Category : धर्म-संस्कृति-अध्यात्म


  •  आप्त पुरुष का स्वरूप       

    ओ३म् ऋषि दयानन्द के ग्रन्थों में अनेक स्थानों पर आप्त विद्वान पुरुष शब्द का प्रयोग हुआ है। स्वाभाविक है कि इस शब्द को पढ़कर इसका अभिप्राय जानने की इच्छा अवश्य होती है। इसके लिए हमने ‘स्वमन्तव्यामन्तव्य...


  • वर्ण व्यवस्था में भेदभाव न हो

    वर्ण व्यवस्था में भेदभाव न हो

    ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य और शूद्र-ये समाज के चार आधार हैं। इनमें कोई छोटा बड़ा नहीं। ये चारों ही मनुष्य-समाज के उपयोगी अंग हैं।इनमें कोई भी अनुपयोगी नहीं है। किसी एक के बिना समाज का काम नहीं...