बाल कविता बाल साहित्य

आज मेरी बुआ की चिट्ठी आई है!

आज मेरी बुआ की चिट्ठी आई है मोती की तरह सुंदर, उनकी लिखाई है, परिवार की हर बेटी को उन्होंने आगे बढ़ने की राह दिखाई और सिखाई है! दादी- बाबा ने कभी रोका न टोका, जब भी उन्होंने पढ़ने की इच्छा जताई है! गर्व है हम सबको उनपर, हर क्षेत्र में उन्नति उन्होंने पाई है! […]

बाल कविता

बाल गीत: आपके-हमारे- 10

1.टेलीफोन ”हैलो-हैलो, आप हैं कौन?  जल्दी बोलें, रहें न मौन, कैसे पता मुझे लग पाए, किसने किया है टेलीफोन.” ”मैं हूं तेरा नन्हा साथी, आओ खेलें मिल के खेल, मेरे पास है पीली जिप्सी, तुम ले आओ अपनी रेल.” -लीला तिवानी 2.कम्प्यूटर कम्प्यूटर मेरा कम्प्यूटर, करता टक-टक टिक-टिक टर, सबसे प्रमुख भाग जो इसका, कहलाता […]

बाल कविता

बालगीत – माँ की लोरी

मुझे याद है माँ की लोरी। माँ थी मेरी कितनी भोरी।। बिस्तर जब गीला हो जाता। रोकर अपना कष्ट बताता।। लेती समझ वेदना मोरी। मुझे याद है माँ की लोरी।। नींद नहीं जब मुझको आती। थपकी दे – दे मुझे सुलाती।। गा- गा मीठे स्वर में लोरी। मुझे याद है माँ की लोरी।। कभी जाँघ […]

बाल कविता

अदला – बदली

सुबह जगाने आता सूरज, शाम सुलाने आता चंदा। गर अदला-बदली हो जाए, झूम – झूमकर गाए बंदा।। पता नहीं सूरज को निश दिन, इतनी सुबह जगाता कौन? दिन भर गायब रहता चंदा, ठीक शाम को लाता कौन? कोई पता बता दे उसका, जो इनको ड्यूटी देता है। क्या ये नहीं बगावत करते? या तो वो […]

बाल कविता

बाल कविता – समोसे

गरम समोसे मुसकाते हैं ,मुँह में पानी वो लाते हैं। तीन नुकीले कोनों वाले ,सबके मन को ललचाते हैं। स्वाद चरपरा उसका होता ,चटनी साथ बहुत भाते हैं। चाय समोसे जब संग आते ,महफ़िल में रंग जमाते हैं। सुबह जलेबी और समोसे,जन जन पे ख़ुशी लुटाते हैं। — महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

प्रकृति से खिलवाड़ कर…

प्रकृति से खिलवाड़ कर पहाड़ों जंगलों को काट कर विकास का दीप जलाया है ..पर यह हमने क्या पाया है।   ढांचागत विकास कर फैक्ट्रियों- मशीनों का निर्माण कर धरती के तापमान को बढ़ाया है ..पर यह हमने क्या पाया है।   गरम हो रही है धरती नदियों ने बदली है धारा यह खतरनाक रसायनिक […]

बाल कविता

रेलगाड़ी

छुक छुक करती आती रेल हम सब को ले जाती रेल हो गरीब या हो अमीर शरणदात्री सबके रेल। चाहे पास या हो दूर सबको ही ले जाती रेल सुविधाएं मिलती हैं ढेरों कम खर्चे में करें सवारी। चाहे अकेले जाना हो या परिवार को ले जाना हो, सबकी सुविधा सबकी रेल पैसा कम और […]

बाल कविता

बालकविता “सबका ऊँचा नाम करूँ”

मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा।मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।—मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।।—मैं जब चलता ठुमक-ठुमक,वो फूले नही समाते हैं।जग के स्वप्न सलोने,उनकी आँखों में छा जाते हैं।।—ममता की मूरत मम्मी-जी,पापा-जी प्यारे-प्यारे।मेरे दादा-दादी जी भी,हैं सारे जग से न्यारे।।—सपनों में सबके […]

बाल कविता

बायोस्कोप

आओ-आओ बायोस्कोप देखो, पंसेरी का चूहा देखो, बारह मन की धोबन देखो, पैसा फेंको, तमाशा देखो. गागर में भर लाई है सागर, गुजरिया की नन्ही-सी गागर देखो, उंगली पे गोवर्धन पहाड़ देखो, पैसा फेंको, तमाशा देखो.

बाल कविता

दीपक

प्रभु ने हमको प्रेम से सौंपा, तमहारी-सुखदाई उजास, जब तक दम-में-दम है अपने, देंगे हम स्नेहिल प्रकाश. दीपक-तले अंधेरा होता, घेरे पर रोशन होते, खुद जलकर औरों को रोशन, करके हम खुश हैं होते.