बाल कविता शिशुगीत

नशा नाश करता है

नशा नाश का कारण होता, तन-मन-धन का करता नाश, आत्मा तक भी बिक जाती है, परिवार का सत्यानाश! मोबाइल भी एक नशा है, सीमित हो इसका उपयोग, आंखें भी धोखा दे जातीं, लग सकते हैं और भी रोग. खुद भी समझें बात पते की, नशा बड़ों का भी छुड़वाएं, नशा मुक्त भारत बनाएं, आओ यह […]

बाल कविता शिशुगीत

बादल राजा

बादल राजा आएंगे, ढेरों खुशियां लाएंगे, रिमझिम-रिमझिम बरखा होगी, पंछी गाना गाएंगे. भीग-भीग पेड़ों के पत्ते, और हरे हो जाएंगे, ताल-तलैया जल से भरेंगे, हम झूमेंगे-नाचेंगे.

बाल कविता शिशुगीत

योग व्यायाम

आओ योग व्यायाम करें, स्वास्थ्य रहें खुशहाल रहें, आयु में होगी वृद्धि, सांसों में संचार करें. योग से योग हो बुद्धि में, योग से सोच में होगा योग, योग से विवेक में योग करें, जीने की उमंग में होगा योग. लेखिका- लीला तिवानी योग के दो अर्थ हैं- 1. योग व्यायाम 2. जोड़ या जुड़ना

शिशुगीत

तितली

तितली हूं मैं तितली हूं, रंगबिरंगी तितली हूं, उड़ती-फिरती फूलों पर मैं, उनकी सहेली तितली हूं. अपने छोटे पंखों से मैं, मृदु संगीत सुनाती हूं, मुझे न पकड़ो, फूल न तोड़ो, बच्चों को समझाती हूं.

शिशुगीत

पर्यावरण मित्र बनिए

फूल-फूल पर मंडराता, भौंरा मीठा गीत सुनाता, पर्यावरण का मित्र वही है, जो फूलों से नेह निभाता. पेड़ न काटे, पौधे लगाए, स्वच्छता से निभाए नाता.

शिशुगीत

जल्दी उठो

चिड़िया मैं कहलाती हूं, मीठे गीत सुनाती हूं, सुबह-सवेरे हरि-गुण गाकर, जल्दी सबको जगाती हूं. जल्दी उठना अच्छा होता, समय बहुत-सा मिल जाता है, चुस्ती और तंदुरुस्ती पाकर, तन-मन खुश हो जाता है.

शिशुगीत

पानी

पानी जीवनदाता है, खेती खूब कराता है, पानी पी हम प्यास बुझाते, पानी से बर्तन मंजवाते. कपड़े धोते पानी से, खूब नहाते पानी से, पानी से घर को धुलवाते, आग बुझाते पानी से. पानी की बूंद-बूंद कीमती है, इसे व्यर्थ न बहाएं.

शिशुगीत

शेर

जंगलों में रहता है शेर, जंगल का राजा है शेर, शेर समूह में रहता है, शक्ति-पुञ्ज होता है शेर. अपना शिकार यह खुद करता है, मरे हुओं को न खाता शेर, तेजी से यह दौड़ लगाता, बड़े जोर से दहाड़े शेर. राष्ट्र का प्रतीक है शेर, ऊंची छलांग लगाता शेर, अंधेरे में भी देख है […]

शिशुगीत

खेल

आओ मिलकर खेलें खेल, मन प्रसन्न करता है खेल, स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है, चुस्ती भी है बढ़ाता खेल. खेल से बुद्धि तीव्र है होती, कौशल-विकास करता है खेल, इम्यूनिटी भी बढ़ जाती है, टीम वर्क सिखलाता खेल.

शिशुगीत

मीठे वचन

जैसे हरे-भरे पेड़ों से, धरती सुंदर लगती है, वैसे मन के प्रेमिल भाव से, मन की बगिया सजती है. आओ बच्चो, प्यार करें हम, धरती मां के हर प्राणी से, कभी किसी का दिल न दुखाएं, मीठे वचन झरें वाणी से.