Category : लेख





  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    एक अवधी ग़ज़ल लिखने का प्रयास 2122 1212 22 कोई  पक्का  मकान  थोरै   है । दिन दशा कुछ ठिकान थोरै है ।। सिर्फ कुर्सी मा जान है अटकी । ऊ दलित का मुहान थोरै है...





  • मैं वेश्या हूँ

    मैं वेश्या हूँ

    हाँ ! तुमने ठीक कहा ! मैं वैश्या हूँ । लेकिन क्या कभी तुमने यह भी सोचा है कि हम लड़कियाँ वेश्या क्यों बनती हैं ? नहीं न ! और तुम मर्द जात ये सोचोगे भी...