बाल कविता

बालगीत – साबुन

घिस – घिस छोटा मैं होता हूँ। मैल तुम्हारा मैं धोता हूँ।। तरह – तरह के रँग हैं मेरे। महक ताजगी भरी बिखेरे।। कभी न मैला मैं होता हूँ। मैल तुम्हारा धोता हूँ।। सब ही मुझको साबुन कहते। सस्ते – मँहगे भी हम रहते।। कभी नहीं मैं तो सोता हूँ। मैल तुम्हारा मैं धोता हूँ।। […]

बाल कविता

मिलजुल के सीखो रहना जी

ये जीवन है एक लड़ाई,इसमें होती हाथापाई। जीतोगे तो ताज मिलेगा ,हारोगे तो मिलेगी खाई। वैसे तो मिलते कम मौके, पर जब पाओ करो भलाई। खुशियों के रंगीन चमन में,आग लगाती नफरत ताई। दुनिया के मेले में अक्सर,अच्छों में भी दिखी बुराई। मिलजुल के सीखो रहना जी,इसमें सबकी होय भलाई। — महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

बालगीत “जोकर खूब हँसाये”

जो काम नही कर पायें दूसरे,वो जोकर कर जाये।सरकस मे जोकर ही,दर्शक-गण को खूब रिझाये।—नाक नुकीली, चड्ढी ढीली,लम्बी टोपी पहने,उछल-कूद कर जोकर राजा,सबको खूब हँसाये।—चाँटा मारा साथी को,खुद रोता जोर-शोर से,हाव-भाव से, शैतानी से,सबका मन भरमाये।—लम्बा जोकर तो सीधा है,बौना बड़ा चतुर है,उल्टी-सीधी हरकत करके,बच्चों को ललचाये।—(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बाल कविता

दिवाली का पावन पर्व

प्यारे बच्चो! तुम्हें बताऊं, दिवाली की कथा सुनाऊं। दिया जलाकर घर सजाऊं; खुशियों का यह पर्व मनाऊं।। बहुत पहिले अवधपुरी में, दशरथ के घर जन्मे राम। पाप-ताप सब दूर किये; सफल हुए तब सबके काम।। झूठा-पापी था इक रावण, उसके साथ लड़े प्रभु राम। मार रावण को रामचन्द्र ने; बढ़ाया अच्छाई का है मान।। इसी […]

बाल कविता

चार बाल गीत- 7

1.बायोस्कोप आओ-आओ बायोस्कोप देखो, पंसेरी का चूहा देखो, बारह मन की धोबन देखो, पैसा फेंको, तमाशा देखो. गागर में भर लाई है सागर, गुजरिया की नन्ही-सी गागर देखो, उंगली पे गोवर्धन पहाड़ देखो, पैसा फेंको, तमाशा देखो. 2.दिवाली जगमग-जगमग आई दिवाली, दीप खुशी के लाई दिवाली, मिलकर दीप जलाएंगे, प्रेम-संदेशा लाई दिवाली. मिट्टी के दीपक […]

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दिवाली

जगमग-जगमग आई दिवाली, दीप खुशी के लाई दिवाली, मिलकर दीप जलाएंगे, प्रेम-संदेशा लाई दिवाली. मिट्टी के दीपक कुम्हार ने, बड़े जतन से बनाए हैं, कुम्हार की भी मने दिवाली, ढेरों दीपक लाए हैं. दीप जलें तो होती दिवाली, प्रेम बढ़े तो होती दिवाली, मन में दीप खुशी के जलें तो, जगमग-जगमग होती दिवाली. बम-पटाखे नहीं […]

बाल कविता बाल साहित्य

आज मेरी बुआ की चिट्ठी आई है!

आज मेरी बुआ की चिट्ठी आई है मोती की तरह सुंदर, उनकी लिखाई है, परिवार की हर बेटी को उन्होंने आगे बढ़ने की राह दिखाई और सिखाई है! दादी- बाबा ने कभी रोका न टोका, जब भी उन्होंने पढ़ने की इच्छा जताई है! गर्व है हम सबको उनपर, हर क्षेत्र में उन्नति उन्होंने पाई है! […]

बाल कविता

बाल गीत: आपके-हमारे- 10

1.टेलीफोन ”हैलो-हैलो, आप हैं कौन?  जल्दी बोलें, रहें न मौन, कैसे पता मुझे लग पाए, किसने किया है टेलीफोन.” ”मैं हूं तेरा नन्हा साथी, आओ खेलें मिल के खेल, मेरे पास है पीली जिप्सी, तुम ले आओ अपनी रेल.” -लीला तिवानी 2.कम्प्यूटर कम्प्यूटर मेरा कम्प्यूटर, करता टक-टक टिक-टिक टर, सबसे प्रमुख भाग जो इसका, कहलाता […]

बाल कविता

बालगीत – माँ की लोरी

मुझे याद है माँ की लोरी। माँ थी मेरी कितनी भोरी।। बिस्तर जब गीला हो जाता। रोकर अपना कष्ट बताता।। लेती समझ वेदना मोरी। मुझे याद है माँ की लोरी।। नींद नहीं जब मुझको आती। थपकी दे – दे मुझे सुलाती।। गा- गा मीठे स्वर में लोरी। मुझे याद है माँ की लोरी।। कभी जाँघ […]

बाल कविता

अदला – बदली

सुबह जगाने आता सूरज, शाम सुलाने आता चंदा। गर अदला-बदली हो जाए, झूम – झूमकर गाए बंदा।। पता नहीं सूरज को निश दिन, इतनी सुबह जगाता कौन? दिन भर गायब रहता चंदा, ठीक शाम को लाता कौन? कोई पता बता दे उसका, जो इनको ड्यूटी देता है। क्या ये नहीं बगावत करते? या तो वो […]