कविता

कोरोना

हे कोरोना हे कोरोना जरा मेरी बात तो सुनो ना क्या तू चीन देश से आया है वुहान शहर में जन्म पाया है तेरा भय ही सबको छाया है सबने महामारी तुझे बताया है देश दुनिया सामने तेरे नतमस्तक है जहाँ जहाँ होती तेरी दस्तक है सब रिश्ते नातों को तोड़ा है जब से इंसानो […]

कविता

अजीत जोगी : सादरांजलि निवेदित

देश के सुयोग्य आईएएस रायपुर के जिस कार्यालय में कलेक्टरी की, उसे ही सीएम हाउस भी बनाया गया छत्तीसगढ़ बनने के बाद तुरंत रायपुर में राजधानी में कांग्रेस के तेजतर्रार प्रवक्ता रहे प्रवक्ता के रूप में दीवाने देश और छत्तीसगढ़ के पहले सीएम बने अनुसूचित जाति के रूप में विवादित रहे एक्सीडेंट में वैशाखी मिले […]

कविता

हमारी विरासत चूल्हा 

माँ के हाथ की सोंधी रोटी बनती थी इस चूल्हे पर चौके में बैठ सारा परिवार भोजन का लेता आनंद कभी आग जब धीमी होती धुआं उगलता चूल्हा तब माँ, छोटी फुकनी ले हाथ में फूंकती जोर जोर से चूल्हा रोटी एक तवे पर डलती एक आगी पर सिकती पिता के कहने पर पापड़ भी […]

कविता

माँ

माँ चंदन है माँ वंदन है, माँ स्नेहावतार है, माँ का प्रेम है पावन सरिता,माँ गंगा की धार है।। माँ के चरण है मथुरा,काशी, माँ ही प्रयागराज है, माँ के प्रेम स्नेह में डूबे, राम,कृष्ण अवतार हैं।। माँ का प्रेम है मधुर चांदनी, माँ सावन मल्हार है, माँ के चरणों में ही अर्पित, यह जीवन […]

कविता

पंच चामर छंद : छटा बिखेर प्रेम की

अतीत में भविष्य में, नहीं प्रवेश चाहिए सदैव वर्तमान में, अचिंत हो विराजिए।। विकार राग द्वेष का, न चित्त में रहे कभी। न लोभ मोह शोक हो, समाप्त व्यग्रता सभी।। प्रबुद्ध ज्ञान ज्योति की, बहे सु-धार नर्मदा। सुकर्म धर्म चित्त में, रहे अभीष्ट सर्वदा।। छटा बिखेर प्रेम की, घिरे न मेघ रोष का। निशंक तुष्ट […]

कविता

मैं गंगा हूं

भागीरथ के तप का हूं प्रतिफल, पतित पावन है मेरा जल । देवव्रत को दिया जन्म, जगत माता बनी तरणी हूं निर्मल । प्रचंड प्रवाह कर सके वहन, धरती में कहाँ इतना बल । शिव ने शिरोधार्य किया, प्राकट्य धरा में तब हुआ सरल । महादेव की जटा से धारा, प्रकट भई गोमुख के द्वारा […]

कविता पद्य साहित्य

मेरी 16 प्रासंगिक कविताएँ

डॉ. सदानंद पॉल की कविताएँ 1. इंद्राणी मुखर्जी किसी कुरूप पर कितने मर्दों को मरते देखा है प्रेम की देहलीला सुंदर युवती पर ही आ ठहरती है द्रोपदी सुंदरी थी राजकुमारी थी पाँच-पाँच पति पाई थी फिर भी दुश्शासन ने छेड़ने का साहस किया ऐसे में इंद्राणी मुखर्जी फ़ख्त तीन पतियों की रानी सिर्फ इतिहास […]

कविता

आज़ गगन में चांद हँसा है

******************** प्रिय तुम मुझसे दूर न जाओ, मेरे मन में आज नशा है। घूंघट खोल रही है कलियाँ , झूम रही है मतवाली अलियाँ , नन्दन वन की वायु चली है, सुरभित दीखी आज गली है, लगती सुखमय मधुरिम वेला, जीवन नन्दन मंजुल मेला, उठती मन में मधुरिम आशा, मिटती सारी थकित पिपासा, तुम भी […]

कविता

*गौ माता की महिमा*

पुत्र दिलाता दाल रोटियां गौ माता दूध पिलाती है, इसी लिए गौ को माता कहते है और जग में पूजी जाती है। पाप भार जब बड़े धरती पर तब रूप गऊ का धरती है, चार पांव में चार धाम है और अंग अंग में है तीर्थ। मां ने हमें ममत्व दिया है दूध नहीं अमरत्व […]

कविता

व्यंग्य कविता : संपादक बनाम कवि

हमारे एक संपादक मित्र अभी कुछ दिन पहले कोरोना से हो गए थे अपवित्र.. एक अत्यावश्यक कार्य से, लग गए थे लाइन में तब से ही घर में हैं क्वारेंटाइन में। एक बार जब हम हुए थे बीमार याद है…साथ में लाये थे फूल आज कैसे जाएँ हम भूल, इस नाते सामाजिक व्यवहार तो चुकाना […]