धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

स्वामी दयानंद और मेक्समुलर के वेद भाष्यों का तुलनात्मक अध्ययन

शंका- जब मेक्समूलर आदि पश्चिमी विद्वानों के वेद भाष्य उपलब्ध थे तो स्वामी दयानंद द्वारा नवीन वेद भाष्य करने जैसा श्रमसाध्य कार्य क्यों किया गया? समाधान- इस शंका का समाधान स्वामी दयानंद और मेक्समुलर के वेद भाष्यों का तुल्नात्मक अध्ययन से भली भांति होता हैं। वेद शब्द का वर्णन होते ही आज के नौजवान या […]

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वेदाविर्भाव और वेदाध्ययन की परम्परा पर विचार

सृष्टिकाल के आरम्भ से देश में अनेक ऋषि व महर्षि उत्पन्न हुए हैं। इन सबकी श्रद्धा व पूरी निष्ठा ईश्वरीय ज्ञान वेदों में रही है। यह वेद सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर द्वारा हमारे अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा को उनकी आत्मा में अपने आत्मस्थ स्वरूप से प्रेरणा द्वारा […]

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श्रेष्ठ मानव जीवन का आधार : वैदिक संस्कार

संस्कार की चर्चा तो सभी करते व सुनते हैं परन्तु संस्कार का शब्दार्थ व भावार्थ क्या है? संस्कार किसी अपूर्ण, संस्काररहित या संस्कारहीन वस्तु या मनुष्य को संस्कारित कर उसका इच्छित लाभ लेने के लिए गुणवर्धन या अधिकतम मूल्यवर्धन value addition करना है। यह गुणवर्धन व मूल्यवर्धन भौतिक वस्तुओं का किया जाये तो वैल्यू एडीसन […]

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तुलसी और शालिग्राम विवाह पर्व- एक अनैतिक पर्व

भारतीय महिलाओ द्वारा मनाया जाने वाले अनेक पर्वो में से एक पर्व है तुलसी और शालिग्राम विवाह, जो कार्तिक शुक्ल की एकादशी को महिलाओ द्वारा बड़ी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है । कहा जाता है की तुलसी – शालिग्राम विवाह सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य देने वाला होता है। इस दिन तुलसी के पौधे को […]

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बालक मूलशंकर द्वारा शिवरात्रि पर चूहे की घटना के विरोध का परिणाम क्या हुआ?

महर्षि दयानन्द सरस्वती के आत्म कथन में हम पढ़ते हैं कि उन्होंने 14 वर्ष की अवस्था में पिता के कहने से शिवरात्रि का व्रत रखा था। रात्रि में शिव मन्दिर में सभी व्रती जागरण कर रहे थे परन्तु देर रात्रि बालक मूलशंकर के अतिरिक्त सभी को नींद आ गई। बालक मूलशंकर इसलिए जाग रहे थे […]

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शंका समाधान

शंका –  ९ वें वर्ष के आरम्भ में द्विज अपने संतानों का उपनयन करके आचार्यकुल में अर्थात जहाँ पूर्ण विद्वान और पूर्ण विदुषी स्त्री शिक्षा और विद्यादान करने वाली हो अर्थात वहाँ लड़के और लड़कियो को भेज दें और शूद्र आदि वर्ण उपनयन किये बिना विद्याभास के लिए गुरुकुल में भेज दे।- सत्यार्थ प्रकाश यहाँ […]

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हमारा स्वर्णिम अतीत और देश की अवनति के कारणों पर विचार

संसार में वैदिक धर्म व संस्कृति सबसे प्राचीन है। इसका आधार चार वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद हैं। वेदों का लेखक कोई मनुष्य या ऋषि–मुनि नहीं अपितु परम्परा से इसे ईश्वर प्रदत्त बताया जाता है। वैदिक प्रमाणों एवं विचार करने पर ज्ञात होता है कि सृष्टि की रचना होने के बाद जैविक व […]

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शूद्रों का मंदिर प्रवेश एवं धर्मग्रन्थ

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा मधुबनी  में एक मंदिर में प्रवेश किये जाने के पश्चात मंदिर को धोकर उसका शुद्धिकरण किया गया क्यूंकि मांझी महादलित कहे जाने वाले समाज के सदस्य हैं एवं शंकराचार्य निश्चालदास का बयान कि दलितों को मंदिर में प्रवेश की धर्मशास्त्रों में मनाही हैं हिन्दू समाज के किसी प्रतिष्ठित […]

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वेद और भाई-दूज का पर्व

कार्तिक अमावस्या दीपावली के बाद शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन भाई दूज का पर्व देश भर में मनाया जाता है। यह पर्व भाई व बहिन के प्रेम, स्नेह, समर्पण, परस्पर रक्षा, सहयोग, सहायता, सेवा, शुभकामना, आवश्यकता पड़ने पर एक दूसरे के लिए त्याग व बलिदान का प्रतीक है। इसका जब आधार खोजने का प्रयास किया […]

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महर्षि दयानन्द और गोवर्धन पर्व

दयानन्द महाभारत काल के बाद से अब तक के वेदों के सबसे महान ऋषि व विद्वान थे। ईश्वरीय ज्ञान वेद में गो की स्तुति की गई है। अतः स्वाभाविक था कि महर्षि दयानन्द भी गो भक्ति करें और उसका प्रचार करें। गो भक्ति क्या है? गो के प्रति आदर की भावना, उसको मातृस्वरूप मानकर उसकी […]