धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

क्षमापना का अर्थ है क्षमा मांगना भी और क्षमा करना भी

 ‘मुझे क्षमा कर दिजिए मेरी वजह से आपको दुःख पहुँचा’ यह कहना बड़े साहस का काम है।शायद इसी लिए क्षमा को वीरों का आभूषण कहा गया है। क्षमा करना उतना कठिन नहीं है जितना क्षमा मांगना। गलती करना मानव की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। हम सभी अहंकार या प्रमादवश गलती करते हैं, किसी की अवहेलना करते हैं, किसी का […]

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मिथिला की लोककला और संस्कृति 

भारतीय दर्शन मनुष्य जीवन को एक उत्सव के रूप में देखता है।ऐसा उत्सव जो इस ब्रह्माण्ड में जीवन की पूर्णता को प्रकाशित करता है।इस उत्सव को मनाने के लिए ही संस्कृति का निर्माण हुआ है।और इस संस्कृति की प्राण धाराएं हैं-लोक-कलाएं। जीवन-उत्सव को नृत्य,चित्रकला,कथा,लोक-रंजन की विविध विधाओं के माध्यम से प्रकट करने के पीछे मनुष्य […]

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सामाजिक चिंतन

मातापित्रोर्मलोद्भूतं मलमांसमयं वपुः। त्यक्त्वा चांडालवद् दूरं ब्रह्मीभूय कृती भवः।। (विवेकचूड़ामणि दूसरा भाग, श्लोक २८७) भगवद्गीता, उपनिषत् आदि धर्म ग्रंथों को मैं स्नातक के पूर्व से ही पढ़ता था, ना केवल हिंदू धर्म ग्रंथ की बल्कि कुरान, बाइबल को भी मैंने तेलुगु में पढ़कर समझने की कोशिश की। लेकिन मेरी जिज्ञासा कभी पूरी नहीं हुई। शोधार्थी […]

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वर्ष 2018 का सावन माह

साल 2018 में एक तरफ पवित्र ‘सावन’ : दूसरी तरफ ‘ईद- उल -अजहा’ (बकरीद)। जिस समाज में रह रहा हूँ, हिन्दू भी उतनी है, जितनी मुस्लिम ! हिंदुओं के पवित्र माह ‘सावन’ (श्रावणमास), जिसमें शिवभक्ति चरम पर रहती है और हिन्दू धर्मावलम्बी इस माह माँस, मछली, अंडे, प्याज, लहसुन …. इत्यादि का भक्षण नहीं करते […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सर्वगुण संपन्न थे भगवान श्री कृष्ण

(जन्माष्टमी पर विशेष) भगवान श्री कृष्ण का जन्म गोकुल, जिला मथुरा ;यू.पी.द्ध में हुआ। श्री कृष्ण द्वापर युग में यशोधा माता की कोख से पैदा हुए। उनके पिता श्री नंद किशोर थे। गोकुल गांव में आज भी श्री कृष्ण के समय के चिन्ह मौजूदा हैं। वह वृक्ष भी मौजूद है जिस पर कृष्ण को यशोधा […]

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भाई बहन के सम्बन्धों मेंअटल विश्वास का प्रतीक- पवित्र रक्षा बंधन

विश्वास की डोर जितनी नाजूक है उतनी कठोर भी क्योंकि इन्सान के निजी एवं  दैनिक कार्यों में बिना विश्वास के किसी भी रिश्ते का चलना कठिन होता है। पवित्र रक्षा बंधन त्योहार भाई बहन के अटल विश्वास को दर्शाता है और सम्बन्धों को प्रगाढ़ करता है।आज भी आफिस,घर या रिश्ते विश्वास पर ही चलते हैं।हाल […]

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सती बिहुला, देवी विषहरी और अंगिका क्षेत्र

“अरकच्च:” (कच्चू व अरबी पत्ते की पेटी) कहते हैं! अंगिका क्षेत्र में 17-18 अगस्त को यही व्यंजन बनते हैं! माँ बिहुला और देवी मनसा की पूजा-अर्चना। बांग्ला व फसली संवत-साल के भाद्रपद संक्रांति दिवस (17-18 अगस्त) को माँ बिहुला पूजा अथवा मनसा देवी व विषहरी पूजा बिहार, झारखंड और प. बंगाल के उस जिला में […]

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यादों में सिमट गए सावन के झूले

भारतीय संस्कृति में सावन में झूला झूलने की  वैदिक काल से चली आ रही परम्परा लुप्त सी हो गयी है।सावन के झूले अब यादों में सिमट कर रह गए है। आधुनिकता की वजह से पर्व, त्यौहार, उत्सव मनाने का स्वरूप बदल गया है लेकिन त्यौहारो की प्रासंगिकता आज ही बरकरार है।      वो भी […]

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पृथिवी सहित समस्त सृष्टि को परमात्मा ने जीवात्माओं के लिये बनाया है

ओ३म् हमारा यह संसार अर्थात् हमारी पृथिवी, सूर्य, चन्द्र आदि सब ग्रह-उपग्रह प्रकृति नामक अनादि सत्ता से बने हैं। प्रकृति की संसार में चेतन ईश्वर व जीवात्मा से भिन्न स्वतन्त्र जड़ सत्ता है। इस अनादि प्रकृति को परमात्मा व अन्य किसी सत्ता ने नहीं बनाया है। इस प्रकृति का अस्तित्व स्वयंभू और अपने आप है। […]

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सिक्किम का नेवार (प्रधान) समुदाय

नेवार समुदाय मूल रूप से नेपाल के काठमांडू के निवासी थे I नेपाल शब्द के आधार पर नेवार शब्द की उत्पत्ति हुई है I “नेपाल” नाम की व्युत्पत्ति नेपाल के प्रसिद्ध तपस्वी और संरक्षक संत “ने मुनि” से हुआ है जिन्होंने एक धर्मपरायण चरवाहे के पुत्र को राजा के रूप में प्रतिष्ठित किया और इस […]