Category : बाल कविता


  • साहस के पुतले

    साहस के पुतले

    इस धरती की कठिन डगर पर, आगे बढ़ते जाएंगे साहस के पुतले बनकर हम, जग को स्वर्ग बनाएंगे- आज हमारी आजादी पर, पांव पड़े गद्दारों के आज हमारी सीमा पर हैं, डेरे खूनी सायों के नई...

  • बालगीत : वर्षा आई

    बालगीत : वर्षा आई

    अम्मा    देखो     वर्षा   आई। रिमझिम रिमझिम बुँदियाँ लाई। हम  नहाएँगे   बाहर   जाकर, सड़क खेत गलियों में आकर, दौड़  भाग  कर  धूम   मचायें, नाचें    कूदें       गाने      गाएँ, लगती   वर्षाऋतु   ...

  • नानी और ननिहाल

    नानी और ननिहाल

    गरमी अपने संग लाती लंबी छुट्टी हर साल छुट्टी आते हि याद आते नानी और ननिहाल बैठते हि छुक छुक गाड़ी मे दिखते अजब नजारे पीछे भागे पर्वत नदियाँ पेड़ और पौधे सारे पटरी का आपस...




  • मेरी अभिलाषा

    मेरी अभिलाषा

    5 जून ‘पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर विशेष छोटी-सी कुदाल दिलवादे, मैं भी गड्ढा खोदूंगा, उसमें नीम का पेड़ लगाकर, रोज ही जल से सींचूंगा, समय-समय पर खुरपी से मैं, निराई-गुड़ाई भी कर दूंगा, पेड़ बड़ा...