धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भारतीय पर्व हमारी आस्था विश्वास का प्रतीक”-

भारत की संस्कृति और सभ्यता में पर्व का विशेष स्थान माना जाता है।यहाँ की प्राचीन संस्कृति यहाँ के लोक-पर्व,रीति-रिवाज,परम्पराएँ, मान्यताएँ, ये सब हमारे धर्म,आस्था,विस्वास का प्रतीक है।हमारे देश मे अनेक जाति,धर्म,संस्कृति,भाषा-भाषी व सम्प्रदाय के लोग निवास करते हैं,बाउजूद इसके इनमें आपस मे प्रेम,सद्भावना,भाईचारे और अनेकता में एकता की मिशाल देखने को मिलती है।यही हमारे देश […]

कविता धर्म-संस्कृति-अध्यात्म पद्य साहित्य

मीराबाई

भक्तों में सिरमौर है मीरा, सन्तों में सिरमौर है मीरा। कवियों में सिरमौर है मीरा, भारत की पहचान है मीरा।। कुड़की गाँव में जन्मी वह , जोधा की पड़पोती थी। राठौड़ वंश में जन्मी मीरा, भारत की है शान मीरा।। रत्न सिंह की पुत्री थी , भोजराज की पत्नी । बचपन से दृढ़ निश्चयी मीरा, […]

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मकर संक्रांति

मकर सक्रांति पूरे भारतवर्ष में 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। हिंदू/ सनातन धर्म में अधिकांशतः मनाया जाने वाला यह पर्व/त्योहार प्रकृति से जोड़ता हैं, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपनी जब गति बदलते हैं या यूँ कहें कि जब सूर्य जब दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं तब उस दिवस को मकर संक्रांति […]

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सनातन धर्म और प्रकृति

अगर हम कोई तेहवार मना रहें हैं तो पक्की बात हैं कि हम प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ कोई पर्व ही मना रहे हैं।हम सार्वत्रिक रूप से कुदरत से जुड़े हुए हैं। आंग्ल तारीखों के पहले ही महीने में आने वाला ये पर्व हैं और वह हैं लोहड़ी और संक्रांत। लोहड़ी और संक्रांत  को देखें […]

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आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का पर्व मकर संक्रांति

शीत ऋतु के बीच जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। एक प्रकार से यह पर्व जीवन व सृष्टि में नवसंचार करता है। यह हिंदुओं का प्रमुख परिवर्तनकारी समय का पर्व है। यह पर्व पूरे भारत व पड़ोसी […]

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क्या है उलटी प्रतिमा का रहस्य ?

मांगी तुंगी जी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र दक्षिण भारत में जैनों का सबसे मुख्य पवित्र सिद्ध क्षेत्र है। नासिक (महाराष्ट्र) से लगभग 125 किमी दूर तहराबाद के पास स्थित, बीच में पठार के साथ एक प्रमुख जुड़वां शिखर वाली चोटी है। राम और हनुमान ने मंगितुंगी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। निर्वाणकांड के अनुसार राम, […]

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राजकुमार पार्श्वनाथ और तीर्थंकर पार्श्वनाथ

जैन धर्म की मुख्य दो धाराएँ हैं- एक दिगम्बर जैन और दूसरे श्वेताम्बर जैन। दिगम्बर, दिग्-अम्बर-दिगम्बर। दिशाएँ ही जिनकी अम्बर- वस्त्र हैं अर्थात् नग्न। श्वेताम्बर स्पष्ट है जो श्वेत-सफेद वस्त्र धारण करते हैं। जिनके साधु नग्न रहते हैं वे दिगम्बर और जिनके साधु सफेद वस्त्र धारण करते हैं वे श्वेताम्बर। श्वेताम्बर परम्परा में तीर्थंकरों चौबीस […]

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सोचने वाली बात

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरा गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः गुरु ही सब कुछ है।दुनिया में हर क्षेत्र में, कहीं भी सफलता पानी हो,एक अच्छे मार्गदर्शक की जरूरत होती है।कई बार गुरु हमें मनुष्य रूप में मिलते  हैं तो कई बार किसी और रूप में। हर मनुष्य को एक गुरु तो वरदान रूप में प्राप्त […]

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भारतीय धरोहर का जीर्णोद्धार जरूरी

वक्त के साथ चलते गल चुकी है भारतीय परंपरा, संस्कृति और संस्कारों की नींव। स्मृतियों से विलुप्त होते ढ़ह रहे है धार्मिकता के किले। आजकल की पीढ़ी को कहाँ मुँह ज़ुबानी याद रामायण की चोपाई और भगवद् गीता के श्लोक। मृत:प्राय होते उजली धरोहर मिट रही है, जरूरत है जीर्णोद्धार की, चाहे मंदिर हो चाहे […]

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हमारे पवित्र सोलह संस्कार

हिंदू धर्म कोई व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं हैं,ये प्राचीन काल से आस्थाएं और ऋषि मुनियों द्वारा संचित अनुभव और तथ्यों के आधार  पर किया समुच्चय हैं। जिसमें स्वस्थ और सामाजिक  जीवन  यापन के लिए जरूरी रीति और रिवाजों का वर्णन किया गया हैं।कोई एक व्यक्ति द्वारा सूचित पथ पर चलने की सिख नहीं […]