धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

साधना रहस्य – नाम और मंत्र जप से पाएं संकल्प सिद्धि

हर व्यक्ति चाहता है आत्म शान्ति। इसके लिए वह लाख प्रयत्न करता है किन्तु मनः शान्ति उससे उतनी ही दूर भागती रहती है। मनः शान्ति के लिए मन की चंचलता का त्याग परम आवश्यक है। संतोष और आत्मसंयम को धारण कर लिए जाने से मनःशान्ति के साथ ही जीवन लक्ष्यों को प्राप्त करना सहज, सरल […]

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तथ्यहीन विश्वास – कैसे मिले सच्चा मोक्ष?

तथ्यहीन विश्वास इंसान का वक्त बर्बाद करता है अच्छा खासा धन भी खर्च करा देता है। कर्म की बजाए धर्म के पीछे भागने वालों ने अंधश्रद्धा का व्यवसाय करने वालों के हौसले बुलंद कर रखे है। आखिर कब लोग विवेकशील होंगे? ऐसी कई घटनाएं होती रहती है जो तथ्यहीन विश्वास के वशीभूत होकर जनता उन […]

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सामाजिक समरसता के भगीरथ -अलौकिक लीलावतार मावजी महाराज

भारतीय संस्कृति में धर्म साधना का जो रूप दिखाई देता हैं वह मज़हब या रेलिज़न का पर्याय मात्र न होकर एक विराट जीवन दृष्टि का परिचायक है। वह कोई उपासना पद्धति विशेष नहीं है बल्कि समष्टि हित की दिशा में वैयक्तिकता के तिरोभाव की एक करुणामूलक परिणति है। यही कारण है कि भारतीय धर्म साधना […]

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झारखंड के कुडमि हाशिये में !

“खट मरे मुर्गा, बिलाय खाये अण्डा ” यह कहावत छोटा नागपुर पठार में चिरकाल से बसने वाले और झारखंड की सबसे बड़ी आबादी कहे जाने वाले कुडमियों पर अक्षरस :लागू होता है । झारखंड की कुल आबादी का 24% प्रतिशत से ऊपर का यह जनजाति अपने हक अधिकारों से पूरी तरह वंचित है, और ढोल […]

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इक्ष्वाकु वंशीय गुरु नानक देव: भगवान राम के वंशज

गुरु नानक देव  खत्री वंश में अवतरित हुए थे।      खत्री दरअसल सूर्यवंशी क्षत्रिय ही हैं। खत्री शब्द की उत्पत्ति क्षत्री से हुयी है। *गुरु अंगद जी जब गुरुमुखी अक्षरों का निर्माण कर रहे थे तो उन्होंने क्ष की जगह ख का प्रयोग किया।*  माता हिंगलाज खत्रियों की कुल देवी हैं। गुरु गोविन्द सिंह […]

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जहाँ तीन शताब्दियों से हो रही है भावी अवतार की उपासना

            दुनिया भर में भगवान और उनके अवतारों की पूजा आम बात है लेकिन हिन्दुतान में एक इलाका ऐसा भी है जहाँ करीब तीन शताब्दियों से उस देवता की उपासना हो रही है जो अब भी भविष्य के गर्भ में है तथा पुराणों के अनुसार जिनका अवतार होने वाला है।             राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात […]

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सांस्कृतिक अवमूल्यन चिंतनीय

भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए ही विश्वप्रसिद्ध है। देश की आत्मा इसकी संस्कृति में निवास करती है कहा जाए तो कोई अतिशयक्ति नहीं होगी। “वसुधैव कुटुंबकम्” इसकी नींव है और सत्यमेव जयते इसका ध्येय वाक्य है। त्याग हमारी संस्कृति की सुगंध है । तेन त्यक्तेन भुंजिथा मा गृध कस्यस्वितधनम्। केवल भारतीय संकृति ही समस्त […]

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प्रतिक्रिया – बोद्ध धर्म

1 यह कहना गलत है कि बोद्ध धर्म सनातन धर्म से निकला है। बल्कि सच्चाई यह है कि जब महात्मा बुद्ध ने सनातन धर्म के नाम पर उस समय के ब्राहम्णो द्वारा अपनाई अमानविय हरकतों को देखा तो उन्होने सनातन धर्म से अलग एक अलग धार्मिक विचारधारा को जन्म दिया जो कि सनातन धर्म से […]

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जीवन सार्थक बना लो

अहन्यहनि भूतानि गच्छन्तीह यमालयम् । शेषा: स्थावरमिच्छन्ति किमाश्चर्यमत: परम्  ।। अर्थात् – लोग (जीव) प्रतिदिन मृत्यु के मुख में जा रहे हैं, परंतु बचे हुए लोग अमर रहना चाहते हैं । वे सोचते हैं कि सारा संसार मर जाएगा लेकिन वे बचे रहेंगे । इससे बड़ा आश्चर्य क्या होगा ? हम बेखबर होकर मृत्यु के […]

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स्नान,ध्यान,दान,उपासना का पर्व कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा का दिन पूरे वर्ष मे विशेष दिवस के रूप में माना जाता है।क्योंकि इस दिवस को बहुत ही पावन,पुण्य और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।इस अवसर पर पवित्र तीर्थ स्थलों के नदियों,तालाबों पर स्नान,ध्यान,दीपदान,और उपासना किया जाता है। इस कार्तिक पूर्णिमा को भगवान भोलेनाथ का दुसरा नाम जिनको “त्रिपुरारी” कहा जाता […]