बाल कहानी

बालकहानी : दोस्ती में दरार

          बहुत पुरानी बात है। एक वनांचल गाँव था पण्डेल। गाँव से ही बिल्कुल लगा हुआ एक बहुत बड़ा बबूल का पेड़ था। उस बबूल पेड़ पर एक कौआ रहता था। गाँव से खाने की जो भी वस्तु मिलती; पेड़ पर लाता, और आराम से बैठकर खाता था। दिन भर गाँव, […]

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पतंग का धागा और चींची चिड़िया

सोनू की तीसरी पतंग काटते हुए राहुल जोर से चीखा काई पो चे , सोनू की मकर संक्रांति पर्व की खुशी तो जैसे कही खो गयी, बिल्कुल उदास हो गया सोनू , सोनू को इस बात की भी चिंता थी कि अब उसके सभी दोस्त उसे चिढ़ाएंगे, राहुल और सोनू एक ही अपार्टमेंट में रहते […]

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तारों की बारात

”ममी, मैं पंद्रह अगस्त को चांद वाली पतंग उड़ाऊंगा.” सोते समय धैर्य ने ममी से कहा. ”अच्छा बेटा जैसी चाहे वैसी पतंग उड़ाना, पर यह चांद वाली पतंग उड़ाने का विचार तेरे मन में कैसे आया?” ”देखो न ममी, चांद भी अकेला है और मैं भी अकेला!” ”बेटा, न तो चांद अकेला है और न […]

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इबादत

अक्सर इबादत अपने इष्टदेव की ही की जाती है. नरेंद्र ने किसकी इबादत की! छोटा-सा बालक नरेंद्र पार्क में सी-सॉ झूला झूलने गया था. सी-सॉ झूला झूलने के लिए उसे किसी साथी की जरूरत थी, पर कोई मिल नहीं रहा था. अकेले कैसे सी-सॉ झूला झूलता वह! ”कोई नहीं आ रहा मेरे साथ सी-सॉ झूला […]

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बाल कहानी : आकर्षक खिलौने

           अध्यापक ठाकुर जी कक्षा सातवीं में आए। बोले- “बच्चों ! कल से दशहरे की छुट्टी हो रही है पाँच दिनों के लिए; यानी शुक्रवार तक। बच्चे खुश हो गए। ठाकुर जी फिर बोले- “दशहरे की छुट्टी का आनंद लेने के साथ तुम सबको एक गृहकार्य भी करना है; और उसे […]

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गुलाब के पांच बाल गीत-

रोज डे 22 सितंबर पर विशेष 1. कांटों में हंसना सीखो हम गुलाब हैं, खुश दिखते हैं, पर कांटों में रहते हैं। कांटों में हंसना सीखो, हंस-हंस सबको कहते हैं॥ राजा की पदवी पाकर भी, हम विनम्र रहना चाहें। जिससे जग के राजा के दर, शान-मान से जा पाएं॥ 2. ‘रोज डे’ मैं गुलाब हूं, […]

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खुद से अच्छा दोस्त कोई नहीं

छवि और अवि में अच्छी दोस्ती थी। दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती। एक ही कॉलेज में होने के कारण हर काम साथ- साथ करती। कहीं जाना होता दोनों साथ मे जाती। लोग दोनों की दोस्ती की मिसाल दिया करते। अवि काफ़ी मेहनती थी। छवि उसकी थोड़ी भी हेल्प कर देती तो वो […]

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दंड में छिपा दुलार

दिव्या, हीरा ,आभा , तीनों मित्र थीं। साथ साथ पढ़ती खेलती ।एक नहीं आती तो दूसरी उसे बुलाने पहुंच जाती। आभा काफी मेहनती थी। हीरा थोड़ी सी चंचल पर टीचर का कहना तुरंत मानती थी । यह बात अलग थी कि कभी-कभी बहाने भी बना जाती थी। टीचर तीनों में सबसे ज्यादा दिव्या को मानती […]

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कहानी – फल

सुबह के 9 बजे हिंदी अध्यापिका ने ऑनलाइन कक्षा में प्रवेश किया बच्चे जोश भरी आवाज़ में एकदम बोले – ” सुप्रभात अध्यापिका जी ! हम आपके पीरियड का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे क्योंकि आज आप हमे कहानी सुनाने वाली हो .” अध्यापिका – “हाँ-हाँ बच्चों सुप्रभात ! चलो अब सबको मैं म्यूट […]

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बाल कहानी – नन्हा टॉबी

टॉबी का नाम यूं तो मोहित था मगर उसे सारे लोग टॉबी कहकर बुलाते थे।टॉबी को ये बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती।वो अक्सर ही अपनी मम्मी से शिकायत करता, क्या आप मेरा नाम बदल नहीं सकतीं मम्मी। मुझे टॉबी नाम बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मगर उसकी मां नीलू हमेशा ही उसकी बात को […]