Category : बाल कविता

  • कृतघ्न कौन?

    कृतघ्न कौन?

    एक आदमी पेड़ के नीचे, बैठा-बैठा ऊंघ रहा था, एक शेर भी बहुत दूर से, मानव की गंध सूंघ रहा था. आंख अचानक खुली मनुष्य की, देखा उसने शेर आ रहा, डरकर भागा मानव आगे, पीछे-पीछे...



  • ईमानदारी का पुरस्कार

    ईमानदारी का पुरस्कार

    रामू नाम का लकड़हारा, नदी किनारे पर रहता था, रोज सवेरे जल्दी उठकर, जंगल को जाया करता था. लकड़ियां लाकर रोज शहर में, एक धनी को बेचा करता, उनसे जितने पैसे मिलते, रूखा-सूखा खाया करता. एक...

  • मितव्ययिता

    मितव्ययिता

    रामू खेलकर घर में आया, देखा नल को बहता उसने, सोचा ममी बंद करेंगी, नल को बंद किया ना उसने. कमरों की बत्ती जलती थी, पंखे भी सब हवा दे रहे, सोचा पापा बंद करेंगे, वरना...

  • कीटों की कहानी: उनकी ज़ुबानी

    कीटों की कहानी: उनकी ज़ुबानी

    मलेरिया का वाहक हूं, आपके खून का ग्राहक हूं, ज्वर फैलाना मेरा काम, मच्छरमल है मेरा नाम, सबको ही है मेरा सलाम. जहां कहीं हो कूड़ा-कचरा, निर्भय आती-जाती हूं, मैं मक्खी हूं रोगों की जड़, पेचिश-हैजा लाती हूं,...


  • नन्हा टिंकू

    नन्हा टिंकू

    नन्हा टिंकू गया बजार, लेकर आया केले चार. केला एक दिया ममी को, केले रह गए बाकी तीन, बोला, ”कौन बजाए बीन?” केला एक दिया पापा को, केले रह गए बाकी दो, बोला, ”कौन रहा है...

  • पेड़ लगाऊंगा

    पेड़ लगाऊंगा

    नन्हा मैं हूँ नन्हा सा ही पेड़ लगाऊंगा, भरी जवानी में फल जिसके ढेर खाऊंगा। हरी भरी धरती पर बरसेंगें बादल काले काले, बारिस की पानी में कागज की नाव चलाऊंगा।। अपने कुर्ते को टांग खूटी...

  • माँ !

    माँ !

    माँ तो बस माँ होती है इतना ही जानता हूँ मैं! ममता के सुखद सपर्श बस पहचानता हूँ मैं! माँ बिन कहे सब जाने माँ को रब मानता हूँ मैं! माँ तो बस माँ होती है...