Category : बाल कविता



  • ग़ुब्बारे वाला

    ग़ुब्बारे वाला

    बचपन में एक झोले वाला मुझको बड़ा रिझाता था हाथों में बांसुरी लिए मधुर तान सुनाता था सुरम्य रसीली बंसी की धुन पर हर बालक सम्मोहित था जब जब तान बंसी की सुनता मन उल्लास से...

  • सपनों का संसार

    सपनों का संसार

    कितना प्यारा होता हैसपनों का संसार होते हैं यहाँ पर क़ई असंभव चमत्कार आकाश में हम उड़ते हैं दरिया में गोते लगाते हैं फूलों के घर बनाके मोतियों से सजाते हैं सुरज-चाँद से मिलके हम खेलते...



  • कविता और विज्ञान

    कविता और विज्ञान

    नीला सुंदर गगन यह विस्तृत कल्पना हुई पूर्ण कवि की, अरे , यहाँ कोई रंग कहाँ है? ये तो माया है’अपवर्तन’ की। अहा जरा इनमें तो झांको नायिका की भावपूर्ण आँखें कहाँ, अरे ये तो मानव...



  • नानाजी का पतंग शौक

    चुन्नु-मुन्नू के नानाजी को, पतंग उड़ाने का शौक लगा, रंगीले पतंगों को देखा तो उनको ये बे-रोक लगा..! नानाजी ने झुर्रीले हाथों में पतंग उठाई, एक हवा के झोंके ने हाथों से छिटकाई, नानाजी धीमे-धीमे पतंग...