इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म लेख

गुरु पूर्णिमा के महात्म्य क्यों हैं ?

महर्षि पराशर और मछुआरिन मत्स्यगंधा उर्फ सत्यवती के प्रेम संयोग से उत्पन्न संतान, जो कृष्ण यानी काले रंग के थे तथा जिनका जन्म द्वीप में हुआ था और जो सभी धार्मिक साहित्य में पारंगत थे अर्थात कृष्ण द्वैपायन व्यास, जो कालांतर में वेदव्यास के नाम से ख्यात हुए । दैनिक जागरण के अनुसार, महर्षि वेदव्यास […]

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स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि

स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि 4 जुलाई को है। जो 40 वर्ष भी जी न पाए और इतनी ही उम्र में पूरी दुनिया को सनातन ‘हिंदुत्व’ की सीख दे गए । उन्होंने तब महिलाओं के प्रति प्रथम सम्मानार्थ सर्वप्रथम उन्हें संबोधन करने को लेकर ‘बहन’ (भगिनी) शब्द अंग्रेजी यानी Sisters के रूप में किए। सन 1893 […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

कबीरदास के शब्दों में गुरु महिमा

गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई पर विशेष… संसार में कोई भी तत्व गुरु के समान नहीं गुरु को केवल परलोक तक पहुचाने वाला ही नहीं वरन इहलौक याने वर्तमान को सुधार कर भविष्य बनाने वाला कहा गया है। भारतीय दर्शन में गुरु को केवल एक व्यक्ति या पद नहीं माना वरन एक तत्व माना गया है […]

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भारतीय संस्कृति रहस्यवादी है !

‘भारतीय संस्कृति’ रहस्यवादी है, तो स्पष्टवादिता लिए ! सम्पूर्ण दुनिया में ‘भारतीय सभ्यता और संस्कृति’ की अक्षुण्ण रहस्यवादिता को विदेशी विद्वानों और दुश्मनों ने भी माना। क्या मेगास्थनीज़, ह्वेनसांग, मेक्समूलर ! तो कामिल बुल्के, रस्किन बांड आदि तो यहीं के रह गए । अल्लामा इक़बाल ने तो कलमतोड़ प्रशंसा किये। जिसतरह से ताज़महल हमारी आन- […]

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सर्वज्ञ ईश्वर से ही सर्गारम्भ में चार ऋषियों को चार वेद मिले थे

ओ३म् हमारा यह संसार स्वतः नहीं बना अपितु एक पूर्ण ज्ञानवान सर्वज्ञ सत्ता ईश्वर के द्वारा बना है। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, सर्वव्यापक, सर्वातिसूक्ष्म, एकरस, अखण्ड, सृष्टि का उत्पत्तिकर्ता, पालनकर्ता तथा प्रलयकर्ता है। जो काम परमात्मा ने किये हैं व करता है, वह काम किसी मनुष्य के वश की बात नहीं है। संसार में केवल […]

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सूर्य समान प्रकाशवान तथा अंधकार से रहित ईश्वर को हम जानें

ईश्वर है या नहीं? इस प्रश्न का उत्तर ‘ईश्वर है’ शब्दों से मिलता है। ईश्वर होने के अनेक प्रमाण हैं। वेद सहित हमारे सभी ऋषि आप्त पुरुष अर्थात् सत्य ज्ञान से युक्त थे। सबने वेदाध्ययन एवं अपनी ऊहापोह शक्ति से ईश्वर को जाना तथा उसका साक्षात्कार किया था। यजुर्वेद 31.18 मन्त्र ‘वेदाहमेतं पुरुषं महान्तमादित्यवर्णं तमसः […]

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क्या हिन्दू है सबसे उदारवादी सहिष्णु धर्म ?

आदरणीय मित्र प्रदीप, संस्पर्श नमन् ! जब आप खुद ‘प्रदीप’ हैं, तो आपको स्वयं सहित दूसरे के घरों को भी उज्ज्वल करने चाहिए । कितने को सहयोग किया है, आपने ! जो आप प्रदीप कहलाते हैं । प्रदीप तो प्रकाशित करता दीपक होता है, फिर कैसे और क्यों प्रदीप हो गए आप ? कभी आपने […]

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बिहुला-विषहरी और मंजूषा चित्रकला

बांग्ला व फसली संवत-साल के भाद्रपद संक्रांति दिवस (17 या 18 अगस्त) को माँ बिहुला पूजा अथवा मनसा देवी व विषहरी पूजा बिहार, झारखंड और प. बंगाल के उस जिला में प्रचलित है, जो चंपानगर (वर्त्तमान भागलपुर) के निकटस्थ है । यह क्षेत्र ‘अंगिका पट्टी’ भी कहलाता है । लोक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव […]

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स्वस्थ मन सभी भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नतियों का आधार है

ओ३म् सामान्य मनुष्य आज तक अपनी आत्मा के अन्तःकरण में विद्यमान एवं कार्यरत मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार उपकरणों को यथावत् रूप में नहीं जान पाया है। मनुष्य को मनुष्य उसमें मन नाम का एक करण होने के कारण कहते हैं जो संकल्प विकल्प व चिन्तन-मनन करता है। मनुष्य का मन आत्मा का करण है […]

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आत्मा एक अनादि द्रव्य है जिसकी सिद्धि उसके गुणों से होती हैं

ओ३म् संसार में अनश्वर एवं नश्वर अनेक पदार्थ हैं जिनकी सिद्धि उनके निजी गुणों से होती है। वह गुण सदा उन पदार्थों में रहते हैं, उनसे कभी पृथक नहीं होते। अग्नि में जलाने का गुण है। वायु में स्पर्श का गुण है, जल में रस है जिसे हमारी रसना व जिह्वा अनुभव करती है। इसी […]