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जन्मदिन के अमृतोत्सव की बधाई, कुलवंत : गुरमैल

प्रिय कुलवंत, ”मेहरबां लिखूं हसीना लिखूं या दिलरुबा लिखूं हैरान हूँ कि आपको इस खत में क्या लिखूं!” अब यह लिखना कि तुम मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर नाराज़ न होना, इस उम्र में हंसी की बात नहीं होगी तो और क्या होगी! क्योंकि वह ज़माना बहुत पीछे छूट गया और ये बातें तो अब हमारे […]

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उल्लू

अक्सर हम जब मोबाइल खोलते हैं, तो उसमें स्क्रीन पर अच्छी-अच्छी बातें लिखी होती हैं, पर हम (मैं अपनी बात कर रही हूं) इतनी जल्दी में होते हैं, मानो तूफान मेल छूट रही हो और आगे बढ़ जाते हैं. एक बार ऐसे ही हमारी नजर पड़ गई. उस दिन अभियन्ता दिवस (इंजीनियर्स डे) था. 15 […]

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विचारों का दर्पण –दृष्टिकोण

  विचारों का दर्पण-दृष्टिकोण किसी भी दृश्य की सुन्दरता देखने वाले की दृष्टि की पवित्रता पर निर्भर करती हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो क्यों कोई व्यक्ति किसी दृश्य को घृणा की दृष्टि से देखता है जबकि वहीं दृश्य दूसरा व्यक्ति मनोहारी दृष्टि से देखता हुआ उसके आनन्द की अनुभूति करता है सुंदरता और कुरूपता […]

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कीर्तिमानों के शिखर पर – लीला तिवानी जी

सभी को सादर अभिवादन ! एक बार फिर एक विशेष दिन के रूप में 10 सितम्बर ने दस्तक दी है। हम सबके जीवन में कुछ विशेष दिन कुदरत ने स्वयं निर्धारित किये होते हैं।  जीवन में घटित विशेष घटनाओं की याद स्वरूप हम इन्हें निर्बाध स्मरण करते रहते हैं और बना लेते हैं इस दिन को […]

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तालिबान का क्रूर शासन

“”तालिबान का क्रूर शासन”” यह बिल्कुल सच है कि आज अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है वह मानवीय त्रासदी से कम कुछ भी नहीं है। 25 साल बाद अफगानिस्तान में तालिबान ने फिर से एंट्री की है और वो भी अमेरिका जैसी सुपर पावर की आंखों के सामने और अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान […]

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गुरमैल भाई की सफलता का डंका

आज का ब्लॉग एक विशेष ब्लॉग है. विशेष इस मायने में कि आज के ब्लॉग की ब्लॉग संख्या है- 2882 यानी उल्टा-सीधा एक समान. जिधर से मर्जी हो पढ़ो, एक समान – 2882  यह ब्लॉग हमने गुरमैल भाई को समर्पित किया है. गुरमैल भाई लगातार सात साल से हमारे ब्लॉग के साथ जुड़े हुए हैं. गुरमैल भाई के बारे में […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

फलित ज्योतिष पर पौराणिक गुटर-गूँ

प्रसिद्ध योगगुरु बाबा रामदेव ने बयान दिया कि “ज्योतिष विद्या ने क्यों नहीं कोरोना काल के बारे में पहले जानकारी दी। सारे मुहूर्त भगवान ने बना रखे हैं। ज्योतिषी काल, घड़ी, मुहूर्त के नाम पर बहकाते रहते हैं। बैठे-बैठे ही किस्मत बनाते हैं। किसी ज्योतिष ने यह नहीं बताया कि कोरोना आने वाला है।…” बाबा […]

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कोविड महामारी में सामाजिक मूल्यों का पतन

कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर में उत्पन्न हुआ और देखते देखते पूरे विश्व में एक माहामारी बनकर फैल गया ,विश्व का कोई भी देश इस महामारी से अछूता न रहा ,लाखों लोग असमय काल-कवलित हो गये ।पहली लहर बीती ,विश्व के कई देश दूसरी लहर से जूझ रहे हैं ,तो कई देश तीसरी लहर […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

कोरोना: मानव नस्ल ख़त्म करने की पहल

बहुत हो चुका कोरोना का रोना। कोई कह रहा मैनें इसे हरा दिया, कोई नए नए इलाज बता रहा।  कोई इसके लिए चीन, कोई मांस खाने की बात बता रहा। कोई मरकज कोई हरिद्वार कुम्भ को जिम्मेवार बता रहा।  कोई मास्क पहनने, कोई न पहनने की दलील दे रहा, कोई जड़ों का नहीं पत्तों का […]

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गरीबी के रंग

    होली पर शोरगुल करती झोंपड़-पट्टी के बच्चों की टोली घूमती-घूमती शहर के ऐसे इलाके में आ पहुंची जहां भव्य सुन्दर कोठीनुमा मकान थे जिनकी बालकनियों और छतों से निरन्तर रंगों की बरसात हो रही थी और रंग-भरे गुब्बारे फेंके जा रहे थे। तरह-तरह की पिचकारियों से रंगों की बौछारों ने खूबसूरत समा बांध […]