बाल कविता

फूलों की कहानी- नानाजी की बागवानी

सुबह-सुबह सूरज दादा की किरण पड़ी, पड़ते ही चुन्नु-मुन्नू की नींद उड़ी, चुन्नु और मुन्नू ने ली अंगड़ाई, उठकर नानाजी की और दौड़ लगाई, कमरे में जाकर देखा तो नानाजी वहाँ नहीं थे, ना पूजाघर ना रसोई, नानाजी और कहीं थे, चुन्नु-मुन्नू बाहर आए वहीं खड़े थे नानाजी, चरण-स्पर्श करके बोले- ” करते हो क्या […]

बाल कविता

बाल कविता – नैनीताल में

जून माह में ठंडक पड़ती नैनीताल में गर्मी की सब अकड़ निकलती नैनीताल में लखनऊ दिल्ली पैतालीस डिग्री में झुलस रहे सोलह पर ही धूप सिकुड़ती नैनीताल में गर्मी धूप पसीना सबकी दादागीरी बंद नहीं किसी की भी है चलती नैनीताल में पंखा कूलर एसी सबकी छुट्टी रहती है नहीं किसी की दाल है गलती […]

बाल कविता

बाल कविता : नाच रहे थे खुशी में सारे

नाच रहे थे खुशी में सारे, रिमझिम बारिश बरस रही, पर जाने क्यूं,एक कोने में, बैठी चिड़िया सुबक रही, पूछा तो बोली देखो वर्षा ने, मेरा घरौंदा गिरा दिया क्या करूं और कहां जाऊं मैं, घर अब मेरा नहीं रहा, सुनकर बात ये उसकी मेरे, दिल को आया बड़ा मलाल, रोओ नहीं,रो रो कर तुमने […]

बाल कविता

वर्षा

ऋतुओं की रानी है वर्षा , रिमझिम -रिमझिम होती वर्षा , चारों तरफ हरियाली छायी , मौसम में ख़ुशहाली  लायी , खुश होती तो भर देती है नदी तालाब में पानी वर्षा , पर गुस्से में बाढ़ बनकर, करने लगती मनमानी वर्षा ! — निवेदिता चतुर्वेदी

बाल कविता

बाल कविता : स्कूल चलो

पाँच साल की हुई जो सिमरन, दादा बोले चल, नाम लिखा आता हूं स्कूल में पढ लिख कर बनो सफल, बेमन से होकर तैयार, बिटिया चली स्कूल, पूरे दिन बस खेल खेलना, कैसे जाती भूल, भूख लगी जब लंच टाईम में, डिब्बा उसने खोला, बड़े प्यार से भोला मिन्टू , आकर उससे बोला, आओ सिमरन […]

बाल कविता

बादल

काले बादल नभ में गरजते , रिमझिम -रिमझिम बरसते बादल , इस तप्त धरती को , शीतलता प्रदान करते बादल , इन बूंदा बूंदी फुहारो में , बच्चे नहाते आँगन में , शोर मचाकर , धूम मचाकर , मस्ती करते आँगन में , हाथ जोड़ कर विनती करते , बार -बार तू आना सावन में […]

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बाल कविता : लड्डू का पौधा

एक बार पार्टी थी घर में, लड्डू आए बड़े बड़े, खाते खाते दो लड्डू थाली मे से निकल पड़े, मां बोली पिंकी से बेटा, नीचे गिरा हुआ मत खाओ, चिड़िया कोई खा ले इसको , ऐसी जगह पे रख आओ, बात ये सुनकर पिंकी अपने मन ही मन मे मुस्काई, उठा के दोनो लड्डू वो […]

बाल कविता

बालकविता  स्कूल

चुनमुन चुनमुन चल स्कूल, झाड़ किताबो की अब धूल, छुट्टी मे इतना खेले कि पढ़ना लिखना गए सब भूल खत्म हो गई छुट्टी अब तो, रोज़ विद्यालय जाऐंगें, पढ़लिख कर कुछ बन पाऐ काम सभी के आऐंगे।। — असमा सुबहानी 

बाल कविता

बाल कविता : पेड़ लगाओ

पेड़ न होते इस धरती पर,, हरी-भरी इसे करता कौन ? पेड़ न होते तब हम सबको मीठे फल खिलाता कौन ? पेड़ न होते तो हम सबको, शुद्ध वायु देता कौन ? चलते-चलते जब थक जाते, शीतल छाया देता कौन ? पेड़ न होते इस धरती पर, पंछी को आश्रय देता कौन ? पेड़ […]

बाल कविता

पर्यावरण स्वच्छ बनाओ।

वृक्षों से धरती सजाओ, पर्यावरण स्वच्छ बनाओ। इधर-उधर कूड़ा मत फैंको, धरती का कण-कण महकाओ॥ पोलीथीन से नाता तोड़ो, जूट के बैग सब अपनाओ। वाहन कम से कम चलाओ, धुंए से सबको बचाओ। आओ सब मिल पेड़ लगाएँ, पर्यावरण स्वच्छ बनाएं। अपनी प्यारी  धरती माँ को, हम प्रदूषण मुक्त बनाएं॥ — सुरेखा शर्मा