Category : कविता

  • नहीं  समेटी नहीं जाती पीर अब तो

    नहीं समेटी नहीं जाती पीर अब तो

    नहीं समेटी नहीं जातीपीर अब तोकागजो मेंहर्फ़ों में किस्सों में विचारों में मात्र यहाँ या और कही भी लिख देने भर से नहीं सुलझता ये जाला उलझन का ….. जबसे बदलने लगे हालात मुल्क के महफूज़ नहीं बेटियां...

  • जला आई हूँ मैं

    जला आई हूँ मैं

    जला आई हूँ मैंतुम्हारी रामायणजहाँ पूजा जा रहा थासीता को…बनाकर देवी-स्वरूपानहीं बनना था मुझे सीता नहीं देनी थी अग्नि-परीक्षा ना समाना था.. धरती की गोद में नहीं लेना था.. तमगा कोई पतिव्रता होने का ना भटकना...

  • तुम गए तो मेरी प्यास गई

    तुम गए तो मेरी प्यास गई

    तुम गए तो जैसे प्राण गए, मेरे जीवन की आस गई तर्षित थी मैं जन्मों से,. तुम गए तो मेरी प्यास गई जीवित तो…. अब भी हूँ मैं मैं हर्षित…. भी रह लेती हूँ तुम बिन चिंतन शून्य है पर मैं...



  • ****पिता****

    ****पिता****

    ****पिता**** माँ का हर श्रृंगार पिता। बच्चों का संसार पिता।। माँ आँगन की तुलसी है। दर के वंदनवार पिता।। घर की नीव सरीखी माँ। घर की छत-दीवार पिता।। माँ कर्त्तव्य बताती है। देते है अधिकार पिता।।...

  • कुछ सपनें टूट गए तो क्या

    कुछ सपनें टूट गए तो क्या

    कुछ सपनें टूट गए तो क्याकुछ अपने रूठ गए तो क्याजीवन के ……दुर्गम पथ परकुछ साथी छूट गए तो क्यासूरज तो फिर भी निकलेगानयी सुबह फिर भी आएगी फिर भोर करेगें पक्षी करलवफिर पवन सुगंध फैलाएगीयह अंधकार...

  • तुम…. बस पागल कर देती हो

    तुम…. बस पागल कर देती हो

    नैन कमान के चितवन से …..बस घायल कर देती हो कैसे तुमको समझाऊँ तुम…. बस पागल कर देती होजन्मों से प्यासा था मैं, हलक में लार थी बची नहींप्यासे प्यासे कंठ में तुम, प्रिय गंगाजल भर देती...

  • मिस्ड काल

    मिस्ड काल

    मिस्ड कॉल पड़ी स्मृति के किसी कोने जिनमें दर्ज हो सकती है किसी की शरारत किसी की भूल किसी की ज़रूरत किसी की आदत किसी की विपन्नता मिस्ड कॉल असंख्य बार उभर आते हैं मोबाइल स्क्रीन...