बाल कविता शिशुगीत

कोआला

ऑस्ट्रेलिया में मिलता हूं, वृक्षों पर मैं रहता हूं, स्तनधारी जंतु हूं मैं, नमी पसंद मैं करता हूं. बच्चों-बुजुर्गों को प्यारा हूं, आनंद का मैं पिटारा हूं, मुझको गोद में सब लेते हैं, शाकाहारी न्यारा हूं. कोआला (Koala) ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक वृक्षों पर रहने वाला, शाकाहारी धानीप्राणी (मारसूपियल​) है। यह ‘फ़ैसकोलार्कटिडाए’ (Phascolarctidae) […]

बाल कविता

चार बाल काव्यमय कथाएं- 5

आज अंतरराष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस है. इस अवसर प्रस्तुत है हमारी बाल पुस्तक- शृंखला “चित्रमय काव्यमय कहानियां” का पांचवां और अंतिम भाग. साथ ही आपके लिए है इस पुस्तक का लिंक भी- https://issuu.com/shiprajan/docs/baal_pustak_1 17. लालच बुरी बला है हड्डी एक बड़ी ले मुंह में, कुत्ता एक बहुत हर्षाया, कहीं अकेले में खाने की, मन में […]

बाल कविता शिशुगीत

डॉगी

राजा भैय्या का डॉगी हूं, प्यारा हूं नहीं बागी हूं, जैसे नाचें राजा भैय्या, मैं भी नाचूं ता-ता थैय्या. कान हैं मेरे हाथी जैसे, सिर पर मेरे ताज है, राजा भैय्या कहते सबको, इस पर मुझको नाज है.

बाल कविता शिशुगीत

हाथी

  छोटा-सा मैं हाथी हूं, बच्चों का मैं साथी हूं, जैसे गोलू-मोलू-रिंकू, मैं भी नाना का नाती हूं. आओ हम सब मिलकर खेलें, सवारी भी मैं कराऊंगा, तुम छोटे-से हो तो क्या मैं, झुककर पीठ पर चढ़ाऊंगा.

बाल कविता शिशुगीत

भोंदूराम

  हाथ में लेकर झोला-झंटा, घर से निकले भोंदूराम, पत्नी ने बोला था जाओ, ले आना दस मीठे आम. चैन से बैठना उसे सुहाता, कब भाता था उसको काम! अब तो भैया मजबूरी थी, पत्नी का आदेश ललाम. घर से निकले भोंदू भाई, वहां मिल गया तोंदू नाई, “कहो आज कहां जाते हो भाई, बहुत […]

बाल कविता

एक कहानी बादल की

आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊं, एक कहानी बादल की, काले- पीले, रंग- बिरंगे, भूरे- काले बादल की। रूई से बन गगन में घूमें, अलग अलग धर रूप सलोने, भरा हुआ है कुछ में पानी, बात निराली बादल की। सोच रहे क्या कहां से लाता, इतना सारा ये पानी, धरती जिससे धानी बनती, प्यास बुझाते बादल की। […]

बाल कविता

बाल कविता

आओ बच्चों सैर करादू नन्हें से बाजार में होली दिवाली के अवसर पर खूब पटाखें ले लो तुम सब रंगों से भरी पिचकारी ले लो अबीर गुलाल से धूम मचादो पुए पकवान से थाल सजी है खाओ पिलो मस्ती करलो आपस में खूब खुशियां बांटों। बिजया लक्ष्मी

बाल कविता

देखो ग्रीष्म ऋतु आई है

देखो ग्रीष्म ऋतु आई है भीषण गर्मी ले आई है। गर्मी से सब हलाकान हैं गर्मी से सभी परेशान हैं। जब-जब गर्मी बढ़ती है प्यास हमे खूब लगती है। गले हमारी सुख जाती है तब ठंडी कुल्फी भाती है। कुल्फी-लस्सी ललचाती है बच्चों के मन को भाती है। जब कुल्फी दिख जाती है तब-तब आखें […]

बाल कविता

सपने देखो खुशियों वाले

सपने देखो खुशियों वाले ,जिनमे ना हो दुख के ताले। अन्धकार को दूर भगा के ,लाओ मस्ती भरे उजाले। मेले में जा कर खोजो जी ,ठेले चाट समोसे वाले। मेले में जा कर देखो जी ,जादू वाले खेल निराले। सपने में हों गुड्डे गुड़िया ,जिनके मुखड़े भोले भाले। नित देखो तुम नए नवेले ,सपने जो […]

बाल कविता शिशुगीत

गौरैया

                                            विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च पर विशेष चूं-चूं करती चौबारे पर, एक गौरैया आई, मुझको बड़ी बहिन समझ उसने मुझे, अपनी व्यथा सुनाई. खेतों में विष भरा हुआ है, ज़हरीले हैं ताल-तलैया, दाना-दुनका […]