Category : कविता

  • ।।यूरेका।।

    आसमान से हर शहर वैसा ही दिखता है जैसे हर शहरी आदमी आमतौर पर लगता है सभ्य नदियाँ दिखती हैं मिट्टी पर खींची गदली रेखाओं सी और पहाड़ियां छोटी छोटी कुकुरमुत्ते की छतरियों जैसी ऐसे में...

  • शे”र

    शे”र

    खुद मे खुद की करता हूँ तलाश तब कहीं एक शे”र पाता हूँ तराश प्यार को निभाना नही होता आसान कभी कभी तो चली जाती है जान किशोर



  • “तटस्थ “

    “तटस्थ “

    “तटस्थ ” मैं तुमसे कभी मिल नहीं सकता हूँ न तुमसे कभी कुछ कह सकता हूँ मुझे तेरा घर मंदिर सा लगता है जैसे ही गली में मैं पांव रखता हूँ बर्फ सी जमी तन्हाई कहीं...



  • शिव मंदिर {ध्यान }

    शिव मंदिर {ध्यान }

    शिव मंदिर की सफ़ेद छत हैं और सोने की हैं दीवार फर्श पर बिछा रहता हैं सुनहरा प्रकाश उपस्थित आत्माओं की श्वेत पंखुरियों सी होती हैं पोशाक बजते हैं पखावज मृदंग की होती हैं संग मे...

  • “लिखना “

    “लिखना “

    “लिखना ” पल भर के लिए मिलना है जीवन भर उसे लिखना है एक लहर छूकर लौट गयी ज़ख़्मों को अब सीलना है कोई नही जानता मुझे आईने से ये कहना है खामोश रहते है कैसे...