Category : कविता


  • आशा की किरण

    आशा की किरण

    अंधकार छा जाता है, चारो ओर। नहीं कोई राह सूझती है, तब हमें राह दिखलाती है, आशा की किरण। बुझ जायें अगर, दिया की लौ। और इन्सान उस दिया को, अपनी किस्मत माने, कि वह दिया...

  • झील

    झील

      आज शाम सोचा; कि, तुम्हे एक झील दिखा लाऊं … पता नही तुमने उसे देखा है कि नही.. देवताओं ने उसे एक नाम दिया है…. उसे जिंदगी की झील कहते है… बुजुर्ग, अक्सर आलाव के...

  • सड़क पर भविष्य

    सड़क पर भविष्य

    कचरे का ढेर ढेर पर बच्‍चे जूठन बीनते नज़रें चुरा निगलते देखा है अक्सर इन में भविष्‍य भारत का मैंने । भारत का वर्तमान दौड़ता है सरपट फ़ेरारियो में बढ़ जाता है आगे लाद कर जिम्मेदारियाँ...

  • मुझसे नफ़रत है यारो

    मुझसे नफ़रत है यारो

    आईने को मुझसे नफ़रत है यारो जबभी मै सामने होता हूँ मुह फेर लेता है इस रुसवाई का मै क्या करु यारों दोस्त वो ऐसा है कि न छोड़ सकता हूँ  बेवफाई का भी दामन पाक...

  • आदर देते आ रहे है

    आदर देते आ रहे है

    ============= कोमलांगी सुकोमल थे बहुत मगर कष्ट हर एक सरलता से सहे जा रहे है| रहम ही करके पाला पोसा है आपको होके खड़े यूँ तभी आप बोल पा रहे है| ढहाए हम पर ना जाने...



  • चपत

    चपत

    कभी रिश्तेदारी में कभी दोस्ती यारी में और तो और कभी मेहरबानी में …. दुःख क्या .. टुटा तब पहाड़ रुपये-पैसे की चपत लगी यार जब कंगाली में ..सविता

  • दोगलापन

    दोगलापन

    दोगलेपन की भरमार बहुत दुश्मनों की खरपतवार बहुत लोग बहुत से शर्तो पर ही जीते दरो -दीवार में हैं दरार बहुत | @सविता मिश्रा