बाल कविता शिशुगीत

हमें चाहिए आजादी

हमें चाहिए आजादी कोरोना के कष्टमय इरादों से, व्यर्थ के दुःखदायी विवादों से, दुश्मन की नापाक चालों से, प्लास्टिक बैग से भरे नालों से. आजादी जो निर्बाध हो, विश्वास जिसमें अगाध हो, आनंद का अंबार हो, प्रेम-ही-प्रेम का श्रंगार हो.

बाल कविता शिशुगीत

फुटकी

फुटकी हूं मैं फुटकी हूं, दिखने में मैं छुटकी हूं, नील गगन पर जब मैं उड़ती, याद न रखती छुटकी हूं. सब कहते मैं सुंदर हूं, बच्चों की मैं प्यारी हूं, घमंड करना मुझे न भाता, सरल स्वभाव उर-धारी हूं.

बाल कविता शिशुगीत

नीला रंग

  मेरी छतरी कितनी प्यारी! रंग है इसका नीला, जब मैं ऊपर नजर उठाऊं, आसमान भी नीला. नीले रंग की टोपी मेरी, मम्मी ने है बनाई, नीले रंग की चिड़िया प्यारी, मेरे अंगना आई.

बाल कविता शिशुगीत

बुआ का पर्स

बुआ जब भी आती हैं, खेल-खिलौने लाती हैं, टॉफी-बिस्कुट-कपड़े-मिठाई, चीजें ढेर-सी लाती हैं. ममी कहतीं, ”रोज बुआ से, चीजें लेना ठीक नहीं”, ”मैं मजबूर हूं पर्स बुआ का, चेक किए बिन चैन नहीं.”

बाल कविता शिशुगीत

नशा नाश करता है

नशा नाश का कारण होता, तन-मन-धन का करता नाश, आत्मा तक भी बिक जाती है, परिवार का सत्यानाश! मोबाइल भी एक नशा है, सीमित हो इसका उपयोग, आंखें भी धोखा दे जातीं, लग सकते हैं और भी रोग. खुद भी समझें बात पते की, नशा बड़ों का भी छुड़वाएं, नशा मुक्त भारत बनाएं, आओ यह […]

बाल कविता शिशुगीत

बादल राजा

बादल राजा आएंगे, ढेरों खुशियां लाएंगे, रिमझिम-रिमझिम बरखा होगी, पंछी गाना गाएंगे. भीग-भीग पेड़ों के पत्ते, और हरे हो जाएंगे, ताल-तलैया जल से भरेंगे, हम झूमेंगे-नाचेंगे.

बाल कविता शिशुगीत

योग व्यायाम

आओ योग व्यायाम करें, स्वास्थ्य रहें खुशहाल रहें, आयु में होगी वृद्धि, सांसों में संचार करें. योग से योग हो बुद्धि में, योग से सोच में होगा योग, योग से विवेक में योग करें, जीने की उमंग में होगा योग. लेखिका- लीला तिवानी योग के दो अर्थ हैं- 1. योग व्यायाम 2. जोड़ या जुड़ना

शिशुगीत

तितली

तितली हूं मैं तितली हूं, रंगबिरंगी तितली हूं, उड़ती-फिरती फूलों पर मैं, उनकी सहेली तितली हूं. अपने छोटे पंखों से मैं, मृदु संगीत सुनाती हूं, मुझे न पकड़ो, फूल न तोड़ो, बच्चों को समझाती हूं.

शिशुगीत

पर्यावरण मित्र बनिए

फूल-फूल पर मंडराता, भौंरा मीठा गीत सुनाता, पर्यावरण का मित्र वही है, जो फूलों से नेह निभाता. पेड़ न काटे, पौधे लगाए, स्वच्छता से निभाए नाता.

शिशुगीत

जल्दी उठो

चिड़िया मैं कहलाती हूं, मीठे गीत सुनाती हूं, सुबह-सवेरे हरि-गुण गाकर, जल्दी सबको जगाती हूं. जल्दी उठना अच्छा होता, समय बहुत-सा मिल जाता है, चुस्ती और तंदुरुस्ती पाकर, तन-मन खुश हो जाता है.