बाल कहानी

गुलाब के पांच बाल गीत-

रोज डे 22 सितंबर पर विशेष 1. कांटों में हंसना सीखो हम गुलाब हैं, खुश दिखते हैं, पर कांटों में रहते हैं। कांटों में हंसना सीखो, हंस-हंस सबको कहते हैं॥ राजा की पदवी पाकर भी, हम विनम्र रहना चाहें। जिससे जग के राजा के दर, शान-मान से जा पाएं॥ 2. ‘रोज डे’ मैं गुलाब हूं, […]

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खुद से अच्छा दोस्त कोई नहीं

छवि और अवि में अच्छी दोस्ती थी। दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती। एक ही कॉलेज में होने के कारण हर काम साथ- साथ करती। कहीं जाना होता दोनों साथ मे जाती। लोग दोनों की दोस्ती की मिसाल दिया करते। अवि काफ़ी मेहनती थी। छवि उसकी थोड़ी भी हेल्प कर देती तो वो […]

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दंड में छिपा दुलार

दिव्या, हीरा ,आभा , तीनों मित्र थीं। साथ साथ पढ़ती खेलती ।एक नहीं आती तो दूसरी उसे बुलाने पहुंच जाती। आभा काफी मेहनती थी। हीरा थोड़ी सी चंचल पर टीचर का कहना तुरंत मानती थी । यह बात अलग थी कि कभी-कभी बहाने भी बना जाती थी। टीचर तीनों में सबसे ज्यादा दिव्या को मानती […]

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कहानी – फल

सुबह के 9 बजे हिंदी अध्यापिका ने ऑनलाइन कक्षा में प्रवेश किया बच्चे जोश भरी आवाज़ में एकदम बोले – ” सुप्रभात अध्यापिका जी ! हम आपके पीरियड का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे क्योंकि आज आप हमे कहानी सुनाने वाली हो .” अध्यापिका – “हाँ-हाँ बच्चों सुप्रभात ! चलो अब सबको मैं म्यूट […]

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बाल कहानी – नन्हा टॉबी

टॉबी का नाम यूं तो मोहित था मगर उसे सारे लोग टॉबी कहकर बुलाते थे।टॉबी को ये बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती।वो अक्सर ही अपनी मम्मी से शिकायत करता, क्या आप मेरा नाम बदल नहीं सकतीं मम्मी। मुझे टॉबी नाम बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मगर उसकी मां नीलू हमेशा ही उसकी बात को […]

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बाल लघुकथा – मयंक का बदलाव

  अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक आ चुकी थी, परंतु मयंक अपनी पढ़ाई को छोड़ मोबाइल व लैपटॉप पर गेम खेलने में मस्त था | गेम खेलने से समय बचता तो उसे टेलीविजन पर कार्टून, सीरियल देखने में निकाल देता | देर रात तक इलेक्ट्रिक दुनिया में खोया रहकर सुबह देर से जागता, इसलिए कभी ठीक से […]

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बालकहानी : एहसास

दोपहर का समय था। बच्चे स्कूल के मैदान पर लंच कर रहे थे। बच्चों के ही पास अध्यापक सुभाष यदु जी खड़े थे। बच्चों पर उनकी नजर थी। एक छोटी सी बच्ची को रोटी न खाते देख यदु जी बोले – ” क्यों जी , रोटी को क्यों नहीं खा रही हो ? ” लड़की […]

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यादों के झरोखे से- 30

डाइनिंग टेबिल पर बहार रमेश को बचपन से ही हमेशा अपने पिताजी से शिकायत रहती थी. कारण भी कोई विशेष नहीं था. बस बात इतनी-सी थी कि, उसका नाम इंग्लिश में आर से आता था और स्कूल में उपस्थिति रजिस्टर में उसका नाम काफी नीचे आता था. बड़े होने पर भी नाराज़ होने का कोई-न-कोई […]

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बालकहानी : शौचालय बन गया

नीली-नीली गिरिश्रृंखलाओं , हरे-भरे वृक्षों , टेढ़ी-मेढ़ी राहों से घिरे गोड़ आदिवासी बाहुल्य एक छोटा सा गाँव है चितनार। धान यहाँ के लोगों की मुख्य फसल है। यहाँ के रहवासी मेहनत-मजदूरी में भी पीछे नहीं रहते ; साथ ही वनोपज से अपनी बहुत सी आवश्कताओं की पूर्ति कर लेते हैं। प्रेम , सौहार्द्र , भ्रातृत्व […]

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गुरू जी की चिन्ता

बड़ा या छोटा सभी के चेहरे पर चिन्ता की रेखाएं थी फिर गुरू जी तो कई जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रहे थे अपनी अपने परिवार की अपने आस पड़ोस और अपने विद्यार्थियों की।जी हां बात ही कुछ ऐसी थी।बहत्तर साल में गुरू जी किसी युवा से कम फुर्तीले न थे सुबह जल्दी उठना दिनचर्या […]