कविता

दौर हैं बदल रहे…

आज अचानक से जहन में एक महान साहित्यकार, कवि, ग़ज़लकार ‘दुष्यंत कुमार’ की एक पंक्ति आ गयी. उस ग़ज़ल की उस पंक्ति को अपनी जुबान से अगर मैं बोल भी लेता हूँ तो मेरे रोंगटें खड़े हो जातें हैं. वो सदाबहार पंक्ति है, ‘हो गई है पीर पर्बत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई […]

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गद्य काव्य : एक चुप्पे शख्स की डायरी 46 वां पन्ना

ठहर जाने से खत्म नहीं हो जाते रास्ते…थक कदम गए…रास्ते नहीं । हर छूटते मील के पत्थर को देखना…खुद को दिलासा देना है और सामने पड़े रास्ते को देखना बस एक उम्मीद…। पत्थर चले कहाँ तक की सूचना है , कितना बाकी है इसे नहीं पता…यह संशय भी साथ यात्रा करता है…पहुचेंगे वही , जहाँ […]

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कविता : सुई-धागा

तुमने जोसुई-धागा दिया था सितारे टाकने को…उससे मैने अपनी उदासी की उधड़ी चादर टांक लीकोई क्योंकर जान पाएउदासियों के पीछे कौन रहता है…(यकीन मानो मैने अबतक किसी को जानने नहीं दिया की….सितारे कहाँ है…टाकने कहाँ थे और सुई-धागा तुमने क्यों दिया…)

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कविता : असहमति के सोलह साल

विवाह के सोलह साल बादसोचती है श्यामलीकभी सहमती नहीं ली गई उसकीदेह उसकी थी देहपति दूसरा…सहमति नहीं ली गई उसकीजब पहली बार किन्ही निगाहों नेबाहर से भीतर तक नाप डाला उसेउसकी देह के बारे में जितना जानते थे शोहदेउतना तो खुद उसे नहीं पता….असहमति तोडना पुरुषत्व भरा हैयही जानकर सहमति के बिनाजीती रही है उसके साथ […]

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कविता : कविता चाँद पर

हवाओं से रगड़ खा खा करछिल गए कन्धेहथेलियों पर बादल टिका कभी नहीं टिकाआँखे धूल सने आसमान परजहाँ ना कोई नक्षत्र ना आकाशगंगा…अमावस की रात मेंअपना ही हाथ सूझे ना सूझे…पर कविता अगर चाँद पर लिखनी है तोचाँद पर ही लिखूंगा….

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कविता : नेकी कर कुएं में डाल

कुआं है , पानी हैगहरा , बहुत गहरा गहराई कुएं की नहीं , पानी की हैयह पहली बात है…पत्थर फेंकते हुए लोगनहीं जानते पानी टूटता नहीं , पानी नहीं जानतापत्थर का भययह दूसरी बात….तीसरी बात यह किजब तक कुआं है जबतक पानी हैपत्थर आएँगे यूं ही…गहराई सब रहस्य सहेजे रहेगीबस आएगी एक आवाजवह प्रतिरोध नहींस्वीकृति है….लिजलिजी काई तालाबो में […]

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कविता : जो टूट गया

सधे हाथों से थाप थाप कर देता है आकारगढ़ता हैं घड़ा गढ़ता हैं तो पकाता हैंपकाता है तो सजाता हैसज जाता है जो… वह काम आता है…हर थाप के साथ खतरा उठाते हएथपते हुए , गढ़ते हुए रचते हुए , पकाते हुए टूट जाता है जो…वह टूट जाता है….जो काम आया…उसकी कहानी आप जानते हैजो टूट गया , मैं तो […]

कविता

♫प्रेरणा गीत ♫- ☼ दूर है मंजिल !☼

☺☻…..***♪ ♪ ♫ ♪ ♫ ♪ ♪ ♫ ♫***……☻☺ ll दूर है मंजिल  तारे जैसे चमकते हैं सारे  इनको पाना ही मतलब है जीवन का प्यारे  वो भी , थे इंसा, जिन्होंने चाँद पर  कदम रखा इक दिन  तू भी , है इंसा, तो क्यूँ न करेगा  तू भी ये इक दिन  ll  दूर है […]

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पिया का प्यार

अपने अपने पिया का प्यार पाने के लिए, सुहागन ने स्वयं को दुल्हन सा सजाया है, बालों में लगा कर भीनी भीनी खुशबू का गजरा, चमकती लाल बिंदिया से क्या माथा चमकाया है, कानो में झुमके नाक में नथनी, मांग में सिन्दूर सजा, अपने पिया को प्रेमालिंगनं के लिए पूरा उकसाया है, सुहागन ,कंगन खनका […]

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कविता : रहो देखते यू.पी. वालो…

यह कविता मैंने उत्तर प्रदेश के २०१२ के विधानसभा चुनावों के परिणामों के तुरंत बाद लिखी थी. इसमें मैंने उ.प्र. का दिवाला पिटने की सम्भावना जताई थी. यह कविता ‘युवा सुघोष’ के मई-जून २०१२ के अंक में छापी गयी है. इसे पढ़कर देखिये और आज की स्थितियों की तुलना कीजिये कि मेरी वह आशंका कितनी […]