Category : कविता

  • आज का आदमी

    आज का आदमी

    आँधियाँ भी नहीं बुझाती कभी चिरागों को इस तरह , आज इंसानियत को जिस तरह से मिटाता है आदमी, महासागर की लहरें भी नहीं उछलती ज्वार में इस तरह, अपनी दौलत के नशे में ,आज ज्यों...

  • बालगीत- आरती

    बालगीत- आरती

    आरती घर में सबकी बड़ी दुलारी नन्ही बिटिया आरती । अम्माजी का हाथ बंटाती, कभी काम से ना घबराती चौका-बर्तन करे, और घर- अंगना रोज़ बुहारती । थके, खेत से बापू आते, तुरन्त खाट पर हैं...


  • जीवन के ज़ानिब से

    जीवन के ज़ानिब से सच का सामना आसां तो नहीं मौत का दामन सुर्ख सा इन्सान बेपरवाह फिर भी अश्क के समन्दर में भी खिलखिलाहट लिए फिरता है| मौन दरख्त पर पंख फैलाए हुए परिन्दे खोखले...


  • संबंध  विच्छेद

    संबंध विच्छेद

    भरें हैं न्यायालय खचाखच भरे हैं महिला केंद्र प्रयासरत हैं निरंतर मध्यस्थता को तत्पर बता रहे हैं सबको अधिकारों की परिभाषा कर्तव्यों की व्याख्या मन का मन से सम्बन्ध व् संबंधों की पराकाष्ठा लोग सुन रहे...

  • मन चाहता है……..

    मन चाहता है……..

    छुप-छुप छम- छम बरसा करती थीं जो अँखियाँ कहती हैं मुझसे अब मुस्कुराने को मन चाहता है कहती है सिसकती ज़िन्दगी अब तो ख़ुशी का गीत गुनगुनाने का मन करता है हुआ अजब यूँ ये नज़ारा...

  • अलविदा

    अलविदा

    सोचता हूँ जिन लम्हों को ; हमने एक दूसरे के नाम किया है शायद वही जिंदगी थी ! भले ही वो ख्यालों में हो , या फिर अनजान ख्वाबो में .. या यूँ ही कभी बातें...

  • सर्दी: दो मुक्तक

    सर्दी: दो मुक्तक

      ठिठुरती इन हवाओं ने दिखाए रंग सर्दी के सिसकती सी फिजाओं ने सिखाये ढंग सर्दी के काँपती हैं घटायें भी सिहरते हैं सभी पंछी सभी दिन रात भी अब तो हुए हैं संग सर्दी के...