इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आर्यसमाज ही ईश्वर प्रवृत्त ज्ञान चार वेदों का प्रतिनिधि व प्रचारक है

ओ३म् –आर्यसमाज स्थापना दिवस पर- आर्यसमाज की स्थापना वेदों के महान विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में की थी। ऋषि दयानन्द के माध्यम से ही देश के अधिकांश लोगों को इस तथ्य का ज्ञान हुआ कि वेदों का ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर से प्राप्त हुआ। वेदों में […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक

गाय आदि पशुओं की हत्या का अभिशाप देश को भोगना पड़ता है

ओ३म् संसार में मनुष्य मुख्यतः दो प्रकार के कर्म करता है। यह कर्म पाप व पुण्य कहलाते हैं। पुण्य कर्म सभी मनुष्यों के लिये करणीय होते हैं तथा पाप कर्म उपेक्षणीय व अकरणीय होते हैं। पाप कर्म करने से मनुष्य निन्दा का पात्र बनता है और पुण्य कर्मों को करने से यशस्वी व प्रशंसा का […]

इतिहास कविता पद्य साहित्य

संभावना

जिस तरह दिनकर सुबह को निकलकर शाम को विलीन हो जाता है फिर दूसरे सुनहरे कल के लिए उसी तरह/ मुझे संभावना है कि इंसान भी आज नहीं तो कल अवश्य ही बदलेंगे अपने सुनहरे भविष्य के लिए।।     मनोज बाथरे चीचली

भाषा-साहित्य

न्यायपालिका और हिन्दी : अवरोध और चुनौतियाँ

लोकतांत्रिक सरकार के तीन अंग हैं = विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। इनमें न्यायपालिका की अहम एवं सशक्त भूमिका रहती है। लोकतंत्र की सफलता मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका पर आधारित होती है। इस के लिए सजग और सतर्क रूप से न्याय व्यवस्था का विकास करने की आवश्यकता होती है। न्यायपालिका की सहायता के लिए जागरूक विधायिका […]

लेख सामाजिक

दूरदर्शन

# दूरदर्शन लॉकडाउन अवधि के प्रथम दो सप्ताह में ‘दूरदर्शन’ का राष्ट्रीय चैनल सबसे अधिक देखा जाने भारतीय चैनल है । केवल बीस दिन पहले कोई यह बात कहता तो यह बात लगभग असंभव लगती। देश में संचार क्रांति और निजी चैनलों के आने के बाद से ही दूरदर्शन की दर्शक संख्या में निरंतर कमी […]

इतिहास कविता पद्य साहित्य

लहराते विचार

विचारों के अथाह सागर में लहराते हुए विचार अपने लिए कुछ अरमानों के संग संसार में सफ़र पर निकलते हैं वो सोचते हैं हमें कहीं ठहराव का महासागर मिल जाए।। मनोज बाथरे चीचली

राजनीति

धर्म और मज़हब का चश्मा उतार कर देखो

“मजहब के नाम पर लोगों को यूं ना बरगलाओ इंसान को आपस में एकदूसरे का दुश्मन ना बनाओ मजहब कमजोर नहीं इतना जो जरूरत पड़े तुम्हारी, बस तुम देशहित में खुद एक अच्छा इंसान बनकर, इंसानियत के प्रति कुछ तो जिम्मेदारी निभाओ।।” आज सम्पूर्ण विश्व एकजुट होकर वैश्विक आपदा बन चुके कोरोना वायरस से अघोषित […]

इतिहास कविता पद्य साहित्य

पहचान

मैं क्या हूँ? मेरी पहचान क्या है अपने ज़हन में यह प्रश्न लिए घूमता हुआ इंसान इस/ प्रश्न का उत्तर दर-ब-दर तलाशता फिरता है लेकिन / उसका उत्तर उसको क्या पता जिससे वह पूछ रहा है उसका / उत्तर तो सिर्फ ये हैं कि / इंसान अपनी पहचान स्वयं बनायें।। मनोज बाथरे चीचली जिला नरसिंहपुर […]

सामाजिक

जीवन में समझौता का महत्व

मनुष्य का जीवन शायद समझौता के लिए ही बना जिसे हर कदम पर करना ही होता है चाहे वह प्रकृति हो अथवा दैनिक जीवन रिश्ते कैरियर या देश विदेश की बातें बिना समझौता कुछ भी नहीं। प्रकृति-आये दिन हमलोगो को प्रकृति से समझौता करना होता है जैसे बहुत जरूरी काम हो और आंधी आ जाय […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

पैदल अरब देशों में जाकर आर्यसमाज स्थापित करने वाले ऋषिभक्त पंडित रुचिराम आर्योपदेशक

ओ३म् आर्यसमाज में आर्योपदेशक पं. रुचिराम जी ऐसे ऋषिभक्त प्रचारक हुए हैं जिन्होंने पैदल ही अरब देशों में जाकर वहां जो देखा, सुना व अनुभव किया, उसका सजीव चित्रण अपनी एक पुस्तक ‘अरब में मेरे सात साल’ में किया है। हमारे मन में विचार आया कि हम इनके बारे में कुछ जानकारी प्रस्तुत करें। हमारी […]