Category : बाल कविता

  • “क.ख.ग.घ. सिखलाऊँगी”

    “क.ख.ग.घ. सिखलाऊँगी”

    मम्मी देखो मेरी डॉल। खेल रही है यह तो बॉल।। पढ़ना-लिखना इसे न आता। खेल-खेलना बहुत सुहाता।। कॉपी-पुस्तक इसे दिलाना। विद्यालय में नाम लिखाना।। मैं गुड़िया को रोज सवेरे। लाड़ लड़ाऊँगी बहुतेरे।। विद्यालय में ले जाऊँगी।...

  • इच्छा

    इच्छा

    पंछी बन मैं उड़ूं एक दिन पंख फैलाकर नील गगन में, रंग बिरंगी जैसे तितलियां उड़ती है, खुशी से चमन में। बातें करती है पुष्पों से और लेती है उनसे परागकण, मैं भी करूं बादलों से...



  • चम्पू बन्दर

    चम्पू बन्दर

    चम्पू बन्दर मस्त कलंदर। चलता देखो कैसे तन कर। पढ़ने में थोड़ा सा कम पर। शैतानी में पहला नम्बर। डाल डाल कभी पात पात पर, लपक लपक कर उचक उचक कर, अभी आम खा कर बैठा...


  • लाल परी- नील परी

    लाल परी- नील परी

    कहा दादी से सोनू मोनू ने सुनाओ हमें कोई कहानी, आज ना देखेंगे कार्टून हम सुननी है हमें परी की कहानी। कहां दादी ने सोनू मोनू से फिर बैठो मेरे पास आकर, करना ना तुम शैतानी...

  • आई दिवाली

    आई दिवाली

    बाल काव्य सुमन संग्रह से बाल गीत 38.आई दिवाली जगमग-जगमग आई दिवाली, प्रेम के दीपक लाई दिवाली, जीवन में खुशियां भरने को, भेंट खुशी की लाई दिवाली. खेल-खिलौने, खील-बताशे, मेले-मिठाई लाई दिवाली, पूजा-अर्चा, मेल-मिलाप ले, आतिशबाज़ी, लाई दिवाली.

  • अच्छे बच्चे

    अच्छे बच्चे

      रेल चली भई छुक छुक छुक। हमने बोला रुक रुक रुक। ड्राइवर था वो बड़ा सयाना। उसने पूछा कहाँ है जाना। हम बोले नानी जी के घर। ड्राइवर बोला ज़ोर से हँस कर। पहले मुझको...