Category : बाल साहित्य

  • बालकहानी-  खिलखिलाता परिवार

    बालकहानी- खिलखिलाता परिवार

    नदी के किनारे-किनारे सुंदरम गाँव बसा हुआ था। ऊंचे ऊंचे पहाड़ ,बहता हुआ पानी,महकते फूल और हरियाली के बीच खिलखिलाता गाँव। जो वहाँ आता जाने का नाम न लेता। गांववालों को ही नहीं,बच्चों तक को को...


  • सबसे प्यारी मां

    सबसे प्यारी मां

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से) माता मेरी सबसे प्यारी, सारे जग से है वह न्यारी, दुनिया में प्यारी मां जैसा, कोई नहीं होता उपकारी. कई देवता मना-मनाकर, मां बालक को पाती है, आंख की पुतली से...


  • मक्कू को सबक

    मक्कू को सबक

    शरारती और चटोरा मक्कू चूहा इधर-उधर खाने की तलाश में फिर रहा था। उसे मिर्च-मसालेदार और दूध से बनी चीजें बहुत पसंद आती थीं। तभी पनीर की लुभावनी गंध उसकी नाक में घुसी और वह उसको...

  • साहसी बकरा

    साहसी बकरा

    चंचल नटखट भोलू बकरा, निर्भय फिरता-कूदता था, उछल-कूद करता था दिन भर, नहीं किसी से डरता था. एक बार पिकनिक करने को, जंगल में जाने की ठानी, मना किया था सब मित्रों ने, बात किसी की...

  • ग्रीष्मावकाश

    ग्रीष्मावकाश

    बन्द हुए स्कूल गली में बच्चे खेले खेल। आगे पीछे दौड़ रहे है छुक छुक करती रेल। भरी दुपहरी तपती धरती इनको नही सताती। जोर जोर आवाज लगाकर मम्मी रोज बुलाती। पल पल में झगड़े करते...


  • सूरज दादा

    सूरज दादा

    ”सूरज दादा, सूरज दादा, कहो चमकते कैसे हो? युगों-युगों से पलक न झपकी, फिर भी दमकते कैसे हो? कौन-सी गैस से मिले रोशनी, कौन-से पंप से देते हो? कौन तुम्हें ईंधन देता है, कैसे तुम ले...

  • गुड़िया की शादी !

    गुड़िया की शादी !

    रीचा बड़े ही प्यार से अपनी गुड़िया को सजा रही थी उसने कितने दिनो से शोर मचाया हुआ था कि वो अपनी गुड़िया की शादी प्रियंका के गुड्डे से सोमवार को करेगी। पापा और ममी के...