Category : बाल साहित्य

  • जानवर !

    जानवर !

    बंटी जल्दी जल्दी स्कूल की ओर जा रहा था,तभी एक नज़र पिंकी के पापा पर पड़ी! पिंकी के पापा उसी ओर आ रहे थे, पर अचानक बंटी के कदम रुक गए …..ये क्या? पास की झाड़ियों में...

  • मेरा खिलौना

    मेरा खिलौना

    मुझको कहते बाल सलोना, मैं अपनी ममी का खिलौना, मुझको भातीं चीजें कितनी, सबसे प्यारा मेरा खिलौना. सबसे पहले मुझको भाया, झन-झन झुंझने वाला खिलौना, फिर फिरकी-लट्टू-गुब्बारे, बैट-बॉल था मेरा खिलौना. टमटम गाड़ी-कार-प्रैम का, भेंट में...




  • अभिलाषा

    अभिलाषा

    छोटे-छोटे बालक हैं हम, काम मगर करते हैं महान, मत समझो कमजोर हमें तुम, साहस में ही अपनी शान. आंधी-पानी-तूफानों से, डर जाएं जो हम वो नहीं, बाधाएं कितनी भी आएं, हमको उनका गम है नहीं....


  • रंगों की कहानी

    रंगों की कहानी

    इक खरगोश था चिट्टा राम यार उसका, कौआ कालीराम ॥ खाना पीना और सो जाना सिवा इसके कोई और न काम ॥ इक दिन कालू कौआराम बोला चिट्टा राम से ॥ मैं काला तू चिट्टा गोरा...

  • अनुभव

    अनुभव

    मनोज दसवीं कक्षा में पढ़ता था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद में भी बहुत तेज था। वार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी थी । उसके सभी पर्चे अच्छे हुए थे।...

  • सबक

    सबक

    बहुत पुरानी बात है। नंदनवन में एक तालाब था। उसके किनारे एक बेल का पेड़ था। उस पेड़ पर एक नटखट बंदर रहा था। वह दिन भर उछलकूद करता रहता था। इस पेड़ से उस पेड़...