बाल कविता

एक पेड़ लगाकर तो देखो

पेड़ों की ठंडी छांव में ज़रा बैठकर तो देखो, कित्ते बरस में पेड़ इतने ऊंचे-घने हो पाए, कैसे हो पाए भई, जरा सोचकर तो देखो, नए पेड़ यदि न लग पाए तो भावी पीढ़ी को, कैसे बड़े-घने पेड़ों की ठंडी छांव मिल पाएगी. जरा सोचकर तो देखो, एक पेड़ लगाकर तो देखो.

बाल कविता

बिल्ली मौसी

बिल्ली मौसी झुंड में रहती, यों तो कहती नहीं मैं डरती, कहो आज क्या खास हुआ है, शायद चूहा पास हुआ है! तुम नापास हुई तो क्या है, कोशिश करो फिर हर्ज ही क्या है! ऐसे डरने से क्या होगा! खा जाओगी तुम ही धोखा. चूहा क्या तुम्हें खा जाएगा! आंख दिखाओगी वह भागेगा, आत्महत्या […]

बाल कविता

बालगीत “नीड़ बनाया है”

कल केवल कुहरा आया था,अब बादल भी छाया है।हाय भयानक इस सर्दी ने,सबका हाड़ कँपाया है।। भीनी-भीनी पड़ी फुहारें,झीना-झीना उजियारा।आग सेंकता सरजू दादा,दिन में छाया अँधियारा।कॉफी और चाय का प्याला,सबसे ज्यादा भाया है।। आलू और शकरकन्दी भी,सबके मन को भाते हैं।गर्म-गर्म गाजर का हलवा,खुश होकर सब खाते हैं।कम्बल-लोई और कोट से,कोमल बदन छिपाया है।। हीटर-गीजर […]

बाल कहानी

बालकहानी : सोना समझ गयी

“मैं बहुत थक गयी हूँ। अब एक कदम भी नहीं चला जाता है मुझसे। सुबह से शाम तक बस; सिर्फ काम ही काम। सुनिए जी, आज मैं घर पर ही रहूँगी। आप जाइये काम पर।” नन्हीं चींटी सोना ने अपने पति डंबू से कहा।           डंबू ने सोना को चिढ़ाते हुए […]

बाल कविता

बालगीत – धूप सुहानी

लगती हमको धूप सुहानी। जाड़े की कहलाती रानी।। जब जाड़े का मौसम आता। बहुत-बहुत हमको वह भाता। दादी कहती खूब कहानी। लगती हमको धूप सुहानी।। जब होता है विदा अँधेरा। तब होता है स्वर्ण – सवेरा।। सूर्य झाँकता खिड़की- छानी। लगती हमको धूप सुहानी।। छोड़ रजाई बाहर आते। दैनिक चर्या में लग जाते।। करते याद […]

अन्य बाल साहित्य

बाल पहेलियाँ

1. बच्चों का इक पर्व अनोखा ,   हर वर्ष जो आता है ।   हँसते गाते और नाचते ,  नई उमंगे लाता है ।। 2. तीस दिवस का बना महीना , है इसकी पहचान । सर्दी की यह दस्तक देता , जरा बताओ जॉन ।। 3. माह नवंबर में इक आता ,  प्यारा पर्व […]

बाल कविता

चली रेल, छुक-छुक, छुक-छुक!

छुक-छुक, छुक-छुक, चली रेल, छुक-छुक दौड़ेंगीं, प्रिय सखा हमराह होंगे, मीठी-मीठी बातें होगी।। हंसी-ठिठोली, मौज मस्ती, रंग बहार लाएगी दोस्ती, जीवन सतरंगा हो जाएगा, प्रेम-रस धार बरसेगी।। कोई आये, कोई जाये, पेड़-पौधे, वन मनभाये, ऊंचे परबत, गहरी खाई, करतब करते बंदर तमाशाई।। ले लो मूंगफली नमकीन, गरम वड़ा-पाव लजीज, चना-जोर हैं चटपटा स्वाद, चल दी […]

बाल कविता

भागेगा जाड़ा

सरदी जी लाए पैगाम ,शीत ऋतु का तुम्हे सलाम। सुबह जल्दी मत उठना तुम ,करना देर तलक आराम। दिन भर कम्पना जाड़े से ,करना नाही कोई काम। कसरत से कतराना मीत ,फिल्म देखते गुजरे शाम। अब स्नान की कर दो छुट्टी ,सखे बचा जाड़े से चाम । पीते रह के काफी चाय ,करना सरदी को […]

बाल कविता

कोयल

अरे!अरे! सुनो कोयल है आई, अपनी सुंदर सी मीठी वाणी है लाई। कोयल है जो काली पर सबके मन को भाती है घने जंगल में बैठी हो पर तुम्हारी आवाज कौने-कौने तक पहुंचती है। इस मीठी वाणी को तुम कैसे हो गाती। तुम हो काली पर दिल की हो अच्छी वाली हो। अरे!अरे! सुनो कोयल […]

बाल कविता

भगवान

राम साईं शिव कैलाश सबके मन में रहते भगवान, नीलकंठ है शिव भगवान सबके मन में रहते राम। हनुमान जी के सीने में रहते सीताराम बोलो जय श्री राम, चक्रधारी है विष्णु भगवान लेते हम सबकी बात मान। राम साईं शिव कैलाश सबके मन में रहते भगवान। नाम -अंशिका कक्षा- नवमी राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक […]