लेख

होगा संकट में जीवन

होगा संकट में जीवन न कोई प्रलय आयेगी! न कोई सुनामी आयेगी! किन्तु एक दिन ओ जरूर आयेगा जिस दिन मनुष्य अपने ही विछाये हुये जाल में फंस कर पंख फड़फड़ाने लगेगा और उसे बचाने वाला कोई नहीं होगा। वर्तमान समय के मनुष्य की जरूरतें बहुत तेजी से बढ़ रहीं हैं बिना सोंचे समझे नये […]

लेख

कोरोना के कर्मवीर:-निर्मला पासवान

कोरोना के कर्मवीर: -निर्मला पासवान निर्मला पासवान पत्नी श्री संजय कुमार 2011 से एन एम सी एच अस्पताल में कार्य कर रहे हैं। जो कोटा के विज्ञान नगर की निवासी हैं। कोविद काल में अपने स्लावों में कई परेशानियों के बावजूद भी पूरी तरह से पांच बार अलग अलग समय पर सेवाए दी है और […]

लेख

कोरोना के कर्मवीर:-रवि वर्मा

   कोरोना के कर्मवीर:-रवि वर्मा कोरोना बीर रवि वर्मा रवि वर्मा पिता श्री जगदीश शाक्यवार मां निर्मला शाक्यवाल बालाकुंड के निवासी हैं चिकित्सा विभाग में इनकी सेवाएं 2011 झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से आरंभ हुई है जहां नर्स के पद पर रहते हुए मरीजों की सेवा का कार्य किया है वर्तमान अस्पताल में पिछले 4 वर्षों […]

भाषा-साहित्य लेख

भारत में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और आगे इसका भविष्य

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, यह तो हर व्यक्ति जानता ही होगा! मध्यांतर में इसने अपना अस्तित्व ही खो दिया था। आज फिर से कुछ लोगों के अथक परिश्रम से इसको सर उठाकर चलने का मौक़ा मिला है। हिंदी अगर आगे बढ़ी है और बढ़ रही है तो वो साहित्य व लेखन के माध्यम से। इसको […]

स्वास्थ्य

बाल मन पर पड़ता प्रभाव

गाँधी जी की जयंती दो अक्टूबर करीब आने को है, किताब उठाया बापू की जीवनी पढ़ने लगा, पढ़ने पर पाया की मोहनदास नामक बालक बचपन में सत्यवादी राजा हरिचन्द्र नामक चलचित्र देखने पर पुरे जीवन सत्य बोलने का प्रण कर लेता हैं और सत्य के मार्ग पर आजीवन चल पड़ता है फिर विचार आता है […]

सामाजिक

यह कैसी सेवाभाव ?

मैंने ऐसी कथित मंगलव्रती और गुरुवारव्रती महिला को जानता हूँ, जो सास-ससुर को भूल रंगून से आये बैलून वाले पिया को और उनसे उत्पन्न संतान के सिवाय और किसी के बारे में नहीं सोचती है, वे भीखमंगे को दान नहीं करेगी, तो रिक्शेवाले से किराये देने में उलझेगी ! यह कैसी आस्तिकता है, भाई ! […]

भाषा-साहित्य

खरी-खोटी सुननेवाले खरे सर !

खरी-खोटी सुनानेवाले कवि-पत्रकार विष्णु खरे ! पत्रकार के रूप में विष्णु खरे ने शुरू किया कैरियर ! यह जो जरिया चुना था, उस समय यह इसके लिए नाकाफी रहा। जीवन भर हिन्दी साहित्य की सेवा में जुटे रहने वाले एक व्यक्ति की अपनी अलग पहचान है। विष्णु खरे की प्रतिष्ठा समकालीन सृजन परिदृश्य में एक […]

सामाजिक

फ़ैशनेबल उपवास

यह कैसी आस्तिकता है, भाई ! सावन भर मुर्गी-मछली या लहसून-प्याज नहीं खाये, किन्तु जैसे ही सावन पूर्णिमा खत्म हुई कि अगले दिन लोग इनसब चीजों पर ऐसे टूट पड़ते हैं, जैसे- घाव को देखकर मक्खी व एक माह तक इन सब चीजों को  किसी तरह बर्दाश्त किए हुए थे ! हद हो गई, भाई […]

इतिहास

हाइकू

हाइकू ******** सुनहरा हो जीवन हर पल, सभी चाहते। ********** सब चाहते जीवन सुनहरा, हो हर पल। ********* जन जन की सुनहरे पलों की, ही चाहत है। ********* डर सबका ये सुनहरे पल, कब खो जायें। *********** विश्वास नहीं ये सुनहरा पल, चला भी गया। ************ भरोसा मुझे मेरा भी सुनहरा पल आयेगा। ********** खुशी […]

लेख

सोशल मीडिया विरोधी पोस्ट

शीर्षक “सोशल मीडिया विरोधी पोस्ट” आज हम लोग जिस युग में हम श्वास ले रहें हैं। यह युग डिजिटल का युग है। और डिजिटल युग में लोग अपने जीवन के पल पल की क्रिया विधि को सोशल मीडिया पर अपडेट करते रहते हैं । इसी के साथ लोग अपने आस्था से जुड़ी तस्वीरें या विचार […]