Category : बाल कविता

  • शेखचिल्ली के सपने

    शेखचिल्ली के सपने

    एक सेठ का नौकर मूढ़-सा, शेखचिल्ली था उसका नाम, चलते-फिरते, जागते-ऊंघते, सपने लेना उसका काम. एक बार बोला मालिक से, ”मां की याद सताती है, मुझको ऐसा लगता रहता, मां भी मुझे बुलाती है”. मालिक ने...



  • परी के सात पुत्र

    परी के सात पुत्र

    एक परी के सात पुत्र थे, सातों अलग-अलग रहते थे, एक पुत्र का नाम रवि था, वह स्वभाव से एक कवि था. जंगल उसको अच्छे लगते, झर-झर झरने मोहक लगते, एक-एक पर्वत पर घूमा, फूलों के...


  • जैसी संगति बैठिए

    जैसी संगति बैठिए

    मोहन एक नेक लड़का था, पढ़ने-लिखने में होशियार, सब करते तारीफ, बड़े भी, करते उसको बेहद प्यार. उसके सब साथी अच्छे थे, करते जन-सेवा का काम, पढ़-लिखकर और खेल-कूदकर, करते थे वो खूब आराम. एक बार...

  • रोटी कौन खाएगा?

    रोटी कौन खाएगा?

    छोटी-सी मुर्गी थी लाल, बतख सफेद थी खूब कमाल, चितकबरी बिल्ली शैतान, काला कुत्ता बड़ा बेईमान. चारों साथ-साथ रहते थे, कभी न आपस में लड़ते थे, मुर्गी तो करती थी काम, बाकी सब करते आराम. एक...

  • उपकार का बदला

    उपकार का बदला

    एक मछुआरा सोहनलाल, था गरीब पर नेक थी चाल, रोज कमाता जितना भी वो, कुछ खाता कुछ करता दान. उस नगरी का राजा लोभी, चैन न लेने देता था, जो न किसी दिन कर दे पाता,...

  • जुड़वां भाई

    जुड़वां भाई

    छोटू मोटू जुड़वां भाई, आपस में करते न लड़ाई, छोटू एक इंच छोटा था, मोटू तीस ग्राम था भारी. दोनों में कुछ भेद न दिखता, इससे मुश्किल भारी होती, एक उड़ाता दूध-मलाई, खूब मार दूजे को...