कविता

मेरे हमनसी मेरे दिलबर अपने प्यार का पता दे

मेरे हमनसी मेरे दिलबर अपने प्यार का पता दे तू दूर क्यों है हमसे इतना जरा पता दे तेरे प्यार के ही खातिर ,दुनियाँ बसायी मैनें तेरे प्यार को ही पाकर महफ़िल सजाई मैनें जितने भी गम थे मेरे उनको मैं भूलता था मेरी दिलरुबा मेरे दिलबर तुमको ही पूजता था मंज़ूर क्या खुदा को […]

कविता

कुंवारी लडकियाँ …

कुंवारी लडकियाँ … गिनती है पिता के माथे की शिकन और फिर गिनती है अपनी उम्र हाथ के उँगलियों में कई बार हर बार चूक समझकर दुहराने लगती है अपनी ही गिनती माँ से पूछती है अपने जन्म की सही तारीख  और दर्ज कर लेती है एक और अनचाहा सच हमउम्र सहेलियां जब लौट आती […]

कविता

61वां पन्ना (एक चुप्पे शख्स की डायरी)

समझ आते आते ही आया तुम्हारा प्रेम…। परिंदों से प्रेम करते हुए पिंजरे खरीद लाए… हिरण जंगल से बाड़े में आ गए..। प्रेम कहते रहे और बनाते रहे मकान का नक्शा… कि जिसमे लोग दो रहे और कमरे तीन हो…। हर खुली जगह जमीन की बरबादी की तरह देखी जाती रही…. अभियंताई बहस तब तक चली… […]

कविता

हाइकु

1 तड़ तड़ाक बची नहीं गरिमा चोटिल आत्मा । ===== 2 तड़ ताड़क सहमा बचपन देख माँ गाल । ===== 3 तड़ तड़ाक रिश्ता नाजुक टूटा काँच सा कच्चा । ===== 4 हर्ष अपार घन लेकर आये फुही बहार । ===== 5 छन्न संगीत तपान्त करे वर्षा गर्म तवे सी ===== 6 फुही झंकार लगे […]

कविता

ख्व़ाब में छू कर तुम जो चले गए

ख्व़ाब में छू कर तुम जो चले गए तन मेरा और  निखर सा गया जाने कैसा रंग मेरे कपोलो पर छा सा गया न तो गुलाबी न तो फागुनी न ही वासंती वो स्पर्श का रंग था तुम्हारे स्पर्श का रंग ऐसा लगा कि जैसे लौह ने पारस छुआ हो और वो कुंदन सा स्वर्णिम हुआ हो निखरा-निखारा,संवरा-संवरा उजला […]

कविता

आओ ना मॉनसून

  वसंत के मोहक वातावरण में , धरती हंसती , खेलती जवान होती , ग्रीष्म की आहट के साथ-साथ धरा का यौवन तपना शुरू हुआ , जेठ का महीना जलाता-तड़पाता उर्वर एवं उपजाऊ बना जाता , बादल आषाढ़ का उमड़ता – घुमड़ता प्यार जता जाता , प्रकृति के सारे बंधनों को तोड़ता , पृथ्वी को […]

कविता

हाइकु

रात सहती प्रसव टहकना सूर्य ले जन्म । टहकना = थोड़ी थोड़ी देर में दर्द उठना ========== हो गई रात रहस्य सूर्यग्रास गगनांगन । =========== मन उठल्लू स्वार्थ क्षणिक गांठ सोच निठल्लू । =========== अनर्थ शब्द रिश्ता-कश्ती डूबती हद तोड़ती । ========== बने मकान समुंद्र पाट देंगे कचरा भर । ========== दोस्ती दरिया प्यार शंख-सीपियाँ […]

कविता

गीत-****पूरी कहो कहानी****

गीत- ****पूरी कहो कहानी**** कुछ कहता है चित्र तुम्हारा कुछ तुम कहो ज़ुबानी। कुछ न छिपाकर रक्खो दिल में पूरी कहो कहानी।। गम को अगर छिपाओगे तो वो तुमको गम देगा। जब तक नहीं कहोगे भीतर ही भीतर काटेगा। इसीलिए कह दो तुम हमसे करो न आनाकानी। कुछ न छिपाकर रक्खो दिल में पूरी कहो […]

कविता

पिता का संघर्ष

वो टूटता भी है कई भावों में बड़ा होना अधिकार था घर में घर का भी अधिकार बड़ा था उस पर दूसरी ओर विवशता बड़े का बड़ा होना भी कर्ज का बोझ भी बड़े होने का बड़ा ही होता है स्ट्रीट लाइट जहाँ गाँव भर को रोशन कर बड़े होने का दर्जा देती पूरी पंचायत […]

कविता

रिश्ता

माँ बेटे का रिश्ता होता है अनमोल रहता है अहसास माँ को अपने बेटे के दुःख दर्द का बेटा चाहे नालायक हो जाये माँ तब देती है दुआ, माँ होती है अनमोल क्यों नहीं समझ पाता है बेटा उसका क्यों सताता है, लड़ता है उससे क्यों नहीं समझता उसके दिल का हाल पर माँ तो माँ […]