बाल कविता

आम की पौध: एक बाल गीत

मां मेरी इक विनती मान ले, आम की पौध तू मुझे मंगा दे, बगिया में इसको रोपूंगा, फलते देख खुश होऊंगा. मत पूछो क्या लाभ हैं इससे, प्रदूषण दूर भगाऊंगा, धूप से मुझे बचाएगा यह, ठंडी छाया पाऊंगा. जब यह खूब बड़ा होगा, इस पर झूला डालूंगा, सब मित्रों को यहां बुलाकर, झूलूंगा और झुलाऊंगा. […]

बाल कविता

वो शिक्षक कहलाते हैं

प्यार-दुलार, संस्कार है देते, वो शिक्षक कहलाते हैं। अंत:शक्ति जगा, देते आकार, वो शिक्षक कहलाते हैं।। अज्ञानी मन को तपा-तपा, सूरज सा वे चमकाते हैं। प्रकाश दिखाते अंधकार में, उत्तम शिक्षक कहलाते हैं।। अनगढ़ पत्थर को प्रयास से, पत्थर पारस बना देते हैं। स्वच्छता, साक्षरता बढ़े देश में, जागरूकता क्रांति ला देते हैं।। पुस्तक और […]

बाल कविता

हम सब बोलें मीठे बोल

बात पते की सुन लो बच्चो जब भी खेलो मिलकर खेलो। जब भी बोलो हंसकर बोलो, बातों में मिसरी सी घोलो।। अच्छे और बुरे कामों को, मन की आंखों से तुम तोलो। जब बोलो तब सच-सच बोलो, कभी न बातें रच-रच बोलो।। हंसकर मन की गांठें खोलो, दिल से दिल का रिश्ता जोड़ो। जब बोलो […]

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बालगीत-तारे औऱ बाल जिज्ञासा

दिखें रात में नभ में तारे। जाते कहाँ दिवस में सारे।। टिम-टिम करके करते बातें। अच्छी लगती हैं तब रातें।। लगते हैं आँखों को प्यारे। दिखें रात में नभ में तारे।। माँ! तारों का घर अंबर में। कैसे लटके वे अधवर में।। आँखें ज्यों मिचकाते सारे। दिखें रात में नभ में तारे।। सूरज का क्या […]

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बालगीत- लहँगे का भाई:प्लाजो

पाजामे का   नव  अवतार। प्लाजो आया तज सलवार।। नए रूप में बड़ा निराला। रंग – बिरंगा नीला काला।। नीचे – ऊपर सम आकार। प्लाजो आया तज सलवार।। पहन रहे थे अब तक पापा। मम्मी भी खो बैठीं आपा।। छिड़ी एक दिन मीठी रार। प्लाजो आया तज सलवार।। सट – सट टाँगें घुस जाती हैं। पहन […]

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गीत – अपना वतन

मेरे वतन की धूल को। मेरे वतन के फूल को।। मेरा नमन! मेरा नमन!! मेरा वतन ! अपना वतन!! हम वतन की संतान हैं। तुमसे हमारी जान हैं।। है विश्व में चमका रतन। रक्षक बनें कर- कर जतन।। मेरा नमन ! मेरा- नमन! मेरा वतन ! अपना वतन!! हम गाँव नगरों में रहें। अपना तुम्हें […]

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सबसे प्यारा देश हमारा

सबसे न्यारा सबसे अच्छा ,प्यारा अपना देश, सब रहते है इस बगिया में जाकिर ,जॉन  महेश । सुखविंदर भी रहते इसमें और सलमा भी रहती , सब मिलकर त्योहार मनाते मस्त हवा  है बहती ।  आशा का है घर का मंदिर जस्सी का  गुरुद्वारा, जारा की मस्ज़िद भी यह है चर्च मैरी का प्यारा । […]

बाल कविता

हम स्कूल चलेंगे

हम बच्चे फिर स्कूल चलेंगे। उम्मीदें नव झूल चलेंगे। मीत बनेंगे प्यारे-प्यारे, हस्ते- गाते रोज़ मिलेंगे । खेलेंगे हम खूब पढ़ेंगे । जीवन अपना स्वयं गढ़ेंगे। हारे हैं न कभी हारेंगे, विजयी बनकर ही निखरेंगे।। हम देश का भविष्य बनेंगे। ये साबित कर दिखलाएँगे। धीर, वीर, तकदीर बनेंगे , सरहद पर शमशीर बनेंगे।। हम कलाम, […]

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बालगीत – भाता मुझको मेरा गाँव

भाता मुझको मेरा गाँव। वहाँ पेड़ की शीतल छाँव।। शहरों से अच्छा है प्यारा। नदिया का है शांत किनारा।। जाने को विचलित हैं पाँव। भाता मुझको मेरा गाँव।। लोग गाँव के भोले सीधे। नहीं लालची धन पर गीधे।। नहीं काग – सी होती काँव। भाता मुझको मेरा गाँव।। अन्न ,फूल,फल की हो खेती। गाँव धरा […]

बाल कविता बाल साहित्य

रसगुल्ला

गोल गोल रसगुल्ला, स्वादिष्ट, बड़ा ही निराला। मुंह में डालो,घुल जाए, खाए,और खाते ही जाए। प्यारे,चाशनी में घुले घुले, दुलार में जैसे डुबे डूबे, मुदुल,मुलायम, धवल, कपास-से बिल्कुल नरम। छोटू मोटू सब खाते, मस्ती और मौज मनाते। दादा-दादी,नाना-नानी बिना दांत जी भर खा पाते।। प्यारे बच्चो,निर्मल रहो, रासगुल्ले-सा धवल चरित्र हो। स्वभाव में कोमलता हो, […]