बाल कविता शिशुगीत

प्रॉमिस डे

प्रॉमिस डे आज आया है, वादा मुझे भी करना है, छोटा बच्चा हूं तो फिर क्या! सबके दुःख को हरना है. आज्ञा बड़ों की मैं मानूंगा, छोटों का रखूंगा ध्यान, स्वच्छता सब जगह रखूंगा, देश का मान मेरा सम्मान.

बाल कविता शिशुगीत

प्रपोज़ डे

मैं तो छोटा बच्चा हूं जी, मैं किसको प्रपोज करूं? ऐसा करता हूं मैं अपनी ममी को ही प्रपोज़ करूं. ममी ने ही जन्म दिया है, हरदम मेरा ध्यान रखा, होकर बड़ा याद करूंगा, मैंने भी प्रपोज़ डे का मज़ा चखा.

बाल कविता शिशुगीत

रोज़ डे

टीचर ने मुझको है पढ़ाया, रोज़ का मतलब होता गुलाब, मैं भी ममी का गुलाब हूं, टीचर का भी हूं मैं गुलाब. रोज़ का मतलब प्रतिदिन होता, प्रतिदिन पढ़ता-लिखता हूं, इसीलिए तो रोज़-रोज़ मैं , रोज़ डे मनाता दिखता हूं.

बाल कविता

बालकविता “सूरज कितना घबराया है”

फागुन में कुहरा छाया है। सूरज कितना घबराया है।। — अलसाये पक्षी लगते हैं। राह उजाले की तकते हैं।। — सूरज जब धरती पर आये। तब हम दाना चुगने जायें।। — भुवन भास्कर हरो कुहासा। समझो खग के मन की भाषा।। — बिल्ली सुस्ताने को आई। लेकिन यहाँ धूप नही पाई।। — नीचे जाने की […]

बाल कविता शिशुगीत

जय भारत मैं गाऊं

मन करता है जय भारत, जय-जय भारत मैं गाऊं, जय भारत, जय भारत गा, गणतंत्र दिवस मैं मनाऊं. उठते-बैठते, सोते-जागते जय भारत मैं गाऊं, चलते-फिरते, दौड़ते-भागते जय भारत मैं गाऊं. गंगा-सा पावन मन लेकर, काम सभी के आऊं, हिमगिरि-सा हो अटल इरादा, देश का मान बढ़ाऊं. बादल से सीखूं मैं उड़ना, पंछी जैसे गाऊं, फूलों […]

बाल कविता

बाल कविता

मेरा सोना बच्चा सोएगा । मीठे सपनों में खोएगा । जहाँ लड्डू बर्फी भरे पड़े। चॉकलेट के पेड़ हैं बड़े बड़े । जहाँ दूध की नदियाँ बहती हैं , और बहुत सी परियाँ रहतीं हैं । हैं बादल कॉटन कैंडी जैसे , इन्हें खाए बगैर रहूँ कैसे । गुड्डे ,गुड़िया और टेडी बियर , मुझको […]

बाल कविता शिशुगीत

छवि देश की सुथरी होगी

छोटे-छोटे बालक हैं हम, लेकिन नहीं किसी से कम, मत समझो नादान है बुद्धि, कल तो देश चलाएंगे हम सौंप के तो देखो डोरी हमको, न्याय व्यवस्था चुस्त करेंगे, दोषी कोई न बच पाएगा, ऐसा सबको दुरुस्त करेंगे. शांति होगी अपने देश में, क्रांति प्रदूषण के प्रति होगी, भ्रांति रहेगी न किसी नियम में, छवि देश […]

बाल कविता शिशुगीत

पांच तोते

  तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, हमें देश पर नाज. तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, देश पर न आए आंच. तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, अपने मन को जांच. तोते आए पांच, दिखा रहे थे नाच, बोला तोता एक, आतंक […]

बाल कविता

बाल गीत “जीत गया कुहरा”

कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई। जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।। — ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता, लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता, बासन्ती मौसम में सर्दी ने ली अँगड़ाई। जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।। — साँप-नेवले के जैसा ही युद्ध हो रहा, कभी सूर्य और कभी […]

बाल कविता शिशुगीत

नन्ही चिड़िया

नन्ही-सी मैं चिड़िया हूं, अपनी ममा की गुड़िया हूं, लगती हूं मैं भोली-सी, बड़ी गजब की पुड़िया हूं. अभी तलक मैं उड़ नहीं पाती, फुदक-फुदक कर चलती हूं, जब उड़ने की बारी आए, देखूं कहां निकलती हूं. ममा ही मेरी टीचर भी है, बहुत-से पाठ पढ़ाती है, अपने देश से प्यार करने का, प्यारा सबक […]