Category : कविता


  • सरकारी स्कूल के बच्चे

    सरकारी स्कूल के बच्चे

    फटी जेबोँ मेँ संभाल कर रखी कुछ रेजगारियोँ की खनक आश्वस्त करता है इन्हेँ अपनी छोटी छोटी ख्वाहिशेँ पूरी होने की!!! चंद सिक्कोँ मेँ ही ये खरीद लेना चाहते हैँ अपने सारे सपने . . ....


  • फूल

    फूल

      तुम कहते हो सारे फूल अच्छे लगते हैं तेरे जुड़े में गुलाब के फूल अच्छे लगते हैं तुम्हारी नीयत पर मुझे कोई गुमान नही है तुम्हे मुझसे हुऐ शरारती भूल अच्छे लगते हैं उस पार...

  • कसक

    कसक

    एक आस दबा के रखती हैँ वो अधूरी ख्वाहिशेँ जीने की लालसा को ढँक लेती हैँ घूंघट के नीचे . . . आह भरती ये औरतेँ इनकी अपनी कोई जुबान नहीँ होती हैँ वही कहती हैँ...

  • उड़ान

    उड़ान

      अजनबी हो फिर भी मुझसे एक रिश्ता है तेरे मेरे बीच अनाम सा एक रिश्ता है मुहब्बत ,प्यार ,वफ़ा ए इश्क हो यदि तो कतरे में सागर भी आ बसता है इस जहाँ का मकसद...



  • आकाश

    आकाश

      सीने में दर्द का अहसास होने लगा है दिल को इश्क़ का आभास होने लगा है तेरी प्रत्येक करवट मुझे तलाशने लगी है अपने वज़ूद पर मुझे विश्वास होने लगा है सूरज डूब गया चाँद...

  • कविता : वे स्त्रियां

    कविता : वे स्त्रियां

    वे स्त्रियाँ निकली थीं वे अपने वजूद की तलाश में बाजारवाद ने बड़ी बड़ी आंखों से उन्हें देखा खो गई वे उस तिलिस्म दुनिया में बढती महत्वकांक्षाओं के आगे टेक दिए घुट्ने अपना लिया अमेरिका का...