Category : कविता

  • मुझ लौह को भी कर दो कुन्दन

    मुझ लौह को भी कर दो कुन्दन

      तुम अविनाशी ब्रह्म ज्ञान, मैं व्यथित हृदय का हूँ क्रन्दन तुम पारस पाषाण प्रिये मुझ लौह को भी कर दो कुन्दन   तुम अकल अक्रोधन प्राप्य प्रिये, प्रियता हो जीवन की मैं मात्र अकृतात्मन हूँ...

  • कविता : कुदरत की माया

    कविता : कुदरत की माया

    अजब दिख रही है कुदरत की माया भादो की काया पर सूखे की छाया खेत प्यासे पड़े. सारे चिंतित किसान पानी न मिलेगा तो कैसे उपजेगा धान मौसम का रुख देख हर दिल घबराया अजब दिख...

  • आखिर क्या है कविता ???

    आखिर क्या है कविता ???

    मुझे नहीं पता आखिर क्या है कविता ! शायद प्रकृति का अवर्णनीय सौंदर्य है कविता ! शायद किसी प्रेमिका के अप्रतिम रूप का बखान है कविता ! शायद निश्चल प्रेम की विस्तृत परिभाषा है कविता !...

  • –जीवन पल का संगीत–

    –जीवन पल का संगीत–

    बेहद रोचक है ये संगीत, जीवन के हर पल में है संगीत। बचपन की किलकारियों में है संगीत, यौवन का धड़कन में है संगीत, अधरों के थरथराहट में है संगीत, फड़कती बाजुओं में है संगीत, पलक...


  • तन्हाई

    तन्हाई

    तन्हाईआज भी देखती हूँजब मैँ तुम्हाराव्हाइट शर्टसजीव हो उठते हो तुमठीक उस सफेदझक्क कैनवास की तरहजिसमेँ उकेरना चाहती हूँकई आकृतियाँकई रंग . . .क्या उकेरुँ उसमेँअवसाद के काले रंगया आड़ी तिरछी रेखाएँअकेलेपन केजब साथ थे तुमतब...

  • सूरज

    सूरज

    धीरे-धीरे अस्त हो गया सूरज पच्छिम में   समय ने उतार दी दिन की पहिरन   स्याह परिधान में निखर आया एक नया रूप   घरौंदों को वापस होते पक्षियों की चहचहाहट गूँजती है हर तरफ...



  • नशा क्या है ?

    नशा क्या है ?

    जो पीता है शराब क्या वही नशे में है लगता है मानो आज सभी नशे में है, किसी को दौलत का नशा, किसी को शौहरत का नशा, किसी को प्यार का नशा, किसी को सत्ता का...