Category : लेख

  • पिया की पाती

    पिया की पाती

    पाती प्रिय के नेह की आंखों में आँसू भर जाती है पंथ तुम्हारा निहारकर धूल मुझे दे जाती है । प्रियवर तुम्हारा प्रेम निमंत्रण पढ़कर पलकें मेरी झुक जाती हैं , जैसे मुरझाये हृदय में पीर...



  • ******गजल******

    ******गजल******

    लौट आओ कि शाम ढल न जायें ! वक्त है मुकम्मल बदल न जाये !! काटी है राते हमने करवट बदल कर! इन्तजार मे तेरे दम निकल न जाये!! भूल पाना मुमकिन नही अब तुमको! टूटकर...


  • पागल कौन?

    पागल कौन?

    अरे ! यार रजत “पता नहीं कब तक यूं ही जन्नत में हमारे पत्थरबाजी चलती रहेगी ,पता नहीं ऐसा क्या है वहां पर कि लोग कंप्यूटर और किताब के बजाए पत्थर उठा रहे हैं !! क्या...