धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य को सुख ईश्वर की भक्ति व सत्कर्मों से ही मिलता है

ओ३म् हमें जो सुख व दुःख की अनुभूति होती है वह शरीर व इन्द्रियों के द्वारा हमारी आत्मा को होती है। आत्मा चेतन पदार्थ होने से ही सुख व दुःख की अनुभूति करता है। प्रकृति व सृष्टि जड़ सत्तायें हैं। इनको किसी प्रकार की अनुभूतियां वा सुख व दुःख नहीं होते। आत्मा से इतर परमात्मा […]

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विचार विमर्श- 4

1.क्या बिना विचारों के इंसान का जीवन संभव है? इंसान के जीवन के लिए कुछ चीजें बहुत जरूरी हैं, जिनमें वायु, जल, प्रकाश, रोटी, कपड़ा, मकान प्रमुख हैं. आज की चर्चा का विषय है- क्या बिना विचारों के इंसान का जीवन संभव है? विचारों का स्वरूप अमूर्त है. विचार दिखाई नहीं देते, पर इंसान के […]

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सृष्टि बनाकर हमें मनुष्य जन्म एवं सुख आदि देने से ईश्वर उपासनीय है

ओ३म् हम मनुष्य हैं। हमें यह मनुष्य जन्म परमात्मा ने दिया है। जन्म व मृत्यु के मध्य की हमारी अवस्था जीवात्मा वा जीव कहलाती है। इस सृष्टि में हमारे जैसे  जीव अनन्त संख्या में हैं। सभी जीव अणु परिमाण युक्त अल्पज्ञ चेतन सत्तायें हैं तथा सभी एकदेशी, ससीम, अनादि, नित्य, जन्म-मरण धर्मा तथा कर्म फल […]

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वैदिक धर्म सत्य सिद्धान्तों से युक्त तथा अन्धविश्वासों से मुक्त है

ओ३म् वैदिक धर्म ही मनुष्य का सत्य व यथार्थ धर्म है। इसका कारण वैदिक धर्म का ईश्वरीय ज्ञान वेदों पर आधारित होना है। वेदों को हमारे ऋषि मुनियों ने सब सत्य विद्याओं का पुस्तक बताया है। वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक इसलिये है कि वेदों का प्रादुर्भाव सृष्टिकर्ता ईश्वर से हुआ है। संसार में […]

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वेदों के प्रकाश से ही संसार को ईश्वर सहित धर्म आदि का ज्ञान हुआ है

ओ३म् संसार में किस सत्ता से ज्ञान उत्पन्न व प्राप्त हुआ है? इस विषय का विचार करने पर ज्ञात होता है कि ज्ञान का प्रकाश ज्ञानस्वरूप, सर्वज्ञ, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान तथा सृष्टिकर्ता परमात्मा से सृष्टि के आरम्भ में हुआ है। परमात्मा ही ने अपनी सर्वज्ञता, सर्वव्यापकता तथा सर्वशक्तिमान स्वरूप से असंख्य चेतन जीवात्माओं को उनके पाप […]

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डूबते सूरज भी पूजनीय है प्रकृति पर्व ‘छठ’ में

लोक आस्था का महान सूर्योपासना पर्व ‘छठ’ मनानेवाले भारतीय राज्यों से इतर राज्य से इस पर्व के बारे में पहली बार छपा ‘दीपावली से छठ तक’ नामक शीर्षक समाचार राजस्थान से प्रकाशित राष्ट्रीय साप्ताहिक ‘आमख्याल’ के दिनांक – 09.12.1993 अंक में छपा था । खासकर ‘छठ’ पर मेरे द्वारा लिखित और प्रेषित इसतरह के रिपोर्टिंग […]

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सद्धर्म वेद के प्रचार में मत-मतान्तरों की अविद्यायुक्त बातें बाधक

ओ३म् संसार में अनेक मत–मतान्तर हैं। विचार करने पर यह विदित होता है कि ऐसा मनुष्यों व आचार्यों की अल्पज्ञता व अविद्या के कारण हुआ करता है। संसार में तीन अनादि व नित्य पदार्थों वा सत्ताओं का  अस्तित्व है। ये सत्तायें हैं ईश्वर, जीव व प्रकृति। ईश्वर व जीव चेतन सत्तायें हैं तथा प्रकृति जड़ […]

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यह सृष्टि ईश्वर ने जीवों के सुख तथा मोक्ष के लिये बनाई है

ओ३म् एक अदृश्य सत्ता से यह जगत बना है। उसी सत्ता ने हम जीवात्माओं के शरीर भी बनायें हैं और इस सृष्टि को देखने व भोग करने में सहायक हमें दो आंखे प्रदान की हैं। इस सृष्टि को देखकर विचारशील मनुष्यों के मन, मस्तिष्क तथा बुद्धि में इस सृष्टि के कर्ता वा रचयिता को जानने […]

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रोड शो- 14 : बातें परोपकार की

आज बातें परोपकार की करते हैं. परोपकार की बातें करने से पहले हम आपको पल-पल परोपकार करने वाले प्रभु के परोपकार की एक अद्भुत खबर के बारे में बताते हैं, आप इस खबर को पढ़कर आनंद लीजिएगा- ”आसमान से घर में गिरा अनमोल ‘खजाना’, एक झटके में करोड़पति हुआ खुशनसीब उल्‍कापिंड के गिरने से घर […]

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समस्त मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करती हैं छठी मइया

छठ बिहार प्रदेश का एक प्रमुख महापर्व है।इस महापर्व में छठी मैया एवं भगवान सूर्यानारायण का विशेष रूप से पूजन किया जाता हैं।वास्तव में कोई भी पर्व एवं त्योहार किसी विशेष क्षेत्र आदि का नहीं होता परंतु जिस क्षेत्र आदि से उसकी शुरुआत होती है या फिर जहां से मनाने की परंपरा का विस्तार होता […]