Category : शिशुगीत

  • शिशुगीत

    शिशुगीत

    1.  मुखौटे बंदर, भालू और सियार पुलिस, सिपाही, चौकीदार जो चाहें बन जाएँ आप पहन मुखौटे तो लें यार   2. चश्मा मेले में से चश्मा लाया आँखों पर जब आज चढ़ाया वाह-वाह सबने ही बोला लाल...

  • शिशुगीत

    शिशुगीत

    नेता खादी पहने आते नेता सबको हाथ दिखाते नेता करते कम हैं, कहते ज्यादा कुर्सी को लड़ जाते नेता 2. कुर्सी कुर्सी के हैं खेल निराले इसकी खातिर सब मतवाले मुझको भी है कुर्सी प्यारी पढ़ता...

  • शिशुगीत

    शिशुगीत

    फूल फूल खड़े रहते मुस्काते दे रस मीठा मधु बनवाते फ्रेंड इन्हीं की तितलीरानी रोज सुनाती नयी कहानी खुशबू-खुशबू हरदिन खेलें इक-दूजे को पकड़ें-ठेलें आँधी आती तो डर जाते पत्तों में जाकर छिप जाते   2. रूठी...

  • शिशुगीत

    शिशुगीत

    लाठी दादाजी की साथिन लाठी रहे नहीं उनके बिन लाठी पीकर तेल बनी बलशाली मुझको लगती हाथिन लाठी 2. टोपी रंग-बिरंगी आयी टोपी मेरे मन को भायी टोपी खुद को आईने में देखे जिसने यहाँ लगायी...


  • 37.उपकार

    37.उपकार

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से)     वृक्ष फूल-फल-अन्न हैं देते, नदियां देतीं पानी, सूरज धूप-रोशनी देता, चंदा अमृत-दानी. धरती धीरज का धन देती, अम्बर प्यार लुटाए, जो करता उपकार जगत में, ईश्वर-सम यश पाए.

  • 36.सीख

    36.सीख

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से)   फूल हमें हंसना सिखलाते, भौंरे हमको गाना, तितली जग रंगना सिखलाती, पानी प्यास बुझाना. चींटी मेहनत सिखलाती है, दीपक राह दिखाना, पर्वत दृढ़ रहना सिखलाते, मधुमक्खी मधु पाना.

  • 35.मेला

    35.मेला

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से)   मुझको बड़ा सुहाना लगता, कोई भी हो मेला, मेले में हो सजे-सजाए, लोगों का बस रेला. कुल्चे-छोले-रबड़ी-कुल्फी, खेल-खिलौने न्यारे, झूले-हाथी-ऊंट सवारी, मेले के खेल निराले.

  • 34.वृक्ष

    34.वृक्ष

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से)   वृक्ष हमें फल-फूल हैं देते, अन्न-दालें-मेवे और धान, साज-सज्जा, खेलों की चीज़ें, फर्नीचर देते ये महान. मिट्टी का कटाव रोकते, मौसम के हैं ये सरताज, पत्थर खाकर भी फल देते,...

  • 33.सावन आया

    33.सावन आया

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से)   सावन आया, सावन आया, हरियाली है सावन लाया, खुशियों से मन हर्षाने को झूले लेकर सावन आया. सूखी-प्यासी धरती की है, सावन प्यास बुझाने आया, खुशहाली का वाहक बनकर, झूम-झूमकर...