बाल कहानी

बाल लघुकथा – मयंक का बदलाव

  अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक आ चुकी थी, परंतु मयंक अपनी पढ़ाई को छोड़ मोबाइल व लैपटॉप पर गेम खेलने में मस्त था | गेम खेलने से समय बचता तो उसे टेलीविजन पर कार्टून, सीरियल देखने में निकाल देता | देर रात तक इलेक्ट्रिक दुनिया में खोया रहकर सुबह देर से जागता, इसलिए कभी ठीक से […]

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बालकहानी : एहसास

दोपहर का समय था। बच्चे स्कूल के मैदान पर लंच कर रहे थे। बच्चों के ही पास अध्यापक सुभाष यदु जी खड़े थे। बच्चों पर उनकी नजर थी। एक छोटी सी बच्ची को रोटी न खाते देख यदु जी बोले – ” क्यों जी , रोटी को क्यों नहीं खा रही हो ? ” लड़की […]

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यादों के झरोखे से- 30

डाइनिंग टेबिल पर बहार रमेश को बचपन से ही हमेशा अपने पिताजी से शिकायत रहती थी. कारण भी कोई विशेष नहीं था. बस बात इतनी-सी थी कि, उसका नाम इंग्लिश में आर से आता था और स्कूल में उपस्थिति रजिस्टर में उसका नाम काफी नीचे आता था. बड़े होने पर भी नाराज़ होने का कोई-न-कोई […]

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बालकहानी : शौचालय बन गया

नीली-नीली गिरिश्रृंखलाओं , हरे-भरे वृक्षों , टेढ़ी-मेढ़ी राहों से घिरे गोड़ आदिवासी बाहुल्य एक छोटा सा गाँव है चितनार। धान यहाँ के लोगों की मुख्य फसल है। यहाँ के रहवासी मेहनत-मजदूरी में भी पीछे नहीं रहते ; साथ ही वनोपज से अपनी बहुत सी आवश्कताओं की पूर्ति कर लेते हैं। प्रेम , सौहार्द्र , भ्रातृत्व […]

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गुरू जी की चिन्ता

बड़ा या छोटा सभी के चेहरे पर चिन्ता की रेखाएं थी फिर गुरू जी तो कई जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रहे थे अपनी अपने परिवार की अपने आस पड़ोस और अपने विद्यार्थियों की।जी हां बात ही कुछ ऐसी थी।बहत्तर साल में गुरू जी किसी युवा से कम फुर्तीले न थे सुबह जल्दी उठना दिनचर्या […]

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बहादुर राहुल

पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला राहुल बहुत ही समझदार बच्चा था। रोज़ की भांति जैसे ही वह स्कूल से निकला, सामने आइसक्रीम वाला नज़र आया। आइसक्रीम राहुल की कमज़ोरी थी। खुश होकर राहुल आइसक्रीम वाले की तरफ लपका। पर यह क्या, आज रोज वाले भैया की जगह कोई और आइसक्रीम बेच रहा था। राहुल को […]

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नीलमणि

एक दिन मम्मी रुही को घर के बाहर गार्डन में बैठा, अंदर चली गई। पौधे के पास बैठी रुही को देखकर पेड़ से उतर कर चिड़िया और गिलहरी भी रुही के पास इधर उधर घूमने लगी रुही ने अपने पास रखी कटोरी से दाना डाल दिया गिलहरी खुशी से झूमकर दाना खाने लगी चिड़िया भी […]

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बालकहानी : शशांक की गुरुभक्ति

सिर्रीवन में सृष्टि ऋषि का आश्र था। आश्रम में रहकर विद्यार्थी विद्या प्राप्त करते थे ; क्योंकि पहले आज की तरह पाठशालाएँ नहीं थीं। विद्यार्थी अपने गुरू की सेवा मन लगाकर करते थे। आश्रम का पूरा काम विद्यार्थी ही किया करते थे ; जैसे – आश्रम की सफाई करना , लकड़ी लाना , पानी भरना […]

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धैर्य का पाठ ( बालकथा )

गर्मी की छूट्टियां शुरू होने वाली थी  , गोलु आज खुद को बहुत हल्का महसूस कर रहा था । ढ़ेरों उत्साह से लबालब दौड़ कर माँ के पास जाते हुए पूछा माँ— “अब मैं बड़ा हो रहा हूँ , आप चाहें तो बाजार का कोई काम मुझे भी करने दे सकती हैं ।” “हूँहहह… मेरा […]

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पतंग की कहानी

बारह वर्ष का विहान रोते-रोते दादा जी के पास आया। दादा जी दादा जी देखो न सबकी पंतग तो आकाश में कलाबाजी खा रही है। पर मेरी पंतग तो ऊपर जाती ही नहीं है। बार-बार नीचे गिर जाती है। मेरे सब दोस्त मुझ पर हंस रहे हैं। सोनू ठीक से उड़ीची नहीं दे रहा था […]