बाल कविता

मुझे समझाना तुम।

मां सुन सुन के ये समाचार मुझे डर लगता है, तुम हो मेरे पास फिर भी मुझे डर लगता है। पापा सब का ध्यान हैं रखते देखो अस्पताल में, उनके पास बेझिझक जाऊं कैसे मुझे डर लगता है। आज के हालात देख याद स्कूल की बात आई, साफ सफाई का महत्त्व बताती टीचर याद आई। […]

बाल कविता

“सबको अच्छे लगते बच्चे”

चंचल-चंचल, मन के सच्चे।सबको अच्छे लगते बच्चे।।—कितने प्यारे रंग रंगीले।उपवन के हैं सुमन सजीले।।—भोलेपन से भरमाते हैं।ये खुलकर हँसते-गाते हैं।।—भेद-भाव को नहीं मानते।बैर-भाव को नहीं ठानते।।—काँटों को भी मीत बनाते।नहीं मैल मन में हैं लाते।।—जीने का ये मर्म बताते।प्रेम-प्रीत का कर्म सिखाते।।—(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बाल कविता

बाल कविता : मैं तो छोटा सा बच्चा हूँ जी

मैं तो छोटा सा बच्चा हूँ जी। दिल का एकदम सच्चा हूँ जी।। लगता हूँ सबको अच्छा जी। करते है सब मुझको प्यार।। माँ दादी का मैं लाड़ला प्यारा। हूँ में घर में सबका दुलारा।। कहते है सब शैतानी करना मेरा काम। करता हूँ मैं नित नये शरारत भरे काम।। जैसा भी हूँ लेकिन लगता […]

बाल कविता

नन्हा मुन्ना बच्चा हूँ मैं

नन्हा मुन्ना बच्चा हूँ मैं, दिल का एकदम सच्चा हूँ मैं। सुबह सबेरे जगता हूँ मैं, रोज योगा करता हूँ मैं। रोज करता हूँ मैं ईश्वर का गुणगान, उनकी कृपा से भारत बने महान। जाता हूँ पढ़ने रोजाना स्कूल, नहीं करता हूँ पढ़ाई मैं कोई भूल। स्वच्छता का रखता हूँ हर वक्त ध्यान, स्वच्छ रखकर […]

बाल कविता बाल साहित्य

शाम सुहानी

मेरी शाम सुहानी हो जाये नानी एक कहानी हो जाये कोई अच्छी सी कोई सच्ची सी जो गुज़री हो कोई लम्बी सी वही बात पुरानी हो जाये नानी एक कहानी हो जाये कोई सुख का हो कोई दुःख का हो जो नयन में अश्रु बन छलका हो मेरी आँख का पानी हो जाये नानी एक […]

बाल कविता

बाल कविता – गोल ही गोल

सूरज गोल चंदा गोल। धरती , अंबर , तारे गोल।। गाड़ी के पहिए हैं गोल। गेंद हमारी सबसे गोल।। मुरगी का अंडा भी गोल। माताजी का बेलन गोल।। ढोल, नगाड़े, ढप हैं गोल। तबला और मंजीरा गोल।। पंखे के चक्कर भी गोल। घूम रहीं दो सुइयाँ गोल।। आँखों की दो पुतली गोल। आलू और टमाटर […]

बाल कविता बाल साहित्य

गुड़िया की शादी

    गुड़िया की शादी बात सुनो न दादी प्यारी।।                                    गुड़िया दस की हुई हमारी। पिंकी के घर गुड्डा आया। रिश्ता उसने है भिजवाया। देखो कैसा शुभ अवसर है। गुड्डा सेना में अफसर है। तारीख तुम्हे सुझानी होगी। […]

बाल कविता

बन्दर से भी बुद्धिमान होती है अधिक बँदरिया

एक दिवस भोलू बन्दर ने पर्स राह में पाया. नोट देखकर काफी उसमें ऐसा प्लान बनाया- पाँच सितारा होटल में चल खाना खाया जाये. आज बँदरिया रानी पर कुछ रंग जमाया जाये. भोलू जी जा पहुँचे होटल वेटर को बुलवाया. सबसे पहले सूप टुमैटो वेटर लेकर आया. भोलू जी पी गये शौक से सूप गटागट […]

बाल कविता

बादल

मैं घन,बादल कहलाता हूँ। सबको ही मैं नहलाता हूँ।। खारे सागर से जल भरता। नभ में ले जा मीठा करता।। धरती पर फिर बरसाता हूँ। मैं घन,बादल कहलाता हूँ।। गरमी में धरती तपती है। प्यासी!प्यासी!नित जपती है। बुँदियाँ बरसा सहलाता हूँ। मैं घन, बादल कहलाता हूँ।। बंजर ,जंगल या फसलों पर। खेतों , नगरों सब […]

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बालगीत “पढ़ने में भी ध्यान लगाओ”

मौसम कितना हुआ सुहाना। रंग-बिरंगे सुमन सुहाते। सरसों ने पहना पीताम्बर, गेहूँ के बिरुए लहराते।। — दिवस बढ़े हैं शीत घटा है, नभ से कुहरा-धुंध छटा है, पक्षी कलरव राग सुनाते। गेहूँ के बिरुए लहराते।। — काँधों पर काँवड़ें सजी हैं, बम भोले की धूम मची है, शिवशंकर को सभी रिझाते। गेहूँ के बिरुए लहराते।। […]