Category : कविता

  • जिंदगी

    जिंदगी

    भूल गया जो अपना पथ फिर मंजिल का है भान कहाँ । काँटों पर चलकर ही तो मिल पाता है अंजाम यहाँ । भूल गया जो दुख को अपने , सुख का है आभास कहाँ ,...

  • छंद पंचचामर

    छंद पंचचामर

    शिल्प विधान- ज र ज र ज ग, मापनी- 121 212 121 212 121 2 वाचिक मापनी- 12 12 12 12 12 12 12 12 “छंद पंचचामर” सुकोमली सुहागिनी प्रिया पुकारती रही। अनामिका विहारिणी हिया विचारती...

  • अल्फ़ाज़

    अल्फ़ाज़

      अल्फ़ाज़ कागज़ कलम लिए आज हूँ, तुमको सोचती आज हूँ , ख्वाब से निकाल लूँ, तुमको साकार कर लूँ , तुम्हारे ख्याल को , शब्दों में ढाल लूँ , कहाँ से शुरू करूँ , कहाँ...

  • चुनाव चिन्ह

    चुनाव चिन्ह

      गर्मया था चुनावी माहौल चारों ओर बज रहे थे सब ओर देशभक्ति के गीत, जो था कभी पक्का दुश्मन वो भी बन गया था नेताओं का सच्चा मीत। “मेरे देश की धरती सोना उगले भर...

  • मैं बेटी हूँ

    मैं बेटी हूँ

    मैं बेटी हूँ , मैं दुहिता हूँ , मैं इस दुनिया में आयी हूँ , मै हूँ रचना परमेश्वर की मैं प्यार प्रीत बन आई हूँ । मैं हूँ मान्या , मैं हूँ कन्या , उषा...

  • खुशियों के त्यौहार

    खुशियों के त्यौहार

    दिवाली गुरुपर्व ईद क्रिसमस सब खुशियों के हैं त्यौहार. सबको गले लगाकर झूमो, मिल कर गायें नाचें यार. हम सब भारत मां की संतान सुख दुख, रहन सहन, सब एक. सभी सुखी हों यही मनाते, मिल...

  • मेरे पास उदासी

    मेरे पास उदासी

    मेरे पास उदासी बैठी है सुबह से बातें कर रही है ताने मारती मैं मुँह लटकाए सुन रहा हूँ झेल रहा हूँ यातनाएँ बेवजह। क्या करूँ? झुलस रहा हूँ झेल रहा हूँ पीड़ा मार समय की...

  • दीया प्यार का

    दीया प्यार का

    दिल के किसी कोने में , तेरे प्यार का दीया , मैंने जलाया है,।। हमेशा जलता रहेगा । तेरे नाम का दीया, दिल के आंगन में, दीये में है तेल,। मेरे प्यार का , तेरी यादों...

  • भिखारी

    भिखारी

    वह जग को भला क्या देगा जो स्वयं ही है भिखारी, रहती सदा ईश से कामना हर लो प्रभु!मेरी व्यथा सारी। कर दो सुख की बरसातें बढ़े न दुख की अगन, पूरी कर दो मन की...

  • दिया और मैं

    दिया और मैं

    देहरी पर माटी का दिया जल रहा था। रात की गोद में सपना सा पल रहा था। कभी हवा, कभी अँधेरे से लड़ रहा था। मिटटी का था पर ज़रा न डर रहा था। मैंने कहा...