Category : कविता


  • “पतझड़ “

    “पतझड़ “

    “पतझड़ ” दूर बहुत दूर है वो प्यारा गाँव साथ चलती है बबूल की छाँव सूख गयी है स्नेह की नदी रेत में धँस धँस जाते है पाँव कितना प्राचीन है वो मंदिर सीढ़ियाँ कहती है...


  • ज़िंदगी एक वरदान   

    ज़िंदगी एक वरदान   

      हर एक मुस्कराहट चेहरे की, मुस्कान नहीं होती, प्यार हो या दिल्लगी कभी भी, अनजान नहीं होती, आंसू आँखों में आते हैं , गम में भी और ख़ुशी में भी,  पर हर इंसान को इन आंसूंओ की पहचान नहीं होती,    कभी पानी का एक कतरा भी प्यास  को नसीब नहीं, कभी रिमझिम बरसते पानी की परवाह नही होती, जिसका दिल खुद एक बहता हुआ दया का दरया हो, उसकी की हुई मदद ,  किसी पे अहसान नहीं होती,   ज़िंदगी की राहों में दुःख भी आते हैं और सुख भी , पर यह ज़िंदगी किसी श्ख्स की मेहमान नहीं होती, उम्र तो गुजरती...

  • ~उद्धार~

    ~उद्धार~

    रावण धू धू कर जल रहे थे हम पैसों की बर्बादी देख दुखी हो रहे थे अगल-बगल देखे रावण ही बिखरे थे सब रावण के ज्वाला से ही निखरे थे उनकी शक्ल भयावह दिख रही थी...

  • मृत्यु वर्णन

    मृत्यु वर्णन

    किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है….. था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था…. बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था…. ना जाने था वो कौन...

  • माँ

    माँ

    मां वो तुम ही हो मां … जिसने मुझे जिंदगी का मतलब बतलाया रिश्तों को निभाने का अर्थ समझाया वो तुम ही हो मां जिसने … दुनिया की ना सुनके मुझपर विश्वास जताया और जिंदगी में...

  • नयी रातें

    नयी रातें

    हो चली अब पुरानी बातें नया जमाना नयी हैं रातें सोचो जरा— उनका क्या होगा? जो करते थे केवल गरीब की बातें, भूखी रखते थे गरीब की आंतें पुँजीवाद की बेबजह बुराई करना लोंगों को रोजगार...

  • हाइकु

    हाइकु

    1 श्रद्धा व आस प्रतिमा बने मूर्ति आन बसे माँ। 2 त्रिदेवी शक्ति विरिंच भी माने माँ जग निहाल। 3 तैर ना सकी बुझी निशा की साँस उषा की झील। 4 पिस ही गई माँ दो...

  • सफेद बाल…

    सफेद बाल…

    आज जब खुद को देखा आईने में तो सकपका सी गई आंखे चौंधिया गई दिल का धङकना जैसे थम सा गया एकटक..पल पल बस खुद को ही निहार रही थी खुद पर विश्वास भी कहाँ हो...