Category : बाल साहित्य


  • बाल कविता : मैं बेचारा….

    बाल कविता : मैं बेचारा….

    मैं बेचारा बेबस शिशु सबके हाथों की कठपुतली मैं वह करुं जो सब चाहें कोई न समझे मैं क्या चाहूँ। दादू का मै प्यारा पोता समझते हैं वह मुझको तोता दादा बोलो दादी बोलो खुद तोता...

  • गौरैया

    गौरैया

    ची ची करती गौरैया कभी घर के मूँडेरो तो कभी पेडो की डालियॉ चूँ चूँ कर दाना चूँगती फूदक-फूदक कर उडाने भरती छोटे-छोटे तिनके को चून अपना प्यारा नीड बनाती सूर्य अस्त होते ही चुपके से...



  • शिशुगीत – १५

    शिशुगीत – १५

    १. हिन्दी नववर्ष हैप्पी न्यू ईयर मत बोल शुभ नवसंवत्सर आया है चलकर स्वागत के पट खोल हमसब की अपनी पहचान भारतमाता का गुणगान चैत्र महीना आया है नयी उमंगे लाया है   २. गुड्डा मेरा...




  • शिशु गीत

    शिशु गीत

    1 खेल रहे थे मुन्नू राजा लेकर खूब खिलौने प्यारे दिखे दूर से चुन्नू भैया झट से लगे छुपाने सारे । 2 कुछ कच्चे ,कुछ पक्के लाए ख़रबूज़े कितने मन भाए लगीं डाँटने मुझको अम्माँ गमले...