Category : कविता

  • मन : हार जीत

    मन : हार जीत

    मन हारा तो मैँ हारा मन जीता तो मैँ जीता पल पल क्षण क्षण जीवन संग्राम, मन के बाहुबल मेँ बीता। खंड खंड हो गयी चेतना, तार तार जब मेरी वेदना, कौन अपना कौन पराया, खुला...

  • नेपथ्य

    नेपथ्य

    मन के स्पंदन करते तार, क्रंदन करती झनकार, कुछ डूबते से उठते से मन को, फिर घेर रहा अंधकार, घनेरा तमस फैला, भटकता मन अकेला, पथ के आवर्तोँ से हारा, कब होगा नवउजियारा। तब किलकारी लेती...


  • मेरा हिँदुत्व

    मेरा हिँदुत्व

    मेरा हिँदुत्व केवल धर्म नहीँ है, पंथ नहीँ है, वर्ग नहीँ है, ये मन की विचारधारा है, मुझको प्राणोँ से प्यारा है, ये जीवन जीने की कला महान, ये सत्यपथ का महाविज्ञान, ये कोई जात नही...

  • संध्या

    संध्या

    सूरज पश्चिम के तट खडा है, आज बादलोँ का जमघट बडा है, संध्या की बेला लेती अंगडाई है, भगवा चदरिया अंबर पर छाई है। पवन मद्धम बहती है पंछी चहकते हैँ, बाग बाग सुरभित कर गुलाब...

  • नव उद्भव

    नव उद्भव

    तंगदिलोँ मेँ फिर मैँ कोई आग लगाने आया हूँ, वो जो हारा बैठा राही है उसे जगाने आया हूँ। जिसके पथ पर विपदा है, जिसकी राह पर शूल अनेक, उसकी मंजिल पर बिखरे है, नवोत्सव के...


  • मन तुम उन्मुक्त उड़ो

    मन तुम उन्मुक्त उड़ो

    मन तुम उन्मुक्त उड़ो पथ पर आते आवर्त अनेक, तुम ध्येय बनाओ केवल एक, नवयुग धरती पर लाने, नवज्योति क्राँति की जगाने, मनबाधा से मुक्त उड़ो, मन तुम उन्मुक्त उड़ो। पथ पर चलना तुम्हे अकेले, मिल जाएँगे...

  • कवि की पीडा

    कवि की पीडा

    कवि आज क्या सुनाए, गीत किन पर अब लुटाए। सपनोँ की रचना व्यर्थ है, मन कहने मेँ असमर्थ है। दुख है शब्दजाल सारे टूट गये, घट कल्पनाओँ के अब फूट गये। कोरे कागजोँ को कोरा रहने...