Category : बाल कविता

  • तुमने ही सिखलाया

    तुमने ही सिखलाया

    सेवा करना सदा सभी की, तुमने ही सिखलाया बापू। दीन जनों को गले लगाना, तुमने ही सिखलाया बापू॥ बुरा न बोलो, बुरा न देखो, बुरा न सुनो बताया बापू। तन-मन-धन से हिंसा छोड़ो, तुमने ही सिखलाया...

  • एक प्रतिज्ञा

    एक प्रतिज्ञा

    एक प्रतिज्ञा आज करें हम, मिलकर कदम बढ़ाएंगे, कड़वे सच से दूर रहें हम, झूठ कभी नहीं मुख से बोलें.   एक प्रतिज्ञा आज करें हम, कुसंगति से दूर रहें, सुसंगति से नाता जोड़ें, औरों का...




  • बाल कविता : गगन की सैर

    बाल कविता : गगन की सैर

    चंदा के घर जाऊंगा किसी को नही ले जाऊंगा खूब मजे उड़ाऊंगा गगन घूमके आऊंगा चंदा संग सो जाऊंगा सूरज संग उठ जाऊंगा तारों संग खुशी मनाऊंगा फिर घूम धरा पर आऊंगा. — भारत विनय

  • छूमन्तर मैं कहूँ…

    छूमन्तर मैं कहूँ…

      छूमन्तर मैं कहूँ और फिर, जो चाहूँ बन जाऊँ। काश, कभी पाशा अंकल सा, जादू मैं कर पाऊँ।   हाथी को मैं कर दूँ गायब, चींटी उसे बनाऊँ। मछली में दो पंख लगाकर, नभ में...

  • बालगीत : तितली

    बालगीत : तितली

    बालदर्शन मासिक कानपुर मे नवम्बर 1991 में छपा प्रथम बालगीत फूलों पर मंडराती तितली चंचल पंख हिलाती तितली डाल-डाल पर फूल-फूल पर है देखो इठलाती तितली फूलों का मकरन्द चूसकर चंचल पंख हिलाती तितली रंग भरे...


  • बाल कविता – चुन्नू मुन्नू

    बाल कविता – चुन्नू मुन्नू

    चुन्नू मुन्नू पढ़ने जाते रोज़ रोज़ वे उधम मचाते मम्मी पापा जब समझाते सुन कर भूल दुबारा जाते एक दिन एक सिपाही आया मुन्नू को तब बहुत डराया चुन्नू उससे अब घबराया उसने फिर न उधम मचाया — भारत विनय