Category : बाल कहानी

  • जानवर !

    जानवर !

    बंटी जल्दी जल्दी स्कूल की ओर जा रहा था,तभी एक नज़र पिंकी के पापा पर पड़ी! पिंकी के पापा उसी ओर आ रहे थे, पर अचानक बंटी के कदम रुक गए …..ये क्या? पास की झाड़ियों में...

  • अनुभव

    अनुभव

    मनोज दसवीं कक्षा में पढ़ता था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद में भी बहुत तेज था। वार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी थी । उसके सभी पर्चे अच्छे हुए थे।...

  • सबक

    सबक

    बहुत पुरानी बात है। नंदनवन में एक तालाब था। उसके किनारे एक बेल का पेड़ था। उस पेड़ पर एक नटखट बंदर रहा था। वह दिन भर उछलकूद करता रहता था। इस पेड़ से उस पेड़...

  • बालकहानी-  खिलखिलाता परिवार

    बालकहानी- खिलखिलाता परिवार

    नदी के किनारे-किनारे सुंदरम गाँव बसा हुआ था। ऊंचे ऊंचे पहाड़ ,बहता हुआ पानी,महकते फूल और हरियाली के बीच खिलखिलाता गाँव। जो वहाँ आता जाने का नाम न लेता। गांववालों को ही नहीं,बच्चों तक को को...

  • मक्कू को सबक

    मक्कू को सबक

    शरारती और चटोरा मक्कू चूहा इधर-उधर खाने की तलाश में फिर रहा था। उसे मिर्च-मसालेदार और दूध से बनी चीजें बहुत पसंद आती थीं। तभी पनीर की लुभावनी गंध उसकी नाक में घुसी और वह उसको...

  • साहसी बकरा

    साहसी बकरा

    चंचल नटखट भोलू बकरा, निर्भय फिरता-कूदता था, उछल-कूद करता था दिन भर, नहीं किसी से डरता था. एक बार पिकनिक करने को, जंगल में जाने की ठानी, मना किया था सब मित्रों ने, बात किसी की...

  • गुड़िया की शादी !

    गुड़िया की शादी !

    रीचा बड़े ही प्यार से अपनी गुड़िया को सजा रही थी उसने कितने दिनो से शोर मचाया हुआ था कि वो अपनी गुड़िया की शादी प्रियंका के गुड्डे से सोमवार को करेगी। पापा और ममी के...

  • ईमानदारी का पुरस्कार

    ईमानदारी का पुरस्कार

    रामू नाम का लकड़हारा, नदी किनारे पर रहता था, रोज सवेरे जल्दी उठकर, जंगल को जाया करता था. लकड़ियां लाकर रोज शहर में, एक धनी को बेचा करता, उनसे जितने पैसे मिलते, रूखा-सूखा खाया करता. एक...


  • शेखचिल्ली के सपने

    शेखचिल्ली के सपने

    एक सेठ का नौकर मूढ़-सा, शेखचिल्ली था उसका नाम, चलते-फिरते, जागते-ऊंघते, सपने लेना उसका काम. एक बार बोला मालिक से, ”मां की याद सताती है, मुझको ऐसा लगता रहता, मां भी मुझे बुलाती है”. मालिक ने...