बाल कविता

लाल-लाल तरबूज🍉

लाल – लाल तरबूजा आया । मैंने जी भर कर वह खाया।। गर्मी का मधु फल तरबूजा। मीठा ऐसा ज्यों तर कूजा।। माता और पिता को भाया। लाल – लाल तरबूजा आया।। तपन धूप गर्मी की हरता। तृप्ति प्यास की भी है करता। जिसने देखा मन ललचाया। लाल – लाल तरबूजा आया।। लू – लपटों […]

बाल कविता

बच्चों से बतियां

बाहर कोरोना की मार बच्चों रहना होशियार वायरस है यह एक नन्हा सा मगर करे छुप-छुपकर वार…… बार-बार हाथ तुम धोना दूर रहेगा जिद्दी कोरोना बिना काम बाहर मत जाना कोई चीज भीतर ना लाना…… स्कूल बंद है पार्क बंद रहना अनुशासन के पाबंद चीजों में चिपक कर यह आता बाहर के खाने को कर […]

अन्य बाल साहित्य

मेरा नाम चैपलिन

मुझे बारिश में भींगना अच्छा लगता है, क्योंकि कोई तब मेरे आंसू देख नहीं सकता है ! 16 अप्रैल यानी महान हास्य कलाकार चार्ली चैपलिन का जन्मदिवस है । हॉलीवुड के मूक फिल्मों के विदूषक चार्ली चैपलिन को हिंदी में आवाज और अभिनय दिया– श्रीमान राज कपूर ने। ‘मेरा नाम जोकर’ का जोकर की भूमिका […]

बालोपयोगी लेख

साहित्य के सिपाही

31 जुलाई 1880 को ईदगाह के परिपक्व बचपना की तस्वीर को दुनिया में लेखनी के माध्यम से दिखाने वाले धनपत राय श्रीवास्तव का जन्म हुआ।प्रेमचंद’ नाम रखने से पहले, सरकारी नौकरी करते हुए वे अपनी रचनाएं ‘नवाब राय’ के रूप में प्रकाशित करवाते थे, लेकिन जब सरकार ने उनका पहला कहानी-संग्रह, ‘सोज़े वतन’ जब्त किया, […]

बाल कविता

बाल गीत – ताऊ जी 

दिन भर कितना लाड़ लड़ाते ताऊ जी नई कहानी रोज़ सुनाते ताऊ जी। भूलें चाहे पापा जी टॉफ़ी लाना दूध जलेबी खूब खिलाते ताऊ जी। चाचा कहते पढ़ ले, पढ़ ले , ओ मोटी ! उनको अच्छे से धमकाते ताऊ जी। कठिन पढ़ाई मुझको जब भी दुखी करे बड़े प्यार से सब समझाते ताऊ जी। […]

बाल कविता

बाल गीत – गुड़िया

छम छम करती गुड़िया आई रुन झुन रुन झुन बड़ी सुहाई आँखों में काजल है आँजा पीने को मांगे वह माजा जब ना दें तो करेगी शोर कहे बस ये दिल मांगे मोर पढ़ना लिखना नहीं सुहाता दौड़ धूप है इनको भाता खुलेंगे जाने कब स्कूल क्या जाने किसकी थी भूल सोते से अब तो […]

बाल कविता बाल साहित्य

होली आई, होली आई!

इन्द्रधनुषी रंग है बिखरे, आकाश का स्वरूप भी निखरे; रंगों की बौछार है लाई, होली आई, होली आई! लाल, पीला, हरा गुलाल, बुबुई रंग दे सानू के गाल; खाएँ गुजिया, पापड़ और मिठाई, होली आई, होली आई! बच्चों का मनपसंद त्यौहार, हर ओर खुशियाँ और प्यार; पिचकारियों की कतार लगाई, होली आई, होली आई! रूठें […]

बाल कविता

बालगीत – चीनी से अच्छा गुड़ खाना

चीनी से अच्छा गुड़ खाना। रोगों का घर चीनी माना।। प्रकृति ने दी हमें मिठाई। गाढ़ी भूरी हमने खाई।। उदर – रोग सब दूर भगाना। चीनी से अच्छा गुड़ खाना।। हड्डी को मजबूत बनाता। रक्त – चाप का दोष हटाता।। कमी रक्त की पूर्ण मिटाना। चीनी से अच्छा गुड़ खाना।। भोजन को भरपूर पचाता। स्वर […]

बाल कविता

बंदर जी

बैठे हो मुंडेर पर क्यों?पास नहीं आते हो क्यों?दाँत दिखाते गुस्से में क्यों?हमें डराते चखचख कर क्यों?नीचे आओ बंदर जीरोटी खाओ बंदर जी,फिर तुमको अंगूर खिलाऊँतुमको अपना दोस्त बनाऊँ।

बाल कविता

टीका सबको लगवाना है

टीका सबको लगवाना है। कोरोना से मनुज बचाना है।। साठ साल से ऊपर वाले। खोलें अपने भ्रम के ताले।। बीमारी दूर भगाना है। टीका सबको लगवाना है।। भारत ने खोजा है टीका। जो है सबके हित में नीका।। अफ़वाहों से क्या पाना है! टीका सबको लगवाना है।। वैज्ञानिक भारत के ज्ञानी। इनका नहीं विश्व में […]