Category : लेख


  • *** संस्कार और दिखावा ***

    *** संस्कार और दिखावा ***

    कल सपने में देखा-गुरुवर पत्नी सहित पधारे. “धन्यभाग्य हैं” कहकर हमने उनके पाँव पखारे. वे बोले-खुश रहे सदा तू बस इतना बतला दे- यों ही चरण कभी क्या धोये तूने मात-पिता के? यह सुनते ही नींद...






  • तेरा खत 

    तेरा खत 

    तेरा खत  कासिद भी आया था ,खत लेकर रोता हुआ…. मैं खोलकर पड़ने की ,ज़ुर्रत ना  कर सका   वह रात का सपना वह दिल के मेरे वहम  सब कुछ मेरे ज़हन में जैसे घर कर गया ...

  • सम्मान

    सम्मान

    आज सुबह-सुबह हमने https://www.sadabaharcalendar.com/ से जो अनमोल वचन निकाला, वह निकला-   पुस्तक या रचना में लेखक की आत्मा निवास करती है. पुस्तक या रचना का सम्मान लेखक का सम्मान है.   इससे हमें लगा कि...