Category : कविता

  • प्रकृति

    प्रकृति

    जब हम अच्छा और बुरा सोचने लगते हैं और वार करने लगते हैं नैसर्गिकता पर। लेकिन प्रकृति ऐसा नहीं करती.. वह जानती है.. क्योंकि कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता है। बस होता है तो...

  • जय किसान

    जय किसान

    क्षितिज पर जब हो रही होती पैदाइश नए आदित्य की .. तड़के ही, कॉधे पर रख हल खेत की ओर चल पड़ता…. मन मेअसीम संभावनाओ को भर  ..हल चलाता  महनत  से … पसीना बहाता ,संग होता...

  • हिन्दी को प्रणाम

    हिन्दी को प्रणाम

    हिन्दी तो बस हिन्दी है । मां के सिर की बिन्दी है ।। उर्दु, अरबी या फिर चीनी, अंग्रेजी हो या जापानी, सारे जग में सबसे सुन्दर, सबसे मीठी हिन्दी है । हिन्दी मातृभाषा है ,...

  • मातृभाषा हिन्दी

    मातृभाषा हिन्दी

    खिलखिलाती हंसती जाती, गीत गति के गढ़ती जाती । अनेक विधाएं अदब की इसमें, और हमेशा बढ़ती जाती ।। देषी-विदेशी शब्दों को भी, उर्दु जैसे अरबों को भी, बाहर से आये हर आखर को, अपने अन्दर...

  • तस्वीर…..

    तस्वीर…..

    बरसों से एक तस्वीर तेरी बसा रखी है दिल में बड़ी शोख, शरारत भरी सूरत आंखों में लम्हा-लम्हा बड़े जतन से सम्भाला है मैनें कतरा-कतरा जिंदगी में समेट रखा है मैनें यादों के करवा में खुद...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    खेती हरियाली भली, भली सुसज्जित नार। दोनों से जीवन हरा, भरा सकल संसार।। भरा सकल संसार, वक्त की है बलिहारी। गुण कारी विज्ञान, नारि है सबपर भारी।। कह गौतम कविराय, जगत को वारिस देती। चुल्हा चौकी...


  • जिंदगी एक सिनेमा

    जिंदगी एक सिनेमा

    ये जिंदगी भी तो है इक सिनेमा नए किरदार नए अभिनय रंग अनेक कभी श्वेत श्याम सी यादें कभी रंग बिरंगी बातें कभी खिलता मौसम कभी ठहरा सा जीवन रोज नया सा रोल जिंदगी ये गोल...


  • महावीर

    महावीर

    जो दुविधाओं में पला हो जो कांटो पर चला हो जिस प्रिय को ईश्वर ने अद्भूत अनुपम दृढ़ता लाने जीवन के पाठ को सीखलाने मजबूत सांचे में ढाला जो धुन धुनी मतवाला हो अदम्य साहस वीरतायुत,...