शिशुगीत

चन्द शिशु गीत

1 ‘क’ से कब तक पढूँ कबूतर आँगन आये कभी उतर कर समझ न पाऊँ क्यूँ उड़ जाए जब भी चाहा देखूँ छूकर । 2 हैं कितने अचरज की बातें कौन बनाता दिन और रातें फूल खिलाता इतने सारे देता तारों की सौगातें । 3 बड़ी सुहानी धूप खिली है किरन परी भी आ धमकी […]

बाल कविता

बाल गीत 1 : प्यारा भैया

भैया बहुत सताये मुझको चोटी खींच रुलाये मुझको गुड़िया मेरी छीने भागे पीछे खूब भगाये मुझको   मेरी पुस्तक रंग उसके हैं खेलें कैसे ढंग उसके हैं क्या खाना है क्या पहनाऊँ नये नये हुड़दंग उसके हैं   फिर भी तुमको क्या बतलाऊँ प्यार उसी पर आये मुझको मेरा प्यारा न्यारा भैया कभी दूर ना […]

बाल कहानी

सिर पर चाय : बाल कहानी

हर कोई लल्लन लोमड़ की चर्चा कर रहा है। लल्लन महानगर से जो आया है। एक तो वह तीन-चार दिन से लगातार साइकिल चला रहा है। साइकिल चलाते-चलाते ही खा रहा है। पानी पी रहा है। नहा रहा है। दाढ़ी बना रहा है। साइकिल पर ही अपनी दैनिक क्रियाएं कर रहा है। सभी लल्लन की […]

बाल कविता

बालगीत – ‘गर्मी गयी विदेश घूमने’

थककर बैठे कूलर दादा , कुछ दिन थोड़ा सुस्ताते हैं , सिर पर अपने हाथों को रख ,पंखे चाचा अलसाते हैं | फ्रिज बेचारी कुड़ कुड़ करती , ठंडी आहें छोड़ रही है , बर्फ पुरानी पड़े – पड़े , अपना ही माथा फोड़ रही है | बंद पड़ी डिब्बे मे कुल्फी , बड़ी बेबसी […]

बाल कहानी

‘फिर नहीं ललकारा’ : बाल कहानी

बैडी सियार को इन दिनों पहलवानी का शौक चढ़ा था। उसने अच्छी-खासी रकम देकर जंबों हाथी से पहलवान के गुर भी सीख लिए थे। जंबों हाथी ने एक दिन बैडी सियार से कहा-‘‘अब तुम अच्छे पहलवान बन गए हो। मैंने तुम्हें खास और बड़े सभी दांवपेंच सीखा दिए हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई तुम्हें आसानी से पटकनी […]

अन्य बाल साहित्य

मस्ती की पाठशाला : बाल नाटक

सूत्रधार : काननवन में हँसी-खुशी और धमा-चैकड़ी का माहौल देखकर आस-पास के वनवासी हैरान हो जाते थे। सुबह से रात होने तक उल्लास और आनन्द की गूँज चारों और सुनाई देती थी। काननवन में खुशियों का स्कूल जो खुल गया था। स्कूल जाने वालों के व्यवहार में तेजी से बदलाव दिखाई देने लगे थे। सभी […]

बाल कहानी

बाल कहानी – ओढ़ ली रजाई

वसंत आया। चींटी के बच्चों ने कहा-‘‘मम्मी! हम कब तक अंधेरे में रहेंगे? हमें दुनिया देखनी है।’’ चींटी ने डाॅटते हुए कहा-‘‘चुप रहो। अभी तुम बच्चे हो। जब बड़े हो जाओगे, तब जाना।’’ एक बच्चे ने पूछा-‘‘माँ। हम बड़े कब होंगे?’’ चींटी ने कहा-‘‘अभी सो जाओ।’’ चींटी लोरी सुनाने लगी। बच्चे लोरी सुनकर सो गए। […]

बाल कविता

बालगीत – ‘ जाग रहा है चौकीदार’

कहता सदा रहो होशियार , जाग रहा है चौकीदार | असमय कभी नही सोना , साहस कभी नहीं खोना हरदम सावधान रहना , सोते और जगते रहना लगा रहा है यही पुकार , जाग रहा है चौकीदार | सर्दी – गर्मी या तूफान , सदा खड़ा है सीना तान कर्तव्यों पर ही अविचल , देख […]

बाल कहानी

बाल कहानी : ‘जिम्मेदारी हम सभी की’

जंबो हाथी नल के नीचे नहा रहा था। चूंचूं चूहा चिल्लाया-‘‘अरे! अरे! जंबो दादा। यह क्या कर रहे हो?’’ जंबो हाथी ने चूंचूं चूहे को घूर कर देखा। फिर नहाते हुए बोला-‘‘देख नहीं रहा है। नहा रहा हूं। दर्जनों बाल्टी पानी डाल चुका हूं। गर्मी है कि लगती ही जा रही है। ’’ ‘‘यही तो […]

बाल कहानी

बाल कहानी : वैसे बड़ा मज़ा आया

एक नन्ही सी चींटी थी। आज वह घर से बाहर निकली थी। एक तितली ने चींटी का रास्ता रोक लिया। पूछा-‘‘अरे! छुटकी कहाँ चली?’’ चींटी ने तुनक कर जवाब दिया-‘‘तुमसे मतलब?’’ तितली को हँसी आ गई। तितली ने जवाब दिया-‘‘मतलब ये कि तुम अकेली हो!’’ चींटी ने अकड़ते हुए कहा-‘‘अकेली हूं तो क्या हुआ। सूरज […]