बाल कविता शिशुगीत

पांच तोते

  तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, हमें देश पर नाज. तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, देश पर न आए आंच. तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, अपने मन को जांच. तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, आतंक […]

बाल कविता

बाल गीत “जीत गया कुहरा”

कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई। जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।। — ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता, लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता, बासन्ती मौसम में सर्दी ने ली अँगड़ाई। जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।। — साँप-नेवले के जैसा ही युद्ध हो रहा, कभी सूर्य और कभी […]

बाल कविता शिशुगीत

नन्ही चिड़िया

नन्ही-सी मैं चिड़िया हूं, अपनी ममा की गुड़िया हूं, लगती हूं मैं भोली-सी, बड़ी गजब की पुड़िया हूं. अभी तलक मैं उड़ नहीं पाती, फुदक-फुदक कर चलती हूं, जब उड़ने की बारी आए, देखूं कहां निकलती हूं. ममा ही मेरी टीचर भी है, बहुत-से पाठ पढ़ाती है, अपने देश से प्यार करने का, प्यारा सबक […]

बाल कविता

मछली

मैं मछली कहलाती हूँ। जल में ही रह पाती हूँ।। जल ही तो जीवन है मेरा। निशिदिन करती रहती फेरा।। अपना मन मैं बहलाती हूँ। मैं मछली कहलाती हूँ।। गर्मी हो या वर्षा, जाड़ा। मुझे न मौसम होता आड़ा।। सब कुछ मैं सह जाती हूँ। मैं मछली कहलाती हूँ।। अंडे से मैं बाहर आती। तैर […]

बाल कविता

ईंटों से घर बना हमारा।

ईंटों से घर बना हमारा। विद्यालय भी बनता प्यारा।। मिट्टी को साँचे में भरते। सुघड़ ईंट का सर्जन करते।। भट्टे में तप रूप सुधारा। ईंटों से घर बना हमारा।। तप कर ईंट लाल हो जाती। चट्टों पर सजकर सो जाती।। कहती कैसा रूप निखारा। ईंटों से घर बना हमारा।। घर , मकान , होटल बनवाते। […]

बाल कविता

हम बच्चे मिलकर 

कूड़ा करकट यहाँ-वहाँ मत फैलाओ कूड़ेदान में ही कूड़ा डाल के आओ आओ-आओ प्यारे-प्यारे बच्चों आओ एकसाथ मिलकर भारत स्वच्छ बनाओ स्कूल हो या घर, सड़क हो या मैदान सर्वत्र चलायें स्वच्छता अभियान स्वच्छ रहे परिवेश हमारा करलो ये प्रण निश्चय ही बलवान बने अपना तन-मन बापू ने स्वच्छता की अलख जगाई थी मोदीजी ने […]

बाल कहानी

बाल कथा – डर के आगे जीत

“दादी माँ; माँ कहती हैं हमलोगों को बचपन में हमारी नानी माँ या दादी माँ कहानी सुनाया करती थी । मैं तो आपके साथ रहता नहीं हूँ तो आपसे कभी कहानी नहीं सुन पाया हूँ , क्या आप मुझे कहानी सुना सकती हैं ?” गोलू के प्यार भरे अनुरोध को धरा टाल नहीं सकी उसने […]

बाल कविता

बरखा

नाच नचाने बादल आया, संग मे कितना पानी लाया। हर ओर थिरकती हवा चली, मदहोश मचलती मनचली। साँय साँय हो इधर उधर , न पता उसे जाना किधर। बरखा को न्यौता दे आयी, देख उसे बरखा मुस्काई। बरखा रानी हवा सयानी, एक सिरे की दो कहानी। घन  घन बादल गरजा, लगा जोर से डोल बजा। […]

बाल कहानी

बालकथा – आघात

“माँ मैं कल से स्कूल नहीं जाऊँगा।” स्कूल से आते ही मानू बस्ता रखते हुए कहता है। “क्यों?” माँ ने प्रश्न किया बिना कुछ कहे चुपचाप अपने कमरे में चला जाता है। माँ भी पीछे-पीछे जाती है पर! वह दरवाज़ा माँ को अंदर लिए बग़ैर ही बंद कर देता है। माँ बहुत देर तक दरवाज़ा […]

बाल कविता

बालगीत – लाल टमाटर

मैं हूँ गोल टमाटर लाल। करता लाल तुम्हारे गाल।। पेरू से मैं भारत आया। योरूप में भी नाम कमाया।। लव एपल का बड़ा कमाल। मैं हूँ गोल टमाटर लाल।। मुझे मानते हैं जो सब्जी। कर लें दूर वहम की कब्जी।। मैं फल हूँ गठिया का काल। मैं हूँ गोल टमाटर लाल।। खुजली हो या बेरी […]