शिशुगीत

चंद्रग्रहण

पापा बोले ”चंद्रग्रहण है, मैंने पूछा, “वो क्या होता पापा?” पापा बोले, ”आओ बताऊं, बताते मुझे थे मेरे पापा. एक सीध में आ जाते जब, सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा, पृथ्वी की छाया पड़ने से, थोड़ा-सा छिप जाता चंद्रमा.” तब यह चंद्रग्रहण कहलाता, खगोल घटना से इसका नाता, जब यह छाया हट जाती है, चंद्रमा पूरी […]

शिशुगीत

गुरु

         (5 जुलाई, 2020 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष) गुरु दीपक गुरु सूर्य हैं, गुरु ज्ञान-उजियार, अंधेरा-अज्ञान दूर कर, करते हैं उपकार. ब्रह्मा-विष्णु-महेश गुरु, गुरु प्रेम की खान, मात-पिता औ’ गुरु की सीख से, शिष्य भी बन जाता महान.

शिशुगीत

कबूतर

मेरी ममी मुझे पढ़ातीं, ‘क’ कबूतर कहना सिखातीं, मैं कहता तब ”कहां कबूतर?”, ”वह तो है घोंसले के अंदर. गुटरूं-गूं-गूं करता है, प्यारा-प्यारा होता है, खूब काम का पक्षी है यह, कुशल डाकिया होता है.”

शिशुगीत

चिड़िया

चिड़िया मुझको अच्छी लगती, देता मैं उसको दाना, फुदक-फुदककर आती है वह, खाती है अपना खाना. खाना खाकर उड़ जाती है, कभी नहीं करती टाटा, याद बड़ी उसकी आती है, लगता जब मुझको चाटा.

शिशुगीत

तोता

तोता है इक प्यारा पंछी, हरे रंग का होता है, लाल चोंच है इसकी प्यारी, जो भी रटाओ रटता है. मिर्ची खाता खूब मजे से, टैं-टैं-टैं-टैं करता है, बच्चों का है प्यारा साथी, पर बिल्ली से डरता है.

शिशुगीत

सूर्य ग्रहण

मम्मी कहतीं सूर्य ग्रहण है, मुझको यह पर समझ न आता,                              सूर्य गज़ब का शक्तिशाली, उसे ग्रहण क्यों कर है लगता? ”सूर्य-पृथ्वी मध्य जब आए चंद्रमा, सूर्य है आच्छादित हो जाता, खगोल शास्त्रीगण सब कहते हैं, ”सूर्य ग्रहण” तब है कहलाता.

शिशुगीत

कौआ

कौआ काला होता है, कांव-कांव कर रोता है, चोरी करना इसे सुहाता, एक आंख का होता है. एक दिवस मेरे घर आया, मेरी रोटी ले भागा, मैंने भी तब खूब चिढ़ाया, ”जा, जा, तू है काला कागा.

शिशुगीत

क्रोध

क्रोध हमारा प्रबल शत्रु है, क्रोध से हरदम बचकर रहना, गुस्से में जाने क्या हो जाए, गुस्से की क्या वजह समझना. गुस्सा जो आए ममी को, प्यारी-सी पप्पी दे देना, गुस्सा जो आए दादी को, ठंडा पानी लाकर देना, गुस्सा जो आए पापा को, किसी कोने में झट छिप जाना, गुस्सा जब ठंडा हो जाए, […]

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सपना

आईसक्रीम के बादल देखे, शरबत भरी हैं नदियां, चॉकलेट के पहाड़ खड़े हैं नाचे मोर ता-ता-थैयां. इंद्रधनुष का बड़ा सा झूला, झूलूं मैं, झुलाए चंदनिया, गाते गीत सलोने पक्षी, भरती कुलांचें वन की हिरनिया. मैंने देखा सपना सुहाना, जो सुनता होता मस्ताना, कभी तो होगा पूरा सपना,

शिशुगीत

मोर

राष्ट्रीय पक्षी हूं मैं मोर, कें-कें बोल मचाता शोर, बादल देखूं छम-छम नाचूं, बच्चों का मैं प्यारा मोर. पंख हैं मेरे वड़े सजीले, सिर पर मेरे ताज है, नीली-प्यारी-लम्बी गर्दन, भारत को मुझ पर नाज है.