इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आर्यसमाज ही ईश्वर प्रवृत्त ज्ञान चार वेदों का प्रतिनिधि व प्रचारक है

ओ३म् –आर्यसमाज स्थापना दिवस पर- आर्यसमाज की स्थापना वेदों के महान विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में की थी। ऋषि दयानन्द के माध्यम से ही देश के अधिकांश लोगों को इस तथ्य का ज्ञान हुआ कि वेदों का ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर से प्राप्त हुआ। वेदों में […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक

गाय आदि पशुओं की हत्या का अभिशाप देश को भोगना पड़ता है

ओ३म् संसार में मनुष्य मुख्यतः दो प्रकार के कर्म करता है। यह कर्म पाप व पुण्य कहलाते हैं। पुण्य कर्म सभी मनुष्यों के लिये करणीय होते हैं तथा पाप कर्म उपेक्षणीय व अकरणीय होते हैं। पाप कर्म करने से मनुष्य निन्दा का पात्र बनता है और पुण्य कर्मों को करने से यशस्वी व प्रशंसा का […]

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पैदल अरब देशों में जाकर आर्यसमाज स्थापित करने वाले ऋषिभक्त पंडित रुचिराम आर्योपदेशक

ओ३म् आर्यसमाज में आर्योपदेशक पं. रुचिराम जी ऐसे ऋषिभक्त प्रचारक हुए हैं जिन्होंने पैदल ही अरब देशों में जाकर वहां जो देखा, सुना व अनुभव किया, उसका सजीव चित्रण अपनी एक पुस्तक ‘अरब में मेरे सात साल’ में किया है। हमारे मन में विचार आया कि हम इनके बारे में कुछ जानकारी प्रस्तुत करें। हमारी […]

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आर्य कौन हैं और इनका मूलस्थान?

ओ३म् मनुष्य श्रेष्ठ गुण, कर्म व स्वभाव को ग्रहण करने से बनता है। विश्व में अनेक मत, सम्प्रदाय आदि हैं। इन मतों के अनुयायी ईसाई, मुसलमान, हिन्दू, आर्य, बौद्ध, जैन, सिख, यहूदी आदि अनेक नामों से जाने जाते हैं। मनुष्य जाति को अंग्रेजी में Human कहा जाता है। यह जितने मत व सम्प्रदायों के लोग […]

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हनुमान जयंती विशेष

कौन है जो संकट में सबके काम आते हैं सब के दुलारे हैं सबको प्यार है वह हनुमान ही हैं जो राम लक्ष्मण सीता सभी के प्रिय है सुग्रीव जामवंत नल नील अंगद सभी के विश्वासपात्र है सब के संकट हरने वाले हैं। जब भी भगवान राम पर कोई संकट आता है आया हनुमान स्वयं […]

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ईश्वर ने हम जीवात्माओं को मनुष्य क्यों बनाया?

ओ३म् हम मनुष्य कहलाते हैं। हम वस्तुतः सदाचार को धारण कर मनुष्य बन सकते हैं परन्तु सदाचारी व धर्मात्मा मनुष्य बनने के लिये पुरुषार्थ करना होता है। पुरुषार्थ सहित विद्यार्जन कर विद्या के अनुकूल आचरण करना होता है। क्या हम सब विद्यावान हैं? इसका उत्तर ‘न’ अक्षर या नहीं शब्द में मिलता है। जब हम […]

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वैदिक संस्कृति के उज्जवल नक्षत्र हनुमान जी के कुछ गौरवपूर्ण कार्य

ओ३म् –हनुमान जी की जयन्ती पर- वैदिक वा पौराणिक मान्यता के अनुसार वीर हनुमान जी का जन्म त्रेतायुग के अंतिम चरण में और फलित ज्योतिष के आचार्यों की गणना के अनुसार 58 हजार 112 वर्ष  पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे भारत देश […]

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यज्ञ से रोग चिकित्सा तथा रोगकारी विषैले किटाणु व वायरसों का नाश

ओ३म् वेदों में ईश्वर ने संसार के सभी मनुष्यों को यज्ञ करने की प्रेरणा की है। यज्ञ से रोगों व विषैले किटाणुओं का नाश होता है इसकी प्रेरणा भी ईश्वर ने की है। यज्ञ में आम्र की तथा कुछ अन्य वृक्षों की समिधाओं वा काष्ठों को जलाकर उसमें वेदमन्त्रों की जीवनोपयोगी प्रार्थनाओं को बोलकर गोघृत, […]

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अग्निहोत्र यज्ञ से रोग निवारण पर शोध एवं अनुसंधान की आवश्यकता

ओ३म् यज्ञ के अनेक प्रकार के भौतिक एवं आध्यात्तिमक लाभ होते हैं। यज्ञ से स्वस्थ जीवन सहित रोग निवारण भी होते हैं। यज्ञ से रोग निवारण के बारे में देश की जनता को ज्ञान नहीं है। ऋषि दयानन्द ने यज्ञ के लाभों का वर्णन करते हुए लिखा है कि देवयज्ञ न करने से मनुष्य को […]