Category : बाल साहित्य

  • पिता

    पिता

    गुस्से से मैं घर से चला आया, इतना गुस्सा था की गलती से पापा के जूते पहने गए। मैंआज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा। जब मोटर साइकिल नहीं...




  • बाल कहानी :  हीरा मोती

    बाल कहानी : हीरा मोती

    टिंकू स्कूल से घर जा रहा था । रास्ते में उसे एक दुबली–पतली भिखारिन मिली, जिसका पेट भूख के कारण अंदर घुस गया था। साड़ी भी जगह –जगह से फटी , मैली कुचैली। उसने अपनी कमजोर...

  • एक है पिंटू

    एक है पिंटू

    एक है पिंटू, बड़ा ही नटखट करता बहुत , हर वक़्त शरारत ! तुतलाती तुतलाती मिट्ठी बोली पर करे , नाक में जब देखो दम एक पिंटू , रहता सब पे भारी भारी कर शैतानियाँ ,...

  • परिक्षा का डर

    परिक्षा का डर

    परिक्षा का आया ऐसा मंजर की हर बच्चे को लग रहा अब डर बहुत कर ली मनमौजी भैया अब याद आ रही सरस्वती मैया कहे एकता बात ये सच्ची यही बात नही लगती अच्छी स्कूल बहुत...

  • रोज सवेरे आता सूरज

    रोज सवेरे आता सूरज

    रोज सवेरे आता सूरज धूप सुनहली लाता सूरज छुट्टी मिलती कभी न इसको दिन भर दौड़ लगाता सूरज ।   जाड़े के दिन भाता सूरज गरमी में झुलसाता सूरज पड़ती है जब रिमझिम बारिश बादल में...

  • कम्प्यूटर

    कम्प्यूटर

    बड़े काम का है कम्प्यूटर करता है यह काम हमेशा सब कुछ जल्दी से निपटाता चलता है अविराम हमेशा |   जो भी इसमें तुम ढूँढोगे पाओगे सब इसके अंदर भैया करते गणित इसी पर मैं...

  • बच्चों को हरषाते बादल

    बच्चों को हरषाते बादल

    उमड़-घुमड़ कर आते बादल पेड़ों को नहलाते बादल ठंडा-ठंडा पानी देकर बच्चों को हरषाते बादल ।   पूरे अंबर में छा जाते पानी इतना कैसे लाते ? अपने हाथों ताल-तलैया पलभर में भर जाते बादल |...