बाल कहानी

स्कूल (गरीबी पर जीत)

राम एक नवी कक्षा का विद्यार्थी है और हमेशा से पढ़ने लिखने में बहुत ही अच्छे दिमाग का रहा है।आठवी कक्षा तक उसकी अटेंडेंस हमेशा पूरी रहती थी और उसकी पिछली कक्षा आठवीं में तो उसकी अटेंडेंस लगभग 97% थी। इससे उसकी टीचर भी उससे बहुत खुश रहते थे।हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहने वाला राम […]

बाल कहानी

बाल कथा – डर के आगे जीत

“दादी माँ; माँ कहती हैं हमलोगों को बचपन में हमारी नानी माँ या दादी माँ कहानी सुनाया करती थी । मैं तो आपके साथ रहता नहीं हूँ तो आपसे कभी कहानी नहीं सुन पाया हूँ , क्या आप मुझे कहानी सुना सकती हैं ?” गोलू के प्यार भरे अनुरोध को धरा टाल नहीं सकी उसने […]

बाल कहानी

बालकथा – आघात

“माँ मैं कल से स्कूल नहीं जाऊँगा।” स्कूल से आते ही मानू बस्ता रखते हुए कहता है। “क्यों?” माँ ने प्रश्न किया बिना कुछ कहे चुपचाप अपने कमरे में चला जाता है। माँ भी पीछे-पीछे जाती है पर! वह दरवाज़ा माँ को अंदर लिए बग़ैर ही बंद कर देता है। माँ बहुत देर तक दरवाज़ा […]

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शाबाश बच्चो 

आज़ मुदित के बैग मेंं ममा नाश्ते का टिफ़िन रखना ही भूल गईं थी और मुदित नें भी ध्यान नहीँ दिया. जब लंच टाईम मेंं उसने बैग खोला तो ये देखकर अवाक रह गया कि ममां बैग मेंं टिफ़िन तो आज़  रखना ही भूल गईं थी. उसे भूख भी लग रही थी लेकिन अब क्या हो सकता था. जब छुट्टी […]

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बालकहानी : प्रसन्नता के आँसू

एक बार ज्ञानदायिनी माँ सरस्वती हंस पर सवार होकर आकाश मार्ग से होते हुए श्रीहरि विष्णुजी से मिलने विष्णुलोक जा रही थीं। श्वेत वस्त्रों से सजी-सँवरी माँ सरस्वती की गौरवर्ण काया रजत आभूषणों से सुशोभित थी। चूँकि माँ सरस्वती को विष्णुलोक पहुँचने में विलम्ब थी, अतः हंस को वह सृष्टि-निर्माण के सम्बंध में बता रही […]

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समुद्र नीला क्यों है

गोलू स्कूल से घर लौटते ही दादाजी के कमरे की ओर दौड़ा। दादाजी… दादाजी… आपसे एक बहुत ही जरूरी सवाल पूछना है। हाँफते हुए बोला। ठीक है भाई पूछ लेना पर पहले थोड़ी देर आराम तो कर लो, अपनी स्कूल की ड्रेस तो बदल लो। फिर एक नहीं दस सवाल पूछ लेना। गोलू अपनी स्कूल […]

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बालकहानी – बच्चों को संता बनने दें

“बच्चे मन के सच्चे होते हैं, वह यदि किसी के लिए कुछ करते हैं तो मन से करते हैं इसलिए उनमें बचपन से ही व्यवहारिक और मानवता के संस्कार डालने चाहिए ताकि वह जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आ सकें । आज एक कहानी के माध्यम से मैं आपको बता रही हूं कि बच्चों […]

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आशीर्वाद

केशव रोज़ अपने ममी-पापा और दादी-दादू के पाँव छूकर विद्यालय जाता और सभी उसे ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद देते। ममी ने समझाया था कि बड़ों की इज्जत करनी चाहिये और उनका कहना भी  मानना चाहिये। ऐसा करने से उनका मन खुश रहता है और मन से आशीर्वाद ही निकलता है। केशव विद्यालय में भी अच्छे […]

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बाल कथा – मिंटी के दाँत

‘माँ देखो न मेरे दाँत कितने चमकीले हैं … हैं न?’ ‘हाँ पर तुम्हे इनका ध्यान रखना चाहिए… नही तो आगे चल कर चीज़ें कुतरने में कठिनाई होगी…’ माँ ने प्यार से कहा मिंटी चुहिया अपने परिवार के साथ रोहन के घर रहती थी। रोहन का घर बहुत बड़ा था… मिंटी सारे घर में धमाचौकड़ी […]

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बाल कथा – रस्साकशी का खेल

आज पार्क में बड़ी ही चहल पहल है। रविवार का दिन जो है। अपना होमवर्क करके सभी बच्चे खेलने आएं हैं। आज यहां रस्साकशी का खेल होगा। बच्चों ने दो टीम बनाई हैं… एक का मुखिया है मोटू और दूसरी का पतलू। सभी बच्चे दो दो की टोली में आएंगे और फिर मोटू पतलू एक […]