Category : कविता

  • ***मैँ मध्यप्रदेश हूँ ***

    मैँ भारत माता का हृदय हूँ, सत्य सार्थक की विजय हूँ, ग्वालियर का राजभवन मै, उज्जैनी का महाकाल हूँ, राजाओँ की नगरी इंदौरी ठाट बाट का भोपाल हूँ। खजुराहो का शिल्प महान फिर, बाँधवगढ का शेर...

  • और पेड़ बहुत रोया….

    मेरी इन दो भुजाओँ मेँ, मेरी पत्तियोँ की छाओँ मेँ, दो मासूम कलियोँ को दरिँदोँ ने मसल डाला, मैँ देखता रह गया, मेरी भुजाएँ मेरी टहनियां, जिसपर टंगी दो बेटियां, मानवता के निर्मम हत्यारोँ का शिकार...


  • कविता : भय मुक्त

    कविता : भय मुक्त

    रात जहाँ पहुचती है घुप्प अँधेरे के साथ मौत अपने वहशीपन से बाहर निकलकर विचरण करती है तलाश करती किसी की जिन्दा लाश जहाँ एक अंतहीन सन्नाटा पसरता जाता है झील करवट बदलती है चीटियाँ तक...





  • हाइकु

    हाइकु

    1 तड़ तड़ाक बची नहीं गरिमा चोटिल आत्मा । ===== 2 तड़ ताड़क सहमा बचपन देख माँ गाल । ===== 3 तड़ तड़ाक रिश्ता नाजुक टूटा काँच सा कच्चा । ===== 4 हर्ष अपार घन लेकर...