बाल कविता

बालगीत “सबके मन को भाते आम”

एक साल में आते आम।सबके मन को भाते आम।।—जब वर्षा से आँगन भरता,स्वाद बदलने को जी करता,तब पेड़ों पर आते आम।सबके मन को भाते आम।।—चटनी और अचार बनाओ,पक जाने पर काटो-खाओ,आम सभी के होते आम।सबके मन को भाते आम।।—कच्चा सबसे खट्टा होता,पक जाने पर मीठा होता,लंगड़ा वो कहलाते आम।सबके मन को भाते आम।।—बम्बइया की शान […]

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बाल कविता

आओ बच्चों खेलो खेल नानाजी के आंगन खेल नन्ही नन्ही तितली पकड़ो रंग – बिरंगे पंखों देखो यहां उड़ेगी वहां उड़ेगी जब पकड़ो तो खूब उड़ेगी धागा बांधकर खूब उड़ाओ आसमान का सैर कराओ रंग – बिरंगे फूलों पर बैठी सबके मन को मोह लेती बच्चे भी खूब करते खेल देखो खूब मचाए शोर! — […]

बाल कविता

बालगीत “नरेन्द्र मोदी”

दामोदर नरेन्द्र मोदी ने,सादा जीवन अपनाया।भारत भाग्य विधाता बनकर,पथ समाज को दिखलाया।।—छोड़ सभी आराम-ऐश को,संघं शरणम् में आया।मोह छोड़कर घर-गृहस्थ का,पथरीला पथ अपनाया।भारत भाग्य विधाता बनकर,पथ समाज को दिखलाया।।—केशर की क्यारी को जिसने,संविधान में बाँध दिया।आजादी के परवानों का,भारत में सम्मान किया।उग्रवाद-आतंकवाद से,कभी नहीं जो घबराया।भारत भाग्य विधाता बनकर,पथ समाज को दिखलाया।।—दागे नहीं खयाली गोले,कूटनीति […]

बाल कविता

मुझे समझाना तुम।

मां सुन सुन के ये समाचार मुझे डर लगता है, तुम हो मेरे पास फिर भी मुझे डर लगता है। पापा सब का ध्यान हैं रखते देखो अस्पताल में, उनके पास बेझिझक जाऊं कैसे मुझे डर लगता है। आज के हालात देख याद स्कूल की बात आई, साफ सफाई का महत्त्व बताती टीचर याद आई। […]

बाल कविता

“सबको अच्छे लगते बच्चे”

चंचल-चंचल, मन के सच्चे।सबको अच्छे लगते बच्चे।।—कितने प्यारे रंग रंगीले।उपवन के हैं सुमन सजीले।।—भोलेपन से भरमाते हैं।ये खुलकर हँसते-गाते हैं।।—भेद-भाव को नहीं मानते।बैर-भाव को नहीं ठानते।।—काँटों को भी मीत बनाते।नहीं मैल मन में हैं लाते।।—जीने का ये मर्म बताते।प्रेम-प्रीत का कर्म सिखाते।।—(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बाल कविता

बाल कविता : मैं तो छोटा सा बच्चा हूँ जी

मैं तो छोटा सा बच्चा हूँ जी। दिल का एकदम सच्चा हूँ जी।। लगता हूँ सबको अच्छा जी। करते है सब मुझको प्यार।। माँ दादी का मैं लाड़ला प्यारा। हूँ में घर में सबका दुलारा।। कहते है सब शैतानी करना मेरा काम। करता हूँ मैं नित नये शरारत भरे काम।। जैसा भी हूँ लेकिन लगता […]

बाल कविता

नन्हा मुन्ना बच्चा हूँ मैं

नन्हा मुन्ना बच्चा हूँ मैं, दिल का एकदम सच्चा हूँ मैं। सुबह सबेरे जगता हूँ मैं, रोज योगा करता हूँ मैं। रोज करता हूँ मैं ईश्वर का गुणगान, उनकी कृपा से भारत बने महान। जाता हूँ पढ़ने रोजाना स्कूल, नहीं करता हूँ पढ़ाई मैं कोई भूल। स्वच्छता का रखता हूँ हर वक्त ध्यान, स्वच्छ रखकर […]

बाल कविता बाल साहित्य

शाम सुहानी

मेरी शाम सुहानी हो जाये नानी एक कहानी हो जाये कोई अच्छी सी कोई सच्ची सी जो गुज़री हो कोई लम्बी सी वही बात पुरानी हो जाये नानी एक कहानी हो जाये कोई सुख का हो कोई दुःख का हो जो नयन में अश्रु बन छलका हो मेरी आँख का पानी हो जाये नानी एक […]

बाल कविता

बाल कविता – गोल ही गोल

सूरज गोल चंदा गोल। धरती , अंबर , तारे गोल।। गाड़ी के पहिए हैं गोल। गेंद हमारी सबसे गोल।। मुरगी का अंडा भी गोल। माताजी का बेलन गोल।। ढोल, नगाड़े, ढप हैं गोल। तबला और मंजीरा गोल।। पंखे के चक्कर भी गोल। घूम रहीं दो सुइयाँ गोल।। आँखों की दो पुतली गोल। आलू और टमाटर […]

बाल कविता बाल साहित्य

गुड़िया की शादी

    गुड़िया की शादी बात सुनो न दादी प्यारी।।                                    गुड़िया दस की हुई हमारी। पिंकी के घर गुड्डा आया। रिश्ता उसने है भिजवाया। देखो कैसा शुभ अवसर है। गुड्डा सेना में अफसर है। तारीख तुम्हे सुझानी होगी। […]