Category : कविता


  • प..  से प्रेम

    प.. से प्रेम

    प्रेम… उम्र से बढ़कर समय से परे भाषा में कैद नहीं न ही परिभाषा में समाये इतना संवेदनशील कि छुअन से थर्रा जाये इतना मजबूत कि पत्थर से टकरा जाए पारदर्शी ऐसा जैसे कि काँच पर...

  • सैनिक की पाती

    सैनिक की पाती

    दिन-ब-दिन बढ़ती जाती कश्मीर समस्या, अब इसको सुलझाने दो सेना को आगे बढ़ने दो खूब खा लिये पत्थर उनसे, अब सबक सिखाने दो दुश्मन पर कहर ढहाने दो शांतिवार्ता होती रही विफल हमेशा, अब लातों के...

  • चौपाई, शांत रस,

    चौपाई, शांत रस,

    सुनहु सखा तुम भ्राता बाली, महाबली था हुआ कुचाली नजर धरी परतिया मवाली, चहत वरण अनुजा बलशाली। सखा सहज कहती यह नीती, पापी हने न पाप अनीति राखहु मन सुग्रीव कस भीती, समय सहज धारहु परितीती।।...

  • सपनों का संसार

    सपनों का संसार

    तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाया सपनों का अंडों से जब बाहर निकले हर चूज़े का पेट भरा प्यार से फिर चिड़िया मां ने चोंच से दाना चुग-चुगकर पंख खिले जब पूरे उनके उड़ने का साहस भरा मानव...


  • वसन्त

    वसन्त

    वसन्त ऋतु का हुआ आगमन, चहुँ ओर सुरम्य हरियाली है। पेड़ों पौध लताओं में सुमन खिले, खेतों खलिहानों में कोयल कूक निराली है।। फसलों में अन्न का अंकुर फूटा, घर- घर मे फागुन की बयार रसवाली...


  • नदी और नारी

    नदी और नारी

    चंचल रोमांच से भरपूर इठलाती हिलौरे मारतीं, अनवरत… नदी और नारी जब भी बड़ीं… रोकीं गईं । कभी … बाँध के बंधन तो कभी … रोड़े अटका कर । बीच अधर में,,, रफ्तार उनकी मिटा दी...

  • डिस्को की डिस्क

    डिस्को की डिस्क

    गली-गली में जब से गूंजी, डिस्को की आवाज, युवक-युवतियां लगे थिरकने, चमक उठे सब साज. धीरे-धीरे लगी बढ़ने जब, डिस्को की डिमांड, सप्लाई कम होती जाती, बढ़ती जाती और डिमांड. इसका भी हल खूब निकाला, टेप...