Category : कविता


  • दो क्षणिकाएं

    दो क्षणिकाएं

    1 लोग यहाँ अलग अलग दशा में बंटे हुए हैं कुछ गरीब कुछ अमीरी लिए हुए है । हताशा कामयाबी की मारामारी  कुछ हुए कामयाब कुछ जूझते हुए है     2 ईश्वर की अनुकम्पा से...

  • ***दिखेगा दूर तक***

    ***दिखेगा दूर तक***

    हर अन्त के बाद उजालों की रफ्तारदेखते ही बनतीतोरण हमेशा ही करते हैं स्वागतआने दो सुबह कीकेवल किरणसब इसी तरह बदलते हुएदिखेगा दूर तक —मौन



  • राखी पर लें प्रण ….

    राखी पर लें प्रण ….

    ” यही प्रण लेना और देना , राखी का मान-सम्मान बढ़ाना” प्रेम के धागे शायद कच्चे हो गये या फिर अपना महत्व खोने लगे हैं एक डोरी में बंधा प्रेम-विश्वास, दुआयें और सम्मान कहीं न कहीं...


  • हाइकु

    हाइकु

    1 बहे मवाद वीरुध हीन भूमि डाका के बाद । 2 सोती जिज्ञासा गर सूर्य सो गया मृत्य/रोती पिपासा । 3 आंख में आंसू रात में ज्यूँ जुगनू दोनों में ज्योति । 4 बने छादन विरोहण...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    1 प्रकृति-ललित-जाल में उलझा लोचन रिमझिम मेघ बरिसत ऋतु दुखमोचन सरि-आईने में निहारे सजे चन्द्र मुखडा हुआ चकित चकोर देख दृश्य मन रोचन === 2 एक औरत दूसरी औरत को समझने में चूक जाती है लगता...