बाल कविता

बादल

मैं घन,बादल कहलाता हूँ। सबको ही मैं नहलाता हूँ।। खारे सागर से जल भरता। नभ में ले जा मीठा करता।। धरती पर फिर बरसाता हूँ। मैं घन,बादल कहलाता हूँ।। गरमी में धरती तपती है। प्यासी!प्यासी!नित जपती है। बुँदियाँ बरसा सहलाता हूँ। मैं घन, बादल कहलाता हूँ।। बंजर ,जंगल या फसलों पर। खेतों , नगरों सब […]

बाल कविता

बालगीत “पढ़ने में भी ध्यान लगाओ”

मौसम कितना हुआ सुहाना। रंग-बिरंगे सुमन सुहाते। सरसों ने पहना पीताम्बर, गेहूँ के बिरुए लहराते।। — दिवस बढ़े हैं शीत घटा है, नभ से कुहरा-धुंध छटा है, पक्षी कलरव राग सुनाते। गेहूँ के बिरुए लहराते।। — काँधों पर काँवड़ें सजी हैं, बम भोले की धूम मची है, शिवशंकर को सभी रिझाते। गेहूँ के बिरुए लहराते।। […]

बाल कविता

बालगीत- मैं हूँ तितली रानी

मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. बहुत ध्यान से बच्चे सुनते, मेरी मधुर कहानी. बगिया-बगिया जाती हूँ. फूलों पर मंडराती हूँ. इठलाती-बलखाती हूँ. अनगिन खेल दिखाती हूँ. मुझे देखकर बच्चे दौड़ें, छोड़ें खाना-पानी. मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. लाल-गुलाबी-नीले हैं. हरे-बैगनी-पीले हैं. कितने रंग-रँगीले हैं. मेरे पंख सजीले हैं. इन पंखों पर […]

बाल कविता शिशुगीत

प्रॉमिस डे

प्रॉमिस डे आज आया है, वादा मुझे भी करना है, छोटा बच्चा हूं तो फिर क्या! सबके दुःख को हरना है. आज्ञा बड़ों की मैं मानूंगा, छोटों का रखूंगा ध्यान, स्वच्छता सब जगह रखूंगा, देश का मान मेरा सम्मान.

बाल कविता शिशुगीत

प्रपोज़ डे

मैं तो छोटा बच्चा हूं जी, मैं किसको प्रपोज करूं? ऐसा करता हूं मैं अपनी ममी को ही प्रपोज़ करूं. ममी ने ही जन्म दिया है, हरदम मेरा ध्यान रखा, होकर बड़ा याद करूंगा, मैंने भी प्रपोज़ डे का मज़ा चखा.

बाल कविता शिशुगीत

रोज़ डे

टीचर ने मुझको है पढ़ाया, रोज़ का मतलब होता गुलाब, मैं भी ममी का गुलाब हूं, टीचर का भी हूं मैं गुलाब. रोज़ का मतलब प्रतिदिन होता, प्रतिदिन पढ़ता-लिखता हूं, इसीलिए तो रोज़-रोज़ मैं , रोज़ डे मनाता दिखता हूं.

बाल कविता

बालकविता “सूरज कितना घबराया है”

फागुन में कुहरा छाया है। सूरज कितना घबराया है।। — अलसाये पक्षी लगते हैं। राह उजाले की तकते हैं।। — सूरज जब धरती पर आये। तब हम दाना चुगने जायें।। — भुवन भास्कर हरो कुहासा। समझो खग के मन की भाषा।। — बिल्ली सुस्ताने को आई। लेकिन यहाँ धूप नही पाई।। — नीचे जाने की […]

अन्य बाल साहित्य

कोरोनावायरस का कहर

प्यारे बच्चो, जय हिंद, आप लोग जानते ही होंगे, कि आजकल चीन में कोरोनावायरस का कहर छाया हुआ है. न केवल चीन में अब तो कोरोनावायरस दुनिया के 18 देशों तक पहुंच चुका है। चीन में अब तक इस जानलेवा बीमारी से 213 लोगों की मौत हो चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीमारी […]

बाल कविता शिशुगीत

जय भारत मैं गाऊं

मन करता है जय भारत, जय-जय भारत मैं गाऊं, जय भारत, जय भारत गा, गणतंत्र दिवस मैं मनाऊं. उठते-बैठते, सोते-जागते जय भारत मैं गाऊं, चलते-फिरते, दौड़ते-भागते जय भारत मैं गाऊं. गंगा-सा पावन मन लेकर, काम सभी के आऊं, हिमगिरि-सा हो अटल इरादा, देश का मान बढ़ाऊं. बादल से सीखूं मैं उड़ना, पंछी जैसे गाऊं, फूलों […]

बाल कविता

बाल कविता

मेरा सोना बच्चा सोएगा । मीठे सपनों में खोएगा । जहाँ लड्डू बर्फी भरे पड़े। चॉकलेट के पेड़ हैं बड़े बड़े । जहाँ दूध की नदियाँ बहती हैं , और बहुत सी परियाँ रहतीं हैं । हैं बादल कॉटन कैंडी जैसे , इन्हें खाए बगैर रहूँ कैसे । गुड्डे ,गुड़िया और टेडी बियर , मुझको […]