धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गहन निराशा और अंधकार से तारती – मां तारा 

तारा जयंती चैत्र माह की नवमी तिथि तथा शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस वर्ष महातारा जयंती 21 अप्रैल 2021, के दिन मनाई जाएगी। चैत्र माह की नवमी तिथि तथा शुक्ल पक्ष के दिन माँ तारा की उपासना तंत्र साधकों  और उनके भक्तों के लिए सर्वसिद्धिकारक मानी जाती है।             […]

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सिक्किम का भूटिया समुदाय

भूटिया तिब्बती मूल के हैं। इन्हें ‘भोटिया’ भी कहा जाता है I इनका मूल निवास स्थान ‘भोट’ (तिब्बत) होने के कारण इन्हें भूटिया कहा जाता है I तिब्बत का प्राचीन भारतीय नाम “भोट” था I इसलिए जो ‘भोट’ अथवा तिब्बत से आया उसे भूटिया कहा गया I 15 वीं शताब्दी के बाद ये लोग सिक्किम […]

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रामायण लीला

सनातन धर्म के विद्वान् धर्माचार्यों के अनुसार इतिहास में कई ‘रामायण’ ग्रन्थ का उल्लेख है, यथा- वाल्मीकि रामायण, कम्ब रामायण, तमिल रामायण, मॉरिशसी रामायण, रामचरितमानस इत्यादि। परंतु सभी रामायणों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मदिवस ‘चैत्र शुक्ल नवमी’ तिथि उद्धृत है, जिसे हिन्दू धर्मावलंबियों द्वारा ‘राम नवमी’ नाम से प्रतिवर्ष मनाये जाते रहे हैं । […]

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सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक, अजन्मा एक ईश्वर ही सबका का उपासनीय है

ओ३म् मनुष्य का अस्तित्व अपने माता व पिता के द्वारा होता है। माता-पिता भी इस सृष्टि के नियमों का पालन करते हुए सन्तानों को प्राप्त करते व सृष्टि की आदि से चली आ रही परम्पराओं का निर्वहन करते हुए उनका पालन व पोषण करते हैं। माता-पिता सन्तान को जन्म देने में निमित्त कारण नहीं होते। […]

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मैं और मेरा देश

ओ३म् मैं अपने शरीर में रहने वाला एक चेतन तत्व हूं। आध्यात्मिक जगत् में इसे जीवात्मा कह कर पुकारा जाता है। मैं अजन्मा, अविनाशी, नित्य, जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसा हुआ तथा इससे मुक्ति हेतु प्रयत्नशील, चेतन, स्वल्प परिमाण वाला, अल्पज्ञानी एवं ससीम, आनन्दरहित, सुख-आनन्द का अभिलाषी तत्व हूं। मेरा जन्म माता-पिता से हुआ है। […]

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स्वामी श्रद्धानन्द के जन्मना जाति व्यवस्था पर उपयोगी विचार

ओ३म् स्वामी श्रद्धानन्द महर्षि दयानन्द के अनुयायी, आर्य समाज के नेता, प्राचीन वैदिक शिक्षा गुरूकुल प्रणाली के पुनरुद्धारक, स्वतन्त्रता संग्राम के अजेय सेनानी तथा अखिल भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा के प्रधान थे। हिन्दू जाति को संगठित एवं शक्तिशाली बनाने के लिए आपने एक पुस्तक ‘हिन्दू संगठन – क्यों और कैसे?’ का प्रणयन किया था। यह […]

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सिंह बनो भेड़ नहीं

एक शेरनी गर्भवती थी, गर्भ पूरा हो चुका था, शिकारियों से भागने के लिए टीले पर गयी, उसको एक टीले पर बच्चा हो गया। शेरनी छलांग लगाकर एक टीले से दूसरे टीले पर तो पहुंच गई लेकिन बच्चा नीचे फिसल गया……नीचे भेड़ों की एक कतार गुजरती थी, वह बच्चा उस झुंड में पहुंच गया। था […]

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महात्मा बुद्ध ईश्वर में विश्वास रखने वाले आस्तिक थे?

ओ३म् महात्मा बुद्ध को उनके अनुयायी ईश्वर में विश्वास न रखने वाला नास्तिक मानते हैं। इस सम्बन्ध में आर्यजगत के एक महान विद्वान पं. धर्मदेव विद्यामार्तण्ड अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘‘बौद्धमत एवं वैदिक धर्म” में लिखते हैं कि आजकल जो लोग अपने को बौद्धमत का अनुयायी कहते हैं उनमें बहुसंख्या ऐसे लोगों की है जो ईश्वर […]

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होली एक विशेष पर्व 

रंगो का पर्व होली विशेषांक में विशेष है। यह  हुडदंगों के साथ तथा गाकर बजाकर चिढाकर खेलते है। वही होरियार है अर्थात (होरि यार) यारो संग होरी । शरद की समाप्ति के साथ ही बसंत का आगमन और फिर होली की हुड़दंग जहाँ रंग और गुलाल प्रकृति के साथ मन भी रंगीन हो जाता है।हमारे […]

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द्वेष मिटा सबको गले लगाने का संदेश है होली

होली नाम से ही हृदय में रंगों का भाव उमड़ पड़ता हैं।सारे बैर भाव को मिटाकर गले लगाने का त्यौहार होली फाल्गुन मास में मनाया जाता है।होली के एक दिन पूर्व होलिका दहन होता है।होली त्यौहार का प्रमाण शास्त्रों से प्राप्त होता है।राधा-कृष्ण की होली जो पुरातन समय में खेली गयी थी वह आज भी […]