Category : बाल कविता

  • बाल गीत – दुकान

    बाल गीत – दुकान

    जंगल में चूहे ने खोली, अपनी एक दुकान हल्दी, धनिया, मिर्च, मसाला, घर का सब सामान चीटी शक्कर लेती उससे , हाथी लेता केला पूरे पैसे सब देते थे, करते नहीं झमेला पर बिल्ली ने कर...



  • मम्मी ऐसा क्यों होता है

    मम्मी ऐसा क्यों होता है

    (आज की दुनिया में हर कोई बिज़ी है,ऐसे में दादी की गोद में ही सुकून मिलता है ये कविता संयुक्त परिवार के महत्त्व को भी दर्शाती है) मम्मी ऐसा क्यों होता है छोटा बच्चा क्यों रोता...

  • कौआ बोला 

    कौआ बोला 

    कौआ बोला कॉँव कॉँव क्या में घर  के अंदर  आऊं ? बोले पापा नहीं नहीं जाओ किसी और की ठाँव इधर उधर तुम फिरते हो बस कॉँव कॉँव ही करते हो जाओ जाकर कुछ काम करो मत इतना...

  • चूहा आया

    चूहा आया

    चूहा आया ,चूहा आया अपने मुँह में रोटी लाया लम्बी मोटी काली दुम खाना खाता है चुन चुन रहता है छोटे से बिल में मम्मी रहती हैं मुश्किल में खाना खुला जो रह जाता है ले...

  • बाल कविता : खेल तमाशा

    बाल कविता : खेल तमाशा

    बच्चों की फुलवारी सजी है हंसी सबके चेहरे पर खिली है हाथी राजा बीच में है विराजे खूब बज रहे हैं बाजे गाजे चुहिया नाच रही है ठुमक ठुमक तोता मैना गा रहे हैं सब बच्चों...

  • बाल कविता : कम्प्यूटर

    बाल कविता : कम्प्यूटर

    आओ बच्चो आओ मेरे संग तुम मौज मनाओ मैं दूंगा तुम सबको ज्ञान एक बार जरा बटन दबाओ तुम देखो मुझमें फिल्म या गीत बना लो मुझको अपना मीत कराऊंगा तुमको दुनिया भर की सैर रखो...

  • बाल कविता : बच्चे

    बाल कविता : बच्चे

    नटखट बच्चे प्यारे बच्चे कितने सच्चे कितने अच्छे बातों से अपनी सबको रिझाते मस्ती में खेलते मजे से खाते सबके दिलों में करते राज कल की फिक्र न डर कोई आज बात-बात में ये लड़ जाते...