बाल कहानी

बाल कहानी – जैसे को तैसा

रानी कोयल और मनु बंदर की कलाकारी से सिंघोला बाग ही नहीं; वरन् आसपास की सारी बगिया वाकिफ थी। रानी कोयल गायन में माहिर थी; तो मनु बंदर था एक नंबर का नर्तक। दोनों को गायन व नर्तन के नियमों की बहुत अच्छी जानकारी थी। उनकी कलाकारी की अंचल में तूती बोलती थी। वे दोनों […]

बाल कविता

बाल कविता

मुझको तोता कह सकते हो, संग मेरे बतिया सकते हो, अपनी प्रशंसा जो खुद करता, मिट्ठू मियां उसे क्यों कहते हो? मैं तो वही बोलता हूं जो, मुझे सिखाते हो तुम लोग, राम-राम कहना सिखलाओ, गाली बकना बुरा है रोग. अच्छे बच्चे अच्छी बातें, करते और सिखाते हैं, वक्त पड़े तो काम बड़े भी, कर […]

बाल कविता शिशुगीत

कोआला

ऑस्ट्रेलिया में मिलता हूं, वृक्षों पर मैं रहता हूं, स्तनधारी जंतु हूं मैं, नमी पसंद मैं करता हूं. बच्चों-बुजुर्गों को प्यारा हूं, आनंद का मैं पिटारा हूं, मुझको गोद में सब लेते हैं, शाकाहारी न्यारा हूं. कोआला (Koala) ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक वृक्षों पर रहने वाला, शाकाहारी धानीप्राणी (मारसूपियल​) है। यह ‘फ़ैसकोलार्कटिडाए’ (Phascolarctidae) […]

बाल कहानी

मास्टर जी का सबक

आज मास्टर जी कक्ष् मे हाजरी ले रहे थे,तभी भोलू का नाम देखकर ठिठक गए। चुप्पी साधते हुए- भोलू! नाम पुकारते हैं।कोई हाजरी के लिए खड़ा नही होता। पुनःभोलू का नाम जोर से लेते हैं। पर कक्षा में सन्नाटा। तभी पीछे से एक लड़का कहता है- “मास्टर जी! उसकी तबियत खराब थी,कुछ दिन शाला आया, […]

बाल कविता

चार बाल काव्यमय कथाएं- 5

आज अंतरराष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस है. इस अवसर प्रस्तुत है हमारी बाल पुस्तक- शृंखला “चित्रमय काव्यमय कहानियां” का पांचवां और अंतिम भाग. साथ ही आपके लिए है इस पुस्तक का लिंक भी- https://issuu.com/shiprajan/docs/baal_pustak_1 17. लालच बुरी बला है हड्डी एक बड़ी ले मुंह में, कुत्ता एक बहुत हर्षाया, कहीं अकेले में खाने की, मन में […]

बाल कविता शिशुगीत

डॉगी

राजा भैय्या का डॉगी हूं, प्यारा हूं नहीं बागी हूं, जैसे नाचें राजा भैय्या, मैं भी नाचूं ता-ता थैय्या. कान हैं मेरे हाथी जैसे, सिर पर मेरे ताज है, राजा भैय्या कहते सबको, इस पर मुझको नाज है.

बाल कविता शिशुगीत

हाथी

  छोटा-सा मैं हाथी हूं, बच्चों का मैं साथी हूं, जैसे गोलू-मोलू-रिंकू, मैं भी नाना का नाती हूं. आओ हम सब मिलकर खेलें, सवारी भी मैं कराऊंगा, तुम छोटे-से हो तो क्या मैं, झुककर पीठ पर चढ़ाऊंगा.

बाल कविता शिशुगीत

भोंदूराम

  हाथ में लेकर झोला-झंटा, घर से निकले भोंदूराम, पत्नी ने बोला था जाओ, ले आना दस मीठे आम. चैन से बैठना उसे सुहाता, कब भाता था उसको काम! अब तो भैया मजबूरी थी, पत्नी का आदेश ललाम. घर से निकले भोंदू भाई, वहां मिल गया तोंदू नाई, “कहो आज कहां जाते हो भाई, बहुत […]

बाल कहानी

रानी परी

आज बिरजू बहुत निराश मन लेकर बाजार से लौटा।जितनी मूर्तियाँ वह बेचने के लिए साथ ले गया था,वैसा का वैसा वापस ले आया।उसकी एक भी मूर्ति नही बिकी।इस कारण वह बहुत दुखी है। उसके बूढ़े पिता जी बिरजू को देखकर दबी जुबान में खाँसते हुए कहता है- “क्या हुआ बिरजू?” “आज तू इतना उदास क्यों […]

बाल कविता

एक कहानी बादल की

आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊं, एक कहानी बादल की, काले- पीले, रंग- बिरंगे, भूरे- काले बादल की। रूई से बन गगन में घूमें, अलग अलग धर रूप सलोने, भरा हुआ है कुछ में पानी, बात निराली बादल की। सोच रहे क्या कहां से लाता, इतना सारा ये पानी, धरती जिससे धानी बनती, प्यास बुझाते बादल की। […]