बाल कविता बाल साहित्य

शाम सुहानी

मेरी शाम सुहानी हो जाये नानी एक कहानी हो जाये कोई अच्छी सी कोई सच्ची सी जो गुज़री हो कोई लम्बी सी वही बात पुरानी हो जाये नानी एक कहानी हो जाये कोई सुख का हो कोई दुःख का हो जो नयन में अश्रु बन छलका हो मेरी आँख का पानी हो जाये नानी एक […]

बाल कविता

बाल कविता – गोल ही गोल

सूरज गोल चंदा गोल। धरती , अंबर , तारे गोल।। गाड़ी के पहिए हैं गोल। गेंद हमारी सबसे गोल।। मुरगी का अंडा भी गोल। माताजी का बेलन गोल।। ढोल, नगाड़े, ढप हैं गोल। तबला और मंजीरा गोल।। पंखे के चक्कर भी गोल। घूम रहीं दो सुइयाँ गोल।। आँखों की दो पुतली गोल। आलू और टमाटर […]

बाल कविता बाल साहित्य

गुड़िया की शादी

    गुड़िया की शादी बात सुनो न दादी प्यारी।।                                    गुड़िया दस की हुई हमारी। पिंकी के घर गुड्डा आया। रिश्ता उसने है भिजवाया। देखो कैसा शुभ अवसर है। गुड्डा सेना में अफसर है। तारीख तुम्हे सुझानी होगी। […]

बाल कविता

बन्दर से भी बुद्धिमान होती है अधिक बँदरिया

एक दिवस भोलू बन्दर ने पर्स राह में पाया. नोट देखकर काफी उसमें ऐसा प्लान बनाया- पाँच सितारा होटल में चल खाना खाया जाये. आज बँदरिया रानी पर कुछ रंग जमाया जाये. भोलू जी जा पहुँचे होटल वेटर को बुलवाया. सबसे पहले सूप टुमैटो वेटर लेकर आया. भोलू जी पी गये शौक से सूप गटागट […]

बाल कहानी

स्कूल (गरीबी पर जीत)

राम एक नवी कक्षा का विद्यार्थी है और हमेशा से पढ़ने लिखने में बहुत ही अच्छे दिमाग का रहा है।आठवी कक्षा तक उसकी अटेंडेंस हमेशा पूरी रहती थी और उसकी पिछली कक्षा आठवीं में तो उसकी अटेंडेंस लगभग 97% थी। इससे उसकी टीचर भी उससे बहुत खुश रहते थे।हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहने वाला राम […]

बाल कविता

बादल

मैं घन,बादल कहलाता हूँ। सबको ही मैं नहलाता हूँ।। खारे सागर से जल भरता। नभ में ले जा मीठा करता।। धरती पर फिर बरसाता हूँ। मैं घन,बादल कहलाता हूँ।। गरमी में धरती तपती है। प्यासी!प्यासी!नित जपती है। बुँदियाँ बरसा सहलाता हूँ। मैं घन, बादल कहलाता हूँ।। बंजर ,जंगल या फसलों पर। खेतों , नगरों सब […]

बाल कविता

बालगीत “पढ़ने में भी ध्यान लगाओ”

मौसम कितना हुआ सुहाना। रंग-बिरंगे सुमन सुहाते। सरसों ने पहना पीताम्बर, गेहूँ के बिरुए लहराते।। — दिवस बढ़े हैं शीत घटा है, नभ से कुहरा-धुंध छटा है, पक्षी कलरव राग सुनाते। गेहूँ के बिरुए लहराते।। — काँधों पर काँवड़ें सजी हैं, बम भोले की धूम मची है, शिवशंकर को सभी रिझाते। गेहूँ के बिरुए लहराते।। […]

बाल कविता

बालगीत- मैं हूँ तितली रानी

मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. बहुत ध्यान से बच्चे सुनते, मेरी मधुर कहानी. बगिया-बगिया जाती हूँ. फूलों पर मंडराती हूँ. इठलाती-बलखाती हूँ. अनगिन खेल दिखाती हूँ. मुझे देखकर बच्चे दौड़ें, छोड़ें खाना-पानी. मैं हूँ तितली रानी-मैं हूँ तितली रानी. लाल-गुलाबी-नीले हैं. हरे-बैगनी-पीले हैं. कितने रंग-रँगीले हैं. मेरे पंख सजीले हैं. इन पंखों पर […]

बाल कविता शिशुगीत

प्रॉमिस डे

प्रॉमिस डे आज आया है, वादा मुझे भी करना है, छोटा बच्चा हूं तो फिर क्या! सबके दुःख को हरना है. आज्ञा बड़ों की मैं मानूंगा, छोटों का रखूंगा ध्यान, स्वच्छता सब जगह रखूंगा, देश का मान मेरा सम्मान.

बाल कविता शिशुगीत

प्रपोज़ डे

मैं तो छोटा बच्चा हूं जी, मैं किसको प्रपोज करूं? ऐसा करता हूं मैं अपनी ममी को ही प्रपोज़ करूं. ममी ने ही जन्म दिया है, हरदम मेरा ध्यान रखा, होकर बड़ा याद करूंगा, मैंने भी प्रपोज़ डे का मज़ा चखा.