Category : कविता

  • इंतजार है

    इंतजार है

    आते हैं, छा जाते हैं, पर बरसते नहीं बादल राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर को  बारिश का इंतजार है. आये बादल, छाये बादल, जी भरकर बरसे थे बादल बाढ़ के बाद आर्थिक राजधानी बंबई को  पीने...

  • उमंग और हौसला

    उमंग और हौसला

    उमंग और हौसला को बाँध निकल पड़ी अपनी मंजिल की ओर आसान नही ये मंजिल रास्तो मे.आते है लाखो अड़चने फिर भी बुलंदियो को बूलंद किये हुये बढती जाती हूँ आगे थक के चूर होती हूँ...


  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    मम्मा ललक दुलार में, नहीं कोई विवाद। तेरी छवि अनुसार मैं, पा लूँ सुंदर चाँद.. पा लूँ सुंदर चाँद, निडर चढ़ जाऊँ सीढ़ी। है तेरा संस्कार, उगाऊँ अगली पीढ़ी॥ कह गौतम कविराय, भरोषा तेरा अम्मा। रखती...

  • कविता

    कविता

    आतंकवाद ************************ उमड़ता – घुमड़ता जहन में है प्रश्न आतंक के जहर से , विशाक्त होता जन-जीवन , जुनून ; सब कुछ तहस -नहस करने का | हर तरफ़ अनकहा डर , खौफ़ क्यों ? किसान...

  • कविता

    कविता

    सावन घन पुलकित है प्यासा मन नाच उठा अंतर मन बरसे यह सावन घन उमड़ घुमड़ बरसे|| मेघों से याचक बन देखो प्रेमी चातक स्वाती की एक बूँद माँग रहा कबसे|| बरसे अविरल बादल नेह के...


  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    वो वहाँ तत्पर बे-खबर प्रतीक्षारत मन से आहत प्यार की चाहत आप यहीं बैठे हैं॥-1 है वहाँ उद्यत आतुरता सहृदयिता नैन चंचलता विकल व्याकुलता-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • नारी

    नारी

    नारी ######## दर्द छुपा है सीने में आंखों में लाचारी है। सहमी सहमी सी रहती.. क्या यह भारतीय नारी है? सिसक रहा मासूम बचपन खून से लथपथ अंतरतल झुलस रहा कहीं यौवन कहीं बेड़ियों सी जकड़न...

  • नेतागिरी

    नेतागिरी

    चलो जीत गए हो तुम और हार गए अब हम। देखो मुहब्बत का वो अफसाना भी कहीं हो गया है गुम। तुम्हारी जीतने की जिद्द ने हमें हर बार हराया है। हम अच्छे-भले इंसानों को कट्टरपंथ...