Category : बाल कविता



  • खुशियाँ (बाल कविता)

    खुशियाँ (बाल कविता)

    माँ के आँचल में हैं खुशियाँ पकते चावल में हैं खुशियाँ प्रेम लुटाती गृहलक्ष्मी की रुनझुन पायल में हैं खुशियाँ बहन रूप में आतीं खुशियाँ भाई संग मिल गातीं खुशियाँ गोद पिता की अनुपम जग में...


  • मियां गधे जी

    मियां गधे जी

      बाँध गले में टाई, सिर पर सेहरा धर कर ऐंठे हैं। ब्याह रचाने मिंया गधे जी, मंडप में आ बैठे हैं। बाराती कुछ नाच रहे कुछ हैं खाने में जुटे हुए। यार दोस्त फ़ोटो खिंचवाने...

  • बालगीत  – नवदुर्गा झाँकियाँ

    बालगीत – नवदुर्गा झाँकियाँ

    सजीं मंच  पर  सुंदर झाँकी। नौ   रूपों   में दुर्गा  माँ  की।। शैलसुता  माँ  वृषभ सवारी। ब्रह्मचारिणी   तपती न्यारी।। चंद्रघंटिका – महिमा बाँकी। सजी मंच पर ….. चौथी   हैं    कूष्मांडा  माता। आदिस्वरूपा...



  • एक और सूरज

    एक और सूरज

    सदियों पहले टकराए ग्रह कहते हैं उससे धरती बनी ! “आग का गोला” थी तब यह, फिर धीरे-धीरे शाँत हुई !! जल, वायु और हरियाली से फिर इसमें जीवन उभरा ! विकास हुआ, जीवन संवरा, विज्ञान...

  • बाल कविता

    बाल कविता

    आओ हम स्कूल चले नव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जो बंधन भव का आओ मिलकर उसको पार करें, आओ हम स्कूल चले ….. जाकर स्कूल हम गुरुओं का मान करें बड़े बूढ़ों का...