धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

बारिश और बाढ़ के बाद एक लोकपर्व

बारिश और बाढ़ के बाद असंख्य संख्या में आए कीड़े-मकोड़े हेतु पूर्ण अंधकार व अमावस्या में दीप जलाकर कीट-पतंग व मच्छरों को भगाने के तत्वश: विज्ञानसम्मत पर्व दीपावली के अगले दिन पशु-प्रेम के प्रासंगिक मवेशी की पूजा यानी गोबररूपी धन लिए गौ के विकास व (सं)वर्द्धन की पूजा की जाती है, फिर पक्षियों और गोबर-गोयठे […]

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मणिपुर का सनामही धर्म

सनामही धर्म दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे प्राचीन धर्म है जिसकी उत्पत्ति मणिपुर में हुई तथा मणिपुर, असम, त्रिपुरा, म्यांमार, बंगलादेश आदि में रहनेवाले मीतै समुदाय इनकी पूजा करता था I मणिपुर में प्राचीनकाल से रहनेवाले आदिवासी समुदाय भी सनामही धर्म में आस्था रखता था, लेकिन ईसाई धर्म अपना लेने के बाद सनामही में इन […]

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पूर्वोत्तर भारत में हिंदू धर्म

पूर्वोत्तर भारत में हिन्दू धर्मावलंबियों की संख्या सबसे अधिक है। इस क्षेत्र में हिन्दू धर्म की तीनों शाखाओं – शैव, वैष्णव और शाक्त के उपासक विद्यमान हैं। पूर्वोत्तर की बहुत बड़ी आबादी प्रकृतिपूजक या जड़ात्मवादी है, लेकिन प्रकृतिपूजक समुदायों पर भी हिंदू धर्म और संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है I पूर्वोत्तर के […]

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कई तरह की आस्थाएँ

अनंत चतुर्दशी पर सभी आस्थाधारकों को सादर नमन…. मेरे जिगरी यार व आदर्श शिक्षक श्री मुकेश चौरसिया की व्याख्याता धर्मपत्नी श्रीमती रश्मि निशा जी ने अपनी चाची व मेरी माँ को तमिलनाडु से लाकर यह पावन ‘शंख’ को सप्रणाम भेंट की है, माँ ने इस दाम्पत्य युगल को आशीर्वाद कहा है, तो हो जाय ‘शंखनाद’ […]

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गणेशोत्सव विशेष : शिव-पार्वती के विवाह में पुत्र गणपति का पूजन

प्रत्येक मांगलिक कार्यों से पहले श्री गणेश जी का स्मरण एवं वंदन जरूर किया जाता हैं।विभिन्न मनोकामनाओं से भक्तगण इनका व्रत-पूजन करते हैं।जो शीघ्र ही पूर्ण हो जाता हैं। भाद्रपद (भादो) माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी ने अवतार लिया था।और इसी कारण से भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी […]

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विशेष सदाबहार कैलेंडर- 162

1.” वक्त ” कहता है मैं फिर न आऊंगा, मुझे खुद नहीं पता तुझे हंसाऊंगा या रुलाऊंगा, जीना है तो इस पल को जी ले, “क्योंकि”मैं किसी भी हाल में इस पल को, अगले पल तक रोक न पाऊंगा. 2.प्लम्बर कितना भी एक्सपर्ट क्यों न हो, मगर वो आँखों से टपकना पानी बंद नहीं कर […]

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वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है

ओ३म् मनुष्य एक ज्ञानवान प्राणी होता है। मनुष्य के पास जो ज्ञान होता है वह सभी ज्ञान स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता। उसका अधिकांश ज्ञान नैमित्तिक होता है जिसे वह अपने शैशव काल से माता, पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों व अपने चिन्तन, मनन, ध्यान आदि सहित अभ्यास व अनुभव के आधार पर अर्जित करता है। […]

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संसार की श्रेष्ठतम रचना यह सृष्टि ईश्वर से ही प्रकाशित हुई है

ओ३म् प्रत्येक रचना एक रचयिता की बनाई हुई कृति होती है। हमारी यह विशाल सृष्टि किस रचयिता की कृति है, इस पर विचार करना आवश्यक एवं उचित है। सृष्टि की रचना व उत्पत्ति आदि विषयों का अध्ययन करने पर यह अपौरुषेय रचना सिद्ध होती है। अपौरुषेय रचनायें वह होती हैं जिनको मनुष्य नहीं बना सकते। […]

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मनुस्मृति और नारी जाति

भारतीय समाज में एक नया प्रचलन देखने को मिल रहा है। इस प्रचलन को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया में अपने आपको बहुत बड़े बुद्धिजीवी के रूप में दर्शाते है। सत्य यह है कि वे होते है कॉपी पेस्टिया शूरवीर। अब एक ऐसी ही शूरवीर ने कल लिख दिया मनु ने नारी जाति का अपमान […]

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वेदों से दूरी के कारण संसार में अविद्या एवं दुःखों की वृद्धि हुई

ओ३म् संसार मे हम अविद्या व दुःखों को देखते हैं। इसका कारण है मनुष्यों की वेदज्ञान से दूरी। वेदों से दूरी वेदों का अध्ययन छोड़ देने के कारण हुई। प्राचीन काल में मनुष्यों के लिये जो नियम बनाये गये थे उनमें वेदों का स्वाध्याय करना अनिवार्य होता था। शास्त्रीय वचन है कि हम नित्य प्रति […]