Category : कविता

  • पर्यावरण बचाएं

    पर्यावरण बचाएं

    पेड़ों से इस धरा को सजाएँ वातावरण स्वच्छ बनाये आओ पर्यावरण बचाएं सब मिल के पेड़ लगाएं प्रदूषित कर दिया नदियों का पानी और तबाह हो रही है जिंदगानी जहाँ तहाँ मत कूड़ा फेंको धरा का...

  • विरह

    विरह

    प्रियतम तुम आयी थी, जीवन को महकाने, सूनी आँखो में फिर से नये सपने सजाने। वह बसन्त की स्वर्णिम बेला,वह मादक अँगडाई, दरवाजे पर घनी छाँव में , वह झूला पुरवाई। कुछ हरषाती तुम जब मुस्कुराती,...

  • सबको स्कूल जाना है

    सबको स्कूल जाना है

    सबको शिक्षा पानी है, शिक्षा का अधिकार हमारा शिक्षा की ज्योति जलेगी, हर बालक बालिका पढे़गी होगा ज्ञान का खूब संचार, मिटे अशिक्षा-अत्याचार। शिक्षा ज्ञान बढायेगी, मंजिल तक पहुंचायेगी शिक्षित बने हर परिवार मिला है शिक्षा...

  • गठबंधन के आंसू

    गठबंधन के आंसू

    आंसू  कई तरह के देखे-सुने-भोगे हैं खुशी के आंसू ग़म के आंसू तनहाई के आंसू जमहाई के आंसू हास-परिहास के आंसू उदासी के आंसू घड़ियाली आंसू महंगाई के आंसू ईर्ष्या के आंसू प्याज के आंसू आंखों...




  • दुनिया

    दुनिया

    आह की तुम बात न करो , आंसुओं को कब भिगो पाया है जहां बहती ही रही नदी निस्वार्थ भाव से किनारों को कब साहिल दे पाया है जहाँ । प्यार की तुम बात न करो...


  • उमंग

    उमंग

    अभी तो ज़रा खिले थे पात उनके दम अभी तो भरा था देख सूरज को मन हरा हरा था उठ चले थे आसमां की ओर लग रहा था सारा जहाँ अपना चढ़ती गिरती सांसों पर बस...