Category : शिशुगीत

  • मिठाई और रेखागणित

    मिठाई और रेखागणित

    बरफी होती है चौकोर, मुझको बहुत सुहाती है, मीठी-मीठी, ताजी-ताजी, मुझे बहुत ही भाती है.   लड्डू होता दानेदार, बड़े मजे से खाती हूं, ममी से दस पैसे लेकर, लड्डू गोल ले आती हूं.   पीली-पीली...

  • स्वर बोलते हैं

    स्वर बोलते हैं

    ‘अ’ अनार पर बैठा है, मन ही मन में ऐंठा है. ‘आ’ ने आम का गुटका खाया, अटक गया तब आ चिल्लाया. ‘इ’ इमली पर हो सवार, पहुंची सात समंदर पार. ‘ई’ ने घर में ईख...

  • कैसे होते अच्छे बच्चे?

    कैसे होते अच्छे बच्चे?

    प्रश्न- क्या तुम हो जी अच्छे बच्चे?  उत्तर- हां जी, हम हैं अच्छे बच्चे. प्रश्न- क्या करते हैं अच्छे बच्चे? उत्तर- ये करते हैं अच्छे बच्चे. जल्दी सोते जल्दी जगते, सबसे पहले वंदन करते, नित्य बड़ों...

  • सेठ जी के टके

    सेठ जी के टके

    टके थे दस, सेठ जी गये फंस, टका निकलवाई का दीना. टके रह गये नौ. टके थे नौ, सेठ जी ने बोये जौ, टका कटवाई का दीना. टके रह गये आठ. टके थे आठ, सेठ जी...

  • जल्दी सोना जल्दी जगना

    जल्दी सोना जल्दी जगना

    प्यारे चुन्न मुन्न जल्दी आओ, आकर जल्दी सो जाओ निंदिया रानी तुम्हें बुलाए, सपनों में तुम खो जाओ- जल्दी सोना जल्दी जगना, बात बहुत ही अच्छी है जल्दी सोने वाला चुन्न मुन्न, पाता चिजी अच्छी है...

  • दो का पहाड़ा

    दो का पहाड़ा

    दो एकम दो, आज्ञाकारी हो. दो दुनी चार, झटपट हो तैयार. दो तीया छः, सफ-साफ रह. दो चौके आठ, याद करो पाथ. दो पंजे दस, झगड़ा करो बस. दो छके बारह, काम करो ज्यादह. दो सते...

  • आओ बूझें एक पहेली

    आओ बूझें एक पहेली

    बच्चो बूझो एक पहेली, नाम बता दो उनका जो थे, नाम बड़ा और कद के छोटे, यही हमारी नई पहेली. आओ बूझें एक पहेली, लाल बहादुर नाम था उनका, शास्त्री जी वो कहलाते थे, यही हमारी...

  • खेल-खेल में

    खेल-खेल में

    खेल-खेल में सीख सकें हम गाना और बजाना, खेल-खेल में सीख सकें हम हंसना और मुस्काना, खेल-खेल में जाना हमने खेल ही से जीवन है, खेल-खेल में सीखा हमने मेल से अपनापन है.   खेल-खेल में...

  • हाथी और दर्जी

    हाथी और दर्जी

    एक था दर्जी, एक था हाथी, दोनों ही थे पक्के साथी, दर्जी करता खूब सिलाई, हाथी खाता खूब मिठाई.   हाथी आकर रोज रात को, कहता- ”दर्जी भाई नमस्ते”, दर्जी देता रोटी उसको, आपस में वो...

  • एकता में बल है

    एकता में बल है

    एक पेड़ पर रहता था, गौरैया का सुंदर जोड़ा, थोड़ा-सा वो समझदार था, अलबेला था थोड़ा-थोड़ा.   सोचा इक दिन गौरैया ने, बन जाता जो एक घोंसला, हम भी सुख से रह सकते तो, होता हमको...