Category : बाल साहित्य

  • मस्ती की पाठशाला : बाल नाटक

    मस्ती की पाठशाला : बाल नाटक

    सूत्रधार : काननवन में हँसी-खुशी और धमा-चैकड़ी का माहौल देखकर आस-पास के वनवासी हैरान हो जाते थे। सुबह से रात होने तक उल्लास और आनन्द की गूँज चारों और सुनाई देती थी। काननवन में खुशियों का...

  • बाल कहानी – ओढ़ ली रजाई

    बाल कहानी – ओढ़ ली रजाई

    वसंत आया। चींटी के बच्चों ने कहा-‘‘मम्मी! हम कब तक अंधेरे में रहेंगे? हमें दुनिया देखनी है।’’ चींटी ने डाॅटते हुए कहा-‘‘चुप रहो। अभी तुम बच्चे हो। जब बड़े हो जाओगे, तब जाना।’’ एक बच्चे ने...