Category : ब्लॉग/परिचर्चा


  • सदाबहार काव्यालय-35

    सदाबहार काव्यालय-35

    कविता   लिफ़्ट का संदेशा   लिफ़्ट हमें लिफ़्ट देती है साथ ही देती है एक संदेशा कि ”भला” करने में अपना भी ”लाभ” छिपा होता है क्योंकि ”भला” शब्द का उल्टा शब्द ”लाभ” ही होता...


  • सदाबहार काव्यालय-31

    सदाबहार काव्यालय-31

    कविता मैं पतंग बन जाऊं   मेरा मन है कि मैं पतंग बन जाऊं मकर संक्रान्ति और पतंगोत्सव की पावन वेला पर सूर्यदेवता की साक्षी में पतंग की तरह नील गगन की नीलिमा में लहराऊं मैं...

  • सदाबहार काव्यालय-29

    सदाबहार काव्यालय-29

    कविता जाग युवा जाग   जाग युवा जाग कि तेरे जागने से देश जगेगा देश जगेगा और हर क्षेत्र में विकास करेगा, भ्रष्टाचार और दुराचार का अंधियारा छंटेगा, भारतीय संस्कृति और सभ्यता का सूरज सारे संसार को...

  • काव्य-रचनाओं का मेला

    काव्य-रचनाओं का मेला

    आज सदाबहार काव्यालय में काव्य-रचनाओं का मेला लगा हुआ था. सभी काव्य रचनाएं खूब सज-धजकर आई थीं. गुलाबी प्लाज़ो-सूट में सजी गज़ल ‘तभी कुछ आएगा मज़ा’ अपने रचयिता राजीव गुप्ता के गुण गाते नहीं थकती थी....

  • सदाबहार काव्यालय-27

    सदाबहार काव्यालय-27

    कविता तू ज़ीरो बनके देख ज़रा   तू ज़ीरो बनके देख ज़रा ज़ीरो को कहीं से भी देखो ज़ीरो ही नज़र वो आता है, ज़ीरो है ऐसा अंक जिसे घटना-बढ़ना नहीं आता है, तू उसकी महिमा...

  • सदाबहार काव्यालय-26

    सदाबहार काव्यालय-26

    गीत   प्रेम का गुलशन महक रहा है   मन का मधुबन चहक रहा है प्रेम का गुलशन महक रहा है-   चारों ओर हैं आज बहारें फूल-ही-फूल हैं जिधर निहारें सूरज दमके, चंदा चमके तारों...


  • सदाबहार काव्यालय-25

    सदाबहार काव्यालय-25

    गीत   मन के दीप जला दे भगवन   दीप बहुत-से जला चुकी हूं, हुआ न दूर अंधेरा, जीवन बीत रहा है निशिदिन, करके तेरा-मेरा। कृपादृष्टि जब हो तेरी तब, तू-ही-तू दिख जाए, मन के दीप...