Category : कविता

  • आँखें

    आँखें

    सच और झूंठ बताती आँखें | शर्म – हया दिखाती आँखें || मर जाये आँख का पानी, कठोर हृदय की पहचान कराती आँखें || प्यार – मुहब्बत की पहली सीढ़ी, शुरूआत कराती आँखें || घड़ियाली आंसुओं...

  • मंजिल तक पहुँचो

    मंजिल तक पहुँचो

    एक दरवाजा बंद हो जाए तुम्हारी कामयाबी का और खिड़की भी न खुले कोई तो यूँ ही कैद न रहो कमरे में या तो तोड़ दो बंद दरवाजा और पहुँचो अपनी मंजिल तक या कर दो...

  • ।। खंडहर।।

    ।। खंडहर।।

    कहते हैं खंडहर को, बरसात ने मारा। अब इसको सम्हालो, काम ये तुम्हारा। वो भूल जाते हैं, जिम्मेदारियां अपनी। सारी लोहें चुरा ली, बनकर के नकारा। टपकी जब एक बूंद, तो छाया गया नहीं। गिरता गया...

  • वयस्क होता बचपन

    वयस्क होता बचपन

    अक्सर … ट्रैफिक सिग्नल पर ख्वाब बेचते, ठण्ड में जमे से… अलाव सेंकते! जूठन से कहीं हैं भूख मिटाते, फुटपाथ पर जीवन के… सपने सजाते! कूड़े के ढेर से उम्मीद को चुनते, अपशब्द – गालियाँ रोज...


  • तुम

    तुम

    नदी जैसे बहती अपने में रहती वैसे बढ़ो तुम अपने में रहो तुम वृक्ष जैसा अचल है पूर्ण वन में वैसे अपना मन स्थिर करो तुम पक्षी जैसे गाते हैं अपना संगीत वैसे अपनी बात जग...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

              मेरी रूह ———– कुछ लम्हो मे सिमट… वक्त के साथ चलते रहे.. किस्मत आने की हसरत.. अपने धुन मे बढ़ते रहे… अपनो का साथ लेकर… बात दिल से सुनते रहे.. मिल...


  • जिंदगी….

    जिंदगी….

    जिंदगी पढ़ रही हूं तुम्हें किताबों की तरह…. हर दिन एक नया पन्ना कभी चुनौतियों से भरा तो कभी सरलता से जीवन पथ पर आगे बढ़ जाना कभी देती है तू उम्मीदों से भरा आसरा एक...