शिशुगीत

नमकीन

एक चीज है मुझको भाती, वह कहलाती है नमकीन, फीकी चीजें ढूंढ के खाता, फिर भी खाता मैं नमकीन. खाकर पीता पानी खूब, लेकिन मिटती जरा न भूख, सी-सी करता जाता हूं,

शिशुगीत

छोले

ममी कहतीं, ‘खा लो सब्जी’, मैं कहता हूं, ‘दे दो छोले’, छोले-पूरी, कुल्चे-छोले, छोले-भटूरे, चावल-छोले. सूखे छोले, खट्टे छोले, या रसदार बने हों छोले, चाहे सब्जी लाख बनी हों, छोले तो रहते हैं छोले.

शिशुगीत

शरबत

मुझको शरबत अच्छा लगता, गर्मी में मैं पीता हूं, पीला, लाल, हरा हो चाहे, बड़े मजे से पीता हूं. नाम सुनाई दे शरबत का, कान खड़े हो जाते हैं, झटपट अपनी ढूंढ गिलसिया, सोनू जी आ जाते हैं.

शिशुगीत

पर्यावरण बचाओ

अधिक-से-अधिक पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ कार और मोटरसाइकिल का इस्तेमाल कम करो, पर्यावरण बचाओ साइकिल का उपयोग बढ़ाओ, पर्यावरण बचाओ पॉलीथिन-प्लास्टिक हटाओ, पर्यावरण बचाओ पानी की बूंद-बूंद की कद्र करके पानी का अपव्यय रोको, पर्यावरण बचाओ रासायनिक खाद व कीटनाशक का प्रयोग बंद करो, पर्यावरण बचाओ. कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे उपकरणों की रिसाइकलिंग करवाओ, पर्यावरण […]

शिशुगीत

पानी

पानी जीवनदाता है, खेती खूब कराता है, पानी पी हम प्यास बुझाते, पानी से बर्तन मंजवाते. कपड़े धोते पानी से, खूब नहाते पानी से, पानी से घर को धुलवाते, आग बुझाते पानी से.   (1978 में लिखी पुस्तक ‘शिशु गीत संग्रह’ से)

शिशुगीत

बुआ

बुआ जब भी आती हैं, खेल-खिलौने लाती हैं, टॉफी-बिस्कुट-कपड़े-मिठाई, चीजें ढेर-सी लाती हैं. ममी कहतीं, ”रोज बुआ से, चीजें लेना ठीक नहीं”, ”मैं मजबूर हूं पर्स बुआ का, चेक किए बिन चैन नहीं.”

शिशुगीत

क्रिकेट

पापा मुझको ला दो बल्ला, मुझे नहीं लेना है छल्ला, अच्छी-सी एक गेंद मंगा दो, क्रिकेट की कुछ बात सिखा दो. ममी जब फैंकेगी गेंद, बल्ले से मैं मारूंगा, आप पकड़ लेना जल्दी से, वरना छक्का कर डालूंगा.   (1978 में लिखी पुस्तक ‘शिशु गीत संग्रह’ से)

शिशुगीत

पापा का स्कूटर

पीं-पीं-पीं-पीं शोर मचाता, पापा का स्कूटर आया, अब तो खूब मजा आएगा,             सोनू सैर करने जाएगा. ”अभी नहीं उतरूंगा पापा, चक्कर एक और खिलवा दो, अच्छे-अच्छे काम करूंगा, एक बार बस और घुमा दो.”   1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह  से

शिशुगीत

आवाजों की दुनिया

झरना झरता कल-कल-कल-कल, तोपें करतीं गड़-गड़-गड़-गड़, फोन फुदकता टन-टन-टन-टन, जंजीरों की होती खन-खन. सांय-सांय है वायु करती, धम-धम कर बंदूक धमकती, टिक-टिक करती घड़ी हमारी, पौं-पौं-पौं-पौं मोटर करती. 1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह  से

शिशुगीत

जरूरी है

कोरोना और लॉकडाउन के चलते, अनुशासन का पालन करना जरूरी है, घर की सीमा में सुरक्षित रहना जरूरी है, बिना जरूरत के घर से बाहर न निकलना जरूरी है, दो गज दूरी रखना जरूरी है, मास्क लगाना जरूरी है, हाथों को सेनेटाइज करना जरूरी है, एक दूसरे का हालचाल पूछना जरूरी है, जरूरतमंदों की मदद […]