बाल कविता

काला कौवा

काला कौवा शोर मचाता,काला कौवा तनिक न भाता। सभी मारते उसको पत्थर ,पर वो जल्दी से उड़ जाता। घर की छत पर जब भी आता ,मन को वो शंकित कर जाता। नन्हे चीकू के हाथों से ,छीन रोटियां वो उड़ जाता। जब भी वो चालाकी करता,कौवा हरदम मुंह की खाता। —महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

हम सब बोलें मीठे बोल

बात पते की सुन लो बच्चो जब भी खेलो मिलकर खेलो। जब भी बोलो हंसकर बोलो, बातों में मिसरी सी घोलो।। अच्छे और बुरे कामों को, मन की आंखों से तुम तोलो। जब बोलो तब सच-सच बोलो, कभी न बातें रच-रच बोलो।। हंसकर मन की गांठें खोलो, दिल से दिल का रिश्ता जोड़ो। जब बोलो […]

बाल कविता

मेरी टीचर सबसे प्यारी

बाल गीत मेरी टीचर सबसे प्यारी, प्यार बहुत मुझे करती है, मेरे मन को सुमन बनाने, की हर कोशिश करती है. नई-नई बातें सिखलाती, ज्ञान-भंडारे भरती है, मेरे मन के हर संशय को, अपने ज्ञान से हरती है. अपने देश की शान बढ़ाना, वह हमको सिखलाती है, अपनी भाषा उन्नत करने, का रस्ता दिखलाती है. […]

बाल कविता

क्रिसमस

क्रिसमस का त्योहार है, खुशियों की बहार है, मिलता रहे अपनों का प्यार, यही बड़ा उपहार है. सांता क्लॉज जी आए हैं, ढेरों तोहफे लाए हैं, बच्चों को खुश करने को, लालम-लाल बन आए हैं.

बाल कविता

हाथी दाँत

इक दिन हाथी ज़ोर से चीखा दर्द हुआ था दाँत में तीखा. दौड़ी भागी हथिनी आई कान पकडकर डॉक्टर लाई . डॉक्टर ने पूछे कई सवाल खूब करी फिर जांच पड़ताल. बहुत सोचकर बोला डॉक्टर, “बिगड़ गई है बात यहाँ पर अब तो है बस यही उपाये झट से दाँत निकाला जाये.” डर से उड़ […]

बाल कविता

रोटी कौन खाएगा?

छोटी-सी मुर्गी थी लाल, बतख सफेद थी खूब कमाल, चितकबरी बिल्ली शैतान, काला कुत्ता बड़ा बेईमान. चारों साथ-साथ रहते थे, कभी न आपस में लड़ते थे, मुर्गी तो करती थी काम, बाकी सब करते आराम. एक बार मुर्गी ने सोचा, इनको सबक सिखाना होगा, सुस्ती से आती कंगाली, इनको चुस्त बनाना होगा. एक खेत से […]

बाल कविता

चाय का प्याला

गरम चाय का हूँ मैं प्याला। सर्दी दूर भगाने वाला।। डंडी थामे मुझे उठाते। होंठों से तब मुझे लगाते।। लाल -हरा रँग गोरा- काला। गरम चाय का हूँ मैं प्याला।। सहन चाय की गरमी करता। कोई चाय गरम जब भरता।। करता मैं उपकार निराला। गरम चाय का हूँ मैं प्याला।। माँ कहती तुम चाय न […]

बाल कविता

नए साल में हुआ धमाल

खुशियां ले के आया साल ,चीकू मीठी हुए निहाल। मीठा सबने खाया खूब ,देखो भैया भर भर थाल। आया जाड़ा मार दहाड़ ,बोला सबसे ओढ़ो शाल। फूल खिले बाग में अनगिन ,मौसम ने क्या किया कमाल। ख़ुशी से नाची तिथी तृषा ,नए साल में हुआ धमाल। — महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

बाल गीत

नई उमंगें साथ लिए , नव वर्ष अब आया है। बहुत कठिन था साल पुराना, छायी थी अंधियारी । दुर्भाग्य ने सबको घेर लिया आई  थी लाचारी ।। डर , चिंता आतंक ने सबको बहुत सताया है। नई उमंगें साथ लिए , नव वर्ष अब आया है।।1।। आतंक रूपी कोरोना से, सबको आफत आयी। जाने […]

बाल कविता

मोर

मोर हूं मैं मोर हूं, बच्चों का प्यारा मोर हूं, सुंदर अनगिन रंगों वाला, करता सबको विभोर हूं. तनिक नहीं हूं मैं इतराता, चाहे पक्षीराज कहाता, सिर पर मेरे कलंगी है नाचना मेरे मन को भाता. खुले वनों में रहता हूं, राष्ट्रीय पक्षी भारत का हूं, इंग्लिश में पीकॉक’ कहाता, संस्कृत में मैं मयूर हूं. […]