शिशुगीत

पापा का स्कूटर

पीं-पीं-पीं-पीं शोर मचाता, पापा का स्कूटर आया, अब तो खूब मजा आएगा,             सोनू सैर करने जाएगा. ”अभी नहीं उतरूंगा पापा, चक्कर एक और खिलवा दो, अच्छे-अच्छे काम करूंगा, एक बार बस और घुमा दो.”   1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह  से

शिशुगीत

आवाजों की दुनिया

झरना झरता कल-कल-कल-कल, तोपें करतीं गड़-गड़-गड़-गड़, फोन फुदकता टन-टन-टन-टन, जंजीरों की होती खन-खन. सांय-सांय है वायु करती, धम-धम कर बंदूक धमकती, टिक-टिक करती घड़ी हमारी, पौं-पौं-पौं-पौं मोटर करती. 1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह  से

शिशुगीत

जरूरी है

कोरोना और लॉकडाउन के चलते, अनुशासन का पालन करना जरूरी है, घर की सीमा में सुरक्षित रहना जरूरी है, बिना जरूरत के घर से बाहर न निकलना जरूरी है, दो गज दूरी रखना जरूरी है, मास्क लगाना जरूरी है, हाथों को सेनेटाइज करना जरूरी है, एक दूसरे का हालचाल पूछना जरूरी है, जरूरतमंदों की मदद […]

शिशुगीत

मोटर कार

पापा ने ली मोटर कार, मोटर में हैं पहिए चार, मोटर की पौं-पौं को सुनकर, सैर को मैं होता तैयार. सड़कों पर चलती है मोटर, गियर से करती है काम, करके शान से इसमें सवारी, मिलता है मुझको आराम.

शिशुगीत

खरगोश

मैं सफेद हूं जैसे दूध, नरम-गुदगुदा जैसे दूब, हरी घास मैं खाता हूं, दाना भी चुग जाता हूं. आंखें लाल हैं मेरी देखो, खूब तेज मैं भगता हूं, जल्दी मेरा नाम बताओ, मैं तुमको क्या लगताहूं? (खरगोश)

शिशुगीत

मेरी मम्मी

मेरी मम्मी प्यारी मम्मी सबसे प्यारी मेरी मम्मी पढ़ने भेजती मेरी मम्मी एक दिन अगर पढ़ाई नहीं करते मम्मी डाँट लगाती है फिर पढ़ने बैठ जाओ तो मम्मी खुश हो जाती है सबसे प्यारी मेरी मम्मी

शिशुगीत

बंदर

जब मैं उछल-कूद करता हूं, मम्मी कहती ”तू है बंदर”, पर मेरे तो पूंछ नहीं है, मैं कैसे हो सकता बंदर! मुहं भी मेरा लाल नहीं है, और न ही बिलकुल काला, ना लंगूर मैं ना ही बंदर, मुझको तो होना है लाला. 1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह से

शिशुगीत

कुत्ता

कुत्ता ‘भौं-भौं’ करता है, नहीं किसी से डरता है, करता है घर की रखवाली, खाता रोटी जो भी पा ली. बच्चों के संग खूब खेलता, गेंद उठाता और फेंकता, पिल्ले इसके प्यारे-प्यारे, ‘कूं-कूं’ शोर मचाने देता.

शिशुगीत

सोशल डिस्टेंस

कोरोना में मजबूरी है, सोशल डिस्टेंस जरूरी है, मन से दो इंच का न फासला हो, तन से जरूरी दो गज दूरी है. घर की सुरक्षित सीमा में रहो, पार्क में भी दूर-दूर रहो, खुद भी दूरी बनाए रखो, औरों को भी दूर-दूर रहने को कहो.

शिशुगीत

मोटर कार

पापा ने ली मोटर कार, मोटर में हैं पहिए चार, मोटर की पौं-पौं को सुनकर, सैर को मैं होता तैयार. सड़कों पर चलती है मोटर, गियर से करती है काम, करके शान से इसमें सवारी, मिलता है मुझको आराम.