बाल कविता

बालगीत – माँ की लोरी

मुझे याद है माँ की लोरी। माँ थी मेरी कितनी भोरी।। बिस्तर जब गीला हो जाता। रोकर अपना कष्ट बताता।। लेती समझ वेदना मोरी। मुझे याद है माँ की लोरी।। नींद नहीं जब मुझको आती। थपकी दे – दे मुझे सुलाती।। गा- गा मीठे स्वर में लोरी। मुझे याद है माँ की लोरी।। कभी जाँघ […]

बाल कविता

अदला – बदली

सुबह जगाने आता सूरज, शाम सुलाने आता चंदा। गर अदला-बदली हो जाए, झूम – झूमकर गाए बंदा।। पता नहीं सूरज को निश दिन, इतनी सुबह जगाता कौन? दिन भर गायब रहता चंदा, ठीक शाम को लाता कौन? कोई पता बता दे उसका, जो इनको ड्यूटी देता है। क्या ये नहीं बगावत करते? या तो वो […]

बाल कविता

बाल कविता – समोसे

गरम समोसे मुसकाते हैं ,मुँह में पानी वो लाते हैं। तीन नुकीले कोनों वाले ,सबके मन को ललचाते हैं। स्वाद चरपरा उसका होता ,चटनी साथ बहुत भाते हैं। चाय समोसे जब संग आते ,महफ़िल में रंग जमाते हैं। सुबह जलेबी और समोसे,जन जन पे ख़ुशी लुटाते हैं। — महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

रेलगाड़ी

छुक छुक करती आती रेल हम सब को ले जाती रेल हो गरीब या हो अमीर शरणदात्री सबके रेल। चाहे पास या हो दूर सबको ही ले जाती रेल सुविधाएं मिलती हैं ढेरों कम खर्चे में करें सवारी। चाहे अकेले जाना हो या परिवार को ले जाना हो, सबकी सुविधा सबकी रेल पैसा कम और […]

बाल कविता

बालकविता “सबका ऊँचा नाम करूँ”

मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा।मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।—मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।।—मैं जब चलता ठुमक-ठुमक,वो फूले नही समाते हैं।जग के स्वप्न सलोने,उनकी आँखों में छा जाते हैं।।—ममता की मूरत मम्मी-जी,पापा-जी प्यारे-प्यारे।मेरे दादा-दादी जी भी,हैं सारे जग से न्यारे।।—सपनों में सबके […]

बाल कविता

बायोस्कोप

आओ-आओ बायोस्कोप देखो, पंसेरी का चूहा देखो, बारह मन की धोबन देखो, पैसा फेंको, तमाशा देखो. गागर में भर लाई है सागर, गुजरिया की नन्ही-सी गागर देखो, उंगली पे गोवर्धन पहाड़ देखो, पैसा फेंको, तमाशा देखो.

बाल कविता

दीपक

प्रभु ने हमको प्रेम से सौंपा, तमहारी-सुखदाई उजास, जब तक दम-में-दम है अपने, देंगे हम स्नेहिल प्रकाश. दीपक-तले अंधेरा होता, घेरे पर रोशन होते, खुद जलकर औरों को रोशन, करके हम खुश हैं होते.

बाल कविता

गौरैया

गौरैया मैं गौरैया, छोटी-सी मैं गौरैया, हर पल कहती रहती हूं, ”शुकराने हे जग के रचैया”. उसने ही हम सबको रचाया, अब तक भी है उसने बचाया, आगे भी वह रखवाला है, हमने व्यर्थ क्यों शोर मचाया?

बाल कविता

चार बाल गीत- 6

1.हिंदी है भारत की शान हम हैं आज के जागरुक बच्चे, हिंदी से है हमको प्यार, भाषाएं कितनी भी सीखें, निज भाषा अपना उपहार. आओ हिंदी को अपनाएं, हिंदी है भारत की शान, राष्ट्र की, राज-काज की भाषा, मातृभाषा मधुर-महान. 2.हे प्रभु मन अच्छा ही रखना हम हैं छोटे फिर भी देखो, महक हमारी जग […]

बाल कविता

बाल कविता – जुगनू

चमक रहा था आसमान में, रात अंधेरी  वो बरसात में । एक बच्चे की जो पड़ी नज़र, पकड़ लिया उसको जाकर । चमक दार कीड़ा था वो, झम, झम जलता था वो । कीड़ा बोला उस बच्चे से, मैं जुगनूं हूँ मुझे छोड़ दो। चमक मेरी दिन में न रहती, उजाले में वो गुम हो […]