Category : कविता

  • हाईकु

    हाईकु

    आतिशबाजी प्रदूषित करेगा वातावरण स्नेह दिपक जलाये क्यू न हम इस दिवाली कोई अपना हमसे रुठा हुआ चलो मनाये मदद करे जरुरतमंद की हाथ बढाये आशीर्वाद ले अपने बुजुर्गो का दीप जलाये शुभकामना दीवाली की सभी...

  • है कि नहीं ….

    है कि नहीं ….

    है कि नहीं …. बहुत गुस्सा में हैं है कि नहीं प्रेमी या प्रेमिका बे-वफ़ा निकले …. पत्नी या पति मगरूर -जल्लाद निकले …. स्वाभाविक प्रतिक्रिया है ,मेरे दोस्त , है कि नहीं कोसो ना ,...

  • “पीड़ा “

    “पीड़ा “

      अपने आप से कतराता रहा आईने के सामने आते ही मैंने अपना मुंह फेर लिया सूरजमुखी का चेहरा उदास सा लगा हो गया हो उसे जैसे पीलिया पहली बार महसूस हुआ पौधों में गुलाब के...


  • दीपों का त्यौहार

    दीपों का त्यौहार

    दीपों का त्यौहार मंगलमय हो आपको दीपों का त्यौहार जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार.. मुझको जो...


  • “नवतपा “

    “नवतपा “

    मृगतृष्णा की नदी बह रही हैं पिघली हुई सी सड़के गयी हैं बहक अमराई से आ रही हैं पके हुऐ आमों की महक कोयल की कूक से गूंज उठता हैं दोपहर का एकाँत अचानक बरखा के...


  • हाइकु

    हाइकु

      चित्त हरण बसता कण कण मुझमे अंश माधव मग्न राधा मनमोहिनी रास प्रेम का काया क्षरण माया का आवरण मृत्यु वरण उभरे शब्द रूप धरा है स्याही बनी कहानी खुद से लड़ा चाहत जीतने की...