Category : बाल कहानी

  • धन्यवाद !

    धन्यवाद !

    समीर भाग कर दादाजी की गोद में आकर बैठ गया और बड़ी मासूमियत से कहने लगा दादा जी अंकित है ना.. मेरा दोस्त बहुत मज़े करता है उसकी किस्मत कितनी अच्छी है वो अभी  सिंगापुर से...


  • छुटकी !

    छुटकी !

    शोभा अपनी सास के साथ सुबह से कन्या पूजन की तैयारी में लगी थी। सब कुछ बन कर तैयार था, जल्दी से कन्याओं को घर पर बुलाने के लिए सासु माँ ने अपने पोते बंटी को...

  • *फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

    *फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

      14 नवम्बर, बाल दिवस, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू का जन्म-दिवस, देवम के स्कूल में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सभी छात्र बड़े उत्साह और उमंग के साथ इस दिवस को मनाते हैं।...

  • नकलची बन्दर

    नकलची बन्दर

    नकलची बन्दर जंगल में एक सिंह रहता था। जंगल बहुत विशाल और घना था। दिन में भी भय के कारण वहां कोई ना फटकता था। सिंह भी बड़ा डरावना था। यदि एक बार शिकार पर नजर...

  • अपनी अपनी छुट्टियाँ

    अपनी अपनी छुट्टियाँ

    वैसे तो परीक्षा खत्म हुए लगभग महीना हो गया था, किन्तु रिजल्ट आने तक पता नहीं क्यों बच्चे इन दिनों को छुट्टियों के दिन मानने को तैयार ही नहीं थे। ऐसा लगता था मानों रिजल्ट का...


  • मोबाइल संस्कृति

    मोबाइल संस्कृति

    सन्देश ने अपने पापा से मोबाइल की जिद्द की , उन्होंने बहुत समझाया -” बेटा , अभी तुम बहुत छोटे हो , अभी तो तुम पाँचवी में हो , अभी से मोबाइल का क्या करोगे ?”...

  • रिश्ता

    रिश्ता

    सुनहरी सवेरे की सरस-सुहानी वेला थी. पीपल के एक घने पेड़ की एक डाल पर चिन्नी चिड़िया अपनी नन्ही बेटी मिन्नी के साथ बैठी थी. चिन्नी चिड़िया अपनी अनुभवी-मटकती आंखों से चौकन्नी होकर अपनी बेटी से बातें...

  • मेरे खिलौने !

    मेरे खिलौने !

    मिंटू जैसे ही सुबह उठा ममी ने सिर पर हाथ फेर कर कहा आज तुम्हारी बुआ जी और सन्नी आ रहे हैं, मिंटू बहुत खुश हो गया। जल्दी जल्दी नहा धौ लिया और ममी से बार...