कविता

जला आई हूँ मैं

जला आई हूँ मैंतुम्हारी रामायणजहाँ पूजा जा रहा थासीता को…बनाकर देवी-स्वरूपानहीं बनना था मुझे सीता नहीं देनी थी अग्नि-परीक्षा ना समाना था.. धरती की गोद में नहीं लेना था.. तमगा कोई पतिव्रता होने का ना भटकना था विरह भोगने हेतु ना जीना था जीवन एकाकी इसलिए…था जरुरी जला दूँ मैं तुम्हारी रामायण ….. दफना दिया […]

कविता

तुम गए तो मेरी प्यास गई

तुम गए तो जैसे प्राण गए, मेरे जीवन की आस गई तर्षित थी मैं जन्मों से,. तुम गए तो मेरी प्यास गई जीवित तो…. अब भी हूँ मैं मैं हर्षित…. भी रह लेती हूँ तुम बिन चिंतन शून्य है पर मैं कल्पित भी रह लेती हूँ  जीनें की चाह थी मेरी भी, तुम गए तो मेरी साँस गई तर्षित थी […]

कविता

हर रूप में नारी महान…. (कविता)

क्रोधाग्नि में हो तो कुछ भी कर गुजरती है , स्नेह में हो तो आकाश को भी पीछे छोड़ देती है, वात्सल्य की मूर्ति बन अवनि के गरूर तोड़ दे , मीठी वाणी ऐसी की मन को भी हर जाये , प्यार में हो तो झरने की तरह बहती जाये , अपराजिता, निडर, अति सहनशील […]

इतिहास कविता

आज वीरांगना लक्ष्मीबाई भी शहीद हुयी .(18 जून 1958 )

“खंजर की चमक खनक तलवार की  खौफ से जीता था दुश्मन सदा जिसके वार से  कांपते थे दिल ..डोलती थी सत्ता जिसके नाम से गुडिया नहीं भायी उसको चूड़िया न सुहाई वक्त को  शब्द जो बोलती थी तलवार से तौलती थी बंदूक भाला बरछी सखी दोस्त बन चले थे था घुड़सवारी शौक .. वीरबाना जिसका […]

कविता

****पिता****

****पिता**** माँ का हर श्रृंगार पिता। बच्चों का संसार पिता।। माँ आँगन की तुलसी है। दर के वंदनवार पिता।। घर की नीव सरीखी माँ। घर की छत-दीवार पिता।। माँ कर्त्तव्य बताती है। देते है अधिकार पिता।। बच्चों की पालक है माँ। घर के पालनहार पिता।। माँ सपने बुनती रहती। करते है साकार पिता।। बच्चों की […]

कविता

कुछ सपनें टूट गए तो क्या

कुछ सपनें टूट गए तो क्याकुछ अपने रूठ गए तो क्याजीवन के ……दुर्गम पथ परकुछ साथी छूट गए तो क्यासूरज तो फिर भी निकलेगानयी सुबह फिर भी आएगी फिर भोर करेगें पक्षी करलवफिर पवन सुगंध फैलाएगीयह अंधकार फिर भी हारेगा  कुछ तारे टूट गए तो क्या जीवन के ……दुर्गम पथ पर कुछ साथी छूट गए तो […]

कविता

तुम…. बस पागल कर देती हो

नैन कमान के चितवन से …..बस घायल कर देती हो कैसे तुमको समझाऊँ तुम…. बस पागल कर देती होजन्मों से प्यासा था मैं, हलक में लार थी बची नहींप्यासे प्यासे कंठ में तुम, प्रिय गंगाजल भर देती होकैसे तुमको समझाऊँ तुम…. बस पागल कर देती हो चारो ओर था सन्नाटा, बस मायूसी सबका हांसिल थी जीवन […]

कविता

मिस्ड काल

मिस्ड कॉल पड़ी स्मृति के किसी कोने जिनमें दर्ज हो सकती है किसी की शरारत किसी की भूल किसी की ज़रूरत किसी की आदत किसी की विपन्नता मिस्ड कॉल असंख्य बार उभर आते हैं मोबाइल स्क्रीन पर अथक कोशिश की अनंत वेदना कुछ परिचितों के कुछ अपरिचितों के जिनमे कई बार दर्ज होते हैं उनकी […]

कविता

मेरा भांजा

छोटा सा मुखड़ा हँसती आँखें खिलती जुल्फें नटखट अदा से दे जाता अपनापन जीवन की लालसा जिजीविषा जगाता खुशियाँ बाँटता मुझे माँ कह पुकारता मुझमें कुछ भरता एक रोशनी दे जाता इस दुनिया में सच्चा रिश्ता बताता यह रिश्ता आज भी कल भी जीवन की सच्चाई दे जाता

कविता

॥स्त्री बनने के बाद॥

जैसे दिया जूझता है हवा के झोंके से किसान लड़ता है टिड्डियों के हमले से बच्चा निपटाना चाहता है अपना होमवर्क सूरज तैरता है बादलों की नदी में उम्र के इस पड़ाव पर स्त्री जूझती है अपने ही शरीर से उसे बार बार होता है कमर दर्द नहीं ठहरती आँखों में नींद थका-थका सा रहता […]