Category : कविता

  • साथ तुम्हारा

    साथ तुम्हारा

    गुजरा कल उदासी भरा था तय कर रही थी सुनी रहें बिना किसी अनुभूतियों के—- तुम कब शामिल हो गए मेरे वजूद में खामोशी से मुझे पता ही नही चला रज-कण पर फैल जाती है जैसे...

  • चार बाल कवितायेँ

    चार बाल कवितायेँ

    1-उमड़-घुमड़ कर आते बादल   उमड़-घुमड़ कर आते बादल मुझे बहुत भाते हैं बादल। कभी बजाते ढोल मंजीरे कभी चमक दिखलाते बादल। खेतों को नहलाते  देते जब पानी भर लाते बादल। और कभी तो घुड़की देकर...



  • अजन्मी बेटी की व्यथा

    अजन्मी बेटी की व्यथा

    देख रही हूं लुटता जीवन, छाया घोर अँधेरा हर पल जकड़े पथ में मुझको, शंकाओं का घेरा। मेरे जीवन की डोरी को माता यूं मत तोड़ो मैं भी जन्मूँ इस धरती पर,मुझे अपनों से जोड़ो। क्यों...

  • झड़ते पत्ते

    मद्धम मद्धम पवन चली मुस्काई बाग़ की कली कली छायी नवभोर लालिमा प्रखर वृक्षों की डालियाँ गयीं निखर रैनबसेर से पर फैलाकर निकले सब पंछी गा गाकर पतझड़ से पहले की भोर मन हरती निश्चित चित...

  • ****अनाम रिश्ते****

    ****अनाम रिश्ते****

      मौसम की तरह रिश्ते बदल जाते हैं शुष्क संवेदनाओं से रिश्तों की गर्माहट बर्फ की तरह ठंडी पड़ जाती आंखों में सावन उतर आते हैं अपने पराए हो जाते हैं पर नही होते सभी रिश्ते...

  • बच्चे, दिल के सच्चे

    बच्चे, दिल के सच्चे, मासूम फ़रिश्ते, जात, धर्म, मज़हब, से अनजान, देश का भविष्य, अपने परिवार की जान , केवल इंसानियत ही जिनकी पहचान, कुछ पढ़ाई , कुछ आपसी दोस्ताना लड़ाई , कुछ ज़िद,कुछ हरकते, कुछ...

  • फूलों की बात

    फूलों की बात

    फूल तुम्हारा हर बार खिलना पहली बार खिलने जैसा कौतुक,अचरज और विस्मय से भरा फूल तुम्हारा हर बार मुरझाना जैसे अंतिम बार विदा होना …… इस खिलने और मुरझाने के मध्य असंख्य वेदना और आनंद के...