बाल कविता

ईक लहरा बारिश हो गयी

ईक लहरा बारिश हो गयी शहर गुलाबी हो गये । नदियों के किनारे भीग गये नदियों में बूदें तैर गयी । हवा के झोंके सर्द हुए ईंटों की गर्मी भभक गयी । सडकों पर नाली उफन पडीं छप-छप बच्चों की शुरू भयी। ईक लहरा बारिश कुछ ऐसी भयी मौन मचल कर निकल पड़े ।

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नानाजी का ‘सॉरी’…!!

चुन्नु-मुन्नू बन ठन के पहली बार स्कूल चले,  नानाजी की सारी बातें रख बस्ते में भूल चले, चुन्नु-मुन्नू ने कक्षा में जैसे ही पाँव ठोका, एक मोटी आवाज ने उन दोनों को रोका, दोनों सहमे, देखा तो मास्टरजी आ रहे, हाथ में अपने एक मोटा डण्डा भी ला रहे, मास्टरजी बोले बिन पूछे ही कहाँ […]

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बाल कविता : फलों का राजा आम

फलों का राजा आया आम , खट्टे मीठे प्यारे आम कच्चे होते खट्टे आम दाल मे डालो कच्चे आम .भून के खाओ कच्चे आम पके खाओ तुम मीठे आम काट -बाँट कर खाओ आम उपवन मे गुच्छो मे आम गर्मी मे तरोताजा करता प्यारा-प्यारा मीठा आम , चटनी और आचार बनाओ नित दिन खाओ न्यारे […]

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पद्य कथा – फौजी चाचा की सीख

एक सुबह फौजी चाचा , गए घूमने बागीचा , सुना वहाँ पर ये चर्चा , पड़ा रो रहा एक बच्चा | कदम बढ़ा कर जा पहुंचे , बच्चे को चूमा पोंछा , लेकिन फिर सन्देह हुआ , बच्चे को किसने फेंका | असली जैसा गुड्डा था , जरा ध्यान से जब देखा टेप मे थी […]

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अकल और पंजा

शेर-सियार ने सावन में झूला एक लगाया बीस-बीस बार झूलेंगे ऐसा नियम बनाया एकदिन दोनों दोस्तों में होने लगा जब झगड़ा आकर उनसे पूछी लोमड़ी क्या है भाई लफड़ा बोला शेर, बहन ! इस पर क्यों न आयेगा खीस खुद बीस को दस कहता मेरे दस झूले को बीस नहीं बहन झूठे शेर को गिनना […]

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सूरज चाँद में हुई लड़ाई

सूरज चाँद में हुई लड़ाई खूब हुई थी हाथापाई घमंडी चाँद बोला अकड़कर तुमसे प्रकाश न लूंगा दिनकर सूरज चाँद से छिना सवेरा चारों ओर छा गया अंधेरा चाँद बहुत ही था निराश छँटती नहीं अमावस -रात जा तारों से हाथ मिलाया फिर भी नहीं उजाला आया एक उपाय बस था बाकी जाकर सूरज से […]

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नानाजी की छड़ी…!!

नानाजी के घर में पहली बार हुई चुन्नु-मुन्नू के बीच में तकरार हुई मुन्नू की गाड़ी लेकर चुन्नु दौड़ गया फिर मुन्नू भी चुन्नु का घोड़ा तोड़ गया दोनों के इस झगड़े से घर में छिड़ गया घमासान कहीं गिरे बरतन, गुलदस्ते, बिखरा घर, सारा सामान बिखरी प्लेटें, बिखरे कप और गिरी घड़ी नानाजी की […]

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मेहनत की जीत

अपने वजन से भी भारी , दाना ले चींटी चढ़ी अटारी। कुछ दूर चढ़कर गिर जाती, फिर सम्हलकर चढ़ने लगती। एक नहीं क़ई बार गिरी, फिर भी वो हिम्मत न हारी। जीत की उसमें था विश्वास, जारी रखी अपनी अभ्यास। आखिर एकबार आयी बारी, दाना ले चढ़ गयी अटारी। चींटी यही देती है सीख, मेहनत […]

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धरती तपती

तप्त तवा-सी धरती तपती। अम्बर से है आग बरसती।। गली-गली जल रही शहर की। कली-कली सूखी उपवन की।। साँय-साँय लू-लपट लगाये। तरु-छाया भी सिमट सुखाये।। पशु-पक्षी सब फिरें तड़पते। इधर उधर छाया को तकते। सूखे पोखर-ताल तलैया। दिखती नहीं नदी में नैया।। वट-पीपल की छाँव सुहाती। नीम-छाँव हर मन को भाती।। — प्रमोद दीक्षित ‘मलय‘

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मेरी प्यारी-प्यारी दोस्त – बाल कविता

मेरी प्यारी-प्यारी दोस्त। नटखट, राजदुलारी दोस्त। चॉकलेट सी मीठी-मीठी, चंदा जैसी न्यारी दोस्त। नहीं रूठने देती मुझको, रखती सब तैयारी दोस्त। सस्ते में खुशियाँ ले आती, है ऐसी व्यापारी दोस्त। एक अकेली दस से बढ़के, सपनों की अलमारी दोस्त। जूही-चंपा क्या-क्या बोलूँ, सजी-धजी फुलवारी दोस्त। उठा उसे घर ले तो आऊँ, लेकिन थोड़ी भारी दोस्त।