Category : बाल साहित्य

  • सुर संगम (नर्सरी गीत नाटिका)

    सुर संगम (नर्सरी गीत नाटिका)

    प्रस्तुतकर्त्ता- छोटा-सा खरगोश नताशा, पेश हुआ ले एक तमाशा, सुनो-सुनो हे प्रिय श्रोताओं, प्रिय बहिनों और प्रिय भ्राताओं. खरगोश- आज खुशी का दिन है आया, जंगल में मंगल है छाया, ताल-वाद्य का होगा संगम, सबका ही...

  • बाल -गीत

    बाल -गीत

    जो चादर देख पाँव पसारते, जरूरतो में कभी न हारते . न मुश्किल में हाथ पसारते , न रिश्तों में कभी धन तलाशते. बिना सोचे जो करते खर्चा , उनका बिलो का घना पर्चा . मेहनत...

  • कृतघ्न कौन?

    कृतघ्न कौन?

    एक आदमी पेड़ के नीचे, बैठा-बैठा ऊंघ रहा था, एक शेर भी बहुत दूर से, मानव की गंध सूंघ रहा था. आंख अचानक खुली मनुष्य की, देखा उसने शेर आ रहा, डरकर भागा मानव आगे, पीछे-पीछे...



  • ईमानदारी का पुरस्कार

    ईमानदारी का पुरस्कार

    रामू नाम का लकड़हारा, नदी किनारे पर रहता था, रोज सवेरे जल्दी उठकर, जंगल को जाया करता था. लकड़ियां लाकर रोज शहर में, एक धनी को बेचा करता, उनसे जितने पैसे मिलते, रूखा-सूखा खाया करता. एक...

  • मितव्ययिता

    मितव्ययिता

    रामू खेलकर घर में आया, देखा नल को बहता उसने, सोचा ममी बंद करेंगी, नल को बंद किया ना उसने. कमरों की बत्ती जलती थी, पंखे भी सब हवा दे रहे, सोचा पापा बंद करेंगे, वरना...

  • कीटों की कहानी: उनकी ज़ुबानी

    कीटों की कहानी: उनकी ज़ुबानी

    मलेरिया का वाहक हूं, आपके खून का ग्राहक हूं, ज्वर फैलाना मेरा काम, मच्छरमल है मेरा नाम, सबको ही है मेरा सलाम. जहां कहीं हो कूड़ा-कचरा, निर्भय आती-जाती हूं, मैं मक्खी हूं रोगों की जड़, पेचिश-हैजा लाती हूं,...