धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मृत्यु बनाम अमरत्व

‘मृत्यु अटल सत्य है ‘यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य और सारतत्व है।अगर कोई किसी को ‘अमरता ‘का वरदान देने का ढोंग रचता है, तो इससे महा झूठ और छद्म कुछ हो ही नहीं सकता ! चाहे वह महाभारतकाल हो, रामायण काल हो या कोई भी कालखण्ड हो, कितनी बिडंबना है कि अश्वत्थामा को ‘अमरता […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा लेख स्वास्थ्य

श्रावणी का वैदिक स्वरूप

श्रावणी का वैदिक स्वरूप प्रियांशु सेठ श्रावण माह अज्ञानियों के लिए ज्ञान का संदेशवाहक बनकर आता है और जनसामान्य को कल्याणपथ पर चलने की ओर प्रेरित करता है। गर्मी के बाद जब वर्षा होती है, तो मानव चित्त वातावरण के अनुकूल होने से शान्त रहता है तथा मन प्रसन्न रहता है। श्रावणी का उत्सव इसी […]

इतिहास

कोरोना के कर्मवीर : रीना सुमन

रीना सुमन पत्नी श्री आत्मा राम सुमन पिता राजेन्द्र कुमार सुमन व माँ स्वर्गीय राम कन्या सुमन कोटा की निवासी है। रीना सुमन ने कोरोना के सम्पर्क में आये मरीजो की सेवा से इतर जगरूक करने का कार्य भी किया जो ये ड्यूटी के बाद मोबाइल के ज़रिए करती । क्योंकि कोविड-19 में ड्यूटी करते […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हमारा यह संसार तीन अनादि व नित्य सत्ताओं की देन है

ओ३म् हमारा यह जगत सूर्य, चन्द्र, पृथिवी सहित अनेकों ग्रह व उपग्रहों से युक्त है। इस समस्त सृष्टि में हमारे सौर्य मण्डल के समान अनेक व अनन्त सौर्य मण्डल हैं। इतने विशाल जगत् को देखकर जिज्ञासा होती है कि यह संसार किससे, क्यों, कैसे व कब अस्तित्व में आया और इसका भविष्य क्या है? हमारे […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मृतक श्राद्ध का विचार वैदिक सिद्धान्त पुनर्जन्म के विरुद्ध है

ओ३म् महाभारत युद्ध के बाद वेदों का अध्ययन-अध्यापन अवरुद्ध होने के कारण देश में अनेकानेक अन्धविश्वास एवं कुरीतियां उत्पन्न र्हुइं। सृष्टि के आरम्भ ईश्वर से प्राप्त वैदिक सत्य सिद्धान्तों को विस्मृत कर दिया गया तथा अज्ञानतापूर्ण नई नई परम्पराओं का आरम्भ हुआ। ऐसी ही एक परम्परा मृतक श्राद्ध की है। मृतक श्राद्ध में यह कल्पना […]

विज्ञान

एलियंस हमारे लिए आज भी चिंतनीय प्रश्न है 

अमेरिका की धरती पर भारतीय यंत्र बना दिखाई दिया जिसकी लंबाई किलोमीटर में थी। संबंधी खबरअखबारों में पढ़ने को आती रही।देश विदेश में कई आश्चर्यजनक निर्मित आकृतियां, मंदिर आदि बने हुए देखे गए।जोकि इंसानों द्धारा निर्मित नहीं हो सकते।ये बाहरी दुनिया एलियंस द्धारा निर्मित हो सकते है।शायद इन्हे निर्मित करने का उद्देश्य धरती पर पहचान […]

भाषा-साहित्य

वीएस नायपॉल भारतहितैषी नहीं थे !

भारतीय मूल के ‘वी एस नायपॉल’ भारत के हितैषी नहीं थे ! जब नीरद सी. चौधुरी का देहावसान हुआ था, तब इसे अंतिम भारतीय अंग्रेज कहा गया था, वी. एस. नायपॉल भी अपने को अंग्रेज समझते थे, क्योंकि 2001 में जब उसे साहित्य का ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला, तो भारतीय मीडिया ने सूचना प्रसारित किया, “भारतीय […]

इतिहास

7 अगस्त : महापुरुष-द्वय की पुण्यतिथि

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता भी थे, तो लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, वे दुनिया के पहले ऐसे गीतकार हैं, जिन्होंने तीन देशों- भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश के राष्ट्रगान को लिखा। ऐसे महान व्यक्ति रवीन्द्रनाथ टैगोर को उनकी पुण्यतिथि (7 अगस्त) पर उन्हें सहित उनके तमाम प्रशंसकों को सादर सुमन ! […]

इतिहास

संस्कृत के दुश्मन कौन ?

मेरा धर्म ‘धर्मांध’ नहीं है, अपितु व्यक्तिश: पीड़ा को जानना भी है ! सिर्फ सवर्ण मिलकर ही सनातन धर्म नहीं बनाते हैं, अपितु इनमें कई जातियाँ हैं ! जब कथित सवर्ण कथित शूद्र को संस्कृत पढ़ने नहीं देंगे, तो संस्कृत पढ़नेवालों की संख्या कम होती चली जायेगी, जैसे- मेरे घर पर बैठक नहीं है और […]

इतिहास

सवाल किया है तो जवाब भी सुनिए

सवाल किया है तो जवाब भी सुनिए दबी आवाज़ों का इंक़लाब भी सुनिए सिर्फ सिखाते ही मत रहिए बच्चों को उन की निगाहों का ख्वाब भी सुनिए कितना रोक सकेंगे नदी को बाँधों में बलखाती पानी का रूबाब भी सुनिए सब कुछ लिख डाला अमीरों के नाम एक दिन गरीब का अभाव भी सुनिए मर्द […]