कविता

पुराने खंडहर

काल के अट्टहास के प्रतीक या शाश्वत रुपी सत्य का बोध कराते पुराने खंडहर ………………….. स्वयं में समेटे हुए अनगिनत कहानियाँ झूठ, सत्य,प्रेम, कुकृत्य … ना जानें कितनी निशानियाँ काल के दंश से … प्रकृति के अंश से … दिखाते कि सबका अंत है सुनिश्चित बताते कि कुछ भूलों के लिए …. पीढ़ियाँ तक करतीं […]

कविता

।। कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ ।।

1 सुन रे कान्हा दूंगी मै उलाहना न तू सताना । 2 प्रेम का पाठ पढ़ा गया छलिया राधा के साथ । 3 सूना पलना गोकुल बधाईयाँ जन्मा ललना । 4 टूटी बेड़ियाँ कारागार मुस्काया जन्मे कन्हैया । 5 बाँसुरी तान मुरली मनोहर बृज की शान । 6 राधा पुकारे द्वार द्वार भटके कृष्ण कहाँ […]

कविता

गीत

सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ… प्रस्तुत है लोकगीत विधा पर आधारित मुरली मनोहर से शिकायत करता एक गीत…   काहे सताया बोलो काहे सताया राधे को कान्हा तूने काहे सताया मार कंकरी उसकी फोड़ी गगरिया पनघट की डगर पर उसको रुलाया काहे रुलाया बोलो काहे रुलाया राधे को कान्हा तूने काहे सताया वृषभानु […]

कविता

तुम मुझ पर विश्वास करो

धर्म-कर्म के मर्म को छोड़ो, ….प्रेम का मत उपहास करो प्रेम किया है तुमनें तो प्रिय,…. प्रेम का बस आभास करो मैं कृष्ण नहीं बन पाऊंगा, ….यदि तुम राधा बन न सकींमैं बस तुम पर विश्वास करूँ, तुम मुझ पर विश्वास करो तुम मेरे मन की राधा,..… प्रिय तुमसे प्रेम का बन्धन है मेरा हृदय तुम्हारा है प्रिय,…..हृदय […]

कविता

तेरो जोर नाय चलत घट घट पे

तेरो जोर नाय चलत घट घट पेकान्हा भरी मटकी जात पनघट तेतेरो जोर नाय चलत घट घट पेकान्हा भरी मटकी जात पनघट तेभरी गगरिया ले राधा जहिहे जाने किन किन से का कहिहें श्याम निसाना चूक गयो, सुनके कहो हम कैसे रहिहें कहो तो हम ही फोर डारें मटकी तो को लगत जो मान घटत […]

कविता

सावन

सावन भी  आया, और  आसमा में बदल भी  छाये| वो बिन बरसे ही घंटो आसमान पे  छाये रहे | मै बालकनी में खड़ा चाय की चुश्किया ले रहा था| मेरे 5 साल के भतीजे  ने पूछा कि चाचू ये बरस क्यों नही रहा?                           […]

कविता

आ जाओ कान्हा, अब तो आ जाओ, 

आ जाओ कान्हा, अब तो आ जाओ,  हर एक सुदामा , गरीब बेचारा, फिरता देखो  मारा मारा , कहीं नहीं कोई उसका सहारा  आओ उसको गले लगाओ,  आ जाओ कान्हा, अब तो आ जाओ,  एक द्रोपदी कई दुशासन , रो रो कर हो रही है व्याकुल , सब चीर हरण को कितने आतुर, आकर उसकी  लाज बचाओ […]

कविता

विरह वेदना

पति जब पत्नी से मिलापत्नी बोली,हे प्राणप्रिये तुम नहीं थेतो लगता था जीवन नहीं हैहे प्रिये तुम्हे मेरी याद आई या नहींपति बोला,तुम ही मेरा जीवन होतुम्हारे बिना कुछ नहीं है मेरा जीवनहे प्रिये जब सावन का मौसम आतातो तुम्हारी याद बहुत आती थीदिन सूने सूने लगते थेपत्नी ने कहा प्रियेअब न जाना मुझे छोड़करविरह […]

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जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई

जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई मोहन मुरली वाला****यशोदा का लालामाखन चुराने चला*****बृज गोपिका घरबृज गोपिका घर******सफल गोपी का जीनासृजनहार दर्शन*****धन्य है तेरा जीना**********************************शान्ति पुरोहित

कविता

जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान

जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान गंगा यमुना सी नदियाँ हैं जो देश का मन बढ़ाती हैं सीता सावित्री सी देवी जो आज भी पूजी जाती हैं यहाँ जाति धर्म का भेद नहीं सब मिलजुल करके रहतें हैं गाँधी सुभाष टैगोर तिलक नेहरु का भारत कहतें हैं यहाँ नाम का कोई जिक्र नहीं […]