Category : बाल कविता


  • स्वतंत्रता दिवस पर

    स्वतंत्रता दिवस पर

    आगे इसे ले जाना है भारत सपूत हम सच्चे हैं देश सेवा से न पीछे हटेंगे मेहनत करेंगे डटकर हम गौरव-स्वाभिमान हित डटेगें कण-कण यहां का सोना उगले ऐसा भारत देश बनाना है एक-एक बुराई मिटाकर...

  • काली बिल्ली

    काली बिल्ली

    काली बिल्ली जब घर आई। मम्मी ने रसमलाई छुपाई। जैसे ही देखा चूहों ने। झट से सरपट दौड़ लगाई चमकीली आँखे थी उसकी। वो मेरे मन को भाई। काली काली धारी वाली। बिल्ली मेरे घर आई



  • दादी की ढोलक

    दादी की ढोलक

    यह ढोलक है दादी की। दादी की परदादी की। दोनों इसे बजाती थीं। मिलकर गाने गाती थीं। हम भी इसे बजाते हैं। गाते हैं मस्ताते हैं। दादी को परदादी को, झुककर शीश नवाते हैं।

  • परी आयी

    सोये बच्चों, झट उठ जाओ बिस्तर छोड़ो, बाहर आओ नभ से परी उतर के आयी देखो संग वह क्या-क्या लायी सोने जैसे पंख निराले हाथों जादू छड़ी सम्हाले रंग-बिरंगा पहने चोला गोरा तन, मुखड़ा है भोला...

  • मेला

    मेला

    आज देखने गए हम मेला तरह-तरह की दुकान सजी है और लगा है ठेला  चाट , पकौड़ी और जलेबी गरम-गरम मुझको लगा सबसे अच्छा  बुढ़िया का बाल नरम-नरम लोग सभी दिखते खूब सजे-धजे बच्चे – बूढ़े...