Category : बाल कहानी

  • ईमानदारी का पुरस्कार

    ईमानदारी का पुरस्कार

    रामू नाम का लकड़हारा, नदी किनारे पर रहता था, रोज सवेरे जल्दी उठकर, जंगल को जाया करता था. लकड़ियां लाकर रोज शहर में, एक धनी को बेचा करता, उनसे जितने पैसे मिलते, रूखा-सूखा खाया करता. एक...


  • शेखचिल्ली के सपने

    शेखचिल्ली के सपने

    एक सेठ का नौकर मूढ़-सा, शेखचिल्ली था उसका नाम, चलते-फिरते, जागते-ऊंघते, सपने लेना उसका काम. एक बार बोला मालिक से, ”मां की याद सताती है, मुझको ऐसा लगता रहता, मां भी मुझे बुलाती है”. मालिक ने...

  • जैसी संगति बैठिए

    जैसी संगति बैठिए

    मोहन एक नेक लड़का था, पढ़ने-लिखने में होशियार, सब करते तारीफ, बड़े भी, करते उसको बेहद प्यार. उसके सब साथी अच्छे थे, करते जन-सेवा का काम, पढ़-लिखकर और खेल-कूदकर, करते थे वो खूब आराम. एक बार...

  • रोटी कौन खाएगा?

    रोटी कौन खाएगा?

    छोटी-सी मुर्गी थी लाल, बतख सफेद थी खूब कमाल, चितकबरी बिल्ली शैतान, काला कुत्ता बड़ा बेईमान. चारों साथ-साथ रहते थे, कभी न आपस में लड़ते थे, मुर्गी तो करती थी काम, बाकी सब करते आराम. एक...

  • जुड़वां भाई

    जुड़वां भाई

    छोटू मोटू जुड़वां भाई, आपस में करते न लड़ाई, छोटू एक इंच छोटा था, मोटू तीस ग्राम था भारी. दोनों में कुछ भेद न दिखता, इससे मुश्किल भारी होती, एक उड़ाता दूध-मलाई, खूब मार दूजे को...

  • खरगोश ने पूंछ बदल ली

    खरगोश ने पूंछ बदल ली

    छोटा-सा खरगोश निताशा, रहता था छोटे बिल में, अपनी छोटी पूंछ देखकर, बड़ा दुखी होता दिल में. एक लोमड़ी उसने देखी, उसकी लंबी पूंछ निराली, बोला, ”मौसी, पूंछ बदल लो, सचमुच यह तो बहुत निराली.” पूंछ...

  • चुंबक के गुण

    चुंबक के गुण

    नन्ही माशा रोज सवेरे, ठीक समय पर शाला जाती, बड़े ध्यान से पाठ याद कर, सीधे घर को आया करती. ठीक जगह पर बस्ता रखकर, खुद ही कपड़े बदला करती, खाना खाती सही ढंग से, फिर...


  • *वाणी पर संयम*

    *वाणी पर संयम*

    उस दिन देवम की कक्षा में टीचर पढ़ा रहीं थीं, कोई गम्भीर विषय चल रहा था। लेकिन पीछे दो छात्र आपस में बात करने में इतने तल्लीन थे कि वे भूल ही गये कि वे कक्षा...