Category : बाल साहित्य

  • शिशुगीत – 3

    शिशुगीत – 3

    १. चिड़ियाघर जब भी छुट्टी आती है हम चिड़ियाघर जाते हैं भालू, चीता, टाइगर देख हँसते हैं, मुस्काते हैं   २. कबूतर उजला भी चितकबरा भी कई रंगों में आता है करे गुटरगूँ दाने चुग मुझे...

  • शिशुगीत – 2

    शिशुगीत – 2

    १. गेंद रंग-बिरंगी आती है मेरा मन बहलाती है बल्ले, हॉकी, रैकेट से ढेरों खेल खिलाती है   २. पंखा फर-फर, फर-फर चलता है गरमी दूर भगाता है निंदियारानी को लाकर सारी रात सुलाता है  ...

  • बाल कविता : खेल तमाशा

    बाल कविता : खेल तमाशा

    बच्चों की फुलवारी सजी है हंसी सबके चेहरे पर खिली है हाथी राजा बीच में है विराजे खूब बज रहे हैं बाजे गाजे चुहिया नाच रही है ठुमक ठुमक तोता मैना गा रहे हैं सब बच्चों...

  • शिशुगीत – 1

    शिशुगीत – 1

    १. बंदर नटखट होता है बंदर उछले-कूदे इधर-उधर धूम मचा दे रस्ते में हँसी दिला दे सस्ते में खाता है रोटी, केले गुलदाने, गुड़ के ढेले २. भालू भालू मोटा, ताकतवर देख इसे लगता है डर...

  • बाल कविता : कम्प्यूटर

    बाल कविता : कम्प्यूटर

    आओ बच्चो आओ मेरे संग तुम मौज मनाओ मैं दूंगा तुम सबको ज्ञान एक बार जरा बटन दबाओ तुम देखो मुझमें फिल्म या गीत बना लो मुझको अपना मीत कराऊंगा तुमको दुनिया भर की सैर रखो...

  • बाल कहानी : ‘हर जीव जरूरी’

    बाल कहानी : ‘हर जीव जरूरी’

    जंबो हाथी ने चिंघाड़ते हुए कहा-‘‘आज फैसला होकर ही रहेगा। शेर सिंह ने आज फिर हिरनों के झुण्ड पर हमला बोल दिया। हमें अपना राजा बदलना ही होगा।’’ रंभा गाय बोली-‘‘चंपकवन में जीना मुहाल हो गया...

  • बाल कविता : बच्चे

    बाल कविता : बच्चे

    नटखट बच्चे प्यारे बच्चे कितने सच्चे कितने अच्छे बातों से अपनी सबको रिझाते मस्ती में खेलते मजे से खाते सबके दिलों में करते राज कल की फिक्र न डर कोई आज बात-बात में ये लड़ जाते...