Category : कविता


  • कविता : प्यार

    कविता : प्यार

    प्यार रिश्तों की धरोहर है, और इस धरोहर को बनाये रखना हमारी संस्कृति एकता और अंखडता है। यह अनमोल है। प्यार अमूल्य निधि है, इसकी अनुभूति किसी योग साधना से कम नहीं इसके रूप अनेक हैं...

  • अंतरात्मा

    अंतरात्मा

    मेरा संबंध तुमने अंतरात्मा का है। हाँ बाहृा जगत में हम पृथक ही सही, न दिखे ये रिश्ता जग में कहीं मन का जुड़ाव मन से तो है । मेरा संबंध तुमने अंतरात्मा का है। भू...

  • तितली रानी

    तितली रानी

    *तितली* *रानी* तितली रानी – तितली रानी रंग बिरंगें पंखों वाली धास – फुस पर विचरण करती सब रंगों मे सुंदर लगती कभी लताएँ , कभी फूलों पर इधर- उधर वो खूब इतराती तुझे देख सब...

  • प्रेम

    प्रेम

    ये कैसी प्रेम कहानी है एक प्रेम के बस में तो दुसरा प्पेम से दूर क्या यही सच्चा प्यार है? एक नजरें मिलाने पे विवस तो दुसरा नजरे चुराने मे विवस क्या यही सच्चा प्यार है?...


  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    है सुख नगर बिनाघर किरायेदार आनंदातिरेक प्रलोभन प्रत्येक॥-1 है छद्म छलावा हर्षोत्कर्ष कल उत्कर्ष हृदय कस्तुरी वन नाचे मयूरी॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • माँ

    माँ

    माँ “”””” माँ सुबह बनके जगाती है सबको चिड़िया सी चहकती फुलबारी सी महकती फिर दोपहर बन जाती सबको भोजन खिलाती फिर स्वयं खाती ढ़लती दोपहरी की तरह बिन ज़िरह बन जाती सांझ करती स्वागत अपने...


  • कविता

    कविता

    जब भी सोचता हूँ तुम्हें मेरे ख़यालों से उठने लगती है वही जानी-पहचानी गंध जो साँसों से होते रोम-रोम से गुजरते समा गई थी रूह में मेरी जब तुम मिली थीं मुझे पहली बार …… तुम...