Category : धर्म-संस्कृति-अध्यात्म


  • पीडि़तों की सेवा मनुष्य का धर्म

    पीडि़तों की सेवा मनुष्य का धर्म

    मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसके चारों ओर अपने निकट सम्बन्धी और पड़ोसियों के साथ मि़त्र व पशु-पक्षी आदि का समुदाय दृष्टिगोचर होता है। समाज में सभी मनुष्यों की शारीरिक, सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य की स्थिति व...

  • आइये चले अँधेरे से उजाले की ओर

    आइये चले अँधेरे से उजाले की ओर

    मित्रो, आइये प्रण कीजिये की हम इन सभी धर्म मजहबो को छोड़ के कोई मानवतावादी और नैतिकतावादी सिद्धांत अपनाएंगे जो तर्क,बुद्धि और विज्ञान पर खरा उतरे। जो किसी बात को अन्धविश्वास के आधार पर आंख बंद...

  • मैं और मेरा परमात्मा

    मैं और मेरा परमात्मा

    एक शाश्वत प्रश्न है कि मैं कौन हूं। माता पिता जन्म के बाद से अपने शिशु को उसकी बौद्धिक क्षमता के अनुसार ज्ञान कराना आरम्भ कर देते हैं। जन्म के कुछ समय बाद से आरम्भ होकर...



  • आयुष्काम (महामृत्युंजय) यज्ञ और हम

    आयुष्काम (महामृत्युंजय) यज्ञ और हम

    सभी प्राणियों को ईश्वर ने बनाया है। ईश्वर सत्य, चेतन, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वान्तरयामी, सर्वातिसूक्ष्म, नित्य, अनादि, अजन्मा, अमर, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान है। जीवात्मा सत्य, चेतन, अल्पज्ञ, एकदेशी, आकार रहित, सूक्ष्म, जन्म व मरण धर्मा, कर्मों को करने...



  • आत्मा- एक मिथ्या

    आत्मा- एक मिथ्या

    आत्मा का अस्तित्व हर धर्म में स्वीकार गया है , पत्न्तु जिस तरह से सभी धर्मो में मिथ्या रूप से ईश्वर की कल्पना गढ़ ली थी उसी प्रकार आत्मा की भी। दरसल आत्मा नाम की कोई...