रेम कोई झूठे स्वप्न नहीं दिखाता, प्रेम मोह जाल में भी नहीं फंसाता, प्रेम में […]

कविता

नाव…

रोज़ बीनती थी… कुछ लकड़ियाँ रोज़ ही तो… देखते ही देखते एक ढेर खड़ा था आँगन में। आश्वस्त था मन अंतिम समय के लिए चिता की सामग्री भरपूर थी। पर एक रोज़ अचानक…. जी को न जाने क्या सूझी हाथों को इशारा हुआ और एक नाव बना डाली लकड़ियों की। फिर तो किनारे से बीच […]

कविता

वादा

सोचती हूं कितना छोटा सा शब्द है ये “वादा” पर इसका वजूद साँसों की अंतिम छोर तक…… कितने तरह के वादे होते हैं प्रेम का वादा दोस्ती का वादा रिश्तों का वादा प्रकृति का वादा और न जाने कितने तरह- तरह के वादे हर दिन हजारों की तादात में वादे लेते हैं जन्म और फिर […]

कविता

बेटी

यह भारत बेटा- बेटी पर अनजान दिखाई देता है, ईश्वर की उस रचना का अपमान दिखाई देता है। जो बेटी को कोख में मारे वो कैसा हत्यारा है, क्यों बेटी से प्यार नहीं और पुत्र सुता से प्यारा है। यदि लड़की से नफरत है तो पत्नी भी एक लड़की है, जिसने तुमको जन्म दिया है […]

कविता

सच बताओ

सच बताओ मेरे याद करने से तुमको हिचकिया आती तो होगी अकेले में जब मेरी याद आये तब थोड़ा सा मुस्कुराती तो होगी क्या मेरा दिल ही करता है बात करने को तुम्हे भी कुछ गुफ्तगू आती तो होगी दूर हो कर तो मै रोता हूँ सच बताओ तुम थोड़ा उदास होती तो होगी जब […]

कविता

संबोधन

खत लिए बैठी नायिका संबोधन में उलझी हो क्या ऐसा संबोधन जो हो प्रेम सराबोर नायक को दिखा जाए संबोधन में छिपा प्रेम प्यार अपनत्व करुणा का लहराता सागर हृदय का उदगार प्रिय का। नाम उसका एक है पर अलग अलग रूप में पुकारते हैं सब तब होती ज्ञात रिश्तों की गहराई हृदय की अंतरंगता […]

कविता

काल चक्र घूमता है !

काल चक्र घूमता है, केन्द्र शिव को देखलो; भाव लहरी व्याप्त अगणित, परम धाम परख लो! कितने आए कितने गए, राज कितने कर गए; इस धरा की धूल में हैं, बह के धधके दह गए ! सत्यनिष्ठ जो नहीं हैं, स्वार्थ लिप्त जो मही; ताण्डवों की चाप सहके, ध्वस्त होते शीघ्र ही ! पार्थ सूक्ष्म […]