बाल कविता बाल साहित्य

नीली साड़ी

मम्मी जी की नीली साड़ी। लगती बहुत सजीली साड़ी। जगह जगह पर मोर सजे हैं। रंग सुनहरी छोर सजे हैं। अमिया के बूटों से सज कर, दिखती बहुत रसीली साड़ी। कपड़ा उसका रेशम रेशम। पल्लू देखो भारी भरकम। अक्सर फिरती मम्मी के संग, जैसे कोई सहेली साड़ी। मैं जब घर घर खेला करती। साड़ी पहन […]

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जल संरक्षण

जल संरक्षण अभियान चलाओ देश में पानी की बचत कराओ नदियाँ और तालाब में कुएँ में और नहर में टंकी में और गड्ढे में इनमें पानी की बचत कराओ पानी अपने काम में लो ना कि यूँ ही फेंकते रहो नदियाँ नहरें कुएँ तालाब हैंडपंप टूयूबैल इन सबसे हमें पानी मिलता अगर तुम यूँ ही […]

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बालकविता “पेड़ों पर पकती हैं बेल”

जो शिव-शंकर को भाती हैबेल वही तो कहलाती है—तापमान जब बढ़ता जातापारा ऊपर चढ़ता जाता—अनल भास्कर जब बरसातालू से तन-मन जलता जाता—तब पेड़ों पर पकती बेलगर्मी को कर देती फेल—इस फल की है महिमा न्यारीगूदा इसका है गुणकारी—पानी में कुछ देर भिगाओघोटो-छानो और पी जाओ—ये शर्बत सन्ताप हरेगातन-मन में उल्लास भरेगा—(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

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घोड़ा

घोड़ा एक पालतू जानवर, मदद हमारी खूब करे, तांगे में जुतकर यह घोड़ा, एक बार भी उफ़ न करे. काम सवारी के आता है, रेस लगाए, जंग लड़े, सर्कस में भी खेल दिखाए. स्वामिभक्त, जब वक्त पड़े.

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बालगीत – गर्मी आई ! गर्मी आई !!

गर्मी आई ! गर्मी आई!! स्वाद भरी सौगातें लाई। बाड़ी में महके- ख़रबूज़े। लाल शहद – से हैं तरबूजे।। खीरा ककड़ी खूब सुहाई। गर्मी आई ! गर्मी आई!! ठंडी आइसक्रीम है भाती। मुन्ना खाता मुन्नी खाती।। ठेले की ध्वनि पड़ी सुनाई। गर्मी आई ! गर्मी आई।। खुशबूदार संतरे आए। अंगूरों के ढेर लगाए।। लीची मधुर […]

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बालगीत “गुलमोहर पर छाई लाली”

लाल रंग के सुमन सुहाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—रूप अनोखा, गन्ध नहीं है,कागज-कलम निबन्ध नहीं है,उपवन से सम्बन्ध नहीं है,गरमी में हैं खिलते जाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—भँवरों की गुंजार नहीं है,शीतल-सुखद बयार नहीं है,खिलने का आधार नहीं है,केवल लोकाचार निभाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—कुदरत की है शान निराली,गुलमोहर पर छाई लाली,वनमाली करता रखवाली,पथिक तुम्हारी […]

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“गर्मी में खीरा वरदान”

तन-मन की जो हरता पीरावो ही कहलाता है खीरा—चाहे इसका रस पी जाओचाहे नमक लगाकर खाओ—हर मौसम में ये गुणकारीदूर भगाता है बीमारी—आधा कड़ुआ, आधा मीठासंकर खीरा हरा पपीता—जिनका रंग पीला होता हैदो देशी खीरा होता है—अन्दर से होता है कच्चास्वाद बहुत है इसका अच्छा—जब खाओ रायता-सलादखीरे को भी करना याद—खीरा गर्मी में वरदानइसके गुण […]

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सॉरी बोला

इक बच्चे में थी बदमाशी मिलती कैसे फिर शाबाशी स्कूल जब भी वो जाता था कुछ न कुछ वो कर आता था कभी फूल को तोड़े जाकर फेक दे जूठा खाना खाकर डेस्क पे क्या क्या लिख देता था नाम न खुद का वो लेता था ब्लेक बोर्ड भी गन्दा कर दे पानी से सब […]

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बालगीत : जंगल की कहानी

जंगल की तुम सुनो कहानी। सुना रही थी मेरी नानी।। हथिनी हाथी पर चिंघाड़ी। फ़टी हुई है मेरी साड़ी।। नई पड़ेगी तुमको लानी। जंगल की तुम सुनो कहानी।। हाथी बोला बंद दुकानें। कैसे जाऊँ साड़ी लाने।। तुमने ऐसी जिद है ठानी। जंगल की तुम सुनो कहानी।। अपने घर में बंद सभी हैं। बाहर आते कभी […]

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बालगीत : पैर

कितने अद्भुत अपने पैर! नहीं किसी से करते बैर।। सबको मंज़िल तक पहुँचाते। ये दुनिया भर को करवाते ।। मेला , हाट , बाग की सैर। कितने अद्भुत अपने पैर!! कर्म – इन्द्रियाँ इनको कहते। भार देह का दोनों सहते।। नहीं शत्रु की करते खैर। कितने अद्भुत अपने पैर!! तू चल !तू चल !!कभी न […]