Category : बाल साहित्य

  • जल्दी सोना जल्दी जगना

    जल्दी सोना जल्दी जगना

    प्यारे चुन्न मुन्न जल्दी आओ, आकर जल्दी सो जाओ निंदिया रानी तुम्हें बुलाए, सपनों में तुम खो जाओ- जल्दी सोना जल्दी जगना, बात बहुत ही अच्छी है जल्दी सोने वाला चुन्न मुन्न, पाता चिजी अच्छी है...

  • दो का पहाड़ा

    दो का पहाड़ा

    दो एकम दो, आज्ञाकारी हो. दो दुनी चार, झटपट हो तैयार. दो तीया छः, सफ-साफ रह. दो चौके आठ, याद करो पाथ. दो पंजे दस, झगड़ा करो बस. दो छके बारह, काम करो ज्यादह. दो सते...

  • आओ बूझें एक पहेली

    आओ बूझें एक पहेली

    बच्चो बूझो एक पहेली, नाम बता दो उनका जो थे, नाम बड़ा और कद के छोटे, यही हमारी नई पहेली. आओ बूझें एक पहेली, लाल बहादुर नाम था उनका, शास्त्री जी वो कहलाते थे, यही हमारी...

  • खेल-खेल में

    खेल-खेल में

    खेल-खेल में सीख सकें हम गाना और बजाना, खेल-खेल में सीख सकें हम हंसना और मुस्काना, खेल-खेल में जाना हमने खेल ही से जीवन है, खेल-खेल में सीखा हमने मेल से अपनापन है.   खेल-खेल में...

  • हाथी और दर्जी

    हाथी और दर्जी

    एक था दर्जी, एक था हाथी, दोनों ही थे पक्के साथी, दर्जी करता खूब सिलाई, हाथी खाता खूब मिठाई.   हाथी आकर रोज रात को, कहता- ”दर्जी भाई नमस्ते”, दर्जी देता रोटी उसको, आपस में वो...

  • एकता में बल है

    एकता में बल है

    एक पेड़ पर रहता था, गौरैया का सुंदर जोड़ा, थोड़ा-सा वो समझदार था, अलबेला था थोड़ा-थोड़ा.   सोचा इक दिन गौरैया ने, बन जाता जो एक घोंसला, हम भी सुख से रह सकते तो, होता हमको...

  • चाहो जो देश का हित

    चाहो जो देश का हित

    मिट्टी की सौंधी खुशबू, जो गीत गा रही है, उस गीत से वतन की, मृदु गंध आ रही है. मिट्टी के इन कणों से, केवल बना न तन है, सुख-दुख मिले इसी से, इस से तरंगित...

  • गणतंत्रदिवस

    गणतंत्रदिवस

    गणतंत्रदिवस गणतंत्र दिवस का पावन पर्व इस बार पुनः आया है गांव गली और शहर में इसका ही उत्साह छाया है मच गई धूम तिरंगे की तीन रंगों के पन्नों की बच्चे मग्न हो घूम रहे...

  • आज के बच्चे कल के नेता

    आज के बच्चे कल के नेता

    आज के बच्चे कल के नेता, आगे बढ़ते जाएंगे देश की सेवा करने हेतु, मिलकर कदम बढ़ाएंगे-   मत समझो हम नन्हे बालक, हम हैं जलती चिनगारी हम ही गगन गुंजा सकते हैं, आज जो भरते...

  • वतन को नमन

    वतन को नमन

    तुझको नमन ऐ मेरे वतन, महिमा तेरी मैं क्या कहूं? तेरे गुणों का गान मैं, हरदम यों ही करती रहूं.   जन्मी यहीं, पली यहीं, खाया यहीं, खेली यहीं, तेरी शरण को छोड़कर, किसकी शरण मैं...