इतिहास

ग़ज़ल

बात दिल की बता गईं आँखें ख़्वाब कितने दिखा गईं आँखें।   दिल में जब भी ग़ुबार उठ्ठा है आँसुओं से नहा गईं आँखें ।   याद माज़ी की जब भी आई है हँसते दिल को रूला गईं आँखें ।   आ गया सच भी सामने अब तो रूख़ से पर्दा हटा गईं आँखें । […]

इतिहास

ग़ज़ल

मत दिखा आँखों को सपना ज़िंदगी खो गया सारा ही मौका ज़िंदगी ।   जानती हूँ तेरे हर्बे मैं सभी अब मुझे देना न धोखा ज़िंदगी।   ये हकीक़त भी सभी को है पता  , इक नया हर दिन है पर्चा ज़िंदगी।   हर इबारत में वही है दास्ताँ, इश्क़ से अश्कों का रिश्ता ज़िंदगी […]

इतिहास

ग़ज़ल

ज़िंदगी, तुझको तमाशा नहीं होने देते अब किसी खौफ़ का साया नहीं होने देते ।   आइने सच की गवाही ही सदा देते हैं मेरे क़िरदार को हल्का नहीं होने देते ।   वे जो नफ़रत की शरर बनके यहाँ फैले हैं वे कभी अपनों से रिश्ता नहीं होने देते ।   चंद सिक्कों पे […]

इतिहास

ग़ज़ल

ज़रा-ज़रा -सा सुकूँ दिल को जब भी आता है मेरे ख़याल का पैकर ही मुस्कुराता है ।   अगर है इश्क़ तो दुश्वारियों का डर कैसा गुहर भी मुफ़्त कहाँ कोई शख़्स  पाता है ।   जिसे कुई भी सलीका नहीं है जीने का , शुऊर जीने का सबको वही बताता है ।   हयात […]

इतिहास

ग़ज़ल

फ़िज़ा दिल की रंगत उड़ा ले गई, गई रात मेरी बला ले गयी ।   बहुत आरज़ू थी कि बरसे घटा, हवा बादलों को उड़ा ले गयी ।   जहाँ चाँद तारों की चाहत बढ़ी मुझे मेरी मिट्टी बुला ले गयी।   निगाहों में जाने है कैसी कशिश मेरे दिल को वो तो लुभा ले […]

इतिहास

ग़ज़ल

रहनुमा बनके जो मंज़िल का पता देते हैं राह काँटों भरी वो मुझको दिखा देते हैं   कैसे कर लूँ मैं यकीं उनकी सदाकत पे अब कितने किरदार बदल के वो दग़ा देते हैं   मेरी चाहत का असर उन पे कहाँ होता है वो तो हर बात पे मुझको ही रुला देते हैं   […]

इतिहास

मौत से आँखें मिलाकर देखिए ज़िंदगी को फिर हँसाकर देखिए   हो ही जायेगा कोई अपना यहाँ प्यार तो सब पर लुटाकर देखिए   आँसुओं से क्यों है तर ये ज़िंदगी इश्क़ में अब गुनगुनाकर देखिए ।   ढूँढते हो चाँद को क्यों हर जगह मुख से ये परदा हटाकर देखिए ।   फैल जाएगी […]

इतिहास

ग़ज़ल

अपना दिखाई दे न तो रिश्ता दिखाई दे , हर शख़्स अब तो भीड़ में तन्हा दिखाई दे ।   कहते हैं जिसको प्यार वो दिखता ही अब नहीं , इनसान अब तो ज़िस्म का भूखा दिखाई दे ।   उनकी खुशी के वास्ते हम दूर हो गए उनको हमारी बात में धोखा दिखाई दे […]

इतिहास

ग़ज़ल

बात दिल की सुनी नहीं जाती बेरुख़ी अब सही नहीं जाती ।।     याद आती हैं तेरी बातें जब। आँख से फिर नमी नहीं जाती ।।   मिल गई है मुझे खुशी सारी। फिर भी तेरी कमी नहीं जाती ।।   रूह में अब तो बस गया है तू चाह तेरी कभी नहीं जाती […]

इतिहास

ग़ज़ल

इस अंधेरे के घर को तू वीरान कर नूर बनकर ज़माने पे एहसान कर।   बात बनती नज़र आएगी फिर यहाँ अपनी शतों को थोडा तू आसान कर।   अश्क आाँखों में आकर करें चुग़लियाँ अब छुपाने का इनको तू सामान कर।   अनुभवों को समेटे पडे खाट पर, इन बुज़ुर्गों का थोडा तो सम्मान […]