Category : कविता

  • गीत  — माँ शक्ति है

    गीत — माँ शक्ति है

    गीत माँ शक्ति है माँ भक्ति है माँ ही मेरा अराध्य माँ सा नहीं है दूजा जग में माँ से ही संसार माँ धर्म है माँ कर्म है माँ ही है सतसंग माँ सा नहीं है...

  • कविता

    कविता

    जिस तरह मायूस हो जाती मोरनी अपने पैरों को देखकर ।उसी तरह उदास हो जाता मन जब कोई पूछता ?कब तलक बाप के होटल में खाओगे बेरोजगार पुत्र से । बेचैन हो जाता मन नसीहत-दर-नसीहत से...

  • इन्तजार

    इन्तजार

    सूनी राहों को अपलक निहारूं निराश मन…………। यादों के दीप अर्से से जलाए हूं बुझा जाओ ना ………। — भावना सिन्हा


  • फैली है चांदनी

    फैली है चांदनी

      तुम्हारी ख़ामोशी की फैली हैं चांदनी उससे आलोकित हैं मेरे मन का गगन नि:शब्द हैं नि:स्वर हैं यह मनोरम वातावरण कभी तुम उस घने वृक्ष की तरह दिखाई देती हो जिसके पत्तों पत्तों पर मैंने...

  • गीता और हम

    युग पुरुष बन जो है खड़ा, गीता का ग्रंथ है हस्त रहा। वन्दन उन्हें कर लीजिये, आज फिर गीता पढ़ लीजिये॥ स्व धर्म से खुद को उठा, क्यों प्रश्न ये व्यापक बना ? जाग्रत ये मन...




  • प्राचीन मंदिर में

    प्राचीन मंदिर में

    धरती के इस बहुत प्राचीन मन्दिर के भीतर जर्जर हो चुके अंधेरो मे उतरकर सीढ़ियाँ गर्भालय में उजालो की हो ,कहीं पर कुछ बूंदें पड़ी यह खोजता हूँ मैं श्लोकों की अनुगूँज अमृत सी सहेजी भरी...