Category : लेख


  • व्यंग्य- चेला चंटाल

    व्यंग्य- चेला चंटाल

    अक्सर गुरु घंटाल की चर्चा होती है. मैंने विचार किया कि अगर गुरु घंटाल हो सकता है तो चेला चंटाल क्यों नहीं. लखनऊ के सनकी जी ने लिखा है- गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय बलिहारी...

  • सत्य की जय हो

    सत्य की जय हो

    “सत्य की जय हो” विनम्रता से सुख को भोगा जा सकता है। धैर्य से दुख को मात दिया जा सकता है। अध्ययन करके विद्या अर्जित की जा सकती है। सम्मान देकर सम्मान पाया जा सकता है।...


  • धर्म ,जाति और अब वंशवाद

    धर्म ,जाति और अब वंशवाद

    इस देश को अब तक सबसे ज्यादे नुकसान पहले ‘धर्मांधता ‘ने पहुँचाया फिर ‘जातिवाद’ ने और अब आज की ‘सिद्धांत विहीन’ राजनीति में ‘सर्वाधिक ‘नुकसान यहाँ नेता का बेटा ही उसका उत्तराधिकारी बनेगा की ‘वंशवादी’ तुच्छ...



  • सात्विक भोजन क्या है?

    सात्विक भोजन क्या है?

    प्राय: मैं अपने रोगियों को सात्विक भोजन करने की सलाह देता हूँ। वे केवल यही समझते हैं कि सात्विक भोजन अर्थात् शाकाहारी भोजन। लेकिन यह बात पूरी तरह सत्य नहीं है। हर शाकाहारी भोजन सात्विक नहीं...

  • आलोचना की प्रासंगिकता

    आलोचना की प्रासंगिकता

    आलोचना, समीक्षा या समालोचना का एक ही आशय है, समुचित तरीके से देखना जिसके लिए अंग्रेजी में ‘क्रिटिसिज़्म’ शब्द का प्रयोग होता है। साहित्य में इसकी शुरुआत रीतिकाल में हो गई थी किन्तु सही मायने में...